इलेक्ट्रिक शेवर ने मामी को दिलाया सेक्स का मज़ा-2

(Electric Shaver Ne Mami Ko Dilaya sex ka mazza- Part 2)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

सम्पादिका: श्रीमती तृष्णा लूथरा
मामा के साथ मुंबई स्टेशन से ठाणे तक पहुँचने में हमें डेढ़ घंटा लग गया और हम दोपहर के लगभग साढ़े बारह बजे के बाद ही उनके घर पहुंचे।

जब हम घर पर पहुंचे तब मेरा स्वागत सिर्फ मामी ने ही किया क्योंकि मामा मामी के शादी शुदा जीवन में अभी तक उनकी कोई संतान नहीं हुई थी।

मामा का घर ठाणे की एक छोटी सी चौल की पहली मंजिल पर था और उसमें सिर्फ एक हाल कमरा था और एक छोटा कमरा था जिसे उन्होंने अपना बैडरूम बना रखा था।
हाल कमरे के एक कोने में रसोई थी तथा दूसरे कोने में बाथरूम था बाकी के हिस्से को बैठक बना रखा था जिसमें एक दीवान और एक सोफे सेट तथा दो कुर्सियाँ रखी थीं।

मैं थोड़े असमंजस से हॉल कमरे को देख रहा था, तभी मामी ने मुझे दीवान पर बिठाया और पानी पिलाया।
मेरे चेहरे के भाव देख कर मामी बोली- विवेक, हम बहुत साधारण वर्ग के हैं इसलिए बहुत ही छोटी सी जगह में जीवन बसर कर रहे हैं। मेरा वादा है कि मैं तुम्हें इस छोटी सी जगह में भी कोई कष्ट नहीं होने दूंगी लेकिन तुम्हें इस दीवान पर ही सोना पड़ेगा।

इतना कह कर मामी ने मेरा सामान उठा कर उनके बैड रूम में रखी अलमारी के पास रख दिया और बोली- विवेक, मैंने अपनी अलमारी में तुम्हारे लिए दो खाने खाली कर दिए है, इसलिए तुम अपना सामान निकाल कर उन में रख सकते हो। तुम्हारे लिए बाथरूम में पानी रखा है, तुम जल्दी से नहा लो।

मैंने अच्छा कह कर अपना सामान मामी की अलमारी में लगा दिया और नहाने के लिए जब बाथरूम में घुसा तब देखा कि उसके दरवाज़े में कुण्डी ही नहीं थी।
जब मुझे वहाँ पर कुण्डी का कोई विकल्प दिखाई नहीं दिया तो दरवाज़े को भेड़ दिया और अंडरवियर पहन कर ही नहाया।

नहाने के बाद मैंने मामी से पूछा- मामी, कपड़े कहाँ सुखाते हैं? मैंने अपना अंडरवियर सूखने के लिए डालना है।
मेरी बात सुन कर मामी ने मेरे हाथ से गीला अंडरवियर ले कर बाथरूम में फेंकते हुए कहा- अरे, तुम्हें इसे धोने की कोई ज़रूरत नहीं थी, मैं खाना खाने के बाद बाकी मैले कपड़ों के साथ इसे भी धो कर सुखा देती।

फिर मामा-मामी के साथ चटाई पर बैठ कर खाना खाने के बाद मामी के कहने पर मैं सुस्ताने के लिए दीवान पर जैसे ही लेटा मुझे नींद आ गई।

शाम पांच बजे जब नींद खुली तो देखा मामा और मामी बैडरूम में डबल-बैड पर सो रहे थे तब मुझे बारह वर्ष पुरानी कुछ बाते याद आ गईं जो कुछ इस प्रकार थी:

मेरे मामा पढ़ाई में अधिक अच्छे नहीं थे इसलिए बारहवीं के बाद उन्होंने आई॰टी॰आई॰ में इलेक्ट्रीशियन की ट्रेनिंग ले कर फैक्ट्री में नौकरी शुरू कर ली थी।
मेरे ननिहाल में पास वाले घर में एक परिवार दूसरे धर्म का रहता था और मेरी मामी उसी परिवार की सदस्य थी।

क्योंकि मामा और मामी आपस में प्रेम करते थे इसलिए जब मामा ने मेरे नाना को बताया कि वह उससे विवाह करना चाहते हैं तब वह बहुत गुस्सा हुए और मेरे मामा को घर से निकाल दिया।

उसके बाद मेरे मामा और मेरी मामी दोनों ही घर से भाग कर मुंबई आ गए और आपस में शादी करके तब से यहीं पर ही बस गए थे।
क्योंकि मेरी मम्मी को छोटे मामा से बहुत लगाव और हमदर्दी थी इसलिए उन्होंने मामा की बहुत सहायता भी करी थी। मामा को मुंबई वाला घर खरीदने के लिए मम्मी ही ने पैसों से उनकी बहुत मदद भी करी थी।

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