प्यासी लड़की की चुदाई की कहानी

(Pyasi Ladki Ki Chudai Ki Kahani)

सब पाठकों को मेरा नमस्कार. मैं काफी पहले से अन्तर्वासना का फैन हूँ. मैंने इधर की बहुत सी फ्री सेक्स स्टोरीज पढ़ी हैं.

मेरा नाम सनी है, मैं गुडगाँव में रहता हूँ. मैं स्मार्ट हूँ.. मेरी 5’7” हाइट और स्लिम बॉडी है, लगभग 69 किलो वजन है.. गोरा रंग है. मेरे होंठ बिल्कुल सुर्ख गुलाबी हैं, जिस पर मुझे कई बार अच्छे कमेंट्स भी मिले हैं.
मैं एक निजी कंपनी में काम करता हूँ.

आज मैं अपनी सच्ची कहानी लिखने जा रहा हूँ. इस कहानी में मैंने बस नाम चेंज किए हैं.

यह कहानी तब से शुरू होती है, जब मेरी नौकरी गुडगाँव में लगी थी. मेरा घर गुडगाँव से 20 किलोमीटर दूर है, इसलिए घर वालों ने कहा कि अपनी बुआ जी के यहां रह ले. मेरी बुआ जी गुडगाँव में रहती हैं.

घर वालों की बात मान कर मैंने वहां रहना शुरू कर दिया. मेरी बुआ जी के पड़ोस में एक फ़ैमिली किराये पर रहती थी. इस मकान में मकान मालिक नहीं रहता था और उन्होंने भी पूरा मकान किराये पर ले रखा था. उनकी एक लड़की थी, जो बारहवीं क्लास में थी. उसका नाम शीनू था. शीनू का एक भाई था और उसके पापा भी निजी कंपनी में काम करते थे, जो सुबह जल्दी जाते थे और लेट आते थे. उनकी फ़ैमिली की और बुआ जी क़ी सही बनती थी. एक दूसरे के घर में आना जाना लगा रहता था.

एक दिन वो लड़की बुआ जी के घर आई. जब मैंने उसको देखा तो देखता रह गया. वो सोनल चौहान जो जन्नत मूवी में एक्ट्रेस है, बिल्कुल वैसी लग रही थी. बिल्कुल वही फिगर. कसम से उसी टाइम सबसे पहले में बाथरूम में मुट्ठी मारकर आया. क्या करूँ दोस्तों मुझसे रुका ही नहीं गया.

मैं थोड़ा शर्मीला था तो उसको देखने की मेरी हिम्मत नहीं होती थी. वो थोड़ी खुले मिज़ाज़ की थी, क्योंकि वो शुरू से ही शहर में रहती आई थी. मैं गाँव से आया देसी लौंडा था.

पर इतना खुले मिजाज की होने के बाद भी वो भी मुझसे नहीं बोलती थी. उसकी आवाज़ ऐसी थी कि बस सुनते ही रहो. इतनी मिठास कि पूछो मत.

उसकी हाइट 5’4” थी. पेट का तो नाम ही नहीं था और नीचे वाला हिस्सा कमर से थोड़ा सा बाहर निकला हुआ था, जो उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा रहा था. उसके तने हुए मम्मे भी उसकी खूबसूरती का एक हिस्सा थे. मतलब उसके हुस्न की जितनी भी तारीफ़ करूं, कम है दोस्तों.

जब बुआ जी उनके घर जाती थीं तो कई बार मैं भी उनके घर चला जाता था. लेकिन मैं उसको पटाने के लिए नहीं जाता था क्योंकि मुझे लगता था कि ये कभी मेरी नहीं हो सकती. मेरा व्यवहार सबके साथ बहुत अच्छा था. थोड़ा चुप चुप रहता था.. जो सबको बहुत पसंद था. साथ ही मैं कभी किसी का कोई काम मना नहीं करता था. जब भी मैं उसको अपने सामने देखता था तो मैं चोरी चोरी नज़रों से उसको देखता था और नज़र हटा लेता था.

एक दिन मेरी बुआ के लड़के ने मुझे अकेले में बुलाया और कहा- बता क्या चक्कर है तेरा?

मैं तो सन्न रह गया. मैंने पूछा- क्या हुआ.. कैसा चक्कर?
वो बोला- पागल मत बना.
मैंने बोला- मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि तू कहना क्या चाहते हो.
फिर उसने कहा कि शीनू तुझे ऐसे क्यों देख रही है, जैसे तुझे अभी खा जाएगी.

ये सुनकर मैं दंग रह गया और मैंने उसे ये कहकर टाल दिया कि वो देख रही थी मैं तो नहीं देखता.

अब मुझे वहां पर 6 महीने हो गए थे. एक दिन वो हमारे घर आई और मैंने शीशे के अन्दर से देखा. यार वो सच में मुझे अपलक देख रही थी. लेकिन मैं उसके साथ अभी तक बात नहीं करता था. क्योंकि मुझे लगता था कि मैं गाँव से हूँ.. ये क्या सोचती होगी मेरे बारे में, बस यही डर था.

एक दिन मैंने बियर पी ली, ये पहली बार था, जिससे मुझे नशा हो गया. किसी को नहीं पता था कि मैंने पी रखी है. सही बताऊं तो मुझे चक्कर आ रहे थे इसलिए मैं लेट गया और बुआ जी को तबियत खराब होने का बहाना कर दिया.

उस समय शीनू की माँ कुछ काम से आईं तो बुआ ने बातों बातों में उसको बताया कि सनी की तबियत खराब है.

कुछ देर बाद आंटी अपने घर चली गईं. फिर मैंने देखा कि कुछ ही मिनट बाद शीनू हमारे घर आ गई. मैंने सोचा कि ये इस टाइम किसलिए आई है क्योंकि शाम के 8 बज रहे थे.

मेरी बुआ रसोई में थी तो वो वहीं चली गई. मैं भी रसोई के बाहर खड़ा हो गया तो पता चला कि वो बुआ से मेरे बारे में पूछ रही थी.

अब मुझे लगा कि कहीं न कहीं वो मुझे चाहती है. मैं वापिस अपने कमरे में लेट गया. दो मिनट बाद वो मेरे कमरे में आ गई. उसको देख कर मेरी धड़कनें तेज हो गईं कि ये मेरे पास क्या करने आ गई.

वो मेरी तरफ एक सांस देख रही थी और मैं भी उसको देख रहा था. बड़ा अजीब सा एहसास था दोस्तो. वो मेरे पास आई और मेरे पास रखे बर्तन लेकर चली गई.

अगले दिन में ऑफिस में गया और दोपहर को मेरे फोन पर लैंडलाइन से फ़ोन आया. मैंने फ़ोन उठाया और पूछा- कौन?
वहां से कुछ देर तक कोई आवाज नहीं आई, फिर थोड़ी देर बाद एक लड़की की आवाज आई- हैलो सनी, कैसे हो?
मैंने उसकी आवाज पहचान ली. मैं बोला- शीनू?
उसने हाँ में जवाब दिया और पूछा- आपकी तबियत कैसी है?
मैंने कहा- मैं ठीक हूँ, आप बताओ.
उसने कहा- आप बिल्कुल ठीक हैं ना?
मैंने कहा- हां, मैं बिल्कुल ठीक हूँ.
वो बोली- मुझे तो चिंता हो गई थी.

मैं चुप रहा, उसकी आवाज मुझे मदहोश करने ही लगी थी कि इतने में वो बोली- चलो मैं रखती हूँ, कोई आ गया है बाय.. टेक केयर.
अब मुझे पूरा यकीन हो गया था कि वो मुझे पसंद करने लगी है. लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था. अब बस इंतज़ार था उसका इजहार करने का.

इसके बाद तो वो जैसे ही मौका मिलता, वो हमारे घर आ जाती, मेरी तरफ देखती रहती और मैं भी उसकी तरफ देखता रहता.

एक दिन मेरी बुआ दूसरे पड़ोसी के घर गई थीं. मैं घर में अकेला था तो मौका देख कर वो हमारे घर आ गई. मैं बेड पर लेट कर टीवी देख रहा था. वो मेरे पास आई और बैठ गई.

उसने पूछा- बुआ कहां है आपकी?
जबकि उसको पता था, तो मैंने कहा- यहीं पड़ोस में हैं.

उसने लाल रंग की टी शर्ट और लोअर पहन रखा था. उसका लोअर बिल्कुल स्किन फिट था, जो उसके फिगर को छिपा नहीं पा रहा था.

अब वो एकटक मेरी तरफ देख रही थी. उसकी आँखें ऐसी लग रही थीं, जैसे इसने दारू पी रखी है. शीनू बहुत सेक्सी लग रही थी यार.

फिर उसने धीरे धीरे अपना एक हाथ आगे बढ़ाया और मेरे बालों को सहलाने लगा और धीरे से कहा- अपना ध्यान रखा करो.
अब मेरी धड़कनें तो बिल्कुल तेज़ हो गई थीं. मेरा लंड लोअर में फूल गया था जो साफ़ दिख रहा था. मैं उसको एडजस्ट भी नहीं कर पा रहा था.

फिर उसने कहा- मैं तुमसे प्यार करती हूँ.
और चुप होकर मेरी आँखों में देखने लगी, मेरे जवाब का इंतज़ार करने लगी.

मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसको अपने ऊपर खींच लिया. वो अब मेरी बांहों में थी. जब वो मेरे गले लगी तो इतना मज़ा आया कि पूछो मत. हम दोनों एक दूसरे में खो गए और आंखें बंद करके उस पल का मज़ा लेने लगे.

मैंने उसकी ठोड़ी के नीचे हल्के से हाथ लगाया और उसके चेहरे को अपने होंठों के पास ले आया. जैसे ही मेरे होंठ उसके गाल से टच हुए, पूरी बॉडी गर्म हो गई क्योंकि उसकी स्किन भट्टी की तरह जल रही थी.

उसने अपने आप को मेरे हवाले कर दिया था. फिर मैंने अपने होंठ उसके होंठों से टच किए और फिर धीरे से उसके एक होंठ को अपने होंठों के बीच में भर लिया, जैसे संतरे की फांक दबा लेते हैं. बस उसके बाद दोनों के होंठ चलने लगे. फिर मैंने उसकी जीभ को अपनी जीभ से टच किया, बहुत मज़ा आया.

मेरा एक हाथ कब उसकी चूची पर पहुँच गया, पता ही नहीं चला. हम एक दूसरे में बिल्कुल खो गए थे.
इतने में आवाज आई- सनी.

हम दोनों अलग हो गए.. और वो उठ कर एक तरफ बैठ गई. इतने में बुआ जी अन्दर आ गईं. बुआ कुछ कहने ही वाली थीं कि शीनू बोल पड़ी- कहां थी आंटी आप.. मुझे आपसे कुछ काम था. मैंने एक सूट का कपड़ा लिया है, आप बता दो कैसा है.
बुआ बोलीं- दिखा.. किधर है?

वो पहली बार सूट सिलवा रही थी. वो बोली- आप हमारे घर चलो.
वो दोनों वहां से चली गईं.

अब कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा, जैसे ही हमें थोड़ा सा मौका मिलता, वो होंठों में होंठ डाल देती थी.

एक दिन मेरे हाथ उसकी गांड पर पहुँच गए. वाह क्या मक्खन गांड थी उसकी यार.. टच करते ही मज़ा आ गया. बिल्कुल भरे पूरे चूतड़ थे.

फिर शीनू ने मुझे बताया कि कल मेरे मम्मी पापा कहीं रिश्तेदारी में जाएंगे और भाई कॉलेज में जाएगा, तो मैं घर पर अकेली रहूँगी.. तुम आ जाना प्लीज.
मैंने मना कर दिया और कहा- कोई देख लेगा.
उसने कहा- जब प्यार किया तो डरना क्या? कल जैसे ही सब चले जाएंगे, मैं तुम्हे फ़ोन कर दूंगी.

फिर क्या था सारी रात नींद नहीं आई. बस उसी के बारे में सोचता रहा कि कल कैसे चुदाई करूँगा.

उस रात मैंने दो बार मुट्ठी मारी और सुबह 4 बजे सो गया.

फिर 8 बजे बुआ जी ने मुझे उठाया और पूछा- क्या हुआ आज ऑफिस नहीं जाना क्या?
मैंने कहा- नहीं, आज कहीं और दोस्त के पास जाना है, कुछ ऑफिस का ही काम है.
बुआ मुझसे ज्यादा कुछ नहीं पूछती थीं.

अब मैं तैयार हो गया और उसके फ़ोन का इंतज़ार करने लगा.

दस बजे उसका कॉल आया, वो बोली- भाई वाशरूम में है, वो 15 मिनट में चला जाएगा. तब तक मैंने सोचा कि अपनी जान को बता दूँ मेरे फ़ोन का इंतज़ार कर रहा होगा.

बस एक चुम्मी देकर उसने फ़ोन रख दिया.

फिर 30 मिनट बाद फ़ोन आया और वो बोली- जान आ जाओ, सब चले गए हैं और सुनो ध्यान से आना कोई देख न ले.
मैंने बुआ से कहा- मैं जा रहा हूँ और 2-3 बजे तक आऊंगा.

मैंने अपने गेट से देखा कि गली से कोई आ तो नहीं रहा है, जैसे ही मैंने देखा कोई नहीं है.. मैं जल्दी से उसके गेट से अन्दर चला गया. उसने पहले ही गेट खोल कर रखे थे. उनका गेट हमारे गेट से अगला ही था तो कोई दिक्कत नहीं आई.

मेरे घुसते ही उसने सारे गेट बंद कर दिए और अन्दर आकर मुझसे मुस्कुरा कर पूछा- क्या लोगे? ठंडा लोगे या गर्म?
मैंने कहा- गर्म.

जैसे ही मैंने गर्म कहा उसने होंठों पर होंठ रख दिए और 5 मिनट तक किस किया. किस के दौरान मैं उसके चूचों और गांड को भी सहलाए जा रहा था, जिसके कारण हम बिल्कुल गर्म हो गए थे.
वो मुझे छोड़ने का नाम ही नहीं ले रही थी. ऐसे लग रहा था जैसे बरसों से भूखी हो और बस सेक्स के लिए ही बनी हो.

उसने स्लीवलेस टॉप जो उसके पेट से ऊपर तक था और नीचे मखमली लोअर पहना हुआ था. मैं उसके बिना ढके हुए बदन पर हाथ फिरा रहा था. जैसे जैसे मेरे हाथ कमर से ऊपर उसकी गर्दन तक गए तो मैं हैरान हो गया क्योंकि उसने नीचे ब्रा नहीं पहन रखी थी. उसके दोनों पैर मेरे पैरों के ऊपर थे और उसने अपनी एड़ियां उठा रखी थीं. हम दीवार के साथ खड़े होकर किस कर रहे थे. एक लंबे किस के बाद उसने जगह बदल ली, अब दीवार की साइड थी.

अब हम बिल्कुल भट्टी की तरह जल रहे थे. मैंने उसके हाथों को ऊपर की तरफ कर दिया और उसके टॉप को निकाल दिया.
टॉप क्या हटा… जलजला आ गया.. क्या मस्त तने हुए ठोस चुचे थे यार. बिल्कुल टाइट.. थोड़े से भी नहीं लटक रहे थे. उसके पेट से 4 इंच बाहर को तने हुए थे.
हम बिल्कुल खामोश थे, बस एक दूसरे को सेक्सी नजर से देख रहे थे.

फिर उसने मेरा हाथ पकड़ा और अन्दर वाले बेडरूम में ले गई.
क्या रूम था यार.. रूम देखते ही मैं और भी उतावला हो गया. उसने मुझे बेड पर बैठाया और और वो मेरी गोद में आकर बैठ गई. उसके पैर मेरी कमर के दोनों तरफ थे.

अब उसने फिर किस करना शुरू कर दिया. उसके दोनों हाथ मेरे बालों में थे और मेरे हाथ उसकी कमर को सहला रहे थे. उसकी कमर बिल्कुल गर्म थी.

फिर थोड़ी देर बाद उसने मुझे धक्का दिया, जिससे मैं बेड पर लेट गया. मेरे पैर नीचे लटक रहे थे. वो मेरे ऊपर बैठी हुई मुझे सेक्सी नज़र से देख रही थी.

फिर अचानक डोरबेल बजी. वो मुझसे हटी और जल्दी से टॉप पहन कर मुझे बाथरूम में छिपा दिया.

उसने पहले खिड़की से देखा कि कौन है. उसने देखा उसकी एक सहेली थी वो भी वहीं पड़ोस में रहती थी.

इधर मैं उसका वाशरूम देख कर हैरान था. बिल्कुल एक रूम जितना बड़ा था, एक फाइव स्टार होटल जैसा था. इसमें बाथटब से लेकर सब कुछ था. बहुत बड़ा मिरर लगा रखा था, जिसमें अपने आप को नंगा नहाते देख सकते हों. उसके पापा एक बड़ी कंपनी में जनरल मैनेजर थे, इसलिए ये सब उनके लिए सामान्य था.

उधर उसने दरवाजा खोल कर उसे अन्दर बैठाया और उसने मुझे बुलाया. मुझे देख कर उसकी सहेली हैरान हो गई.

शीनू ने हमारा परिचय करवाया तो पता चला उसका नाम सीमा था. मैंने उसको पहले देखा हुआ था.
सीमा ने पूछा- ये सब क्या है?
उसने बताया कि हमारे बीच गलत कुछ नहीं है, बस हम दोस्त हैं.

सीमा को हमारे बारे में नहीं पता था. वो दोनों एक ही क्लास में पढ़ती थीं. वो उससे कुछ नोट्स लेने आई थी.

अब सीमा के बारे में बता दूँ. एक कंचनी सी लड़की थी, बिल्कुल गोरी.. एक भी दाग नहीं शरीर पर.. एकदम चिकनी चमेली थी. उसकी हाइट 5 फ़ीट थी, पर बड़ी मासूम लगती थी. हर चीज़ से भरी पूरी थी, चूचों से लेकर गांड तक.

अब तक 12 बज चुके थे.
शीनू ने सीमा को कुछ नहीं बताने को कहा.
सीमा बोली- ठीक है, मैं नहीं बताऊँगी, तुम परेशान मत होना.
ऐसा कहते ही उसने उसे गले से लगा लिया और कहा कि तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो.
सीमा ने कहा- बाबा अब ठीक है, तुम मुझे नोट्स दो और जाने दो. मैं बीच में हड्डी नहीं बनना चाहती हूँ.

शीनू दूसरे रूम में नोट्स लेने चली गई और मैं मुँह घुमा कर खड़ा हो गया.

थोड़ी देर में शीनू नोट्स लेकर आई और फिर सीमा वहां से चली गई और कह कर गई कि थोड़ा ध्यान रखना कोई देख न ले.

फिर शीनू ने दरवाजा लॉक किया, भाग कर मेरे पास आई और गले से लग गई.. फिर किस शुरू कर दिया. उसने अपनी एड़ी उठा रखी थी और फ्रेंच किस कर रही थी. वो पागलों की तरह मेरे पूरे फेस को चूमने लगी.

इधर मेरा लंड तना हुआ था, जो उसकी चूत से टकरा रहा था. हम फिर से गर्म हो गए थे और फिर मैंने एक झटके से उसका टॉप निकाल दिया. अब उसने भी मेरी टी-शर्ट निकाल दी. हमारे नंगे बदन चिपके हुए थे और बिल्कुल गर्म थे.

उसका एक हाथ मेरे लंड पर आ गया. जैसे ही उसका हाथ मेरे लंड पर आया पूरे शरीर में करंट दौड़ गया और लंड भी फूल कर दोगुना हो गया. अब उसका एक हाथ मेरी जीन्स का बटन ढूंढ रहा था. जब वो बटन खोलने की कोशिश कर रही थी, तो बटन खुलने का नाम ही नहीं ले रहा था. पर उसके होंठ अभी भी मेरे होंठों में ही थे.

बहुत कोशिश के बाद जब बटन नहीं खुला तो उसने मुझे धक्का लगाया और मुझे बेड पर पहले वाली पोजीशन में लेटा दिया.

अब वो मेरे ऊपर झुक कर मेरी जीन्स का बटन खोलने लगी. इस वक्त भी उसकी आँखें मेरी आँखों में थीं. फिर उसने धीरे से ज़िप खोल दी और अपने दोनों हाथ मेरी कमर के साइड में ले जाकर पेंट को पकड़ कर धीरे धीरे नीचे करने लगी. उसने मेरी पेंट को घुटनों तक निकाल दिया.

अब मैं और भी ज्यादा उत्साहित हो गया था. मेरे पैर अभी भी नीचे लटक रहे थे. अब उसने अपनी दो उंगलियों से मेरी फ्रेंची की स्ट्रिप पकड़ी और नीचे करने लगी. मेरा लंड बाहर निकलने के लिए बेताब हो रहा था.

मेरा लंड फूलने की वजह से फ्रेंची निकलने में दिक्कत कर रहा था तो वो एक हाथ फ्रेंची के अन्दर डाल कर लंड को सुलझाने लगी और एक हाथ से फ्रेंची को नीचे कर दिया. मैं अपने लंड को देखना चाहता था कि वो कैसा दिखेगा इसलिए मेरा पूरा ध्यान वहीं था.

उसने जैसे ही लंड को बाहर निकाला, सीधे अपने मुँह में ले लिया. मुझे देखने ही नहीं दिया.
और फिर उसने क्या लंड चुसाई की है.. ओए होए.. पूछो मत.
लंड चुसाई के दौरान मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि पहले कभी किसी चीज़ में नहीं आया. मैं आँखें बंद करके मज़े ले रहा था.

करीब 5 मिनट तक वो मेरा लंड चूसती रही, एक बार भी बाहर नहीं निकाला.
अब वो चूसते चूसते घूम रही थी. मेरी आँखें बंद थीं. फिर मुझे महसूस हुआ कि वो घूम कर 69 की पोजीशन में आ गई. मेरा चेहरा उसकी दोनों टाँगों के बीच में था.

मैंने उसके लोअर निकलने के लिए जैसे ही हाथ लगाया, तो पता चला कि वो पहले ही नंगी हो चुकी है.

तभी उसने मेरा लंड मुँह से बाहर निकाला और बोली- ओह गॉड हाऊ स्वीट, कितना पिंक है…
और फिर से मुँह में ले लिया. मेरा लंड पिंक है दोस्तों.

फिर मैंने आँख खोलीं तो नज़र सीधे उसकी चूत पर गई, ज़ो बिल्कुल पिंक थी. यार और पानी की ड्राप उसकी चूत की किनारी पर लटक रही थी. ये देख कर सीधे मेरी जीभ ने उस ड्राप को लपक लिया.

चुत का रस चखते ही मजा आ गया, सच में बड़ा अच्छा स्वाद था. फिर क्या था, मेरी जीभ ने अपना काम शुरू कर दिया और उसकी चूत क़ी किनारियों से लेकर अन्दर तक चाटना शुरू कर दिया.
वो भी बीच बीच में मेरा लंड बाहर निकालकर हल्की हल्की सिसकारियां ले रही थी. मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था.

फिर मैंने देखा कि उसकी चूत से फुआर सी आ रही है. उसकी चूत का दाना अन्दर बाहर हो रहा है और पानी निकल रहा है.

मैंने सारा पानी पी लिया, पर बंदी हटने का नाम नहीं ले रही थी. फिर दो मिनट बाद वो फिर से घूम गई और मेरे ऊपर आ गई. अब उसने मेरे हाथों की उंगलियों में अपनी उंगली फंसा लीं और बिना हाथ लगाए लंड को अपनी चूत में घुसाने लगी. कुछ देर बाद जब नहीं घुसा तो लंड को चूत पर रगड़ने लगी और फिर अपने होंठों में होंठ डाल दिए.

मुझे महसूस हुआ कि उसने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ लिया और अपनी चूत के नीचे फिट कर लिया. मेरे पैर अभी भी नीचे लटक रहे थे और अब उसने धीरे धीरे लंड पर दबाव डालना शुरू किया.

मेरा लंड का टोपा जैसे ही उसकी चूत में गया ऐसा लगा जैसे किसी भट्टी में घुस गया हो.

उसके बाद मैंने एक जोर से झटका मारा और पूरा लंड की उसकी चूत में चला गया. पूरा लंड जाते ही उसने मुझे और मैंने उसको जोर से पकड़ लिया. मुझे ऐसा लगा कि मेरे लंड ने पिचकारी पे पिचकारी छोड़ना शुरू कर दी. मैं झड़ने के बाद में एक मिनट तक ऐसा ही लेटा रहा, पर वो अपना काम कर रही थी. खुद कमर उचका कर धक्के पे धक्का लगाए जा रही थी. थोड़ी देर बाद मैंने भी अपने धक्के लगाने शुरू कर दिए.

अब दोनों तरफ के धक्कों से चुदाई वाली आवाज दोगुनी हो गई थी और उसने मुझे बिल्कुल टाइटली पकड़ लिया. अब वो झड़ने वाली थी और ‘आह.. जान.. आह.. जान..’ कहने लगी.

उसके मुँह से ‘जान..’ शब्द सुनकर मैं और गरम हो गया और मैं भी झड़ने लगा. हम दोनों एक साथ झड़ गए और वो मेरे ऊपर लेट गई.
फिर उसके बाद हमने एक बार और चुदाई की. फिर मैं वहाँ से चला आया.

इसके बाद जब भी मौका मिलता हम चुदाई कर लेते.

अभी मैं एक ऐसी कंपनी में काम कर रहा हूँ, जिसमें मुझे बाहर जाना पड़ता है इसलिए थोड़ा टाइम निकालकर अपनी सच्ची कहानी आप तक पहुँचा सका हूँ. फिर टाइम मिलते ही आगे लिखूंगा. मेरी फ्री सेक्स स्टोरी पसंद आई या नहीं, मेल या मैसेज जरूर करें. धन्यवाद.
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