सहेली की तड़फती जवानी-4

सारिका कंवल

उसने कहा- कुछ देर रुको न.. तुम्हारी बुर का गर्म अहसास बहुत अच्छा लगा रहा है, तुम्हारी बुर बहुत गर्म और कोमल है।

मैंने उसे यूँ ही कुछ देर लेटा रहने दिया फिर उसे उठाया और अपनी बुर साफ़ की और कपड़े ठीक करके सो गई।

अगले दिन सुबह हेमा काफी उदास सी लग रही थी, मैंने उससे पूछा भी कि क्या हुआ पर उसने कुछ नहीं बताया।

शाम को बहुत जोर दिया तो उसने कहा- मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई।

मैंने उससे पूछा- क्या गलती हुई?

तो वो रोते हुए बोली- मैंने अपनी सीमाएं लांघ दीं और रात को कृपा के साथ सम्भोग कर लिया जो मुझे नहीं करना चाहिए था, मैं बहक गई थी।

मैंने उसे धीरज देते हुए कहा- इसमें गलती क्या है तुम दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हो और शादी नहीं कर सकते, पर जरूरी नहीं कि शादी किया तो ही पति-पत्नी बन के रहो। तुम दिल से अगर उसे चाहती हो तो वो बिना किसी नियम-कानून के तुम्हारा पति है और अगर तुमने उसके साथ सम्भोग कर लिया तो कोई बड़ी बात नहीं है।

मेरी बात सुन कर उसे बहुत राहत मिली और वो पहले से ज्यादा खुश दिखने लगी। मुझे भी बहुत अच्छा लगा कि इतने सालों के बाद वो खुश थी।

पर उसके मन में एक और बात थी जो उसे परेशान कर रही थी और वो ये बात कि उसने इतना जोखिम उठा कर उसके साथ सम्भोग किया पर संतुष्टि नहीं हुई।

हम दोनों जानते थे कि कृपा ने कभी पहले सम्भोग नहीं किया होगा, तभी ऐसा हुआ है। पर हेमा को सिर्फ इस बात की चिंता थी कि ऐसा मौका फिर दुबारा मिलेगा या नहीं..!

रात होते-होते मैंने उससे पूछा- क्या आज भी तुम दोनों सम्भोग करोगे क्या?

उसने जवाब दिया- पता नहीं, और फ़ायदा भी नहीं है करके!

मैंने उससे पूछा- क्यों?

उसने तब बता दिया- फ़ायदा क्या.. वो तो करके सो जाता है.. मैं तड़पती रह जाती हूँ..!

मैंने तब उसे पूछा- अच्छा.. ऐसा क्यों?

तब उसने खुल कर कह दिया- वो जल्दी झड़ जाता है!

मैंने तब उसे कहा- नया है.. समय दो, कुछ दिन में तुम्हें थका देगा!

और मैं जोर से हँसने लगी।

मेरी बातें सुन कर उसने भी मुझे छेड़ते हुए कहा- पुराने प्यार के बगल में तो तू भी थी क्या तुम थक गई थी क्या?

मैं डर गई कि कहीं उसने मेरे और सुरेश के बीच में जो हुआ वो देख तो नहीं लिया था। सो घबरा कर बोली- पागल है क्या तू?

पर कुछ ही देर में मुझे अहसास हो गया कि वो अँधेरे में तीर चला रही थी, पर मैं बच गई।

रात को फिर हम छत पर उसी तरह सोने चले गए।

हेमा ने मुझे चुपके से कान में कहा- तू सो जा..जल्दी।

तब मैंने उससे पूछा- क्यों?

तो उसने मुझे इशारे से कहा- हम दोनों सम्भोग करना चाहते हैं।

तब मैंने उसे बता दिया कि मैंने कल रात उनको सब कुछ करते देख लिया था और आज भी देखूंगी!

पर वो मुझे जिद्द करने लगी कि नहीं, तो मैं चुपचाप सोने का नाटक करने लगी।

इधर सुरेश भी मेरे लिए तैयार था, वो भी मुझे चुपके-चुपके मेरे जिस्म को छूता और सहलाता, पर मैं मना कर देती, क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि हेमा और कृपा को कुछ पता चले। क्योंकि मैं पहले से शादीशुदा थी।

काफी रात हो चुकी थी, पर हेमा और कृपा अब भी चुपचाप थे। मैं सोच रही थी कि आखिर क्या हुआ इनको.. क्योंकि मैं खुद उनके सोने का इंतजार कर रही थी।

काफी देर बाद मैं पेशाब करने उठी मेरे पीछे हेमा भी चली आई और कहा- तुम सोई क्यों नहीं अब तक?

मैंने उससे कहा- नींद नहीं आ रही क्या करूँ, तुम जो मर्ज़ी चाहे करो मैं किसी को बताउंगी नहीं..!

तब उसने कहा- इतनी बेशर्म समझा है मुझे तूने?

मैंने उससे तब कहा- कल रात शर्म नहीं आई करने में… मेरे बगल में.. आज आ रही है..!

तब उसने मुझसे विनती करनी शुरू कर दी। मैंने भी उसे कहा- नीद आ गई तो ठीक है वरना मैं कुछ नहीं कर सकती। इस पर वो मुँह बनाती हुई चली गई और लेट गई। मैं भी वापस आकर लेट गई और सोने की कोशिश करने लगी। यह सोच कर कि हेमा इतने दिनों के बाद खुश है, क्यों बेचारी को परेशान करूँ।

पर पता नहीं मुझे नींद नहीं आ रही थी। जब भी नींद आने को होती तो कृपा के हेमा के ऊपर हरकत से तो कभी सुरेश की हरकत से उठ जाती।

तभी हेमा मेरी तरफ मुड़ी और मेरे कान में फुसफुसा कर बोली- सोती क्यों नहीं.. तुझे भी कुछ करना है क्या?

मैंने उससे कहा- पागल है क्या, अब नींद नहीं आ रही तो मैं क्या करूँ, मैं तेरी बैचैनी समझ सकती हूँ।

तब उसने कहा- मुझे पता है तू भी सुरेश के साथ कुछ करने के लिए बेताब है।

मैंने उसे कहा- तेरा दिमाग खराब है, अगर तुझे करना है कर, वरना मेरे सोने का इंतज़ार कर।

तब उसने कहा- मुझे पता है कल रात तूने भी सुरेश के साथ क्या किया, कृपा ने मुझे बता दिया सब।

मैं उसकी बात सुन कर हैरान हो गई कि आखिर उसे कैसे पता चला..!

मैंने तुरत पलट कर सुरेश की तरफ देखा तो उसने खुद ही कह दिया कि उसने आज सुबह कृपा को बता दिया था।

मुझे बहुत गुस्सा आया और चुपचाप सोने चली गई।

पर कुछ देर में सुरेश ने मेरे बदन को सहलाना शुरू कर दिया, पर मैं उसे बार-बार खुद से दूर कर देती।

तब उसने कहा- देखो हम सब अच्छे दोस्त हैं और एक-दूसरे के बारे में सब पता है। फिर किस बात का डर है.. हम जो भी करेंगे वो हमारे बीच ही रहेगा।

उसके काफी समझाने के बाद पता नहीं मेरा भी मन बदल गया और फिर उसके साथ चूमने-चूसने में व्यस्त हो गई और भूल गई कि बगल में हेमा और कृपा भी हैं।

उधर हेमा और कृपा भी अपने में मग्न हो गए। मुझे सुरेश ने आज इतना गर्म कर दिया कि मुझे पता ही नहीं चला कि मैं कब नंगी हो गई।

रात के अँधेरे में कुछ पता तो नहीं चल रहा था पर नंगे होने की वजह से गर्मी में बड़ी राहत थी।

हम दोनों इधर अपनी चुदाई में मग्न थे उधर हेमा और कृपा अपनी तान छेड़ रहे थे।

जब हम दोनों झड़ कर अलग हुए, तो मैंने देखा कि हेमा और कृपा हम दोनों को देख रहे हैं।

मुझे बड़ी शर्म सी आई, पर तभी सुरेश ने कहा- तुम दोनों का बहुत जल्दी हो गया क्या बात है?

इस पर हेमा भी थोड़ी शरमा गई।

मैंने गौर किया तो देखा कि हेमा भी पूरी तरह नंगी है और मेरी तरह खुद को अपनी साड़ी से छुपा रही है।

वैसे मैं और हेमा तो चुप थीं पर कृपा और सुरेश आपस में बातें कर रहे थे।

सुरेश ने मुझे चुपके से कहा- हेमा संतुष्ट नहीं है, मैं हेमा को चोदना चाहता हूँ।

मुझे गुस्सा लगा कि यह क्या बोल रहा है, पर मैं इससे पहले कुछ कह पाती उसने हेमा से खुद ही पूछ लिया और ताज्जुब तो तब हुआ जब हेमा ने ‘हाँ’ कर दी।

पर मैं जानती थी कि हेमा क्यों तैयार हो गई, सो उसकी खुशी के लिए चुपचाप रही।
कृपा भी मान जाएगा ऐसा सोचा नहीं था, पर मुझे इससे कोई लेना-देना नहीं था, क्योंकि लोगों को अपनी जिंदगी जीने का अधिकार होता है।

हेमा मेरी जगह पर आ गई और सुरेश से चिपक गई और फिर उनका खेल शुरू हो गया। उन दोनों ने बड़े प्यार से एक-दूसरे को चूमना शुरू कर दिया और अंगों से खेलने लगे।

हेमा ने सुरेश का लिंग बहुत देर तक हाथ से हिला कर खड़ा किया इस बीच सुरेश उसके स्तनों और चूतड़ों को दबाया और चूसता रहा।

फिर हेमा को अपने ऊपर चढ़ा लिया और उसे कहा- हेमा.. लण्ड को बुर में घुसा लो।

हेमा ने हाथ नीचे ले जाकर उसके लिंग को पकड़ कर अपनी योनि में घुसा लिया फिर धक्के लगाने शुरू कर दिए।

इधर मैं और कृपा उनको देखे जा रहे थे और हम दोनों अभी भी नंगे थे। कृपा हेमा और सुरेश की चुदाई देखने के लिए मेरे करीब आ गया जिससे उसका बदन मेरे बदन से छुए जा रहा था। मेरा पीठ कृपा की तरफ थी और वो मेरे पीछे मुझसे सटा हुआ था।

मैंने महसूस किया कि कृपा का लिंग मेरे चूतड़ों से रगड़ खा रहा है और धीरे-धीरे खड़ा होने लगा। उसका लिंग काफी मोटा था और मुझे भी हेमा और सुरेश की चुदाई देख कर फिर से सम्भोग की इच्छा होने लगी थी।

मैंने कृपा से कहा- ये क्या कर रहे हो?

सने कहा- मुझे फिर से चोदने का मन हो रहा है।

मैंने तब कहा- मन कर रहा है तो क्या हुआ, हेमा को तुमने किसी और के साथ व्यस्त कर दिया अब इंतज़ार करो।

तब उसने कहा- वो व्यस्त है पर तुम तो नहीं हो..!

मैंने कहा- क्या बकवास कर रहे हो, तुम ऐसा कैसे सोच सकते हो?

उसने कहा- प्लीज.. इसमें कैसी शर्म.. हम सब एक ही हैं, मजे लेने में क्या जाता है, हम हमेशा थोड़े साथ रहेंगे।

मैंने कुछ देर सोचा फिर दिमाग में आया कि कृपा कुछ गलत नहीं कह रहा और फिर मेरे मन में उसके लिंग का ख़याल भी आया।
सो मैंने उसको ‘हाँ’ कह दी और उसका लिंग पकड़ लिया।
सच में उसका लिंग काफी मोटा था, लम्बा ज्यादा नहीं था। पर मोटाई इतनी कि मेरी जैसी दो बच्चों की माँ को भी रुला दे।

उसने मेरी योनि को हाथ से सहलाना शुरू कर दिया। फिर कुछ देर मैंने भी उसके लिंग को हाथ से हिलाया और उसे अपने ऊपर आने को कहा।

उधर हेमा सुरेश के लिंग पर बैठ मस्ती में सिसकारी भरती हुई मजे से सवारी किए जा रही थी।

कृपा अब मेरे ऊपर आ चुका था मैंने अपनी दोनों टाँगें फैला कर उसे बीच में लिया और वो मेरे ऊपर अपना पूरा वजन देकर लेट गया।

उसने मेरे स्तनों को चूसना शुरू कर दिया और मैंने उसके लिंग को पकड़ के अपनी योनि में रगड़ने लगी।

थोड़ी देर रगड़ने के बाद मैंने उसे अपनी योनि के छेद पर टिका कर कहा- धकेलो।

उसने जैसे ही धकेला मैं दर्द से कराह उठी, मेरी आवाज सुनकर हेमा और सुरेश रुक गए और हेमा ने कहा- क्या हुआ, बहुत मोटा है न..!

मैंने खीसे दिखाते हुए हेमा को कहा- तू चुपचाप चुदा, मुझे कुछ नहीं हुआ।

मैंने कृपा को पकड़ कर अपनी और खींचा और अपनी टाँगें उसके जाँघों के ऊपर रख दिया और कहा- चोदो..!

कृपा ने धक्के देने शुरू कर दिए, कुछ देर के बाद मुझे सहज लगने लगा और मैं और भी उत्तेजित होने लगी। उधर सुरेश ने हेमा को नीचे लिटा दिया और अब उसके ऊपर आकर उसे चोदने लगा।

कृपा ने भी अब धक्के दे कर मेरी योनि को चोदना शुरू कर दिया, मुझे शुरू में ऐसा लग रहा था जैसे मेरी योनि फ़ैल गई हो, क्योंकि जब जब वो धक्के देता मेरी योनि में दोनों तरफ खिंचाव सा लगता और दर्द होता, पर कुछ देर के बाद उसका लिंग मेरी योनि में आराम से घुसने लगा।

थोड़ी देर में हेमा की आवाजें निकालने लगी और वो सुरेश से विनती करने लगी- बस.. सुरेश हो गया, बस करो.. छोड़ दो..!’

सुरेश सब कुछ अनसुना करते हुए हेमा को बुरी तरह से धक्के देकर चोद रहा था। हेमा झड़ चुकी थी, पर सुरेश ने उसे ऐसे पकड़ रखा था कि हेमा कहीं जा नहीं सकती थी और उसे जोरों से धक्के देते हुए चोदे जा रहा था।

‘बस.. हेमा.. थोड़ी देर और बस.. मेरा निकलने वाला है..!’

हेमा बार-बार कह रही थी- प्लीज.. सुरेश छोड़ दो न.. दर्द हो रहा है… मार डालोगे क्या… क्या करते हो.. कितना जोर से चोद रहे हो..!’
इधर कृपा मुझे चोद रहा था और मुझे भी अब मजा आने लगा था, पर मेरी उत्तेजना अभी आधे रास्ते पर ही थी कि कृपा झटके देते हुए मेरे ऊपर गिर गया।

उसने अपना लावा मेरी योनि में उगल दिया और शांत हो गया।

मैं अब भी प्यासी थी, पर हेमा और सुरेश अब भी चुदाई किए जा रहे थे और हेमा विनती पे विनती किए जा रही थी।

सो मैंने सुरेश से कहा- छोड़ दो सुरेश वो मना कर रही है तो..!

सुरेश ने कहा- बस थोड़ी देर और..!

मैंने तब सुरेश से कहा- ठीक है मेरे ऊपर आ जाओ।

उसने कहा- नहीं.. बस हो गया..!

तब तक तो हेमा फिर से गर्म हो गई, उसका विरोध धीरे-धीरे कम हो गया और उसने अपनी टांगों से सुरेश को जकड़ लिया।
मैं समझ गई कि हेमा अब फिर से झड़ने को है तभी दोनों ने इस तरह एक-दूसरे को पकड़ लिया है जैसे एक-दूसरे में समा जायेंगे। दोनों के होंठ आपस में चिपक गए उनका पूरा बदन शांत था बस कमर हिल रही थीं और जोरदार झटकों के साथ दोनों एक-दूसरे से चिपक कर शांत हो गए, दोनों एक साथ झड़ चुके थे।

कुछ देर बाद सुरेश उठा और हेमा से बोला- मजा आया हेमा?

हेमा ने कहा- हाँ.. बहुत..!

फिर वो दोनों अलग हो गए और हेमा कृपा के बगल में आकर सो गई पर मेरी अग्नि अभी भी भड़क रही थी। सो मैंने सुरेश को कहा- और करना है?

सुरेश ने कहा- कुछ देर के बाद करेंगे।

और फिर हमने फिर से सम्भोग किया। मुझे अपने ऊपर चढ़ा कर मुझे वो चोदता रहा और जब वो झड़ने को हुआ तो मुझे नीचे लिटा कर चोदा। उसके झटके समय के साथ काफी दमदार होते चले जाते थे, जो मुझे दर्द के साथ एक सुख भी देते थे।

मेरा यह अनुभव कैसा लगा आपको, जरूर बताएँ।
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