दोस्त की बीवी की चुदाई की सेटिंग-2

(Dost Ki Biwi Ki Chudai Ki Setting- Part 2)

This story is part of a series:

अगले दिन आशु ने मन बना लिया कि आज नेहा की चुदाई रवि से करवानी है। उसने सुबह नाश्ते के समय नेहा से पूछ लिया- क्या आज फिर रवि को डिनर पर बुला लें क्योंकि कल से तो तुम ऑफिस जाओगी।
नेहा बोली- आज डिनर बनाने का मूड नहीं है, बाहर खा लेंगे, वहीं तुम रवि को बुला लेना!
मतलब वो चुदवाने के मूड में नहीं थी।

खैर, अभी तो सपना के आने में चार दिन बाकी थे.. दिन में नेहा पार्लर गई, शाम को वो बहुत अच्छे मूड में थी कि रवि का फोन आ गया।
रवि ने उसे कल के डिनर के लिए थैंक्स बोला और कहा कि कल वो बहुत सुंदर लग रही थी।
अब अपनी तारीफ सुनकर किस औरत को अच्छा नहीं लगेगा…

नेहा ने उससे पूछा- सपना कब आ रही है?
तो रवि बोला वो तो अभी तीन चार दिन बाद आयेगी।
रवि से उसने कहा- जब तक सपना नहीं आती, तुम डिनर हमरे पास ही कर लिया कीजिए।

उसके फोन के बाद नेहा ने आशु को फोन किया और पूछा- बताओ क्या प्रोग्राम है?
आशु बोला- जैसा तुम कहो… चाहो तो रात को मूवी देखते हैं, फिर डिनर कर लेंगे।
आइडिया बढ़िया था। नेहा ने भोली बन कर पूछा- फिर क्या रवि को भी बुलाओगे?
तो आशु बोला- पूछ लेता हूँ!

आशु साढ़े पांच तक आ गया, उसने नेहा को पहले ही बोल दिया था, दोनों तैयार होकर हॉल पर पहुँचे, रवि वहीं मिल गया था।
नेहा ने आज एक ढीला से टॉप और जीन्स पहनी थी। हॉल में नेहा बीच में बैठी, दोनों ओर रवि और आशु थे।
मूवी हॉट थी, नेहा के दोनों हाथ घिरे ही थे, एक हाथ उसने आशु की गोद में रखा हुआ था और दूसरे हाथ में रवि ने अपना हाथ दिया हुआ था।
आशु ने तो अपनी जीन्स की ज़िप खोल कर नेहा के हाथ में अपना लंड दे दिया था जिसे नेहा ने खूब मसला।

इंटरवल में आशु और रवि जब बाहर कोल्ड ड्रिंक लेने गए तो रवि ने हंस कर आशु से कहा- अपनी ज़िप तो बंद कर ले!
आशु झेंप गया।

बाद की मूवी के दौरान रवि ने एक बार नेहा के मम्मे छूने चाहे पर नेहा ने उसका हाथ प्यार से हटा दिया। फिर रवि की दोबारा हिम्मत नहीं पड़ी।

मूवी के बाद तीनों ने डिनर किया और रवि को छोड़ते हुए घर आये।

कल नेहा को ऑफिस ज्वाइन करना था इसलिए रात को बिस्तर तुड़ाई ज्यादा नहीं हुई और सुबह जल्दी उठ कर नेहा ने अपना और आशु का ब्रेकफास्ट और लंच बनाया।

दिन भर नेहा का कशमकश में बीता। ऑफिस का पहला दिन था.. दिल में कहीं न कहीं रवि भी था.. रवि के दो तीन मेसेज भी थे। शाम को नेहा 5 बजे ऑफिस से निकल ली।
वो बाहर ऑटो लेने ही वाली थी कि सामने से रवि अपनी बुलेट मोटरसाइकिल पर आता दिखाई दिया।

हालाँकि यह मुलाकात अचानक थी, पर नेहा को क्या मालूम था कि रवि पिछले आधा घंटे से इधर चक्कर लगा रहा था।
रवि ने उसे लिफ्ट ऑफर की तो नेहा मना भी न कर पाई।

रवि ने बाईक दौड़ा दी.. नेहा हालाँकि सलवार सूट पहने थी, पर वो बाईक पर दोनों ओर पैर करके ही बैठी। एक तो बाइक की सीट आगे को ढलान की थी और रवि चला भी तेज रहा था तो नेहा को अपनी दोनों बाहें रवि की बाँहों के अंदर से ले जाकर रवि की छाती का सहारा लेना पड़ा।
अब उसके मम्मे रवि की पीठ से भिंचे हुए थे।

रवि ने बाइक लेक की तरफ मोड़ दी। नेहा ने कहा भी कि उसे घर जल्दी ही जाना है, पर रवि ने हंस कर कहा- अभी चलते हैं थोड़ी देर में!
नेहा को भी रवि का साथ अच्छा लग रहा था और घर जाने की जल्दी नहीं थी क्योंकि आशु ने दिन में फोन करके कहा था की उसे कहीं पास में ही बाहर जाना है और वो 8 बजे तक ही आ पायेगा।

रवि ने बाईक लेक के किनारे खड़ी कर दी। नेहा का मन आइसक्रीम खाने का था। उसने चोकोबार ली पर रवि ने नहीं ली।
दोनों लेक के किनारे घूमने लगे।
नेहा ने अपनी चोकोबार से रवि को भी शेयर किया.. दोनों को शेयर करके आइसक्रीम खाने में अच्छा ही लगा।

6 बज गए थे, अब घर भी जाना था। रवि ने बाइक स्टार्ट की और दौड़ा दी घर की तरफ… अँधेरा सा छाने लगा था और हवा में हल्की सी ठण्डक भी थी, तो नेहा चिपक कर बैठ गई रवि से!

रवि ने एक सुनसान सी जगह बाइक रोकी और गर्दन घुमा कर नेहा को होंठों पर चूम लिया उम्म्ह… अहह… हय… याह… और बिना उसकी प्रतिक्रिया देखे वापिस बाइक दौड़ा दी।
नेहा ने हंस कर उसको एक चपत लगाई और बोली- कुछ तो जगह देख लिया करो!

रवि ने नेहा को घर छोड़ा तो नेहा ने उससे चाय पीकर जाने को कहा।
दोनों ऊपर आये.. नेहा ‘दो मिनट में आई…’ कह कर अपने बेडरूम में फ्रेश होने गई और फटाफट मुँह धोकर और सलवार सूट उतार कर एक लॉन्ग फ्रॉक डाल कर आ गई।

वो सीधी किचन में गई और चाय का पानी चढ़ा दिया। पीछे से किचन में रवि भी आ गया और उसे फ्रॉक में देख कर मुस्कुराया और बोला- लगता ही नहीं कि तुम्हारी शादी हो गई है।
नेहा कुछ बोली नहीं बस मुस्कुराई।

रवि ने उसे इशारे से अपने पास बुलाया.. नेहा सकुचाई पर पता नहीं क्या जादू था रवि के आमंत्रण में कि वो रवि की ओर खिंची और सीधी उसकी बाँहों में जा समाई।

रवि ने उसे कस के भींच लिया और अपने होंठ उसके गुलाबी होठों पर जड़ दिए। दोनों पागलों की तरह एक दूसरे को चूमने लगे।

चूमते चूमते रवि ने अपना हाथों से उसकी फ्रॉक उठा दी और अपना एक हाथ उसकी पेंटी के अंदर करके उसके मांसल चूतड़ सहलाने लगा।
नेहा ने मना किया भी- रवि ये ठीक नहीं!
पर रवि ने उसकी एक न सुनी और उसे गोदी में उठा लिया और बेडरूम की ओर चल दिया।
स्थिति भांप कर नेहा ने गैस बंद की.. बन ली चाय… अब तो कुछ और होना तय था।

रवि ने आहिस्ता से नेहा को बेड पर लिटाया और उसके साइड में लेट कर उसके होठों को चूसना शुरू किया। अब उसने अपना एक हाथ उसकी पेंटी के अंदर करके उसकी चूत जो चिकनी हो चुकी थी, के ऊपर कर दिया और अपनी उंगली से उसकी चूत मसाज करने लगा।
अब नेहा से बर्दाश्त नहीं हो रहा था, उसने रवि की शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए तो रवि ने खुद ही अपने पूरे कपरे उतार दिए और एक झटके में नेहा को भी नंगी कर दिया।

अब रवि पूरी लम्बाई में नेहा के ऊपर लेटा था। हालाँकि उसने अपने वजन से नेहा को दबाया नहीं था, पर उसका फनफनाता लंड नेहा की चूत के ऊपर था, उसकी चौड़ी छाती नेहा के मम्मे दबा रही थी, उन दोनों के होठ मिले हुए थे।
दोनों ने ही अपने हाथों से एक दूसरे के गाल पकडे हुए थे।

अब रवि नीचे हुआ और अपनी जीभ नेहा की चूत में न कर दी। नेहा पागल हो रही थी, वो ऊपर उठ उठ कर बोलने लगी- रवि अब अंदर आ जाओ, आओ हम एक हो जाएँ..
रवि भी नेहा की चूत चोदने को लालायित था, वो उठा और अहिस्ता से अपना लंड उसने नेहा की चूत में कर दिया।

अब तो जैसे भूचाल आ गया.. दोनों एक दूसरे को छोड़ने को या पोजीशन बदलने को तैयार नहीं थे। नेहा ने अपनी टांगें ऊपर उठा ली थी और रवि की गर्दन से झूल सी गई थी।

रवि ने धक्कम धक्का के बाद नेहा से पूछकर उसकी चूत अपने वीर्य से भर दी।
नेहा उसे बेड पर छोड़ कर वाशरूम में भागी और सीधे शावर के नीचे खड़ी हो गई। बाहर रवि ने वहीं पास में रखे टॉवल से अपने को पौंछा और कपड़े पहन लिए।

नेहा बाहर आई और रवि को किस करके थैंक्स बोला।
नेहा फटाफट किचन में गई और चाय नाश्ता ले आई।

नेहा ने रवि से ये वायदा लिया, हालाँकि वो आशु से कुछ छिपाना नहीं चाहती, पर वो आशु को अपने हिसाब से बताएगी, अतः जब तक वो नहीं कहे, रवि आशु से कुछ नहीं बताएगा।

रवि जानता था कि आशु को भला क्यों ऐतराज होगा पर नेहा को खुश करने के लिए उसने वायदा कर लिया।
रवि ने अपने मन में सोचा कि अगर आशु को न ही बताया जाये तो क्या हर्ज है। उसने यह बात नेहा से कही तो नेहा ने भी हाँ कह दी।
अब उनके बीच यह तय हुआ कि अभी आशु को कुछ नहीं बतायेंगे।

चाय पीकर रवि वापस चला गया।

दोस्त की बीवी की चूत चुदाई की कहानी जारी रहेगी।
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