रैगिंग ने रंडी बना दिया-76

(Hindi Non Veg Story: Ragging Ne Randi Bana Diya- Part 76)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

अब तक इस हिंदी नोन वेज स्टोरी में आपने पढ़ा था कि गुलशन जी ने पक्का सोच लिया था कि वो सुमन को जरूर चोदेंगे और अब उनकी आत्मा भी गायब हो गई थी. इससे आपको समझ आ गया होगा कि अब सुमन के रंडी बनने की घड़ी नज़दीक आ रही हैं. उधर गोपाल के साथ मोना ने नीतू को लेकर जो खेल खेला था अब उसी खेल को देखते हैं. आज वहां भी बहुत कुछ मसालेदार होने वाला है.

मोना और नीतू बाजार से वापस घर आ गई थीं और दोनों ने मिलकर दोपहर का खाना भी बना लिया था.

इधर घर पर गोपाल मज़े की नींद सो रहा था मगर ये दोनों अब फ्री हो गई थीं, तो मोना ने सोचा क्यों ना नीतू को कुछ तैयार किया जाए ताकि आज ही कुछ मजेदार हो जाए.

मोना- तुझे पता है नीतू अगर तू जीजू की लुल्ली दबाएगी ना… तो वो बहुत खुश होंगे और तुझे आईसक्रीम लाकर देंगे.
नीतू- सच दीदी, आईसक्रीम तो मुझे बहुत अच्छी लगती है मगर माँ मुझे खाने नहीं देतीं, कहती हैं पैसे नहीं हैं.
मोना- अब तू यहाँ आ गई है ना… तुझे रोज आईसक्रीम मिलेगी और जो तुझे पसंद है, वो सब कुछ मिलेगा. बस तू मन से सब करना और एक बात का ध्यान रखना कि जीजू को हमारी बातें बिल्कुल मत बताना.
नीतू- ठीक है दीदी मैं उनको कुछ भी नहीं बताऊंगी और आप भी मेरी माँ को मत बताना कि आप मुझे रोज आईसक्रीम देती हो.
मोना- पक्का नहीं बोलूँगी. अब मेरी बात सुन… जीजू के पास जाकर धीरे-धीरे उनके पैर दबा और वो मेरे बारे में पूछें तो कहना मैं बाहर किसी काम से गई हुई हूँ.
नीतू- मगर आप तो यहीं हो दीदी… फिर मैं झूठ क्यों बोलूं??
मोना- अरे झूठ कहाँ… मैं सच में बाहर जा रही हूँ और ये देख मेरे पास चाभी है, तो मैं लॉक लगा दूँगी… ठीक है, तू जा जीजू को उठा, फिर खाने के बारे में पूछ लेना.
नीतू- ठीक है दीदी आप जाओ… मैं सब देख लेती हूँ… मैं जीजू को खाना भी दे दूँगी.

मोना उसको दिखाने के लिए बाहर निकाल गई और जैसे ही नीतू कमरे में गई, वो चुपके से वापस अन्दर आ गई.

गोपाल सोया हुआ था और नीतू बिस्तर पर जाकर गोपाल की जाँघों को धीरे-धीरे दबाने लगी और साथ ही आवाज़ भी देने लगी- जीजू उठ जाओ, दोपहर हो गई है… क्या आपको खाना नहीं खाना है?
गोपाल की आँख खुल गई… वो तो पहले ही भरा हुआ था और नीतू के मुलायम हाथ जाँघों पर लगते ही उसका लंड फिर से अकड़ने लगा.

गोपाल- तुझे और कोई काम नहीं है क्या… जो सीधे पैर दबाने लग जाती है?
नीतू- सॉरी जीजू… वो उस टाइम मैं आपके पैर ठीक से नहीं दबा पाई थी. मगर अब दीदी नहीं हैं तो जब तक वो नहीं आतीं, मैं ठीक से आपके पैर दबा दूँगी. फिर मुझे आपको खाना भी खिलाना है.
गोपाल- क्या कहा… मोना बाहर गई है? मगर इस वक़्त वो कहाँ गई है?
नीतू- मुझे नहीं पता… अब आप कुछ न कहो, मुझे आईसक्रीम खानी है तो आप मुझे ठीक से दबाने दो बस!

गोपाल- क्या? कैसी आईसक्रीम… किसने कहा?
नीतू- व्व…वो आपसे लेनी है… दीदी ने कहा था. मुझे कुछ भी चाहिए हो तो आपसे माँग लूँ.
गोपाल- अच्छा ये बात है… तो चल अबकी बार अच्छे से दबा… और जहाँ मैं कहूँ, तुम वहीं दबाना… ठीक है!
नीतू- ठीक है जीजू… आप बताओ कहाँ दबाऊं?

गोपाल ने अपने ऊपर चादर डाल ली और नीतू को कहा कि हाथ अन्दर डालो और जैसे मैं कहूँ वैसे दबाती जा.
नीतू- आपने चादर क्यों डाली… मैं ऐसे ही दबा देती हूँ ना.
गोपाल- नहीं… मैंने कहा ना… ऐसे ही दबाओ.

नीतू मान गई और चादर में हाथ डालकर फिर से जाँघ दबाने लगी.
गोपाल- गुड… ऐसे ही… बस सीधे ऊपर की तरफ़ हाथ लेकर आओ और वहां दबाओ.

नीतू ने धीरे-धीरे हाथ ऊपर की तरफ़ किया और अब उसका हाथ गोपाल के लंड पर था. एक बार तो नीतू घबरा गई क्योंकि लंड बहुत गर्म और सख़्त था मगर पैसे और आईसक्रीम के लालच में वो लंड को दबाने लग गई. थोड़ी देर में उसको लंड को दबाना अच्छा भी लगने लगा था.
गोपाल- बहुत अच्छे आह… ऐसे ही उफ्फ… अब इसे पकड़ कर ऊपर-नीचे भी कर… अह…

गोपाल ने नीतू का हाथ पकड़ा और उसे समझाया कि लंड की मुठ कैसे मारनी है. नीतू भी बिल्कुल गोपाल के बताए अनुसार कर रही थी, अब उसको भी लंड पकड़ना अच्छा लग रहा था और उसमें कुछ उत्सुकता भी थी क्योंकि उसकी बस्ती की लड़कियां उसके सामने बहुत कुछ बातें करती थीं जो उसने मोना को नहीं बताई थीं.

गोपाल- आह… बहुत अच्छे… हाँ ऐसे ही करो… आह… ओह नीतू तुम सच में बहुत अच्छी हो… तुम्हें एक नहीं… दो आईसक्रीम लेकर दूँगा.
नीतू- ओह सच जीजू… फिर तो मज़ा आएगा.
गोपाल- एक मिनट रुक नीतू… अपना हाथ नीचे लेकर जा और वहां भी दबा.

नीतू को कुछ समझ नहीं आया तो वो नीचे दबाने लगी मगर गोपाल ने ये इसलिए किया ताकि वो लंड को बाहर निकाल सके.

अब गोपाल ने पजामा नीचे किया और लंड को बाहर निकाल लिया.

गोपाल- आह… अब वापस ऊपर आ जा और पहले की तरह दबाना… ठीक है.
नीतू- ठीक है जीजू अभी दबाती हूँ.

नीतू ने जैसे ही हाथ ऊपर किया, उसका हाथ सीधे खड़े लंड से टच हुआ और उसने जल्दी से हाथ बाहर खींच लिया.
गोपाल- अरे क्या हुआ नीतू दबाओ ना…!
नीतू- जीजू व…वो आपके वो… नहीं.
गोपाल- अरे क्या वो वो कर रही है… जल्दी कर… फिर तेरे लिए आईसक्रीम भी लानी है.

नीतू एकदम से लंड को टच करने से घबरा गई थी मगर गोपाल पर तो वासना सवार हो गई थी, उसने नीतू का हाथ पकड़ लिया.
गोपाल- अरे क्या हुआ… तूने ही तो कहा था कि मेरी सारी बात मानेगी. अब मना क्यों कर रही है… फिर तेरी दीदी आ जाएगी, तो तू फिर उसके पास भाग जाएगी.

मोना का नाम सुनकर नीतू को याद आया कि उन्होंने कहा था कि जैसे जीजू कहे वैसे ही करना… नहीं वो नाराज़ हो जाएँगे.
नीतू- अच्छा जीजू मैं करती हूँ… मगर आप मुझे गुस्सा नहीं करोगे ना…!
गोपाल- अरे मैं क्यों गुस्सा करूँगा… चल अब जल्दी से कर.

गोपाल ने फिर नीतू का हाथ अन्दर कर लिया और अपने खड़े लंड पर रखवा लिया.

अब नीतू गोपाल के लंड को सहला रही थी. शुरू में तो उसके दिल में घबराहट थी मगर धीरे-धीरे वो अच्छी तरह उसकी मुठ मारने लग गई और गोपाल भी मज़े में आहें भरने लग गया, मगर ये दोनों नहीं जानते थे कि मोना छुपकर ये सब देख रही थी.

मोना मन में सोच रही थी- वाह गोपाल तुम्हारी हिम्मत की दाद देनी होगी. पहले ही दिन अपना लंड नीतू को पकड़ा दिया. ऐसे तो बहुत जल्दी तुम इसकी चुदाई भी कर दोगे, मुझे बहुत चौकन्ना रहना होगा. कहीं तुम इसको चोद कर मेरे किये-कराये पर पानी ना फेर दो.

गोपाल- आह… नीतू बहुत अच्छे… आह… ऐसे ही कर… तू बहुत अच्छी है, हाथ को जोर-जोर से ऊपर-नीचे कर.

नीतू को अब मज़ा आने लगा था, वो भी लंड की मुठ मारने में लगी हुई थी और थोड़ी देर बाद गोपाल के लंड की नसें फूल गईं, वो रोकना चाहता था मगर उससे कंट्रोल नहीं हुआ और उसके लंड से एक के बाद एक पिचकारी निकलने लगीं, जिससे चादर भी खराब हो गई और नीतू का हाथ भी वीर्य से सन गया.

उसने जल्दी से हाथ बाहर निकाला- छी:… जीजू ये क्या है अपने मेरे हाथ पर ये क्या कर दिया.
गोपाल- अरे कुछ नहीं… साफ कर ले और सुन, ये बात अपनी दीदी को मत बताना. मैं तुम्हें 100 रुपये दूँगा और आईसक्रीम भी लाकर दूँगा.
नीतू- ठीक है जीजू… अब आप उठ जाओ, मैं हाथ धोकर आपके लिए खाना लगा देती हूँ.

मोना समझ गई कि अब खेल खत्म हो गया… तो वो बाहर मेन गेट के पास गई और नीतू को आवाज़ लगाने लगी.

मोना- नीतू कहाँ हो तुम… मैं आ गई हूँ… तुम्हारे जीजू अभी तक उठे या नहीं?
गोपाल- अरे ये मोना को भी अभी आना था क्या… नीतू तुम जाओ और कहो मैं सो रहा हूँ… समझी और कुछ मत बताना.

नीतू ने ‘हाँ’ कहा और जल्दी से हाथ साफ करके कमरे के बाहर निकल गई. उस वक़्त मोना उधर ही आ रही थी.
नीतू- हाँ दीदी, मैं जीजू को उठाने गई थी… वो सो रहे हैं.
मोना- अच्छा तू किचन में जाकर खाना गर्म कर… मैं उसे उठा देती हूँ.

मोना कमरे में आई और सीधे बेड पर गोपाल के पास लेट गई. तब तक गोपाल ने लंड को अन्दर कर लिया था और जो चादर पर वीर्य लगा था, उसको छुपा लिया था.

मोना ने चादर हटाई और गोपाल को किस करने लगी, जिससे गोपाल ने झूठ-मूट में उठने का नाटक किया.
गोपाल- उहह सोने दो ना डार्लिंग… क्या है?
मोना- बहुत देर हो गई है गोपाल… कितना सोना है तुम्हें… चलो आज तुम्हें खाने के पहले थोड़ा मज़ा दे देती हूँ.

गोपाल कुछ समझ पाता तब तक मोना ने उसके पजामे को नीचे किया और मुरझाए हुए लंड को मुँह में ले लिया.

गोपाल- ये तुम क्या कर रही हो मोना… रूको तो एक मिनट…!

गोपाल की बात पूरी होती, उसके पहले मोना ने लंड को मुँह से निकाला और गुस्से में गोपाल की तरफ़ देखने लगी.

मोना- ये क्या है गोपाल तुम्हारे लंड पर ये चिपचिपा क्या है… और वीर्य की महक भी आ रही है… जैसे अभी-अभी तुमने पानी निकाला हो… बोलो?
गोपाल- व्व…वो तुम स…सुन ही नहीं रही मेरी बात को. अभी स…सपने मैं तुम्हें चोद रहा था तो पानी निकल गया, इतने में तत… तुम आ गईं… तो मैंने सोचा तुम नाराज़ हो जाओगी… इसलिए मैंने साफ कर दिया और ऐसे ही सो गया. एमेम मगर तुम्हें पता चल गया.

मोना- क्या यार तुमने मूड खराब कर दिया. मैंने सोचा था आज जमकर चुदाई का मजा करूँगी मगर तुम पहले ही सपने देख कर ठंडे हो गए.
गोपाल- अरे जान… नाराज़ क्यों होती हो, अभी खाना खाने के बाद चुदाई करेंगे ना.
मोना- नहीं, अब मेरा मूड नहीं है… चलो फ्रेश हो जाओ… फिर देखेंगे.

लो यहाँ भी खेल खत्म… मगर टेंशन नॉट… मज़ा वैसे ही बना रहेगा. अभी अपनी सुमन रानी की चुत बाकी है ना… तो वहां चलते हैं.

एक घंटे तक दोनों बाप-बेटी अपने-अपने कमरे में रहे. मगर सुमन ने तो ठान लिया था कि जब-जब उसको मौका मिलेगा, वो अपने पापा को सिड्यूस करती रहेगी.

सुमन कमरे से बाहर निकली और पापा को आवाज़ लगाई- पापा, लगता है माँ को आने में टाइम लगेगा. मैं लंच बना रही हूँ आपको क्या खाना है, मुझे बता दो.

मेरे प्यारे साथियो, मेरी हिंदी नोन वेज स्टोरी कैसी लग रही है?
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कहानी जारी है.

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