सहेली की सुहागसेज पर दूल्हे ने मुझे चोदा-2

(Saheli Ki Suhagsej Par Dulhe Ne Mujhe Choda- Part 2)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

अब तक आपने पढ़ा..
साक्षी जिसकी सुहागरात मन ही नहीं पाई थी क्योंकि वो मासिक धर्म से गुजर रही थी.. और उसके पति यानि जीजू मुझे चोदने के चक्कर में थे।
अब आगे..

मैं बोली- सच बोल रहे या मेरे साथ मजाक कर रहे हो?
हालांकि मैं तो सब कुछ जानती थी, फिर भी जीजू को तड़पा रही थी।
जीजू बोले- अगर मेरी बात पर यकीन नहीं हो तो साक्षी से पूछ लो।

फिर मुझे एक शरारत सूझी। मैं उठी और जीजू के पास गई और उनके गाल को उमेठते हुए अफसोस जताते हुए बोली- मेरे प्याले बेचारे जीजू..

मैंने झुक कर उन्हें अपनी चूचियों के दीदार करवा दिए और मैं जाने लगी।
जीजू भी कहाँ पीछे रहने वाले थे, उन्होंने मुझे खींचते हुए अपने गोद में बिठा लिया और बोले- मेरी ड्रीम गर्ल.. अपने आशिक को छोड़ कर कहाँ जा रही हो?
यह बोलकर उन्होंने मुझे कसकर गोद में तेजी से दबा लिया।

मैं कसमसाते हुए बोली- छोड़ो जीजू.. यह क्या कर रहे हो?
हालांकि मुझे भी मजा आ रहा था।
जीजू बोले- यार सोफे पर तुम बैठोगी ही.. इससे बढ़िया है कि मेरी गोद में ही बैठो.. कम से कम किसी का तो भला होगा।
फिर मैं बोली- अच्छा जी किसी का भला करने के चक्कर में कहीं मेरे साथ कुछ बुरा ना हो जाए।

जीजू मेरी जांघों को सहला रहे थे, वो मेरी गर्दन पर गर्म साँस छोड़ते हुए बोले- मेरी रानी.. इस प्यासे को एक बार अपनी इस गर्म जवानी का रस पीने का मौका दे दो।

जीजू अब पूरी तरीके से गर्मा गए थे, मेरी गर्दन पर गर्म-गर्म साँसें छोड़ रहे थे.. जिससे मैं भी मदहोश होने लगी थी।

अब जीजू का का लंड नीचे एकदम टाईट हो चुका था और उनका सख्त हो चुका लंड मेरी गांड में चुभ रहा था। मैं भी अब चुदने के लिए अन्दर से एकदम तैयार हो गई थी लेकिन मैंने अपने आपको संभाला और जीजू से जबरदस्ती अलग हो गई।

जीजू बोले- क्या हुआ मेरी जान.. कितना ज्यादा मजा आ रहा था।
फिर मैं एक्टिंग करते हुए बोली- नहीं जीजू.. ये गलत है.. मैं यह सब नहीं करवा सकती।
जीजू बोले- इसमें गलत क्या है? यार साली तो वैसे भी आधी घरवाली होती है।
मैं बोली- हाँ पर आधी होती है.. पूरी नहीं।

इस पर जीजू बोले- यार जीजू समझ कर ना सही.. ब्वॉयफ्रेंड समझ कर ही चुदवा लो। वैसे भी जब से तुम्हें देखा है.. मैं तुम्हारा दीवाना हो गया हूँ। बस एक बार मुझे चोदने का मौका दो। यह बोल कर वह बहुत ज्यादा गिड़गिड़ाने लगे।

मैं बोली- ठीक है.. लेकिन इससे मेरा क्या फायदा होगा?
जीजू बोले- तुम बोलो.. तुम्हें क्या चाहिए.. गाड़ी, बंगला, रूपए, डायमंड सैट.. बोलो क्या चाहिए?
मैं बोली- यह सब मेरे पास पहले से ही है।
जीजू बोले- फिर क्या चाहिए मेरी रानी..
ये बोलकर उन्होंने मेरे गालों का एक चुम्बन ले लिया।

मैं बोली- चूत के बदले चूत।
जीजू बोले- मैं कुछ समझा नहीं.. खुल कर बताओ और जल्दी बताओ।
मैं बोली- मैं तुमसे एक शर्त पर चूदूंगी। कि साक्षी को भी किसी और से चुदना पड़ेगा।

जीजू ने बिना समय गंवाए ‘हाँ..’ कर दिया और बोले- तुम जिससे चाहो साक्षी को चुदवा लेना.. मैं कभी नहीं रोकूंगा।

मैं तो बस जीजू को टेस्ट कर रही थी। लेकिन जीजू तो मेरे हुस्न के चक्कर में बिल्कुल पागल हो गए थे, वे अपनी बीवी को दूसरों से चुदवाने के लिए भी तैयार हो गए थे।

जीजू बोले- बस अब तुम मेरे से चुदवा लो।
मैं बोली- ठीक है.. लेकिन कहाँ?
तो जीजू बोले- इसी सुहाग-सेज पर रानी।
मैं बोली- यहाँ नहीं.. कोई आ जाएगा।
जीजू बोले- कोई नहीं आएगा रानी.. सब जानते हैं कि ये ‘न्यू-कपल’ का कमरा है।

मैं बोली- साक्षी तो बाथरूम में है.. वह आ गई तो?
जीजू झट से उठे.. उन्होंने बाथरूम की कुण्डी को बाहर से लगा दी और बोले- वह एक घंटे से पहले नहीं आने वाली है। तब तक हम निपट लेंगे।
मैं बोली- ठीक है.. लेकिन जो करना है.. जल्दी करो.. मुझे भी जल्दी घर जाना है।

जीजू अब बिना समय गंवाए मुझे अपनी बाँहों की गिरफ्त में लेकर बेताहाशा मेरे गालों को चूमने लगे.. मेरे होंठों को ऐसे चूस रहे थे.. जैसे कि होंठ ना हों.. कोई लेमनचूस की गोली हों।

फिर जीजू ने बिना समय गंवाए मेरे टॉप और ब्रा को उतार दिया। मेरी बड़ी सी दूधिया चूचियों को देखकर बिल्कुल बेकाबू हो गए। मेरी चूचियों पर अभी भी अंकल के दाँतों के निशान थे.. जो मेरी चूचियों पर चार चाँद लगा रहे थे।

जीजू मेरी एक चूची को दाँतों से काटे जा रहे थे और एक चूची को बुरी तरह से मसले जा रहे थे। मुझे दर्द भी हो रहा था और मजा भी आ रहा था।

फिर मैं कराहते हुए जीजू से बोली- जीजू काटो मत यार.. निशान पड़ जाएगा।
जीजू बोले- साली रण्डी.. पूरी चूची तो पहले से ही कटवा कर आई है, अब मेरे काटने से दिक्कत हो रही है? साली छिनाल.. चुदक्कड़ ना जाने कहाँ-कहाँ से चुदवा कर आई हो और मेरे सामने नखरे कर रही हो।

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