पड़ोसन की कुंवारी बेटी को चोदा

(Real Sex Story: Padosan Ki Kunvari Beti Ko Choda)

रियल सेक्स स्टोरी पड़ोसन को स्कूटी सिखा कर चोदा-2 से आगे:
थोड़ी देर में बाथरूम से होते हुए सुमन मेरे पास आ गई. हम साथ साथ लेट गए. सुमन ने नाईट गाउन पहना था. हमने जम कर चुदाई का दौर चलाया. मैंने दो बार सुमन को चोदा, परंतु मेरा सारा ध्यान स्वीटी की उभरी हुई चूत में ही था. लगभग एक बजे सुमन अपने कमरे में चली गई.

अगले दिन सायं को जब घर आया तो स्वीटी का मूड ऑफ था. पता चला कि वह फ़िल्म देखने जाना चाहती है.
मैंने कहा- थोड़ा पढ़ाई करते हैं, फिर फ़िल्म देख आना.
उसने कहा- ठीक है.

मैं उसके कमरे में चला गया, इधर उधर की बातें की, उसका पढ़ाई में कोई ध्यान नहीं था. उसने वही छोटी चिपकी हुई निक्कर डाल रखी थी. मैंने एक टीशर्ट और लोअर डाल रखा था. लोअर में स्वीटी को मेरे लंड की हरकत साफ़ नज़र आ रही थी.

मैंने बातों बातों में उसका मोबाइल फ़ोन उठाया और गैलरी में फ़ोटो देखने लगा. एक मरियल से लड़के की फ़ोटो कई जगह दिखाई दी तो मैंने पूछा- ये तुम्हारा बॉयफ्रेंड है?
उसने कहा- हाँ, मेरा बॉय फ्रेंड है.
मैंने कहा- स्वीटी, बुरा मत मानना, कहाँ यह कार्टून सा लड़का और कहाँ तुम हुस्न का जलवा. तुम्हें और कोई नहीं मिला?
उसने जवाब नहीं दिया बस नीची आँखें करके बैठी रही.

मैंने उससे कहा- यदि तुम चाहो तो आज मैं तुम्हें पिक्चर दिखा लाऊँ, परंतु डरता हूँ कहीं तुम्हारा बॉय फ्रेंड बुरा न मान जाए.
स्वीटी एकदम बोली- वो कौन होता है बुरा मानने वाला!
मैंने कहा- ठीक है, 7 बजे का शो देख कर आते हैं.
मैंने साथ के पिक्चर हाल की, दो टिकटें लास्ट में, कॉर्नर की देख कर नेट पर बुक की.

मैंने सुमन को बताया कि हम दोनों पिक्चर जा रहे हैं. खाना आकर खाएंगे.

हम सिनेमा हाल में पहुंचे. हमारी लास्ट की लाइन थी, जो सारी खाली पड़ी थी. पिक्चर शुरू होते ही रोमांटिक सीन आने लगे. मैंने धीरे धीरे अपना हाथ स्वीटी के हाथ से टच कराया. उसने कोई प्रतिरोध नहीं किया. मैंने धीरे से उसका नर्म हाथ अपने हाथ में ले लिया. वह मौन स्वीकृति देती रही.

मैंने धीरे से उसका हाथ उठा कर अपनी गोद में खड़े लंड पर रख दिया. वह कुछ नहीं बोली. मैं धीरे धीरे उसका हाथ सहलाता रहा. उसने मेरे लंड पर से हाथ नहीं उठाया. मैंने उसके कंधे के ऊपर से हाथ रख लिया और उसके बालों को छेड़ने लगा.
वह गर्म हो चुकी थी. मैंने उसे बाहों में भर कर किस कर लिया.
उसने कहा- कोई देख लेगा.

मैंने कहा- मुझसे फ्रेंडशिप करोगी?
उसने कहा- अभी शक है क्या?
मैंने इतना सुनते ही अपना लंड पैंट में से निकाल कर उसके हाथ में पकड़ा दिया.
उसने लंड पकड़ते ही कहा- यह क्या है?
मैंने कहा- लंड है.

उसने फोन की लाइट ओन करके देखा और बोली- उई माँ, इतना बड़ा और मोटा?
मैंने उससे पूछा- तुम्हारे बॉयफ्रेंड का कैसा है?
उसने बताया- आपकी उंगली जैसा.

वह मेरे लंड को सहलाने लगी, मैं उसकी चूचियों को टीशर्ट के अंदर हाथ डाल कर मसलता रहा. मैंने उसकी जीन्स खोल दी और पेंटी में हाथ डाल कर चूत को हाथ से भींचा. उसने आँखें बंद कर ली.
मैंने पूछा- कभी बॉय फ्रेंड का चूत में लंड लिया है?
उसने हाँ में उत्तर दिया.
मैंने कहा- मजा आया था?
तो उसने कहा- उसका तो एक मिनट में अंदर जाते ही छूट गया था.

मैंने उसकी चूत में उंगली डाली तो उसे दर्द हुआ और मजा भी आया. मैं समझ गया कि बॉयफ्रेंड से सील नहीं टूटी थी.

तभी इंटरवेल हो गया, हाल में हमारे जैसे ही तीन चार और बैठे थे. लाइट में उसने लौड़े को अच्छी तरह देखा और बोली- ऐसा तो मैंने ब्लू फ़िल्म में देखा था, मेरे बॉयफ्रेंड ने दिखाई थी एक बार.

हाल की लाइटें बंद हो गई. मैंने उसकी चूचियों को पीना शुरू किया, वह लंड को ऊपर नीचे करती रही.
मैंने उससे कहा- अपनी जीन्स नीचे कर के मेरे ऊपर बैठ जाओ.
उसने जीन्स नीचे घुटनों तक की और मेरी सीट पर आकर मेरे लंड को अपने चिकने और मोटे चूतड़ों के नीचे दबा कर बैठ गई और मेरे लंड को अपनी चूत पर भी आगे से रगड़ने लगी.

मैंने उसकी चूत के दाने को रगड़ा तो वह लगभग बेहाल हो गई, उसने बताया कि उसके बॉयफ्रेंड को तो ये कुछ करना आता ही नहीं है.

वह बोली- क्या आप रात को मम्मी के सोने के बाद मेरे कमरे में आ सकते हो?
मैंने कहा- एक शर्त है!
वह बोली- क्या?
मैंने कहा- तुम अपने बॉयफ्रेंड को छोड़ दोगी.
वह बोली- सुबह बताऊँगी.

हम पिक्चर अधूरी छोड़ कर घर आ गये.

मैंने सुमन से बताया कि बात बन गई है, परंतु कल बताएगी. आज मैं इसके कमरे में इसके साथ रहा कर बात करूंगा.. तुम अनजान बनी रहना और जल्दी अपने कमरे में सो जाना.

हमने खाना खाया और प्लान के मुताबिक सुमन अपने कमरे में सोने चली गई, मैं स्वीटी के कमरे मैं चला गया.

अंदर जाते ही मैंने स्वीटी को अपनी गोद में उठा लिया और उसके होंठ चूसने लगा. वह भी पिछले दो घंटों से गर्म हो चुकी थी. उसकी चूत पिक्चर हाल में ही पानी छोड़ चुकी थी. बाहर से जीन्स भी गीली हो गई थी.

मैंने उसकी टीशर्ट निकाली और उसकी चूचियों पर टूट पड़ा. क्या मजेदार बड़े बड़े आम जैसे मम्मे थे, उन पर एकदम छोटे छोटे गुलाबी निप्पल. मैं चूसता रहा, वह सिसकारियाँ लेती रही.
मैंने धीरे से उसकी जीन्स उतारनी शुरू की. उसने लेटे लेटे अपने चूतड़ ऊपर उठाये और जीन्स और पैंटी दोनों निकाल दी.

जिस चूत को मैंने उसकी छोटी निक्कर में ढके हुए देखा था अब वही चूत मेरे सामने पाव रोटी की तरह फूली हुई, गुलाबी रंगत लिए, एकदम नंगी थी. सफाचट गोरी, कोई बाल नहीं. मैंने उसे फर्श पर नंगा खड़ा किया और खुद अपने सारे कपड़े निकाल फैंके.

मेरे लोहे की रॉड जैसे लंड को देख कर वह घबरा गई और कहने लगी- इससे नहीं करना है.
मैंने उसे समझाया- चूत में बहुत जगह होती है, तुम चिंता मत करो. ब्लू फ़िल्म में देखा है न ऐसा लंड चूत में जाते हुए.

उसको बाहों में भर कर, उसके सारे शरीर को मैंने चूम चूम कर उसे उत्तेजित किया. फिर उसे बैड पर लिटा कर उसकी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा. उसके दाने को जब मैंने अपने होठों से चूसा तो मजे में उसकी चीख निकल गई.
मैंने उंगली से भी उसकी चूत का रवां किया.

फिर मैंने उसे अपना लंड चूसने को कहा तो उसने झट से पकड़ कर मुंह में ले लिया. परंतु लंड इतना मोटा था कि मुश्किल से उसके मुंह में घुसा, परंतु उसे मजा नहीं आ रहा था और मैं उसके साथ जबदस्ती नहीं करना चाहता था.

उसको खड़ी करके मैंने लंड को उसकी चूत पर टिकाया. वह आगे पीछे हो कर उसको रगड़ने लगी. कई देर तक मेरे मोटे लौड़े से चूत की घिसाई करने के बाद उसने मुझे एकदम छोड़ा और बेड पर टांगे चौड़ी करके लेट गई.
मैं समझ गया कि लड़की लंड मांग रही है.

मैं उसके बाथरूम गया और एक ऑयली क्रीम लेकर आया, क्रीम को अच्छे से उसकी चूत पर लगाया और अपने लौड़े पर मला.
मैंने उसे बताया कि उसके बॉयफ्रेंड को करना नहीं आता था, वह बच्चा था, आज तुम चुदोगी तो थोड़ा दर्द होगा जिसे बर्दाश्त कर लेना, फिर एक बार के दर्द के बाद सारी जिंदगी मजे ही मजे हैं.

वह बोली- लेकिन यह इस छोटी सी जगह में जाएगा कैसे?
मैंने कहा- अभी जाएगा.
मैंने उसकी टांगों को चौड़ा करके फैला दिया और उसकी चूत की पत्तियों को अलग करके छेद पर लंड को पकड़ कर रखा और थोड़ा अंदर जोर लगाया.

चूत इतनी चिकनी हो चुकी थी कि एकदम लंड को पकड़ गई और थोड़ा सुपारा अंदर चला गया.
मैंने उससे पूछा- दर्द हुआ?
तो उसने कहा- नहीं, मजा आ रहा है, करो.

मैंने और जोर लगा कर जैसे ही धक्का मारा दो इंच लंड अंदर चला गया. साथ ही वह तकिये के ऊपर की तरफ चढ़ने लगी.

मैंने उसे थोड़ा नीचे खींच कर एक धक्का और मारा तो उसकी चीख निकल गई, चूत में आधा लंड उतर गया था और लंड ने कौमार्य की झिल्ली को फाड़ दिया था.
मैंने उसके होठों को अपने होठों से दबा लिया और कहा- जो होना था वह हो गया.
उसकी चूत से खून निकलने लगा था.
उसने कहा- एक बार निकालो, बहुत दर्द हो रहा है.

मैंने कहा- निकालने से दुबारा दर्द होगा और यह कहते हुए एक जोर का झटका देकर सारा लंड अंदर घुसेड़ दिया.
वह दर्द से बिलखने लगी.

मैंने उसकी जांघों को अपने हाथों से मसला और चूचियों पर प्यार करने लगा. उसके गालों पर आंसू आ गये थे. कुछ देर बाद मैं बिना हिले उसके ऊपर लेटा रहा. वह कुछ नार्मल होने लगी. उसने नीचे चूत को छू कर देखा तो उसे हाथ में खून लगा.
वह कहने लगी- यह क्या है, एक बार बाहर निकालो.
मैंने लंड बाहर निकाला, एक साफ कपड़े से उसकी चूत साफ़ की, वह बाथरूम गई और चूत धो कर आ गई. मैंने भी लंड को साफ़ किया और दुबारा चूत और लंड पर क्रीम लगाई. थोड़ी देर उसे प्यार किया, उसके मम्मों को चूसा, उसके पटों को सहलाया और उत्तेजित किया.

मैंने दुबारा उसके ऊपर आकर लंड को चूत में डालना शुरू किया. लंड अबकी बार आराम से अंदर चला गया. स्वीटी को फटी झिल्ली के पास थोड़ा दर्द हुआ. फिर उसे मजा आने लगा. चूँकि मेरा लंड काफी लंबा और मोटा था तो मैंने थोड़ा सब्र से काम लिया.

अब स्वीटी ने मुझे इशारा किया कि अब ठीक है, चोदो.

मैंने धीरे धीरे लंड अंदर बाहर करना शुरू किया. उस पर मस्ती छाने लगी. मैंने स्पीड बढ़ाई, वह आह…. ऊह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… हाई… करो …ठीक है… जोर से कर लो… कहती रही. अभी तक मैं उसे सीधा मिशनरी पोजीशन में ही चोद रहा था.

फिर मैंने उसकी दोनों टांगों को थोड़ा अपनी बाँहों में उठा कर चोदना शुरू किया तो लंड ज्यादा अंदर तक गया. उसे थोड़ा दर्द हुआ, थोड़ा मजा भी आया. मैं उसे धकाधक चोद रहा था. वह मजे से चीख चिल्ला रही थी, एकदम उसकी सांसे तेज हो गई और उसने मुझे कस कर जकड़ लिया, उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया था.

मैंने लंड बाहर निकाला और उसके साथ लेट गया. वह बिल्कुल संतुष्ट हो चुकी थी.
मैंने पूछा- तुम्हारा बॉयफ्रैंड के बारे में क्या विचार है?
तो उसने कहा- उस साले की गांड पर कल ही लात मार दूँगी.

दस मिनट बाद मैं फिर उसके ऊपर चढ़ गया.
उसने कहा- और करना है?
मैंने कहा- खुद तो मजा ले लिया, अब मुझे तो लेने दो. मेरा कहाँ छूटा है.

मैंने उसकी दोनों टाँगें अपने कन्धों के ऊपर रख कर घमासान चुदाई शुरू कर दी. उसे फिर मजा आने लगा, वह जोर जोर से आवाजें निकलने लगी.
कुछ देर बाद मैंने पोजीशन बदली और उसे अपने ऊपर आने को कहा.
उसने अपने हाथ से मेरा लौड़ा पकड़ा और चूत पर सेट कर लिया. वह उसे ज्यादा अंदर नहीं ले पा रही थी, क्योंकि अभी उसकी चूत में पूरी जगह नहीं बनी थी. फिर मैंने उसे घोड़ी बना कर चोदना शुरू किया. उसमें भी उसे लंड बड़ा होने की वजह से तकलीफ हो रही थी.

फिर उसने कहा- मैं थक गई हूँ. अब बस करो. बाकी कल कर लेंगे.

मैंने उसे बेड के किनारे पर घसीट के खींच लिया और नीचे खड़े हो कर उसकी टांगों को पूरा फैला कर जबरदस्त चुदाई शुरू कर दी. वह ‘बस करो… बस करो…’ कहने लगी. वह लगभग 5 बार झड़ चुकी थी. मैंने भी 20-25 जबरदस्त शाट लगाकर उसकी चूत को अपनी वीर्य की पिचकारियों से भर दिया.

जब मैंने अपना लंड उसकी चूत से निकाला तो उसकी चूत में से वीर्य बह कर चादर पर तेजी से गिर रहा था. वह टांगे चौड़ी करके पड़ी थी. मैं उसके ऊपर एक टांग चढ़ा कर और उसे बाँहों में ले कर सो गया.

रात के दो बज चुके थे. मैंने और करना चाहा तो उसने मना कर दिया. मैं उसे किस करके नंगा अपने कपड़े उठा कर ड्राइंगरूम से होता हुआ अपने कमरे में आ गया और नंगा ही बेड पर सो गया.

कुछ देर बाद मुझे लगा कि कोई मेरा लंड चूस रही है. मैंने आँखें खोल कर देखा तो वह सुमन थी.
मैंने उससे कहा- यह क्या कर रही हो?
उसने कहा- मुझे स्वीटी की चुदाई की आवाजें और चीखें सुनाई दे रही थीं, क्योंकि मैं रूम के बाहर ही खड़ी थी.

स्वीटी की चुदाई की आवाजें सुनकर सुमन भी उत्तेजित हो चुकी थी, उसने मेरा लंड मुंह में लिया और चूसने लगी. थोड़ी देर में ही लंड फिर खड़ा हो गया.

मैंने उसे बताया- स्वीटी अपने बॉय फ्रेंड को छोड़ देगी क्योंकि बॉय फ्रेंड से कुछ हुआ ही नहीं था. इसकी सील मैंने ही तोड़ी है, अब यह कहीं नहीं जायेगी. कल तुम इसे आई पिल दे देना ताकि यह प्रेग्नेंट न हो जाए और एक तुम भी खा लेना.
उसने कहा- मैंने तो कॉपर टी लगवा रखी है.

मैंने अभी कपड़े नहीं पहने थे. अतः सुमन का गाउन उतार कर उसकी टांगों को अपने कन्धों पर रख कर चुदाई शुरू कर दी. कुछ देर बाद सुमन झड़ गई और मुझसे कहने लगी- मेरा हो गया.
मैंने कहा- ठीक है तुम अपने कमरे में जाओ. मैं और नहीं झड़ता.
वो कहने लगी- ये क्या बात हुई, बिना पिचकारी मरवाये आनन्द नहीं आएगा.

मैंने उसे घोड़ी बनाया और उसकी ऐसी चुदाई की कि उसका सिर बेड के सिरे पर लगने लगा. कुछ देर बाद मैंने उसकी चूत को अपने वीर्य की पिचकारियों से लबालब भर दिया. वीर्य उसके पटों पर से नीचे बहने लगा और वह जा कर अपने कमरे में सो गई.

हम तीनों ही सुबह 9 बजे उठे. स्वीटी से चला नहीं जा रहा था.
उसकी मम्मी ने पूछा- आज स्कूल नहीं जाना?
तो स्वीटी कहने लगी- मेरी आज तबियत ठीक नहीं है.
सुमन मुस्करा कर अपने कमरे में चली गई.

मेरी लॉटरी निकल आई. माँ बेटी दोनों चुदक्कड़ थीं जिन्हें मैं हर रोज बारी बारी से चोदता रहा.
मेरी रियल सेक्स स्टोरी कैसी लगी मुझे मेल करके बताएं!
राज शर्मा
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