मेरे लण्ड की ठरक और चूत चुदाई-1

(Mere Lund Ki Tharak Aur Chut Chudai-1)

दोस्तो नमस्कार.. मेरा नाम वीर है। मेरी उम्र 23 साल है। मैं हरिद्वार शहर का रहने वाला हूँ। मेरे दादा जी और दादी जी गाँव में रहते थे.. जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। मैं छुट्टियों में अक्सर गाँव जाता था.. पर अब जाना कम ही हो पाता है।

गाँव में हमारे पुश्तैनी घर के पास एक लड़की रहती थी.. जिसका नाम रूपा था। भाई.. वो देखने में क्या माल लगती थी.. कसम से उसे जो भी देखे.. तो देखता ही रह जाए।
हम दोनों की दोस्ती तो बचपन से ही थी.. लेकिन कभी सेक्स की नज़र से उसको कभी देखा नहीं था। हम दोनों अक्सर शाम हो देर रात तक मकान की छत पर अकेले बैठे रहते थे। उसके और हमारे मकान की छतें आपस में मिली हुई थीं।

यह बात 5 साल पुरानी है, मैं जून में अपने गाँव गया था.. तो गाँव जाते-जाते दोपहर हो गई थी।
मैं जब घर पहुँचा.. तो दादी जी ने मुझे प्यार से बिठाया और खाना दिया। खाना खाने के बाद मैं सबसे पहले रूपा से मिलने चला गया।

उसके घर के दरवाजे पर ताला लगा हुआ था। मैं वापस आने को हुआ.. तभी मुझे अन्दर से कुछ हैण्डपम्प चलने जैसी आवाज़ आई।
मैं ठिठक कर रुक गया और मैंने ध्यान से सुना तो कोई अन्दर हैण्डपम्प चला रहा था। मुझे लगा अन्दर शायद कोई है। मैं भाग कर अपनी छत पर.. ये देखने के लिए गया.. कि अन्दर हैण्डपम्प कौन चला रहा है।

मैंने आपको बताया था कि हमारी और उनकी छत आपस में मिली हुई है। उनकी छत पर जाल लगा हुआ था।

मैंने जैसे ही उसमें से नीचे झाँक कर देखा.. तो मैं एकदम सकते में आ गया.. क्योंकि उधर रूपा एकदम नंगी.. हैण्डपम्प के नीचे बैठे नहा रही थी।

उसको यूँ नंगी नहाते देखकर मेरे होश उड़ गए.. मैं एकदम हतप्रभ रह गया।
फिर मैंने ध्यान से देखा.. हय.. वो क्या लग रही थी.. एकदम चाँद का टुकड़ा..

मैंने पहली बार किसी लड़की को नंगा देखा था। उसकी हिलती हुई चूचियाँ बहुत ही मस्त लग रही थीं.. उस पर पानी की कुछ बूँदें चिपकी हुई थीं.. जो धूप के कारण हीरे जैसी चमक रही थीं।

अब मैं अब एकटक उसको देखे जा रहा था। वो भी बड़े मजे से नहा रही थी। वो कभी अपनी चूचियों पर साबुन लगाती.. कभी चूत पर.. ये देख कर मेरा लण्ड एकदम कड़क हो गया।

उस दिन मैंने जाना कि कपड़ों में देखकर जो जोश चढ़ता है.. वो अलग होता है.. लेकिन एक लड़की बिल्कुल नंगी नजरों के सामने हो.. तो खुद को रोक पाना बहुत मुश्किल होता है।

अगले ही मिनट वो एकदम से चौंक उठी.. क्योंकि उसने मेरी परछाई देख ली थी.. जो धूप होने के कारण नीचे हैण्डपम्प के पास जा रही थी।

लेकिन मैं इस बात से अंजान उसके जिस्म के मजे ले रहा था।
उसने एकदम से ऊपर देखा.. मैं एकदम जाल से दूर हट गया.. लेकिन वो मुझे देख चुकी थी।
अब मुझे डर लग रहा था कि ये मेरे घर जाकर बोल देगी, डर के मारे मेरा गला सूखने लगा।
लेकिन दोस्तो.. चूत का मजा भी डर के बाद ही मिलता है!
मैं अपने घर गया और चुपचाप जाकर लेट गया।

शाम को रूपा हमारे घर आई.. मैं उसको देखकर डर गया कि अब वो सबको बता देगी। वो मेरी तरफ घूर कर देख रही थी.. मैं उससे नज़र नहीं मिला पा रहा था। लेकिन उसने किसी को कुछ नहीं बताया.. मैं समझ गया कि इसको मुझसे कुछ मतलब है।

अब थोड़ा सा अँधेरा हो गया था.. मैं छत पर घूम रहा था। तभी वो भी अपनी छत पर आ गई।
मैंने उसको देखा तो नीचे आने लगा.. लेकिन उसने मुझे आवाज़ लगाई- वीर सुनो!

मैं रुक गया लेकिन मेरी बुरी तरह फट रही थी.. पता नहीं क्या बोलेगी अब!!
मैं उसके पास गया और अपना सर झुका कर खड़ा हो गया।

वो मुझे देखकर बोली- अब तेरे को शर्म आ रही है.. तब तो बहुत मज़े से देख रहा था।
डर के मारे मैं कुछ बोल नहीं पा रहा था।

अगले ही पल उसने मुझे अपनी बाँहों में जकड़ लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
मैं एकदम से हैरान था.. मेरी समझ में कुछ नहीं आया।

चुम्बन करने के बाद वो बोली- अब तुमने मुझे नंगी देखा है.. तो तुम्हें मुझसे ही शादी करनी पड़ेगी।

मैंने भी हाँ में सर हिला दिया।
उस दिन से हमारी प्रेम कहानी चालू हो गई।

मुझे भी वहाँ पूरे जून रहना था, पूरे 30 दिन तक हम रोज मिलते.. सेक्स की बातें करते.. एक-दूसरे को चुम्बन करते.. लेकिन अभी तक हमने आपस में सेक्स नहीं किया था।

एक दिन मैंने उसको सेक्स करने के लिए बोला.. तो उसने मना कर दिया ओर बोली- ये सब हम शादी के बाद करेंगे। पर मेरे ज़िद करने पर उसने हाँ कर दी।
अब मैं बस एक मौके की तलाश में था लेकिन कोई मौका मुझे नहीं मिला और छुट्टियाँ खत्म हो गईं।

मैं वापस हरिद्वार आ गया।
अब मुझे यहाँ पर उसकी याद सताती थी। पढ़ाई में मेरा मन नहीं लगता था.. मैं उसके बारे में ही सोच-सोच कर मुठ मारने लगा।

अब मैंने सोचा कि पता नहीं रूपा के साथ कब मौका मिले.. एक लड़की तो हरिद्वार में भी तलाश करना चाहिए.. जो मेरे लण्ड की प्यास को बुझा सके।
अब मैं हर लड़की को हवस की नज़र से देखने लगा कि काश ये ही चोदने को मिल जाए.. ये मिल जाए… लेकिन कोई नहीं मिली।
मैं अक्सर हरिद्वार में कनखल जाया करता था.. वहाँ पर एक घाट है.. बहुत अच्छा और एकदम शांत। वहाँ मैं काफ़ी वक्त बिताता था। वहाँ बहुत से लड़के-लड़कियाँ रोमान्स किया करते थे.. अब भी करते हैं, उनको देखकर कभी-कभी लगता था कि किसी का चोदन कर डालूँ.. लेकिन खुद पर काबू कर लेता था।

एक दिन मैं वहाँ बैठा हुआ था कि मेरी नज़र एक लड़की पर पड़ी.. जो मुझे बहुत गौर से देख रही थी। वो ज्यादा स्मार्ट तो नहीं थी.. उसका रंग भी सांवला था.. फिगर भी 34-30-32 का रहा होगा।

मैंने उसकी तरफ देखा तो वो शर्माकर कर मुस्कुराने लगी.. तो मैं भी मुस्कुरा दिया।
उसकी आँखें बड़ी ही प्यारी और मदभरी थीं.. जो चुदाई करने के लिए कामातुर सी लग रही थीं।

फिर मैं घर वापस आ गया.. अपने कमरे में गया और रूपा के नाम की मुठ मार कर सो गया।

अगले दिन शाम को मैं फिर घाट पर गया.. वो लड़की पहले से ही वहाँ थी। उसके साथ एक छोटा सा बच्चा भी था.. हम दोनों ने एक-दूसरे को देखा और एक स्माइल के साथ मैं अपनी जगह बैठ गया।
वो कुछ दूर एक पेड़ के पास खड़ी थी।

थोड़ी देर में.. उसके साथ जो छोटा बच्चा था.. वो मेरे पास आया और बोला- मेरी बुआ को आपका नंबर चाहिए..

मैंने उसको अपना नंबर दे दिया और वहाँ से वापस आ गया।
घर आकर मैं अपने कमरे में जाकर लेट गया.. लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी, मैं नंगा हो गया और अपना लण्ड हिलाने लगा।

तभी मेरे फोन की घंटी बजी.. ‘हैलो!’

उधर से कोई लड़की बोली- हैलो..

मैंने पूछा- जी कौन?

तो वो बोली- इतनो जल्दी भूल गए?

मैं समझ गया कि ये वही घाट वाली लड़की है.. क्योंकि रूपा की आवाज़ तो मैं पहचानता हूँ।

मैंने बोला- जी.. आपको किससे बात करनी है?

वो बोली- जी आपसे..

मैंने कहा- जी.. तो बताएं.. क्या बात करनी है?

वो बोली- मैं गायत्री बोल रही हूँ जो आपको घाट पर मिली थी।

इस तरह हम दोनों खुलते गए और फिर हम बातें करने लगे।
उसने बताया- वो एक तलाक़शुदा औरत है।

मैंने पूछा- तुम्हारा तलाक़ कैसे हुआ?

उसने बताया कि उसके पति के पास सिर्फ़ पैसा था.. लेकिन उसके लिए वक्त और सेक्स बिल्कुल नहीं था.. वो उसको खुश कर ही नहीं पाता था।

तो मैंने उसको बोला- अगर आप मौका दो तो.. मैं आपको खुश कर दूँगा।

वो बोली- मेरे राजा.. इसलिए ही तो तुम्हें फोन किया है।

मेरी तो ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा, जिस चीज़ के लिए मैं परेशान था.. वो खुद चल कर मेरे पास आ गई थी।
बातों-बातों में उसने मुझे अपने घर का पता दिया और बताया- शनिवार और रविवार को मैं घर पर अकेली हूँ.. उसके घर वाले किसी शादी में जा रहे हैं.. तुम घर पर आ जाना.. हाँ लेकिन बाइक से मत आना.. रिक्शा या पैदल ही आना।

मैंने कहा- ओके..

अब मुझे शनिवार का इंतज़ार था.. क्योंकि आज तो मंगलवार ही था। ये तीन दिन बड़ी मुश्किल से कटे।

फोन पर तो मैं उससे सेक्स कर लिया करता था.. लेकिन असली संतुष्टि तो उसके पास जाकर ही मिलती न..

आख़िर वो दिन भी आ ही गया.. शनिवार को 12 बजे दोपहर में मैं उसके घर पहुँच गया।
मैंने घन्टी बजाई.. उसने गेट खोला।
उसको देखते ही मेरे लण्ड में हलचल होने लगी।

सच्ची यार.. क्या माल लग रही थी वो.. आज पहली बार मैंने उसको इतने पास से देखा था।
उसने लाल रंग का सूट पहना हुआ था.. मैं तो उसे बस देखता ही रह गया।

वो बोली- बाहर ही खड़े रहोगे या अन्दर भी आओगे?

मैं होश में आया और अन्दर गया.. उसने गेट बंद कर दिया।
मेरे अन्दर आते ही उसने मेरे होंठों से अपने होंठ मिला दिए।

इस चुम्बन में मुझे रूपा की चुम्बन से ज्यादा मज़ा आया.. क्योंकि यह एक अनुभवी औरत का चुम्बन था।

फिर वो अलग होते हुए बोली- बताओ क्या लोगे?

मैंने भी मज़ाक में बोल दिया- जो ज्यादा ख़ास हो वो पहले दे दो..

तो वो मेरा मतलब समझते हुए बोली- मेरे राजा.. ये सब चीजें तो तुम्हारी ही हैं.. मैं तो चाय की बात कर रही हूँ।

मैं उसको मना करते हुए कह दिया- फिलहाल मेरा मूड चाय का नहीं.. दूध पीने का है।
मैंने उसके चूचों को ज़ोर से दबा दिया, उसके मुँह से ‘सीईई..’ की आवाज़ निकली।

वो बोली- धीरे से जानेमन..

मैंने उसको अपनी ओर खींचा तो वो मेरी गोद में आ गई। हम दोनों एक-दूसरे को चुम्बन करने लगे और एक-दूसरे के कपड़े उतारने लगे। थोड़ी देर में ही हम दोनों बिल्कुल नंगे हो चुके थे।

उसने मेरे लण्ड अपने हाथों से पकड़ा और अपने मुँह में लेकर चूसने लगी।
दोस्तो.. लवड़े की चुसाई के आनन्द के बारे में मैं अपनी जुबान से बयान नहीं कर सकता.. जब कभी आप अपना लौड़ा किसी मस्त औरत से चुसवाओगे.. तब ही इसका वास्तविक आनन्द को समझ आ सकता है।

वो भी रण्डियों की तरह मेरा लण्ड चूस रही थी। थोड़ी ही देर में मेरे लण्ड ने अपना माल छोड़ दिया.. उसने सारा रस पी लिया और मेरी तरफ अपनी चूत कर दी।

उस दिन पहली बार मुझे नंगी चूत के दर्शन हुए। मैंने मन में सोचा- ये है वो करामती छेद.. जिसके लिए लोग फांसी पर चढ़ने को भी तैयार रहते हैं।
मैंने उसकी चूत पर हाथ फेरा और एकदम से उसको ज़ोर से भींच दिया।

‘आह्ह..’
उसे दर्द हुआ.. वो बोल उठी- हय.. मेरे राजा.. दर्द होता है.. जरा प्यार से चाटो इसे..

कहानी अभी जारी है। आपके विचारों का स्वागत है।