बहन का लौड़ा -21

(Bahan Ka Lauda -21)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

अभी तक आपने पढ़ा..

राधे- मेरी जान.. तेरी गाण्ड बड़ी मस्त है आज इसका भी उद्घाटन करवा लो..
मीरा- नहीं अभी नहीं.. मेरी चूत का दर्द ख़त्म हो जाने दो.. उसके बाद गाण्ड की बात करना.. लाओ पहले मुझे लंड चूसने दो.. कितना मस्त लग रहा है.. खड़ा हुआ..
राधे बिस्तर के पास जाकर खड़ा हो गया और मीरा पेट के बल लेटी हुई लौड़े पर जीभ घुमाने लगी।

राधे ने मस्ती में आँखें बन्द कर लीं और मीरा पूरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.. तभी घर का मेन डोर खुला और ममता अन्दर आ गई।
वो सीधी इनके कमरे की तरफ़ आई और जब उसकी नज़र अन्दर पड़ी.. तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं.. उसके पैरों के नीचे से जैसे जमीन निकल गई हो।

यह दोनों तो अपनी मस्ती में खोए हुए थे और ममता ने अपने मुँह पर हाथ रख लिया.. उसकी साँसें तेज़ चलने लगीं, दरअसल वो इस तरह खड़ी थी कि राधे का लौड़ा उसे साफ-साफ मीरा के मुँह में अन्दर-बाहर होता हुआ दिखाई दे रहा था।

अब आगे..

मीरा ने लौड़ा मुँह से निकाल कर उसे अपने हाथों में ले लिया।
मीरा- बस मेरे आशिक अब क्या मुँह में ही पानी निकालोगे.. मेरी चूत गीली हो गई है.. अब अपने इस शैतान को मेरी चूत में घुसा दो न..
राधे- मेरी जान अपने जिस्म को इस कपड़े से तो आज़ाद करो।

मीरा जब बैठी तो उसकी नज़र ममता पर पड़ गई.. वो एकदम चौंक सी गई। उसकी नज़रें दरवाजे पर चिपक गईं और उसकी इस हरकत ने राधे को भी दरवाजे की तरफ़ देखने पर मजबूर कर दिया।
राधे ने जल्दी से पास पड़ी चादर अपने जिस्म पर लपेट ली।

मीरा- अम्म.. म..ममता तुम तो चली गई थी ना.. वापस क्यों आई?
ममता- बीबीजी, जाते वक़्त मुझे याद आया कि मैं अपना फ़ोन रसोई में भूल गई हूँ.. बस वही लेने आई थी.. मगर यहाँ तो नजारा ही अलग हो गया। आपकी बहन का लौड़ा देख कर तो मेरी आँखें चकरा गईं..

राधे- देखो ममता तुम अन्दर आओ और मैं मीरा की बहन नहीं.. पति हूँ.. प्लीज़ तुम किसी को कुछ मत बताना.. तुम्हें जो चाहिए.. हम दे देंगे.. जितने पैसे बोलोगी.. हम देंगे..

ममता- बीबी जी ना ना.. साहेब जी.. मैं गरीब जरूर हूँ.. बेईमान नहीं.. लालची नहीं हूँ.. मुझे बस आप इस उलझन से आज़ाद कर दो.. यह माजरा क्या है?

राधे और मीरा ने ममता को पास बिठाया और शुरू से अब तक की सारी बातें बता दीं।

ममता- साहेब जी.. आप दोनों की जोड़ी बहुत अच्छी है.. मैं कभी किसी को कुछ नहीं बताऊँगी.. लेकिन..
मीरा- लेकिन क्या ममता?
ममता- बीबी जी आप बुरा मत मानना.. मैंने इतना बड़ा लौड़ा कभी सपने में भी नहीं देखा है.. मेरे पति का तो ना के बराबर है.. बस एक बार मैं साहेब जी का लौड़ा अपनी चूत में लेना चाहती हूँ.. मेरी प्यासी चूत की आग यही बुझा सकते हैं.. मेरी सूनी गोद को यही भर सकते हैं.. भगवान के लिए मुझे ये मौका दे दो.. मैं जीवन भर आपकी आभारी रहूंगी।

राधे- यह तुम क्या कह रही हो?

ममता- ना ना साहेब जी.. मैं आपको कोई धमकी नहीं दे रही.. बस प्रार्थना कर रही हूँ.. अगर आप ना भी करोगे.. तो भी मैं किसी को कुछ नहीं बताऊँगी। मैंने इस घर का नमक खाया है.. अब नमकहरामी नहीं करूँगी..

मीरा- देखो ममता.. वैसे तो दुनिया की कोई भी औरत अपने पति को दूसरी औरत के पास नहीं जाने देगी.. मगर तुम्हारे ऊपर बड़ा ज़ुल्म हुआ है और मैं खुद यही चाहती हूँ कि राधे तुम्हें बच्चा दे।

राधे- यह क्या बोल रही हो तुम मीरा.. बच्चा देना कोई मजाक है क्या?
मीरा- हाँ पता है.. आसान नहीं है.. मगर भगवान चाहे तो एक बार में ही बच्चा पेट में पड़ जाता है.. नहीं तो महीनों मेहनत करनी पड़ती है बच्चे के लिए..

राधे- हाँ तो ये बात तुम सोचो.. कैसे होगा ये?
मीरा- अरे मेरे आशिक.. बहुत आसान है.. सुबह जब मैं स्कूल चली जाऊँगी.. तो तुम और ममता अकेले रहोगे.. बस कोशिश करते रहना.. कभी ना कभी तो कामयाब हो जाओगे।

ममता इन दोनों की बातें सुनकर मन ही मन खुश हो रही थी.. उसकी चूत गीली होने लगी थी।

राधे- दिन में पापा रहेंगे ना.. कैसे होगा सब?
मीरा- अरे मेरे भोले आशिक… जब मैं स्कूल चली जाऊँगी और पापा अपने काम से बाहर होंगे.. तब तुम आराम से ममता के साथ कर सकते हो और अभी तो पापा को आने में दो दिन लगेंगे.. तब तक तो बिना किसी डर के कर सकते हो ना..

ममता- बीबी जी आप बहुत अच्छी हो भगवान आपका भला करेगा.. अभी तो मैं जाती हूँ.. आप मज़ा करो। कल आप स्कूल चली जाओगी.. तब मैं साहेब जी के साथ हो जाऊँगी।

मीरा- कल क्यों.. आज ही कर लो.. थोड़ा मज़ा ले लो..
मीरा की बात से ममता शर्मा गई।

ममता- नहीं बीबी जी.. आज नहीं.. आज आप मज़ा लो.. मैं कल अच्छे से नहा- धो कर आऊँगी।
मीरा- ओये होए.. ममता क्या बात है.. नहा कर आओगी या साफ-सफ़ाई करके आओगी.. हाँ..
ममता- बीबी जी आप बहुत बेशर्म हो गई हो.. कुछ भी बोल देती हो..

मीरा- हा हा हा.. अरे इसमें बेशर्मी की क्या बात है.. जब इतना बड़ा लौड़ा चूत में जाएगा.. तो शर्म अपने आप बाहर आ जाएगी.. तुम छूकर तो देखो.. तुम्हें भी पता चल जाएगा।

इतना कह कर मीरा ने राधे का कपड़ा हटा दिया और उसका आधा खड़ा लौड़ा ममता के सामने आ गया।

राधे- अरे मीरा, ये क्या है?
मीरा- अब तुम ज़्यादा भोले मत बनो मेरे सामने तो बड़ी डींगें हांकते हो.. अब ममता से क्यों शर्मा रहे हो.. कर दो बेचारी की गोद हरी-भरी।

ममता तो बस टकटकी लगाए राधे के लौड़े को निहार रही थी, तभी मीरा ने ममता का हाथ पकड़ कर लौड़े पर रख दिया।

मीरा- मेरे सामने तुम शर्मा रही हो.. लो मैं पापा के कमरे में जा रही हूँ.. थोड़ा मज़ा तुम दोनों भी कर लो।

मीरा के जाने के बाद ममता धीरे-धीरे लौड़े को सहलाने लगी.. अब भी उसमें थोड़ी झिझक थी.. मगर ऐसा तगड़ा लौड़ा देख कर उसकी जीभ लपलपा रही थी।

राधे- ममता ऐसे शरमाओगी तो कैसे चलेगा.. ठीक से मज़ा लो ना..
ममता- साहेब जी, आप बहुत अच्छे हो आपका लौड़ा बहुत तगड़ा है.. हमारी मीरा के तो भाग खुल गए.. जो आपसे उसकी शादी हुई.. बस सारी जिंदगी उसको खुश रखना।

राधे- हाँ ममता.. जरूर खुश रखूँगा.. चलो अब बातें बन्द करो.. तुम्हारे मुलायम होंठों से मेरे लौड़े को सुकून दो।

ममता ने बड़ी ख़ुशी से लौड़े को चूमना शुरू किया और सुपाड़े को जीभ से चाटने लगी।

राधे को मज़ा आने लगा.. ममता का स्टाइल थोड़ा अलग था.. मीरा तो नई खिलाड़ी थी.. मगर ममता एक्सपर्ट की तरह लौड़े को चूसने लगी।

राधे का लौड़ा अपने पूरे आकार में आ गया। अब राधे ममता के सर को पकड़ कर झटके मारने लगा।
ममता ने अपने होंठ भींच लिए.. राधे को कुँवारी चूत के जैसा मज़ा आने लगा।
दस मिनट तक राधे ममता के मुँह को चोदता रहा।

राधे- बस ममता अब क्या मुँह से पानी निकालोगी.. अपनी चूत के दीदार भी करा दो..
ममता ने लौड़ा मुँह से निकाला और कहा- नहीं साहेब जी.. अपना जिस्म तो आपको कल ही दिखाऊँगी.. आज तो बस आपके लौड़े से निकला पानी ही पी लूँगी।

राधे ने हंस कर उसको कहा- जैसी तुम्हारी मर्ज़ी.. लो चूसो लौड़े को.. आज पानी पीलो.. कल चूत में डलवा लेना..

ममता ने दोबारा लौड़े को मुँह में भर लिया और मस्ती से चूसने लगी। अब वो कभी राधे की गोटियाँ चूस रही थी.. तो कभी सुपाड़े को लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी। ऐसी ज़बरदस्त चुसाई के आगे लौड़े की क्या मजाल.. जो पानी ना फेंके।
राधे ने ममता के सर को पकड़ लिया और स्पीड से चोदने लगा.. दो मिनट में उसके लौड़े ने वीर्य की धार ममता के गले में मारनी शुरू कर दी।
ममता ने जीभ से चाट-चाट कर पूरा लौड़ा साफ कर दिया.. आख़िरी बूँद तक लौड़े से निचोड़ कर वो पी गई..

राधे- आह्ह.. ममता.. मज़ा आ गया.. तूने तो मुँह से कुँवारी चूत का मज़ा दे दिया.. तुम बहुत सेक्सी हो यार..
ममता- साहेब जी.. कल देखना मेरी चूत भी कुँवारी ही है.. मेरा पति तो निकम्मा नामर्द है.. आपके जैसा असली मर्द कभी मिला ही नहीं.. कल आपको ऐसा मज़ा दूँगी कि आप याद रखोगे मुझे.. अब मैं चलती हूँ..
राधे- अरे ममता तुम कब से लौड़े को चूस रही हो.. तुम्हारी चूत भी तो गीली हो गई होगी.. ऐसे तड़पती ही घर जाओगी क्या..?
ममता- हाँ साहेब जी.. चूत में बड़ी आग लगी है.. आपके लौड़े को देख कर ही ये फड़फड़ाने लगी थी.. मगर आज नहीं.. इसे और तड़पने दो.. अब तो मैं कल ही इसको शांत करवाऊँगी..

राधे इसके आगे कुछ ना बोल सका और ममता ने राधे का शुक्रिया अदा किया और वहाँ से निकल गई।

दोस्तो, उम्मीद है कि आप को मेरी कहानी पसंद आ रही होगी.. मैं कहानी के अगले भाग में आपका इन्तजार करूँगी.. पढ़ना न भूलिएगा.. और हाँ आपके पत्रों का भी बेसब्री से इन्तजार है।
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