मेरा गुप्त जीवन -86

(Mera Gupt Jeewan-86 Lucknow Se Dilli Ka Safar)

This story is part of a series:

चूत चुदाई चलती ट्रेन में

लखनऊ से दिल्ली का सफर शुरु हुआ:

अगले दिन से हमने दिल्ली और आगरा के लिए तैयारी शुरू कर दी। कॉलेज में भी काफी गहमा गहमी थी इस ट्रिप के बारे में!
और जल्दी ही वो दिन भी आ गया जब हम सबने सफर पर जाना था। दिन भर कॉलेज में खूब चहल पहल रही और सब लड़के लड़कियाँ काफी उत्सुक थे।

हमारे ग्रुप में अभी भी केवल जस्सी और नेहा और इधर पूनम और मैं ही थे, दोपहर को एक और लड़की ने हमारे ग्रुप में शामिल होने की इच्छा ज़ाहिर की।
नेहा ने उसको कैंटीन में बुला लिया और हम सबको भी इकट्ठे कैंटीन में बुला लिया।

नेहा ने कहना शुरू किया- इनसे मिलो, यह डॉली है और मेरी ही क्लास में पढ़ती है। यह कह रही थी कि उसको कोई लड़कियों का ग्रुप नहीं मिल रहा जिस में वो शामिल हो सके यह हमारे पास आई है और हमारे ग्रुप में शामिल होना चाहती है।
पूनम बोली- वैसे तो हमारे ग्रुप में हम तीन ही लड़कियाँ हैं लेकिन डॉली को ग्रुप में शामिल होने से पहले उसको सब कुछ बता दो ताकि वो सब समझ कर ही ग्रुप ज्वाइन करे। क्यों ठीक है सोमू?
मैंने हामी में सर हिला दिया।

तब नेहा और जसबीर उसको लेकर दूसरे बेंच में बैठ गई और उसको सब कुछ साफ़ समझाने लगी। ख़ास तौर से हमारे ग्रुप का उन्मुक्त व्यवहार उसको अच्छी तरह से समझा दिया।
फिर वो दोनों उसको लेकर हमारे पास आ गई और नेहा ने कहा- डॉली को सब समझा दिया है और उसको हमारे उन्मुक्त व्यवहार के बारे में भी बता दिया है और वो हमारे साथ ही हमारे ग्रुप में शामिल होना चाहती है।

मैं बोला- ठीक है, हमको खुशी होगी कि आप हमारे ग्रुप में शामिल हो रहीं हैं। मुझको यह उम्मीद है कि आप चारों को एक ही कूपे में जगह मिल जायेगी और मुझ को शायद 2 बर्थ वाले या फिर 4 बर्थ वाले केबिन में जगह मिल जायेगी। और दिल्ली और आगरा में मैं सिंगल रूम प्रेफर करूँगा अगर मिल सका तो। इस तरह हम को एक दूसरे से मिलने में काफी आसानी रहेगी। क्यों गर्ल्स?
सबने हामी में सर हिला दिया।

हम लोगों को कॉलेज से जल्दी छुट्टी हो गई क्योंकि हमने तैयारी करनी थी। सो हम सबने स्टेशन पर मिलने का वायदा किया और अपने घर चले गए।

पूनम और मैंने खाना खाया और मैं अपने कमरे में आकर आराम करने लगा।
थोड़ी देर बाद पूनम भी आ गई, मेरे साथ ही मेरे पलंग पर लेट गई और धीरे से उसका हाथ मेरे कुर्ते के बटन से चलता हुआ मेरे लंड के ऊपर आ गया और पयज़ामे के बाहर से उसके साथ खेलने लगा।

लंड महाशय रात की मेहनत के बाद अभी थोड़ी सुप्त अवस्था में थे। मैंने पूनम की तरफ देखा, उसकी आँखों में देखा और फिर मैं समझ गया कि इसकी चूत चुदवाने के लिए ज़ोर डाल रही है।
मैं उठ कर दरवाज़ा बंद करके फिर लेट गया पूनम के साथ और फिर पूनम अपनी साड़ी थोड़ी सी अपनी टांगों के ऊपर ले आई थी और मेरा भी पायजामा खिसका कर नीचे कर रही थी।

मेरा लंड भी अब धीरे धीरे उन्मुक्त होने लगा था और मैंने पूनम की उठी साड़ी के अंदर हाथ डाल कर देखा, वो भी काफी गर्म हो रही थी।
पूनम ने स्वयं ही अपना ब्लाउज खोल दिया था और ब्रा को भी हटा दिया था तो उसके भी मम्मे उन्मुक्त हो चुके थे।
मैं भी पूनम की बालों से भरी चूत के साथ खेल रहा था और उसकी भग को भी सहला रहा था।

पूनम अब और इंतज़ार किये बगैर मेरे ऊपर अपनी साड़ी को समेट कर बैठ गई और अपने एक खाली हाथ से उसने मेरा लंड को चूत के अंदर डाल दिया और धीरे धीरे से ऊपर नीचे होने लगी।
यदा कदा मैं भी नीचे से धक्का लगा देता था और आहिस्ता आहिस्ता चूत और लंड की लड़ाई तेज़ होने लगी।

मेरे धक्के तेज़ी पकड़ने लगे और फिर जब यह महसूस हुआ कि पूनम की चूत में कम्पन शुरू हो रहा है तो मैंने अपने धक्के बहुत ही तीव्र कर दिए और आखरी पड़ाव पर पहुँच कर मेरे धक्के एक रेल के इंजन की तरह तेज़ी से अंदर बाहर होने लगे थे, लंड एकदम लाल हो रहा था और उसका गुस्सा चूत को भी महसूस हो रहा था और उसने अपनी आदत के मुताबिक खुलना बंद होना शुरू कर दिया था।

पूनम एक लम्बी सांस लेकर मेरे ऊपर से नीचे आ गई और मैंने उससे पूछा- क्यों ठकुराइन, अभी और ताश का पत्ता फेंकूं या फिर अभी और नहीं?
पूनम बोली- बस करो मेरे प्यारे ठाकुर, फिर कभी देखेंगे तुम्हारी पूरी ठकुराई।
फिर हम एक दूसरे की बाँहों में बंध कर सो गए।

रात को हम सब लड़के लड़कियाँ स्टेशन पर मिले।
वहाँ दोनों मैडमों की मदद के लिए मुझको और एक दूसरी लड़की को नियुक्त किया गया।
हम दोनों ने तय किया कहाँ लड़के बैठेंगे और कहाँ लड़कियाँ बैठेंगी। अपनी 4 फ्रेंड्स को एक केबिन दे दिया और इसी तरह बाकी की चार लड़कियों को दूसरे केबिन में एडजस्ट कर दिया और बाकी बची 2 लड़कियों को दो सीट वाले कूपे में बिठा दिया।
इसी तरह लड़को को भी 4-4 वाले 2 केबिन और बाकी को 2 वाले में बिठा दिया, मैडमों को भी एक 2 वाले कूपे में एडजस्ट कर दिया।

जब गाड़ी चली तो खूब बाय बाय हुई और फिर मैं और वो दूसरी लड़की जिसका नाम रेनू था अपनी अपनी बर्थ पर बैठ गए।
थोड़ी देर बाद जब टी टी आया तो सारी टिकट्स दिखा दीं और सारे कूपे भी चेक करवा दिए।
फिर मैं और रेनू ने जाकर मैडमों को बता दिया कि सब ठीक से बैठ गए हैं और टी टी ने भी सब चेक कर लिया है।

गाड़ी सुबह 8 बजे दिल्ली पहुँचने वाली थी तो अब मैं अपनी फ्रेंड्स के साथ जाकर बैठ गया। नेहा ने साड़ी, जस्सी ने सलवार सूट, पूनम ने साड़ी और डॉली ने भी सलवार सूट पहना था।
हम सब में सिर्फ डॉली ही नई थी तो पहले तो वो मुझसे कुछ झिझक रही थी लेकिन धीरे धीरे वो हम सब से वाकिफ हो गई।

मैंने सबसे पहले केबिन को लॉक किया ताकि कोई बाहर से ना आ सके।
अब सब लड़कियों खुल कर बातें करने लगी और नेहा और जस्सी ने डॉली को पिछले दिन हुई हमारी सेक्स कहानी भी बता दी और डॉली से पूछा कि अगर वो चाहे तो कार्यवाही उसी से शुरू करेंगी वो सब!

डॉली कुछ नहीं बोली लेकिन मैं समझ गया कि वो अभी झिझक रही है तो सबसे पहले सारी लड़कियाँ उठ कर मेरे पास आईं और मुझको बहुत ही हॉट किस की लबों पर!

और मैंने भी उनके चूतड़ों को सहला दिया और जस्सी के तो मम्मों को भी दबा दिया।
फिर पूनम उठ कर मेरी गोद में आकर बैठ गई और मैंने उसको बेतहाशा चूमना शुरू कर दिया, यह देख कर जस्सी और साथ में नेहा भी मुझ से आकर लिपट गई लेकिन डॉली अभी भी शरमा रही थी।

हम सब डांस करते हुए डॉली के पास गए और उसका हाथ पकड़ कर मैंने अपने पास खींच लिया और उसके मोटे गोल मुम्मों को छूने लगा और पूनम उसके गोल उभरे हुए चूतड़ों को छेड़ने लगी।
एक ज़ोरदार चुम्मी मैंने उसके होटों पर जड़ दी और बाकी लड़कियों ने भी उसको घेर लिया और उसके जिस्म प्यार से छूने लगी।

पूनम का एक हाथ डॉली की सलवार के ऊपर से उसकी चूत पर चला गया और नेहा ने उसके चूतड़ों को मसलना आरम्भ कर दिया।
मैंने नेहा से पूछा- आप में से कौन कौन मेरा चोदन करना चाहता है?
सबसे पहले नेहा और जस्सी ने हाथ उठाया और फिर पूनम ने और आखिर में डॉली ने।

मैं बोला- नेहा, तुम फैसला करो कि कौन पहले मेरा चोदन करेगा?
नेहा बोली- नई मेंबर होने के नाते तो पहली बारी डॉली की होनी चाहिए लेकिन वो शरमा रही है तो इसकी शर्म खोलने के लिये पूनम को मौका मिलना चाहिए सबसे पहले। क्यों पूनम?

पूनम बोली- नहीं, मैं तो सोमू से रोज़ चुदती हूँ तो सब से पहले जस्सी की बारी होनी चाहये क्यों जस्सी?
जस्सी बोली- ठीक है।
नेहा बोली- सेफ्टी को देखते हुए हम सबको कम से कम कपड़े उतारने चाहिएँ। साड़ी वाली को तो दिक्कत नहीं है, सिर्फ सलवार वाली को परेशानी है?

मैं बोला- किसी को कोई प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए। सलवार वाली और साड़ी वाली, सबको सोमू पीछे से चोदेगा। ठीक है न?
सब लकड़ियाँ बोली- ठीक है, तुम पीछे से शुरू हो जाओ।

जस्सी आई और अपनी सलवार खोल कर उसको नीचे कर दिया और सीट पर हाथ रख दिया और थोड़ी झुक गई।
मैंने भी अपनी पैंट खोल कर उसको टांगों के नीचे किया और थोड़ी सी थूक लगा कर लंड पर, जस्सी की चूत में पेल दिया।
जस्सी थोड़ी गीली हो चुकी थी तो लंड एकदम फटाक से अंदर चला गया।
मैंने नेहा को इशारा किया कि सब एक दूसरे के साथ शुरू हो जाओ और एक दूसरे को खूब आनन्द दो और उनको गर्म भी कर दो।

पूनम डॉली के साथ लग गई और नेहा ने जस्सी के मुम्मे सहलाने शुरू कर दिए।
पूनम ने डॉली की सलवार खोल दी और उसकी सफाचट चूत में उंगली लगाने लगी और दूसरे हाथ से उसके मुम्मे दबाने लगी।
नेहा जस्सी की चूत में हाथ डाल कर उसकी भग को मसलने लगी। भग पर हाथ पड़ते ही जस्सी एकदम उछल पड़ी और स्वयं आगे पीछे होने लगी।
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मैं भी धीरे धीरे शुरू हो कर गाड़ी की स्पीड से मैच करने लगा और जैसे गाड़ी के चलने की स्पीड तेज़ हो रही थी वैसे ही मैं भी अपनी स्पीड को तेज़ दर तेज़ कर रहा था।

नेहा जो जस्सी की चूत पर ध्यान दे रही थी साथ ही उसकी चूत पर पूनम की ऊँगली भी चला रही थी। उसकी उठी हुए साड़ी में से उस की बालों भरी चूत साफ़ झलक दे रही थी और इस झलक का मुझको बहुत ही आनन्द आ रहा था।
मैं बार बार डॉली की सफाचट चूत को देखने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसकी झलक कभी मिलती थी और कभी नहीं भी मिलती थी।

अब जस्सी ने अपनी गांड जल्दी जल्दी आगे पीछे करनी शुरू कर दी थी, मैं समझ गया कि सरदारनी झड़ने वाली है, उसकी कमर को कस कर पकड़ कर मैंने गाड़ी बेहद तेज़ स्पीड पर चला दी और स्पीडी धक्कों के बाद जस्सी का छूट गया और वो मुझसे अपनी गांड जोड़ कर कंपकंपाती हुई रुक गई।

नेहा ने कहा- जस्सी का तो हो गया अब किसकी बारी है?
डॉली खुद ही बोल उठी- अब मेरी बारी है।
सबने कहा- ठीक है, चल शुरू हो जा डॉली।
मैंने कहा- डॉली के शरीर को मैंने देखा नहीं सो डॉली अपनी सलवार तो नीचे कर चुकी है अब वो अपनी कमीज भी ऊपर करे तो उस के मुम्मों के दर्शन हो जाएंगे।

नेहा ने उसकी कमीज़ ऊपर कर दी और उसकी ब्रा भी हटा दी।
सबसे पहले मैंने उसको लबों पर चूमा और फिर उसके गोल मुम्मों पर ध्यान दिया और थोड़ा उनको चूसा और उसकी सफाचट चूत को देखा भी और हाथ भी लगाया।
वो वाकयी में एकदम गीली हो चुकी थी। मैंने उसको बर्थ पर लिटा दिया और उसकी टांगों से सलवार एक पौंचा भी निकाल दिया और फिर उसकी गोरी टांगों में बैठ कर अपने खड़े लंड को उसकी चूत में धकेला।

पहले धक्के में ही लंड पूरा का पूरा अंदर चला गया और डॉली के मुख से एक प्यारी सी आअहाअ निकल गई और मैं रुक गया और डॉली से पूछा- अगर दर्द हो रहा हो तो निकाल लूँ क्या?
डाली के चेहरे का रंग एकदम लाल हो गया और वो ज़ोर ज़ोर से सर हिला हिला कर नहीं नहीं कर रही थी।
सब लड़कियाँ हंसने लगी और बाद में डॉली भी हंस पड़ी।

मेरे लंड के लिए डॉली की चूत एकदम नई नकोर थी तो वो भी मज़े ले ले कर डॉली को चोद रहा था।
पूनम डॉली के उरोजों पर अटैक कर रही थी और नेहा जस्सी के मुम्मों संग खेल रही थी।
और मैं कभी स्लो और कभी तेज़ स्पीड पर धक्का धक्की में लगा हुआ था। डॉली के दोनों हाथ मेरी गर्दन में लिपटे हुए थे और उसके चूतड़ उठ उठ कर लंड मियाँ का स्वागत कर रहे थे।
वो काफी ज़्यादा गर्म हो चुकी थी और उको तीव्र आनन्द की अनुभूति हो रही थी।

जैसे कि उम्मीद थी, वो नए लंड के साथ पहली बार के मिलन के आनन्द को ज़्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर सकी और ओह्ह करती हुई जल्दी ही झड़ गई।
उसके झड़ने के टाइम उसके शरीर में इतना तीव्र कम्पन हुआ कि नेहा और पूनम उसको पकड़ कर बैठी तब उसको कंट्रोल कर सकी।

अब नेहा की बारी थी तो मैंने उससे पूछा- ऐ मलिका ऐ आलिया कैसे चुदना पसंद करेंगी आप?
नेहा भी उसी लहजे में बोली- ऐ मेरे अदना ग़ुलाम, तुम्हारी मलिका तुम पर चढ़ाई करना चाहती है।
मैं बोला- जो हुक्म सरकारे आली, यह आपका खाविन्द आपके लिए तैयार बैठा है, हुक्म कीजिये।
नेहा खाविन्द को ख़ाकसार समझ थी पर खाविन्द का मतलब होता है पति… और मैं मन ही मन मुस्कराते हुए चुप रहा।

नेहा बोली- ऐ ग़ुलाम, हम तुम्हारा ‘बला ए जबर’ करना चाहते हैं।
मैंने सर झुका कर कहा- मलिका को पूरा अख्तियार है।
और मैं जा कर बर्थ पर लेट गया, नेहा अपनी साड़ी उठा कर मेरे ऊपर बैठ गई और लंड को अपनी चूत में खुद ही डाला।
वो भी बहुत गीली थी तो बैठते ही उसकी चूत मेरे पेट के साथ आकर जुड़ गई।
मैंने कोई धक्का मारने की कोशिश नहीं की और वो खुद ही धक्कम पेलम में लगी रही। क्योंकि वो 2 बार चुदाई देख चुकी थी सो वो भी बेहद गीली थी।

उसकी धकापेल जल्दी ही स्पीड पकड़ने लगी। मैंने उसके मुम्मों को उसके ब्लाउज के ऊपर से पकड़ा हुआ था और चुचूकों को मसल रहा था।
पूनम भी उसके चूतड़ों को सहला रही थी और जस्सी मेरे ऊपर बैठी नेहा को लबों पर चूम रही थी।
डॉली खड़े होकर पूनम के मुम्मों के साथ खेल रही थी।
हर कोई अपने काम में बिजी था सिवाए मेरे क्यूंकि मेरा लंड मेरा काम कर रहा था।

जैसे ही नेहा को आनन्द आने लगा चुदाई का, उसने अपने धक्के तेज़ कर दिए और उसकी जांघें जो मेरे पेट से लग रही थी। अब काफी गर्म हो गई थी और मुझको महसूस हो रहा था कि वो भी जल्दी छूटने वाली है।
मैंने हुक्म के खिलाफ नीचे से ज़ोरदार धक्के मारने शुरू कर दिए और इस कोशिश में था कि नेहा जल्दी से छूटे तो मैं अपने केबिन में जाऊँ।
मुझको यह डर सता रहा था कि कहीं मैडम चेकिंग पर ना निकल पड़ें।

मैंने अब चुदाई का काम अपने हाथों में ले लिया और अपने हिसाब से स्पीड तेज़ कर दी, पूनम को इशारा किया कि वो नेहा की चूत को रगड़े और उसकी भग को सहलाये।
पूनम ने यही किया और शीघ्र ही नेहा ने चुदाई की स्पीड अपने आप तेज़ कर दी। मेरे नीचे से ज़ोर के धक्के की चूत घिसाई जल्दी ही अपना रंग लाई और नेहा एक ज़ोर की हुँकार भर कर कर धराशयी हो गई और मेरे ऊपर पूरी तरह से लुढ़क गई।

लड़कियों ने मिल कर नेहा को मुझसे अलग किया और मैंने जल्दी से अपने कपड़े ठीक किये और पूनम से पूछा कि क्या उसकी इच्छा है चुदवाने की?
उसने कहा- नहीं सोमू, मैं तो दिन को भी तुम्हारे साथ ही थी और तुमसे चुदी हूँ।

मैंने केबिन के बाहर देखा कि कोई देख तो नहीं रहा और मैदान साफ़ देख कर मैं जल्दी से अपने केबिन की तरफ चला गया और दरवाज़ा खोल कर मैं अंदर चला गया।
मेरा साथी बड़ी गहरी नींद में सो रहा था।
मैंने घड़ी में देखा तो मुझको तीन लड़कियों को चोदने में तकरीबन एक घंटा लग गया था।

कहानी जारी रहेगी।
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