फ़ोन सेक्स चैट से देसी चूत की चुदाई तक

(Phone Sex Chat Se Desi Chut Ki Chudai Tak)

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम विक्की है, मैं 24 साल का एक जवान और हट्टा-कट्टा दिखने वाला युवक हूँ.. मेरे लंड का साइज भी लम्बा और मोटा है, मेरी हाइट 6 फुट की है।

मैंने अन्तर्वासना की सारी कहानियां पढ़ी हैं। मैं इन रसीली हिंदी सेक्स कहानियों को अकेले में पढ़ता हूँ और अपना लंड हिला कर हमेशा ही आनन्द उठाता रहता हूँ।

फिर मैंने सोचा कि मैं भी अपनी कहानी लिखूँ।

मैं अपने ख्यालों में सदा किसी मस्त देसी चूत की चुदाई का सोचता रहता था और हमेशा इसी जुगाड़ में लगा रहता था कि कब मुझे कोई आंटी भाभी या कोई भी लौंडिया मिले, जिसे मैं हचक कर चोद सकूँ।

इसमें मैं सफल भी हुआ और कुछ न कुछ जुगाड़ लगा कर, अब तक कुछ आंटी की चुदाई और भाभी की चुदाई कर चुका हूँ।

हालांकि यह कहानी मेरी उस आंटी या भाभी की नहीं है.. उनकी चुदाई की कहानी मैं बाद में लिखूंगा, अभी यह कहानी है एक देसी चूत की चुदाई की, मेरी एक फ़ोन फ्रेंड की.. जिसका नाम संगीता है। उससे मैं पिछले दो सालों से बात करता आ रहा हूँ। उसे चोदना तो मैं चाहता था, पर वो मुझे बहुत प्यारी लगती है, इसलिए सोचता था कि कहीं इससे दोस्ती ना टूट जाए।

लेकिन वो है न.. कि मन जुगाड़ लगा ही लेता है, मेरे साथ भी वही हुआ।

एक दिन बातों-बातों में ही मैंने उसे सेक्सुअल एक्साइटमेंट की बातें बताईं, तो पहले तो वो कुछ देर चुप रही, फिर उसने फोन काट दिया।

मेरी तो लग गई.. मैंने सोचा कुछ था और हुआ कुछ और..

इस घटना के कुछ दिनों के बाद उसने मुझे फिर कॉल किया और बोलने लगी- तूने क्या सोचकर मुझसे वो बातें की थीं?
मैंने कहा- बस यार गलती से मेरे मुँह से निकल गई थीं.. सॉरी! तुमसे ऐसी बातें करने से पहले मैं तुमसे नॉनवेज चुटकले भी तो सुनाता ही रहा था, तो बस ये गलती हो गई। मुझे नहीं मालूम था कि ये बातें तुमको बुरी लगेंगी।

इस पर वो एकदम से अंदाज बदलते हुए बोली- तुम न.. बड़े शैतान हो!

उसके इस मूड से मेरा मन कुछ हल्का हुआ और अब उससे बातें शुरू हो गईं।
पर मुझे क्या पता था कि वो आज कुछ और मूड में ही थी, मतलब आग उसमें ही ज्यादा लगी थी।

तो उसने ही मुझसे पूछ लिया- क्या तुम मुझे चोदना चाहते हो?

मुझे तो ऐसा लगा मानो पूरी जन्नत ही मिल गई हो.. जिसके लिए मैंने इतना सोच कर प्लानिंग की थी, वो योजना सफल होती नजर आ रही थी।

वो इतनी आसानी से मान जाएगी, ये मैंने कभी सोचा ही नहीं था।

मैंने बहुत प्यार से और धीरे से कहा- हां..
इस पर उसने सिर्फ ‘हम्म..’ की आवाज निकली।
मैंने फिर एक बार उससे पूछ लिया- मैं ऐसा चाहता तो हूँ पर तुझे कोई प्रॉब्लम तो नहीं होगी ना मेरी जान?
वो कहने लगी- जब आग लगी हो तो उसे शांत नहीं करना चाहिए.. बुझा लेना चाहिए!

मैं अब फिर से खुल गया और इसके बाद मैंने उससे कुछ गंदा वाला मजाक किया। वो भी मुझसे प्यार से बातें करने लगी।

मैंने उससे मिलने की बात करते हुए मिलने की जगह तय की और 5 दिन बाद हम दोनों एक होटल कमरे में मिले।

यह हम दोनों की पहली मुलाक़ात थी। मैंने उसे देखा तो देखता ही रह गया.. क्या लग रही थी वो.. हल्की सांवली सी थी.. पर एकदम झकास माल लग रही थी। उसकी साइज 36-34-36 की थी, वो काले रंग का सूट पहन कर आई थी।

मैं उसे देख ही रहा था कि तभी वो मेरा ध्यान भंग करते हुए बोली- सिर्फ देखना ही है.. या कुछ करोगे भी!

तब मुझे होश आया.. मैंने उसे गले लगाया और एक टाइट हग किया, उसके कड़क चूचे मेरे छाती से लग कर दब रहे थे। मुझे बहुत अच्छा फील हो रहा था। क्या बताऊँ दोस्तो, उसके बदन की खुशबू क्या कमाल की थी।

जब मैंने उसे हग किया तो वो मेरे कान में कहने लगी- जी भर के प्यार करो आज तुम अपनी और मेरी आग बुझा दो.. मैं भी बहुत प्यासी हूँ।

इधर मेरे पैंट में तो मेरा लौड़ा पहले से उफान मार रहा था, मुझे ऐसा लग रहा था कि लंड पेंट को फाड़ कर बाहर न आ जाए। मैं अपने आपको किसी तरह कंट्रोल किए हुए था।

उसके बाद मैंने आगे बढ़ते हुए उसे गले के पीछे चुम्बन करना चालू किया.. शुरुआत ही एक जोरदार चुम्बन से की। गले के बाद चुम्बन करते-करते उसके कान के नीचे चुम्बन करने लगा। बारी-बारी से दोनों कानों के नीचे की लौ पर चुम्बन करते हुए गर्म साँसें छोड़ीं, तो वो एकदम से सिहर गई और गर्म होकर वो भी मुझे चूमने लगी।

इस तरह चुम्बन करते हुए कभी-कभी मैं उसके कान की लौ को काट भी लेता.. कभी कान को मुँह में ले लेता।

वो धीरे-धीरे मदहोश होती जा रही थी.. उसकी धीरे-धीरे कामुक आवाजें भी निकल रही थीं ‘आह्ह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… ऊओह्ह्ह ऊह्ह उमं..’

फिर मैंने उसके होंठों को फ्रेंच स्टाइल चुम्बन करना चालू किया.. मैं अपने होंठ लगा कर उसे चूमने लगा।
बहुत मजा आ रहा था दोस्तो..

चुम्बन करते-करते मैंने उसे बिस्तर पर बिठा दिया और धीरे-धीरे उसे बिस्तर पर लिटा कर उसके चूचे दबाने लगा।
वो मादक सिस्कारियां भरने लगी.. मैं भी गरम होता जा रहा था।

उसके बाद मैं चुम्बन करते करते उसके गले के नीचे सीने पर चुम्बन करने लगा। वो चूचियों पर मेरे हाथों को पाकर एकदम से गरमा गई और सीत्कार करते हुए कहने लगी- आह.. और दबाओ और दबाओ मेरे राजा.. जोर से दबाओ.. आआह्ह्ह उह्ह..

मैं भी मस्ती से उसके मम्मों को मसलने में लगा था। वो सिसकारते हुए कह रही थी- चूची मुँह में लेकर चूसो ना.. चूसो प्लीज.. देखो कितना रस भरा है.. सब तेरे लिए ही है राजा.. दबा के चूसो उन्हह..

मैं उसे तड़पाते हुए उसके गालों पर और कान के नीचे चुम्बन करता रहा और वो ‘उह्ह ह्ह्हूऊउ.. आअह्ह..’ करती रही।
ऐसा लग रहा था.. जैसे ब्लू-फिल्म की शूटिंग हो रही हो।

उसके बाद जब उससे रहा नहीं गया तो उसने मेरा सर अपने गले से उठा कर और मेरे मुँह को पकड़ते हुए अपने चूचों पर रख दिया.. पर मैं मुँह वापस हटा कर उसके गले को ही चूसना जारी रखा तो उसने फिर से मेरे मुँह को उठा कर अपने मम्मों पर रखकर कुछ देर तक दबाए रखा।

अब मैंने भी सोचा कि इसे और ज्यादा तड़पाना अच्छा नहीं है।

मैं अब उसके मम्मों की घुंडियों को मुँह में भर कर चूसने लगा। उसको मानो रहत मिल गई हो.. तो फिर मैं निप्पलों को जोर-जोर से होंठों से दबा कर चूसने लगा।

बड़ा ही मजा आ रहा था दोस्तो उफ्फ्फ..

मैं उसके एक चूचे को चूसता और दूसरी चूची को दबाता, फिर चूचियों को बदल कर ऐसे ही करता। इस तरह देर तक मैं उसके चूचों को बारी-बारी से दबाता और चूसता रहा।

वो ‘आह्ह.. ओह.. उह..’ करती रही।

अब मैं धीरे-धीरे अपने एक हाथ को उसकी बुर के पास ले गया और जैसे ही चुत पर हाथ फेरा तो ये क्या.. वो तो एक बार झड़ चुकी थी.. उसकी चुत रस से लबालब थी।

मैंने उसकी बुर को धीरे-धीरे उंगली डाल कर सहलाना चालू किया.. तो वो और पागल होने लगी।
अब मेरी भी हालत ख़राब हो रही थी.. पर मैं किसी तरह बर्दाश्त किए हुए था।
वो कहने लगी- चोदो ना.. आह्ह्ह आह्ह्ह ईह.. चोद दो ना प्लीज..

मैं तो इतनी जल्दी तो मैदान में उतरने वाला था नहीं.. सो बस मैं उसके चूची चूसना छोड़ते हुए धीरे-धीरे नीचे को आने लगा।

इस बीच मैंने अपने और उसके कपड़े भी खोल दिए। अब हम दोनी नंगे थे और मैं पेट पर चुम्बन करने लगा।

वो तो जैसे पागल ही हुए जा रही थी।

अब तो मुझे भी तो कुछ करवाना था कि नहीं.. तो मैंने उससे कहा- तू मेरा लौड़ा चूस और मैं तुम्हारी बुर को जीभ से चोदता हूँ।
पहले तो वो नानुकुर करने लगी.. और कहने लगी- मैं ये चुदाई ही पहली बार कर रही हूँ.. मुझे चूसने में घिन आती है।

तो मैंने कहा- मैंने कौन सा हजारों बार किया है, मेरा भी तो पहली ही बार है ना..

मैंने जबरदस्ती उसके मुँह में अपना लंड घुसा दिया और वो थोड़ी नानुकुर के बाद लंड चूसने लगी।

थोड़ी देर लंड चूसने के बाद मेरा तो पानी निकलने को होने लगा.. जबकि अब तक तो वो खुद दो बार झड़ चुकी थी और मैं उसकी बुर से निकले अमृत को पी गया था।

चुत रस का बड़ा मस्त स्वाद था दोस्तो.. जिसने पिया है.. वही बता सकता है कि कितना अच्छा लगता है।

इसी बीच वो जंगली हो उठी और तेज-तेज लंड चूसने लगी थी। मेरा लंड तो भरा बैठा ही था.. और मैं भी उसके मुँह में ही झड़ गया।

वो भी बड़े मजे से मेरा लंडरस पी गई। सच में यार.. पानी उसके मुँह में छोड़ते वक्त क्या मस्त मजा आ रहा था दोस्तों.. बता नहीं सकता ओफ़्फ़.. ये तो बस जन्नत थी।

मेरा पानी पीने के बाद बाद वो मुरझाए हुए मेरे लंड के टोपे पर जीभ फेरते हुए लंड को टुनया रही थी, तो मैंने उसे थोड़ी देर और चूसने को कहा। उसने फिर से लंड को मुँह में भर लिया और फिर से मेरा लंड खड़ा हो गया।

अब मैं उठा और उसकी बुर पर मैंने अपना लंड सैट किया, तो वो कहने लगी- डार्लिंग.. मुझे डर लग रहा है.. प्लीज धीरे-धीरे डालना प्लीज.. मेरा पहला मौका है।

मुझे लगा साली इतनी गदराई हुई है और पहली बार चुदा रही है.. मुझे उस पर विश्वास तो नहीं हुआ.. फिर सोचा अभी पता चल जाएगा।

मैंने कहा- वो तो अभी पता चल जाएगा कि पहली बार है या कितनी बार चुद चुकी हो।

मैं धीरे-धीरे लंड को चुत के अन्दर डालने लगा। उसकी चूत वाकयी बहुत टाइट लग रही थी.. धीरे से पेलने में लंड अन्दर जा ही नहीं रहा था।

मैंने सुपारा फंसा कर थोड़ा जोर लगाया ही था कि वो कहने लगी- ऊ..इ. दर्द हो रहा है.. प्लीज निकाल लो!
लेकिन मैं उसकी कमर पकड़ कर चुत में अन्दर करने लगा।

उसने आँखें फैला दीं और चिल्लाते हुए कहने लगी- ओह.. नो.. प्लीज बाहर निकाल लो.. मुझे नहीं चुदवाना.. बस करो।

वो मुझे धक्का देने लगी, पर मैं कहाँ मानने वाला था। मैंने उसकी कमर को जोर से पकड़े रखा और एक जोर का धक्का लगा दिया और उसके होंठों पर अपना होंठों को रख दिया ताकि उसकी चिल्लाहट दब जाए।

मैं लंड पेल कर थोड़ी देर रुका रहा और मैं अपना हाथ वहाँ ले गया, मुझे लगा कि कुछ गीला सा लग रहा है।
जब उसे हाथ में ले कर देखा तो खून था, मतलब वो सही कह रही थी कि उसका पहली बार है।

मैंने अपनी संगीता रानी की सील पैक बुर को आज खोल दिया था। उसके बाद मैंने उसके होंठों से होंठों हटाया और अब उसे अपनी चुत का उद्घाटन करवाने के लिए मुख्य अथिति बनाने के लिए ‘थैंक्स..’ बोला। मैं उसके गाल पर और गले पर चुम्बन करने लगा।

वो भी दर्द से मुस्कुराते हुए मुझे चूमने लगी।

फिर मैंने पूछा- अब दर्द है?
तो उसने कहा- थोड़ा कम है।

अब मैं हल्के से लंड को हिलाने लगा और उसे चुम्बन भी करता रहा।

उसे अच्छा लगने लगा.. उसकी दर्द वाली कराहें अब कामुक सिस्कारियों में बदलने लगीं।

मैं भी धक्के लगाने लगा.. अब उसे दर्द के साथ मजा आने लगा। मैं धीरे-धीरे धक्के तेज करने लगा।

वो ‘उह्ह्ह ऊऊहह..’ करते हुए कहने लगी- अब जोर से करो ना!

मैंने धीरे-धीरे प्यार से छोड़ते हुए धक्कों की रफ़्तार बढ़ाने लगा और उसे चोदता रहा, कभी धीरे-धीरे पेलता और कभी तेज-तेज चोदता।

वो अब जंगली होना शुरू हो गई थी और मुझे गालियां भी देने लगी थी- चोद मादरचोद.. साले जोर से चोद कमीने.. आह्ह..
मैं भी कहे जा रहा था- ले साली रंडी..!

क्या मस्त सीन था और फिर देर की चुदाई के बाद उसने हिम्मत छोड़ दी और निढाल हो गई, उसके बाद मेरा भी निकलने वाला हुआ तो मैंने धक्कों की रफ़्तार को बढ़ा दिया।

जब मेरा झड़ने को हुआ तो मैंने फील किया कि उसका बदन फिर से अकड़ने लगा था। वो कहने लगी- अह.. और जोर से और जोर से.. उह्ह्ह्ह्ह..

इसी के साथ अगले ही पल हम दोनों एक साथ चुदाई का आनन्द लेते हुए झड़ गए।

उसके बाद मैंने उसे एक लम्बा वाला चुम्बन किया और मैंने उसे फिर से ‘थैंक्स..’ बोला, वो भी मुझे चूमने लगी।

इसके बाद तो मैं उसे बहुत बार चोद चुका हूँ।

तो कैसी लगी मेरी ये लाइफ की पहली हिंदी सेक्स स्टोरी ‘संगीता के साथ खून भरी चुदाई’ प्लीज़ मुझे मेल कीजिए।
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