मॉम की चुदाई आंखों देखी

(Mom Ki Chudai Aankho Dekhi)

मैं चंद्रलेखा आज फिर आपको एक सच्ची कहानी सुनाती हूँ. मेरी पिछली कहानी थी
पति के बॉस से चूत गांड चुदवा कर मजा आया
जिसमें मैंने जिक्र किया था कि मैं अपने चचेरे भी से चुदवाती थी. अभी भी चुदवाती हूँ. आज मेरा भाई परेजू मुझसे मिलने आया और मुझे चोद गया तो मैंने सोचा कि अपने दोस्तों को बताऊँ कि मेरी चूत चुदाई शुरू कैसे हुई.

मैं भूमिका बनाने में आपका बहुत समय खराब नहीं करूँगी. ये उस समय की बात है, जब मेरी उम्र 18 साल की थी. हम और हमारे चाचा ताऊ सब एक ही आंगन में बने घरों में रहते थे … बाद में अलग अलग हुए थे. उस वक्त मेरे ताऊ जी के बेटे परेजू की उम्र 19-20 रही होगी.

एक दिन गर्मियों के मौसम में भरी दोपहर को वो और मैं ऐसे ही पकड़ा पकड़ी का खेल, खेल रहे थे. मैं भागते भागते अपने घर के पहली मंजिल पर डैड मॉम के बेडरूम के सामने से निकली, तो मुझे मॉम के खिलखिलाकर जोर से हंसने की आवाज़ सुनाई पड़ी. मैं थोड़ा उधर रुक कर एक खिड़की में से झांकने लगी, तो मेरी सांस रुकी की रुकी रह गई. मैंने देखा मेरी मॉम एकदम नंगी होकर पलंग के सिरहाने पर तह करके रखे गए बहुत सारे कपड़ों के ऊंचे से ढेर पर चढ़ी बैठी हैं और डैड भी नंगे खड़े उनसे कुछ कह रहे थे.

मैंने चुप होकर तमाशा देखना शुरू किया, तब तक परेजू मेरे पीछे आ चुका था. उसे भी मैंने इशारा करके चुपचाप खड़ा होने को कहा. वह भी मेरे पीछे सट कर खड़ा हो गया और अन्दर उचक उचक कर देखने लगा.

मेरी मॉम की उम्र लगभग 37 साल की थी. वह बहुत ही सुन्दर हंसमुख और सेक्सी दिखती थीं. उनके काले घने और लम्बे बाल उस समय खुले हुए लहरा रहे थे. मॉम की गोल गोल मोटी गांड बहुत सुन्दर लग रही थी. उनकी सुडौल बांहें और टांगें एकदम किसी अप्सरा को भी मात देने वाली थीं … और चूची की तो बस पूछो ही मत. मॉम की चूचियां 34-या 36 इंच की साइज़ की गोल चूचियां थीं. उन पर मोटे से दिख रहे निप्पल, ऐसे दिख रहे थे, जैसे अभी किसी ने चूस कर बड़े कर दिए हों.

मॉम आज कुछ ज्यादा ही बेशर्म हो रही थीं. वैसे भी वो थोड़ी सी ज्यादा बोल्ड तो हैं ही. लेकिन आज उन्होंने अपने हाथों से अपनी चूत को चौड़ा किया हुआ था और ऊंचाई पर बैठीं, डैड को चिढ़ा रही थीं. उनकी चूत का द्वार खुला था और अन्दर से लाल लाल एक छोटी सी गुफा जैसे दिख रही थी. उनको इस स्थिति में देखकर मेरा हाथ अनायास मेरी चूत सहलाने लगा. परेजू कब मेरे बदन से सट कर खड़ा हो गया, मुझे पता ही नहीं चला. उसका लंड मेरी गांड को छू रहा था. मुझे उसका लंड बहुत अच्छा लग रहा था … पर वह थोड़ा डर रहा था और मैं भी असमंजस में थी कि वह आखिर है तो मेरा भाई.

इसी बीच डैड ने मॉम से कहा- आओ नीचे को रपट कर आओ, मेरा लंड तेरी चूत की चुम्मी लेने को तैयार है.

ये कह कर डैड कपड़ों के उस ऊंचे ढेर के निचले सिरे पर अपने हाथ से लंड को सीधा पकड़ कर निशाना साध कर बैठ गए थे. मॉम खिलते हँसते ऊपर से रपट कर तेजी से नीचे आईं और गप्प से लंड के ऊपर अपनी चूत को साधते हुए डैड की गोद में ऐसे गिरीं कि डैड लंड फट से मॉम की चूत में समां गया.

ये नज़ारा वाकयी देखने लायक था. भरी दोपहरी सब तरफ गर्मी के मारे सन्नाटा था … और मॉम डैड का एक रूम में ये सेक्सी खेल खेल रहे थे, जो मजेदार और अनोखा ही था.

जैसे ही मॉम डैड की गोद में गिरीं … डैड ने उसी जगह से मॉम को धक्के मार मार कर चोदना शुरू कर दिया.

मेरी हालत ख़राब हो रही थी. परेजू डरा डरा सा था, वो कुछ खास नहीं कर रहा था … मैं उसकी छोटी बहन जो थी.

अब मुझसे भी रहा नहीं गया. परेजू के लंड को मैं महसूस तो कर रही थी और यह भी पता चल रहा था कि वो एकदम लंड तान कर मेरे पीछे खड़ा हुआ है. उसके लंड के अन्दर रह रह कर दिल की धड़कन जैसी हरकत भी पता चल रही थी. पर मेरा मन कर रहा था कि अब तो ये लंड अन्दर ही घुस जाए. या कम से कम गांड की फांक में ही सैट हो जाए. इसलिए मैंने धीरे धीरे अपनी गांड पीछे सरकाई और उसके लंड को गांड की फांक में सैट करने लगी. परन्तु वह थोड़ा पीछे खिसक गया. तभी मैंने उसे अन्दर का सीन दिखने के बहाने अपने करीब और सट कर खड़ा होने का इशारा किया. जब वह करीब आ गया, तो मैंने अपनी गांड की सैटिंग उसके लंड के हिसाब से ऐसी कर ली कि उसका फड़कता लंड मेरी गांड की फांक और गांड के छेद पर धड़कने लगा.

अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. उसकी गरम सांस भी मेरे कान पर महसूस हो रही थी. थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि वो खुद भी मेरी गांड से अपना लंड हटने नहीं दे रहा था.

अन्दर कमरे में डैड ने मॉम को कपड़ों के ढलान से टिका लिया था और मॉम अपने बालों को दबने के चक्कर में अधलेटी सी उचक उचक कर लंड पर झूल रही थीं. डैड मॉम की चुचियों को मुँह में लेकर जोर से चूस रहे थे.

मॉम के मुँह से ‘खूब जोर से …’ और कई तरह की आवाजें निकल रही थीं. मॉम डैड का नाम लेकर कह रही थीं- आह … राजू मेरी जान … चोद दे अब तो जोर से … चोद दे डैड …
डैड भी लंड पेले जा रहे थे.
मॉम बड़बड़ा रही थीं- उई मॉम क्या करूँ आहह … मारो जोर से … चोद चोद दे राजू … आआह्ह … मर गईई … मज़ा आ गया राजू …

मॉम जब ज्यादा लाड़ में रहती हैं, तो मेरे डैड को राजू कह कर भी बुलाती हैं … चुदवाते हुए वो उन्हें राजू राजू पुकार रही थीं.

डैड का इतना बड़ा लंड होगा, मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था. दूर से मुझे ऐसा लग रहा था, जैसे मॉम की चूत में कोई चिकना सा मोटा मूसल जैसा एक पिस्टन, उनकी चूत को पेलम पेल कर रहा हो. चूत में से फच फच की आवाज़ भी आ रही थी.

तभी डैड ने मॉम से कहा- तू घोड़ी बन जा … अब मैं तुझे पीछे से चोदूंगा.
मॉम झट से लंड के नीचे से निकलीं और घोड़ी सी बन गईं … और पलंग पर हाथ टेक लिए. मॉम की गांड हमारी तरफ दिख रही थी. डैड ने मॉम की गांड पर जैसे ही लंड रखा, वो उचक कर बोलीं- गड़बड़ नहीं करना.
डैड ने कहा- नहीं कोई गड़बड़ नहीं होगी.
तब फिर मॉम झुकीं, तो डैड ने थोड़ा सा नीचे से लेकर लंड को मॉम की चूत में पेल दिया और फटाफट धक्के पे धक्का मार कर चोदने लगे.

मेरी और परेजू की हालत ख़राब हो रही थी. हम दोनों ने ही चुदाई का सीन पहली बार ही देखा था और बहुत ही उत्तेजित हो रहे थे.

डैड मामी को जितना जोर से धक्का मार कर चोदते, उतनी ही मॉम की तरफ से सिसकारी और आनन्द का इज़हार होता. वो डैड को खूब उकसा उकसा कर चुदवा रही थीं. थोड़ी देर तक चुदाई के बाद डैड ने जल्दी जल्दी चोदना शुरू किया और लगा जैसे कि उन्हें कंपकंपी सी आ गई हो. वे रुक गए और लम्बी सी आह के साथ झड़ गए. मॉम भी करीब करीब तभी निढाल सी होने लगीं. डैड ने अपना लंड धीरे धीरे निकालना शुरू किया. लंड तो ऐसा लग रहा था, जैसे निकलता ही जा रहा हो और बहुत ही लम्बा होता जा रहा हो. पर सच बताऊं … डैड का लंड था बहुत सुन्दर.

अब हमने सोचा कि यहां से हट जाना चाहिए. मैं आगे आगे चली, पीछे से परेजू को बुलाया और हम दोनों परेजू के कमरे में आ गए. वहां मैं परेजू से चिपट गई और बोली कि भाई मुझे भी ऐसे ही प्यार करो.

परेजू ने मुझे चूम चूम कर ऐसा कर दिया कि अब तो कोई भाई था न बहन थी. बस एक मर्द था और एक लड़की थी. उस दिन पहली बार उसने मुझे चोदने की कोशिश की. हालांकि चुदाई तो नहीं हो सकी … लेकिन चुदाई से कुछ कम भी नहीं हुआ.

इस चुदाई की अधूरी घटना कभी फिर बताऊँगी. हां इसके बाद लगभग रोजाना ही हम दोनों चुदाई करते थे. किसी को कोई शक नहीं हुआ क्योंकि भाई बहन तो थे ही. एक ही घर भी था.
आपके मेल का इन्तजार रहेगा.

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