विज्ञान से चूत चुदाई ज्ञान तक-17

(Vigyan se Choot Chudai Gyan Tak-17)

This story is part of a series:

दीपाली पर मस्ती करने का भूत सवार हो गया था।

अनुजा इसके आगे कुछ ना बोली.. बस उसको गुस्से से आँख दिखाई और कपड़े पहनने को बोल कर नाश्ता लाने चली गई।

नाश्ते के दौरान भी हल्की-फुल्की बातें हुईं..
उसके बाद विकास निकल गया।

अनुजा और दीपाली भी साथ में निकले।

दीपाली के घर के बाहर गमले से चाबी ली.. जल्दी से उसने ड्रेस पहना और स्कूल के लिए निकल गई।
चाबी वापस वहीं रख दी।

इस दौरान अनुजा ने घर की तारीफ की और दीपाली से कहा- स्कूल से वापस उसके पास आ जाए.. उसके मॉम-डैड तो शाम तक आएँगे।

दीपाली ने अनुजा को किस किया और बाय बोलकर चली गई।

स्कूल के गेट पर वही तीनों खड़े उसको आते हुए देख रहे थे।

आज दीपाली के चेहरे में अजीब सी कशिश थी और वो बड़ी चहकती हुई स्कूल में दाखिल हुई।

दीपक- उफ्फ साली क्या आईटम है.. यार जब भी सामने से गुजरती है..

साला लौड़ा इसको सलामी दिए बिना रह नहीं पाता है।

सोनू- यार कब मिलेगी ये साली.. मन तो करता है साली को जबरदस्ती चोद दूँ।

मैडी- अबे साले.. हवसी जबर चोदन की सोचिओ भी मत.. साला आजकल सज़ा बहुत खतरनाक है.. बहन के लौड़े सीधे फाँसी की माँग करते हैं।

सोनू- तो क्या करें यार.. ये साली खुद तो आकर बोलेगी नहीं कि आओ मेरी चूत मार लो।

दीपक- यार साली के नखरे भी बहुत हैं ठीक से देखती भी नहीं है और ना किसी से बात करती है।

मैडी- अरे नखरे तो होंगे ही.. स्कूल में सब से ज़्यादा खूबसूरत माल है और साली को भगवान ने फिगर भी ऐसा दिया कि देखने वाला ‘आह’ भरे बिना रह नहीं सकता!

दीपक- यार कुछ दिन बाद इम्तिहान शुरू हो जाएँगे.. उसके बाद स्कूल से छुट्टी.. साली 12वीं में है.. अगर पास हो गई तो सीधे कॉलेज जाएगी.. पता नहीं कौन से कॉलेज में जाए.. इस बार हमारी तो पास होने की उम्मीद भी नहीं है।

सोनू- हाँ यारों.. किसी भी तरह इम्तिहान के पहले या इम्तिहान के दौरान ही इस साली को पटाओ वरना जिंदगी भर अफ़सोस ही करते रहेंगे।

हाय.. दोस्तो, क्यों मज़ा आ रहा है ना कहानी में.. अरे नहीं मैं आपको बोर करने नहीं आई हूँ.. इन तीनों के बारे में बताने आई हूँ।

क्योंकि अब इनके बारे में बताने का वक़्त आ गया है।

इन तीनों की उम्र लगभग 22 के आस-पास होगी.. कोई एक आध महीने का फ़र्क होगा।
तीनों दिखने में भी बस ठीक-ठाक से ही हैं इसी लिए कोई लड़की इनको भाव नहीं देती और हाँ तीनों पढ़ाई में भी कमजोर हैं..
बस आवरगर्दी करते हैं कई बार फेल होकर अब 12वीं तक आ पाए हैं।

इनका रुझान शुरू से दीपाली पर ही रहा है क्योंकि वो एक सीधी-सादी लड़की थी और बला की खूबसूरत भी थी इसलिए लट्टू होकर ये उसके पीछे पड़े हैं।

इनकी बातों से आपको लग रहा होगा कितने बड़े चोदू होंगे मगर ऐसा कुछ नहीं है.. कोई 3 साल पहले इन्होंने अपने से जूनियर एक लड़के बबलू को फंसाया था वो कोई कम उम्र का चिकना सा लौंडा दिखने में गोरा-चिट्टा था.. बस इन तीनों ने उसको बहला-फुसला लिया और उसकी गाण्ड मार ली.. मगर इनको ज़्यादा दिन तक वो गाण्ड भी नहीं मिली।

बबलू के पापा सरकारी नौकरी में थे, यहाँ से तबादला हो गया तो दूसरी जगह चले गए और बबलू भी उनके साथ चला गया।

इन तीनों ने कोई 2 या 3 बार उसकी गाण्ड मारी होगी।

उस दिन से लेकर आज तक चूत तो बहुत दूर की बात है किसी लड़के की गाण्ड भी नसीब नहीं हुई.. बस हाथ से काम चला रहे हैं।

आप लोग सही सोच रहे हैं अब मेरी कहानी में इनका जिक्र हुआ तो इनको भी चूत के दर्शन जरूर होंगे..

मगर कब और कैसे होंगे वो आगे की कहानी में आपको पता चलेगा..
तो बस पढ़ते रहिए और मज़ा लेते रहिए। चलिए बातें बहुत हो गई.. अब वापस कहानी पर आती हूँ।

वो तीनों काफ़ी देर तक दीपाली के बारे में बात करते रहे.. क्लास में भी बस उसी को घूरते रहे।

आज प्रिंसिपल सब को इम्तिहान के प्रवेश-पत्र के बारे में बता रही थीं कि जाते समय लेते जाना..

सब कुछ सामान्य चल रहा था, जब विकास उस क्लास में आया तो दीपाली के होंठों पर मुस्कान आ गई।

रात की सारी बातें उसे याद आने लगीं.. उसने झट से नज़रें नीची कर लीं उसको उस वक्त बड़ी शर्म आई।

दोस्तो, दोपहर तक कुछ भी ऐसा नहीं हुआ जो आपको बताने लायक हो।

स्कूल की छुट्टी हुई तो विकास ने दीपाली को बोल दिया- तुम अनुजा के पास घर चली जाओ.. मुझे आने में देर होगी.. सबको प्रवेश-पत्र जो देने हैं।

दीपाली गेट से जब बाहर निकली तो वो तीनों उसके पीछे हो लिए और बस चुपचाप चलने लगे।

जब एक सुनसान गली आई तब दीपक ने हिम्मत करके अपने कदम तेज किए और दीपाली के बिल्कुल बराबर चलने लगा और उसकी तरफ देख कर मुस्कुराने लगा।

दीपाली कुछ नहीं बोली और बस चलती रही।

दीपक- दीपाली आख़िर बात क्या है.. हम एक क्लास में हैं. तुम मुझसे कभी बात भी नहीं करती हो?

दीपाली- क्या बात करूँ.. मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी.. मैं जानती हूँ तुम तीनों पीठ पीछे से किस तरह लड़कियों की बुराई करते हो.. जाओ यहाँ से।

दीपक- अरे नहीं नहीं.. तुम गलत समझ रही हो.. हम बुराई नहीं तारीफ करते है.. बस।

तभी वो दोनों भी उसके बराबर आ गए और उसकी हाँ में हाँ मिलने लगे।

सोनू- हाँ दीपाली.. स्कूल की सब लड़कियां एक तरफ और तुम एक तरफ क्योंकि तुम बहुत भोली हो जिसने भी तुम्हें हमारे बारे में बताया है.. तुम खुद जरा सोच कर देखो वो सही लड़की नहीं है.. तुम समझ रही हो ना मेरी बात को…

दरअसल सोनू ऋतु की बात कर रहा था जो दीपाली के करीब थी। उसका ब्वॉय-फ्रेण्ड अजय था.. दोनों काफ़ी मज़ा करते हैं. स्कूल में सब को ये पता है.. बस सोनू का इशारा उसी तरफ था।

दीपाली- देखो कौन कैसा है.. मुझे कोई लेना-देना नहीं.. बस तुम लोग मेरा पीछा करना बन्द करो।

मैडी- अबे सालों क्यों बेचारी को परेशान कर रहे हो.. इसका मन नहीं है बात करने का.. तो ना सही.. चलो इसको जाने दो…

दीपाली ने एक नज़र मैडी को देखा जैसे उसका शुक्रिया अदा कर रही हो।

मैडी- दीपाली मैं इनको ले जाता हूँ.. बस एक बात सुन लो सोमवार को मेरा जन्मदिन है.. अगर हो सके तो प्लीज़ आ जाना.. ओके बाय.. चलता हूँ।

जाते हुए मैडी बस दीपाली की आँखों में ही देख रहा था।

दीपाली के होंठों पर बेहद हल्की सी मुस्कान आई थी, जिसे वो मैडी से छुपा ना सकी।

मैडी भी बिना उसका जवाब सुने उन दोनों को लेकर दूसरी गली में मुड़ गया।

सोनू- अबे ले क्यों आया.. साली को अभी सीधा कर देता.. बहुत भाव खा रही थी।

मैडी- साले सब्र कर.. हमेशा जल्दी में रहता है।

दीपक- और यह जन्मदिन का क्या चक्कर है यार…?

मैडी- साले भूल गया क्या सोमवार को है ना..

दीपक- अरे याद है.. मगर उसको क्यों बोला.. वो कौन सा आ ही जाएगी और मान ले आ भी गई तो क्या होगा?

सोनू- अरे यार.. कल का बता दिया होता.. साली की चूत किसी सुनसान जगह ले जाकर चोद देते।

मैडी- अबे बहन के लौड़े.. कभी तो दिमाग़ का इस्तेमाल किया कर.. कल का रख लेते और वो सुनसान जगह क्यों आती हमारे साथ? हरामी उसको मेरा घर पता है.. वो अगर आती भी है तो वहीं आती। अब सुन सोमवार को वो पक्का आएगी और उसके साथ कोई बदतमीज़ी मत करना.. मेरे दिमाग़ में एक प्लान है.. बस समझो कम बन जाएगा।

दीपक- क्या है.. बता ना यार?

मैडी- अभी नहीं.. सोमवार को.. जब वो आएगी.. तब बताऊँगा। अब चलो यहाँ से.. यहाँ झांट भी नहीं उखड़ पाएगी।

दीपाली सीधी अनुजा के घर चली जाती है।

उसका दरवाजा उस वक्त खुला हुआ था।

अनुजा कमरे में बैठी टीवी देख रही थी।

दीपाली- हाय दीदी.. क्या कर रही हो?

अनुजा- अरे तू आ गई.. विकास कहाँ है?

दीपाली- उनको थोड़ा काम है.. बाद में आएँगे।

अनुजा- इधर आ देख.. न्यूज़ में क्या दिखा रहे हैं.. कल 5 लड़कों ने जन्मदिन पार्टी में एक लड़की को नशे की दवा देकर उसका देह शोषण किया.. कुत्तों को पुलिस ने पकड़ लिया है.. बेचारी वो लड़की अब तक सदमे में है।

दीपाली- कितने गंदे लड़के होंगे.. जबरदस्ती की क्या जरूरत थी.. प्यार से कर लेते।

अनुजा- लड़की कुँवारी थी.. मर्ज़ी से नहीं मानी.. तभी तो ऐसा हुआ उसके साथ.. आजकल किसी का भरोसा नहीं करना चाहिए।

दीपाली- दीदी एक साथ 5 चोदेंगे.. तो कितना दर्द हुआ होगा ना बेचारी को?

अनुजा- हाँ दर्द तो हुआ ही होगा वैसे एक बात है.. अगर लड़की पहले से चुदी हुई हो और अपनी मर्ज़ी से चुदवाए तब ज़्यादा के साथ चुदने में मज़ा आता है।

दीपाली- सच में दीदी… लेकिन 5 कुछ ज़्यादा नहीं हो जाते हैं…

अनुजा- हाँ 5 ज़्यादा है.. बेस्ट 3 होने चाहिए.. एक लौड़ा मुँह में.. दूसरा चूत और आखिरी गाण्ड में.. बस.. फिर देखो क्या मज़ा मिलता है।

दीपाली- ऊह.. माँ.. अब समझ में आया.. वो तीनों मेरे पीछे क्यों पड़े हैं।

अनुजा- कौन तीनों.. बता तो?

बस दोस्तो, आज के लिए इतना काफ़ी है। अब आप जल्दी से मेल करके बताओ कि मज़ा आ रहा है या नहीं.! क्या आप जानना नहीं चाहते कि आगे क्या हुआ?
तो पढ़ते रहिए और आनन्द लेते रहिए..
मुझे आप अपने विचार यहाँ मेल करें।
[email protected]

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