पड़ोसन देसी गर्ल की देसी चुदाई उसके ही घर पर

(Padosan Desi Girl Ki Desi Chudai Uske Ghar Par)

यह मेरी पहली चुदाई की कहानी है मेरी पड़ोसन देसी गर्ल की देसी चुदाई की…

अन्तर्वासना पढ़ने वाले दोस्तों को मेरा नमस्कार!
मेरा नाम विकास है, मैं 21 साल का हूँ और मेरठ का रहने वाला हूँ। मेरे घर में मम्मी-पापा ही हैं, पापा दिल्ली में जॉब करते हैं.. घर पर मैं और मम्मी ही रहते हैं। मैं b.com कर रहा हूँ.. इस तरह से सब लिखना थोड़ा अजीब लग रहा है, पर जो भी सच है.. मैं आप सभी को बताने वाला हूँ ताकि आपको मेरी इस चुदाई की कहानी पर यकीन आए कि ये सच्ची चुदाई की कहानी है।

ये बात एक साल पहले की है। मेरे घर के सामने एक लड़की रहती थी.. उसका नाम कोमल था। जैसा उसका नाम था, वैसी ही वो खुद भी थी.. दिखने में एकदम मस्त माल थी देसी टाईप गर्ल… उसके चूचे बहुत बड़े और सख्त थे.. उनको तना हुआ देखते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता था।
उसके घर में उसके मम्मी-पापा और उसकी दो बहनें और एक भाई था।

पता नहीं क्यों मैं कोमल पर कभी भी पटाने के हिसाब से ध्यान नहीं देता था क्योंकि में सोचता था कि इतना मस्त माल मेरे नसीब में कहाँ हो सकता है।

बात सर्दी की है.. मैं छत पर धूप ले रहा था.. मम्मी घर पर ही थीं। तभी मैंने देखा कि कोमल भी छत पर ही थी। मैं उसको देख कर खुश था.. वो चारपाई पर लेटी हुई थी। उसके बड़े-बड़े चूचे मुझे ऐसे दिख रहे थे.. ऐसा लग रहा था कि उसके बड़े चूचे उसकी टी-शर्ट को फाड़ कर बाहर आ जाएंगे।

वाकयी कोमल एक मस्त माल थी.. उसने अपना हाथ अपने माथे पर रखा हुआ था। मुझे पता नहीं चल रहा था कि वो मुझे देख रही है या नहीं.. पर वो मुझे देख रही थी। वो चारपाई से खड़ी हुई और नीचे चली गई।

फिर अगले दिन वो मेरे घर पर आई.. घर पर मम्मी भी थीं। मैं आपको बता दूँ कि मेरे और कोमल के घर वालों की आपस में ज्यादा नहीं बनती थी, इसलिए हमारा एक-दूसरे के घर पर आना-जाना बहुत कम था, इसलिए मेरी उसको कुछ भी बोलने में फटती है।

वो मम्मी से कुछ बोल रही थी और वो बार-बार मुझे देख रही थी.. मैं भी उसे देख रहा था।

मैं उसके जाने के बाद छत पर चला गया कुछ देर बाद वो भी आ गई, वो पर चारपाई पर बैठ गई, मैं उसकी तरफ देख रहा रहा था, मैंने पूछा- क्या काम था?
मेरी मम्मी को तुम्हारी मम्मी से काम था.. उसके लिए पूछने आई थी।
मैंने कहा- ये बात है.. मैंने सोचा..
कोमल- बोलो.. क्या सोचा?
मैंने कहा- मैंने सोचा कि तुम मेरी यहाँ शिकायत करने आई हो कि मैं तुम्हें छत पर घूर-घूर के जो देखता हूँ।

इस बात वो जोर-जोर से हँसने लगी, कोमल बोली- तुम पागल हो.. ऐसा मैं क्यों क्यों बोलूंगी?
मैंने कहा- तुम्हें बुरा तो नहीं लगता।
वो बोली- नहीं..

उसकी यह बात सुन कर मैं बहुत खुश हो गया था। अब मेरी और कोमल की बहुत बातें होने लगीं। मैंने उसका फ़ोन नंबर ले लिया अब मेरे उससे एसएमएस से चैटिंग और फ़ोन पर बातें होने लगीं।
मैंने एक दिन उससे सेक्स के बारे पूछा कि तुमने कभी सेक्स किया है?
वो बोली- नहीं.. तुमने किया है?
मैंने कहा- नहीं किया।

अब मेरे और कोमल के बीच हर तरह की बातें होने लगीं।

मैंने एक दिन उससे पूछा- क्या तुम मेरे साथ सेक्स करना चाहोगी?
कोमल ने कहा- करना तो चाहती हूँ पर कहाँ?

मैं उसकी ये बात सुन कर बस सही मौके का इंतजार करने लगा।

सर्दी के मौसम में मैं हमेशा नीचे के रूम में सोता हूँ और मम्मी ऊपर वाले रूम में सोती थीं।
मैं रात को उससे बात कर रहा था। मैंने उसे रात को मेरे कमरे में आने के लिए बोला कि मैं बाहर वाला डोर ओपन कर दूँगा।
पर उसने मना कर दिया तो मैं उदास हो गया, मेरा सारा मजा एक मिनट में खत्म हो गया।

मैंने कहा- ओके, कोई बात नहीं नेक्स्ट टाइम कर लेंगे।
वो बोली- नाराज मत होना, प्लीज़ समझो, अगर किसी ने देख किया तो प्रॉब्लम हो जाएगी।
मैंने कहा- कोई बात नहीं।

मैंने उसके नाम की मुठ मारी और सो गया।

एक दिन मैं कॉलेज गया और मैंने अपना फ़ोन साइलेंट मोड पर कर रखा था। जब मैं कॉलेज से निकला तो मैंने अपना फ़ोन चैक किया। उसमें कोमल की 15 मिस कॉल पड़ी थीं। मैंने उसे फ़ोन किया तो उसने मुझसे बोला- एक खुशखबरी है।

मैंने पूछा- क्या बात है?
तो वो बोली- मम्मी-पापा मेरे कॉलेज से आने से पहले ही एक शादी में चले गए हैं।
मैंने कहा- वाओ.. ये तो बहुत ही अच्छी बात है।

मैं मन ही मन में खुश होने लगा, मैंने पूछा- अगर तुम रात मेरे घर आने लगोगी तो तू अपने भाई और बहन को क्या बोलेगी?
वो बोली- ओ हैलो.. मैं नहीं आउंगी तुम आओगे।
मैंने कहा- ठीक है.. पर तुम अपने भाई और बहनों को कैसे समझाओगी?
वो बोली- वो मेरी परेशानी है।
मैंने कहा- ठीक है।

मैं आपको बता दूँ कि कोमल के बहन और भाई अभी छोटे ही थे इसलिए उनका कोई खास डर नहीं था।

रात को 11 बजे उसकी कॉल आई कि आ जाओ। मैंने तुरंत अपना बैक डोर खोला और उसके घर पर जा पहुँचा। उसने गेट ओपन किया। मैंने देखा कि कोमल क्या कमाल का माल लग रही थी।
उसने एक बस टी-शर्ट पहन रखी थी.. उसकी टांगें क्या कमाल लग रही थीं।

उसने कहा- यही सब कुछ कर लोगे.. अन्दर आओ।

मेरी दिल को धड़कन काफी तेज चल रही रही थीं और उसकी भी यही हालत थी। वो सीधे मुझे अपने कमरे में ले गई।
मैंने पूछा- तुम्हारे बहन और भाई कहाँ पर हैं?
वो बोलीं- ऊपर कमरे में सो हुए हैं।

मैं उसे देख रहा था और वो मुझे।
उसने कामुकता भरी निगाहों से कहा- देखते ही रहोगे या कुछ करोगे भी?

मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया क्योंकि मैंने आज तक ये सब किया था।
चूमते-चूमते मैंने उसके कपड़े उतार दिए।
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आह.. क्या चूचे थे.. लाल रंग की ब्रा में समा ही नहीं रहे थे.. सामने देख कर मैं तो पागल ही हो गया। मैं उन्हें चूमने लगा। अब तक मेरी और कोमल की साँसें बहुत गरम हो चुकी थीं। मैंने अपने भी कपड़े उतारे और उसकी पेंटी भी उतार दी उसने शायद आज ही अपनी चूत के बाल साफ किए थे। उसकी चूत बिल्कुल बच्चे की तरह कोमल थी।

मेरा लंड आसमान छू रहा था। मैंने उससे अपना लंड चूसने के लिए बोला, पहले तो वो मना करने लगी। लेकिन मैंने उससे फिर बोला तो वो मेरे लंड को बड़े ही प्यार से चूसने लगी। लंड चूसते चूसते उसने मेरा सारा माल निकाल दिया। वो शायद उलटी करने वाली थी.. पर नहीं की और मुँह साफ करने लगी।

अब मैंने उसे पकड़ा और जैसे ही उसकी चूत को चाटने लगा तो वो मचलने लगी और अजीब-अजीब आवाजें निकलने लगी। उसकी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया और मैंने उसे चाट-चाट कर साफ कर दिया।

अब मैं उसे देख रहा था और वो मुझे देखे जा रही थी.. हम दोनों हँसने लगे।

अब मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा। मैंने पूछा- तुम तैयार हो?
वो बोली- हाँ..

अब मैंने उसे बिस्तर पर पटक दिया.. उसकी चूत एकदम टाइट थी। अब मैं अपने लंड को उसकी चूत डालने लगा, उसकी चूत बहुत ही टाइट थी। मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और एक तेज धक्का दे मारा। उसकी चीख निकल गई। वो बोली- दर्द हो रहा है।
मैं बोला- शुरूआत में होता है.. फिर नहीं होगा।

मैंने फिर से जोर से एक धक्का दे मारा और इस बार मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुसता चला गया, वो दर्द से तड़फ उठी, वो बोली- प्लीज़ निकाल लो.. मुझे दर्द हो रहा है।

वो रोने लगी पर मैंने एक ना सुनी और दूसरा धक्का भी मार दिया और अब मेरा पूरा लंड उसकी चूत में चला गया। उसने मुझे काट लिया.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… मैं उसे समझाने लगा कि कुछ नहीं होगा, पहली बार में ऐसा ही होता है।

मैं थोड़ा रुक गया और जब उसका दर्द बंद हो गया तो मैंने धक्के मारने शुरू कर दिए। अब उसका दर्द कम हो गया और वो भी मेरा साथ देने लगी।

हमने कुछ देर तक देसी तरीके से चुदाई की और एक साथ झड़ गए।
अब वो मुझे देख कर शरमा रही थी।
उसके चहरे पर अजीब सी ख़ुशी थी और मैं भी बहुत खुश था। हमने उस रात में दो बार और चुदाई की।

आप लोगों को मेरी देसी चुदाई की कहानी कैसी लगी.. जरूर लिखना।
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