पड़ोस की जवान सेक्सी लड़की की प्यास बुझाई

(Pados Ki Jawan Sexy Ladki Ki Pyas Bujhayi)

नमस्कार दोस्तो, मैं अनूप ठाकुर एक बार फिर हाज़िर हूँ आप लोगो के सामने अपनी एक और नई सच्ची घटना ले कर। मेरी पिछली कहानी
लोहड़ी की रात मेरी पहली सुहागरात
को आप पाठकों ने बहुत सराहा, उसके लिए आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद।
आज मैं आपको उसके आगे की घटना बताने जा रहा हूँ जो मेरे और ऋदम के बीच सेक्स की सच्ची घटना है। आशा करता हूँ आपको बहुत पसंद आएगी।

जैसा मैंने आपको अपनी पिछली कहानी में बताया कि ऋदम ने मुझे और नैना को टैम्पो ट्रैक्स में स्मूच करते हुए देख लिया था और नैना के घर पर हमारी चुदाई की आवाज़ें भी सुन ली थी।
हुआ यूँ कि उस रात जब मैं नैना के घर के पिछले दरवाज़े से भाग कर अपने घर आ गया तो ऋदम ने नैना से कहा- डांस शुरू हो गया है, आ जा और तेरे मम्मी पापा भी तुझे बुला रहे हैं।

ये सब नैना ने मुझे रात को फ़ोन कर के बताया। लेकिन मैंने महसूस किया कि जब रात को नैना मुझसे फ़ोन पर बार कर रही थी तो उसकी आवाज़ में डर था।
मैंने उससे पूछा- क्या बात है?
तो उसने कहा- ऋदम ने मुझे और आपको टैम्पो ट्रैक्स में स्मूच करते हुए देख लिया था और हमारे घर पर हमारी चुदाई की आवाज़ें भी सुन ली थी। और अब मैं बहुत डरी हुई हूँ कि कहीं वो सब कुछ मेरे घर वालों को ना बता दे।

मैंने नैना को आश्वासन दिया कि ऐसा नहीं होगा और मैं ऋदम से बात करूंगा।
थोड़ी देर तक मेरे समझाने पर नैना समझ गई और सो गई।

ऋदम करीब बाईस साल की जवान सेक्सी लड़की है जो हमारे पड़ोस में ही रहती है और हमारे परिवारों के बीच खूब आना जाना है.

क्यूंकि मेरी ऋदम से बहुत अच्छी बनती थी तो अगले दिन मैं ऋदम के घर गया और उसको कहा- मुझे तुमसे कुछ बात करनी है!
तो उसने कहा- अभी नहीं, अभी मैं सामान पैक कर रही हूँ, एक घंटे बाद आना।
मैंने पूछा- किसका सामान?
तो उसने बताया- मेरे मम्मी पापा गांव जा रहे हैं, वहाँ किसी की मृत्यु हुई है।

फिर मैं घर वापिस आ गया और शाम को फिर से उसके घर गया।
उसने कहा- हाँ अब बोल, क्या बात करनी है?
मैंने कहा- कल तूने क्या देखा?
वो बोली- क्या देखा क्या मतलब?
मैंने कहा- मेरा मतलब है कि कल तूने मेरे और नैना के बीच क्या हुआ वो सब देख लिया क्या?
तो उसने कहा- नहीं, मैंने तो सिर्फ स्मूच करते हुए देखा, बाकी तो मैंने सिर्फ आवाज़ें सुनी नैना की।

मैंने कहा- देख, यह बात किसी को भी पता नहीं लगनी चाहिए।
तो उसने कहा- मैं क्यों कहूँगी किसी से? मेरे को क्या… तुम दोनों जो मर्ज़ी करो। लेकिन एक बात पूछूं?
मैंने कहा- हाँ पूछ… एक क्या दस पूछ! बस ये बात किसी को बताना मत मेरी और नैना की।

उसने कहा- तेरे को बस वही मिली ये सब करने के लिए?
मैंने कहा- तेरा मतलब क्या है वो ही मिली?
वो बोली- उससे अच्छी मिल जाती तुझे तो!
मैंने मज़ाक में कह दिया- क्या करें अब… तू तो मेरी तरफ देखती तक नहीं तो क्या करूं मैं?
उसने कहा- मैं अपनी नहीं और किसी लड़की की बात कर रही हूँ कि तुझे उससे तो अच्छी मिल ही जाती कोई भी।

मैंने कहा- अच्छा… पर मुझे तो तू ही चाहिए थी, पर तू ध्यान ही नहीं देती मुझपे।
उसने कहा- क्यों? मुझमें ऐसा क्या है जो तू मुझे ही चाहता है?
मैंने कहा- क्या नहीं है, सब कुछ तो है तुझमें।
फिर उसने कहा- क्या है बता?

इससे पहले मैं अपनी बात आगे बढ़ा पाता, तब तक उसके दोनों भाई कॉलेज से आ गए।
उन्होंने पूछा- मम्मी पापा कहाँ हैं?
तो उसने बताया कि वो गांव में किसी दूर के रिश्तेदार की मौत हुई है, वो वहां चले गए हैं।

फिर मैं अपने घर आ गया। घर आकर मैंने बहुत सोचा कि क्यों ना ऋदम के साथ भी बात आगे बढ़ाई जाए।
अगले दिन शनिवार था, स्कूल से जल्दी छुट्टी हो गई और मैं रोज़ की तरह स्कूल से सीधे घर आया, खाना खाकर सोचा कि ऋदम के पास जाया जाए।

तो मैं ऋदम के घर चला गया। मुझे पता था इस समय उसके घर पर उसके अलावा कोई नहीं होगा क्यूंकि उसके मम्मी पापा तो गाँव गए थे और दोनों भाई कॉलेज गए होंगे।
उसका कॉलेज पूरा हो चुका था इसलिए वो घर पे ही रहती थी। वो मुझसे 4 साल बड़ी थी लेकिन हम बिल्कुल दोस्तों की तरह रहते थे।

उसका फिगर… उफ़… एकदम भरा पूरा… क्या कहने 36-30-38 का कटाव लिए हुए था।

मैं सीधे उसके घर चला गया। जैसे ही मैंने दरवाज़ा खोला तो वो खुला नहीं। मैंने उसको आवाज़ दी, तो उसके बाथरूम से आवाज़ आई- कौन है।
मैंने कहा- मैं हूँ!
तो वो बोली- अच्छा तू है… मैं नहा रही हूँ, अभी तो मैंने मेन डोर पर कुण्डी लगाई है, तू पिछले दरवाज़े से आ जा और मेरा वेट कर… मैं आई अभी दो मिनट में।

मैं पिछले दरवाज़े से अंदर घुस गया।

दस मिनट बाद वो भी आ गई नहा कर… वो तो एकदम क़यामत लग रही थी गीले बालों में और तंग सूट में। आज उसने नया सूट डाला था जो काफी तंग था और उसका गला उसके चूचों तक था। मैंने उसको छेड़ने के लिए और अपनी बात शुरू करने के लिए कहा- मेन डोर पे कुण्डी और पिछले दरवाज़ा खुला क्यों? किसी को बुलाया है क्या?
और मैं हंस दिया।

इस पर वो बोली- चुप कर… बेवकूफ कहीं का! वो तो इसलिए कि कभी कभी भाई जल्दी आ जाते हैं तो उनको पता है अगर आगे कि कुण्डी लगी है तो पीछे से खुला होगा।
मैंने कहा- अच्छा, मुझे लगा कि मैंने आकर रंग में भंग डाल दी।
वो कुछ नहीं बोली बस हंस दी।

मैंने बात आगे बढ़ाई और कहा- आज तो तू बड़ी सेक्सी लग रही है।
वो बोली- अच्छा, कैसे? आज ऐसा क्या है जो आज मैं ज्यादा अच्छी लग रही हूँ?
मैंने कहा- नहीं नहीं अच्छी तो तू रोज़ ही लगती है, लेकिन आज तू ज्यादा सेक्सी लग रही है।
वो बोली- तो वो कैसे? ये भी तो बता?

मैंने उसके चूचों की तरफ इशारा किया- आज नया सूट डाला है वो भी इतने लो कट गले वाला!
बोली- हाँ, पड़ा था अंदर तो मैंने सोचा आज पहन लूँ।
मैंने कहा- सच में बहुत मस्त लग रही है तू आज!
बोली- अच्छा जी… नैना से भी अच्छी?
मैंने कहा- तेरे सामने तो सारा चंडीगढ़ फीका है।

वो मेरी बात पर हंस पड़ी और बोली- इतना भी मत चढ़ा मुझे चने के झाड़ पे।
मैंने कहा- सच में ऋदम आज तू ज़बराट लग रही है।
फिर वो आँखें नीचे कर के शर्माने और हंसने लगी।

मेरे दिल ने कहा ‘हंसी तो फंसी’ मैंने मौका देख कर उसका हाथ पकड़ लिया।
उसके मुंह से सिसकारी निकल गई लेकिन उसने ना हाथ छुड़ाया ना कुछ कहा।

मैंने उसका चेहरा ठोड़ी से पकड़ कर ऊपर किया तो उसने आँखें बंद कर ली। मैंने ग्रीन सिग्नल समझ कर उसके होंठों पे अपने होंठ रख दिए और उसके होंठो का रस पीने लगा।
मैंने उसको 2 मिनट तक स्मूच किया। जैसे ही मैंने अपने होंठ उसके होंठो से हटाए उसने मुझे कस के गले लगा लिया और तेज़ तेज़ ज़ोर ज़ोर से सांसें लेने लगी।

मैं समझ गया कि मौका अच्छा है लड़की गरम हुई पड़ी है। मैंने फटाफट उसको अपने साथ बेड पर लिटा लिया और फिर से स्मूच करने लगा। इस बार उसने भी मेरा साथ दिया और हमने 5 मिनट तक स्मूच किया। कभी मैं उसका ऊपर का होंठ चूसता तो कभी वो मेरा नीचे का होंठ चूसती। फिर कभी मैं उसके मुंह में अपनी जीभ डालता तो कभी वो मेरे मुंह में अपनी जीभ डालती। इस तरह पांच मिनट तक स्मूच करने के बाद हम अलग हुए लेकिन वो अभी भी शर्मा रही थी।

मैंने उसको पूरी तरह से बेड पर लिटा दिया और खुद बैठ गया। फिर मैंने नीचे झुक के पहले उसके माथे पर, फिर आँखों पर, फिर गालों पर, फिर होंठों पर, फिर ठोड़ी पर किस किया। धीरे धीरे फिर मैं नीचे बढ़ा और उसके गले पर किस किया। फिर मैं थोड़ा और नीचे गया और उसके शर्ट के ऊपर से ही उसके चूचों को किस करने लगा। उसने मेरा सर ज़ोर से अपने चूचों पर दबा दिया।

मैंने उसका शर्ट ऊपर किया और उसके पेट पर और उसकी नाभि पर किस किया, वो पागल सी हो गई और उम्म्म… आअह्ह… उम्म्म्म… जैसी आवाज़ें निकालने लग गई।
मैंने उसको कहा- ज़रा ऊपर को तो हो, तेरा शर्ट उतारना है।
तो उसने शर्ट और समीज निकालने में मेरी मदद करी और फिर से बेड पर लेट गई।

फिर मैंने उसके चूचों को उसकी ब्रा के ऊपर से ही दबाया और दांतों से थोड़ा थोड़ा काटा भी जिसकी वजह से उसके मुंह से उम्म्म… उफ्फ… आअह्ह्ह्… ससीईई… जैसी आवाज़ें निकलनी शुरू हो गई। फिर मैंने उसकी ब्रा खोली और उसके एक चूचे को हाथ में लेकर दबाया और दूसरे को अपने मुंह में ले लिया।
थोड़ी देर तक चूसने और दबाने क बाद मैंने पहले वाले को चूसना और दूसरे वाले को दबाना शुरू किया। दस मिनट तक चूसने और दबाने के बाद मैंने उसके दोनों चूचों को हाथ में पकड़ा और उनको एक साथ जोड़ कर उन पर जीभ फेरने लगा।

उसके मुंह से आआह्ह… उफ्फ… ससीईईई… आआह्ह… उउम्म… ऊऊओह्ह्ह… जैसी आवाज़ें आनी शुरू हो गई और उसने मेरे सर के बालों को पकड़ कर अपने चूचों पर दबा दिया। मैंने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर उसकी सलवार के नाड़े को खोल दिया जिस पर उसके मुंह से थोड़ी ज़ोर से आअह्ह की आवाज़ निकली।

मैंने उसकी सलवार और उसकी पैंटी एक साथ उतार दिए। उसकी पैंटी काफी गीली हो चुकी थी।
उसके बाद मैंने उसको देखा तो उसने अपनी आँखें बंद कर के अपना चेहरा अपने हाथों से छुपा लिया।

मैंने फिर अपने कपड़े उतारे और बिल्कुल नंगा होकर उसके सामने बैठ गया। मैं उसके पैरों के बीच आ गया और उसकी टांगें खोल दी। फिर मैंने जैसे ही अपनी जीभ उसकी चूत पर लगाई, वो पागल हो गई और उसने मेरा मुंह अपने पैरों से दबा के अपनी चूत पर दबा दिया। उसके मुंह से ओह्ह्ह …माँअअअ अअ… मम्मम… आअह्ह… जैसी आवाज़ें निकलने लग गई और उसके हाथ फिर से मेरे बालों पर आ गए और मेरा मुंह अपनी चूत पर दबाने लगे।

मैंने अपनी जीभ उसकी चूत के अंदर डाल कर उसकी चूत को अपनी जीभ से चोदना शुरू कर दिया। फिर मैं उसके ऊपर आ गया और अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लग गया।
वो ममम… आअह्ह्ह… उफ्फ… करने लग गई और बोलने लगी- अन्नू प्लीज डाल दे अंदर… कर दे कुछ… नहीं तो मैं मर जाऊँगी प्लीज।
मैंने उसको 2 मिनट तक ऐसे ही तड़पाया और अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ता रहा।

फिर उसने जैसी ही कहा- डाल दे ना मेरे जानू!
वैसे ही मैंने एक ज़ोरदार झटका मारा और लंड उसकी फुदी को चीरता हुआ अंदर जड़ तक चला गया। इससे पहले कि उसके मुंह से चीख निकलती, मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख कर उसकी आवाज़ दबा दी।
कुछ देर तक वो सुन्न सी पड़ी रही और मैं धीरे धीरे धक्के लगाता रहा। तीन चार मिनट बाद वो भी नीचे से अपनी गांड उठाकर मेरे धक्कों का जवाब देने लगी. मैंने उसके होंठों से अपने होंठ हटाए और अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी।

फिर वो भी मेरी स्पीड के साथ अपनी स्पीड मिलाने लग गई और हमने धुआंधार चुदाई चालू कर दी।
वो कह रही थी- और चोद… और ज़ोर से… और ज़ोर से जानू आअह्ह्ह… और अंदर जान और ना प्लीज जानू आअह्ह… उम्मम्म… आअह्ह… जाननन… उफ्फ… और कर ना जानू… और ज़ोर से प्लीज और अंदर जानू और…

उसके बाद मैंने उसको अपने ऊपर बिठाया और उसको उछलने को कहा. जैसे जैसे वो मेरे लंड पर उछल रही थी, उसके चूचे भी ऊपर नीचे उछल रहे थे जो बड़े अच्छे लग रहे थे क्यूंकि उसके चूचे नैना से बड़े थे और प्यारे भी।
फिर मैंने उसके चूचे चूस लिए और वो और ज्यादा ज़ोर से आवाज़ें निकाल के उछलने लगी।

दस मिनट की धकापेल चुदाई के बाद मैं और वो एक साथ झड़ गए, मैंने अपना सारा माल उसकी चूत के ऊपर निकाल दिया।
मैं उसकी बगल में लेट गया और वो मेरे सर क बालों पे हाथ फेरते हुए बोली- अब मुझे पता लगा कि उस दिन नैना की आवाज़ें क्यों बाहर तक सुनाई दी।
और हम दोनों हंसने लगे।

मैंने कहा- और अगर तुम्हारी सुनी होगी किसी ने फिर?
तो वो बोली- कोई नहीं सुनेगा क्यूंकि पड़ोस में सब ड्यूटी गए हैं।
और फिर वो मेरे ऊपर आकर लेट गई।

फिर हम ऐसे ही सो गए, जब आँख खुली तो देखा ऋदम खाना बना रही थी और मैं वैसा ही नंगा बेड पर पड़ा था।
जैसे ही ऋदम कमरे में आई मैंने कम्बल से अपने आप को ढक लिया जिस पर वो बोली- अभी थोड़ी देर तक तो कोई शर्म नहीं थी मुझसे… अब क्यों ढक दिया? अब कैसे आ गई शर्म इतनी?
मैंने कहा- तब तुम भी तो बिना कपड़ों के थी!
तो वो बोली- अच्छा रुको फिर!

उसके बाद वो किचन में गई और जब तीन मिनट बाद वापिस आई तो वैसी ही बिल्कुल नंगी… और मेरे पास बेड पर बैठ गई और बोली- आई लव यू अन्नू… आज तुमने मुझे बहुत मज़ा दिया जिसको मैं ज़िन्दगी भर नहीं भूलूंगी।

उसके बाद हमने एक दूसरे को खूब छुआ और कुछ देर बाद मैं उसको कपड़े पहना कर अपने कपड़े पहन कर वापिस घर आ गया।

उसके बाद कभी मौका नहीं मिल रहा था ऋदम को चोदने का! लेकिन फिर वो रात आ ही गई जिसकी सुबह मैं और ऋदम चाहते थे कभी न हो… वो थी नए साल की रात 31 दिसंबर की लेकिन वो कहानी फिर कभी।
तब तक के लिए बाय बाय…मुझे मेल कर के ज़रूर बताईयेगा की आपको मेरी और ऋदम की ये चुदाई की सच्ची कहानी कैसी लगी। मुझे आपके मेल का इंतज़ार रहेगा। और हाँ चंडीगढ़ की भाभियों, लड़कियों, और आंटियों को मेरा न्योता है जब मैं करे मेल कर के बात कर लें अगर इच्छा हो तो आपकी भी चुदाई कर दूंगा क्यूंकि मैं किसी महिला या लड़की को जिस्मानी रूप से असंतुस्ट नहीं देख सकता।
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