अपने चोदू को माँ का पति बनवाया-1

(Apne Chodu Ko Maa Ka Pati Banavaya- Part 1)

संसार का सब से पुराना या अनादिकाल से जो खेल चला आ रहा वह खेल चूत और लंड का ही होगा। पता नहीं कब कैसे इसका ज्ञान अपने आप लड़के और लड़की को लग जाता है। आज तो नेट का जमाना है और सब कुछ वहीं से जानकारी मिल जाती है मगर यह जानकारी तब भी मिल जाती थी जब नेट नहीं था।
खैर मैं यहाँ पर किसी को कोई ज्ञान बाँटने नहीं आई हूं। किसी को कहाँ पता लगा और कैसे लगा यह हर एक के साथ अलग अलग कहानी हो सकती है। मगर लंड का खड़ा होना और उसको हिलाने से उसमें से कुछ निकलना … यह सब लड़कों को छोटी उमर में ही पता लग जाता है. वैसे ही लड़कियों को जैसे ही माहवारी शुरू हो जाती है तो चूत और लंड का ज्ञान मिल जाता है। मगर जो
आज के जमाने में बड़े घरों या परिवारों के बच्चे होते हैं, उन्‍हें ज़रूरत से ज़्यादा ही ज्ञान मिल जाता है।
ऐसे ही एक परिवार की कहानी मैं आज बताने जा रही हूँ।
यह कहानी काल्पनिक ही समझ कर पढ़ी जाए. अगर किसी की जिंदगी में ऐसा कुछ हुआ हो या मिलती हो तो उसके लिए मुझे कोई दोष ना दिया जाए बल्कि यह सिर्फ़ एक इत्तेफ़ाक ही समझा जाए.

अमीषा अपनी माँ लीना के साथ रहती थी जो अपने पति से अलग हो चुकी थी या कहा जा सकता है कि उसने अपने पति से तलाक़ ले लिया था या वो विधवा थी मगर उसके बारे में पक्का कुछ भी नहीं कहा जा सकता था. लीना किसी अच्छी कंपनी में ऊँचे ओहदे पर काम करती थी जिस कारण उसके घर में पैसों की कोई कमी नहीं थी। जब से अमीषा ने होश संभाला था वो यही देखती आई थी कि माँ रात को घर पर बहुत देर से आती थी। वापिस आने के बाद उसके पास इतना भी समय नहीं होता था कि वो अपनी बेटी से उसका हालचाल भी पूछ सके।

जब अमीषा को कुछ समझ में आने लगा तो वो यह सोचा करती थी आख़िर आफिस में ऐसा क्या काम होता है कि माँ को किसी दिन भी दिन घर पर जल्दी आने का समय नहीं मिलता। धीरे धीरे वो कुछ ज़्यादा ही सोचने लग गई। फिर उसने सोचा की बिना किसी को बताए वो कुछ छानबीन करेगी।

माँ ने उसे अलग से सोने का कमरा दिया हुआ था और वो खुद अकेली ही सोया करती थी। उसने माँ की अनुपस्थिति में उसके कमरे में जाकर देखा भी, मगर उसे कोई ऐसी चीज़ नहीं मिली जिससे वो किसी नतीजे पर पहुँचती। माँ के कमरे में जो अलमारी थी उस पर लॉक लगा रहता था। जिससे वो उसे खोलकर नहीं देख सकी।

कुछ दिनों बाद अमीषा ने महसूस किया कि उसकी माँ अब कुछ ज्‍यादा ही खुश नज़र आने लगी और घर पर भी टाइम से आने लगी थी। उसके साथ आफिस का कोई आदमी भी साथ में होता था। वो कुछ समय बाद वापिस चला जाता था।
उसकी माँ ने अमीषा को बताया हुआ था कि वो आदमी जिसे वो अंकल कहती थी वो माँ के आफिस में ही काम करता था। जब वो माँ के साथ होता था तो लीना उसे कह देती थी कि तुम जाओ अपना काम करो। इससे अमीषा के मन में कुछ ज़्यादा ही जिज्ञासा होने लगी कि वो उसे ऐसा क्‍यों कहती है?

धीरे धीरे यह लगभग रोज का ही काम हो गया था कि वो घर पर आता था और कुछ समय उसकी माँ के पास रहकर वापिस चला जाता था। आख़िर एक दिन उसने ठान लिया कि वो माँ से छुपकर देखेगी की यह लोग क्या करते हैं।
अमीषा बहुत देर तक यही सोचती रही कि कैसे वो देख और सुन पाएगी क्योंकि उस कमरे में देखने के लिए जब तक अंदर ना जाया जाये कुछ भी नहीं देखा जा सकता। पूरी तरह से जब वो देख चुकी की कोई साधन नहीं है, तो उसकी नज़र कमरे की खिड़की पर पड़ी जो मोटे मोटे पर्दों से ढकी हुई थी। आख़िर उसने परदे के बीच में एक छोटा सा छेद बना दिया जिससे बाहर से अंदर का सब कुछ नज़र आता था जैसे की किसी की होल से नज़र आता है।

जब उसकी माँ और वो आदमी आ गये तो अमीषा कुछ देर इंतजार करने के बाद बाहर आकर उसी जगह से अंदर का नज़ारा देखने लगी। जैसे ही उसने अंदर देखा तो वो बहुत हैरान हो गई। दोनों पूरी तरह से नंगे थे और एक दूसरे की बांहों में कैद थे। उसको कुछ सुनाई तो नहीं पड़ रहा था मगर देख सकती थी कि अंदर क्या हो रहा है।

उसने देखा कि वो आदमी माँ से कुछ बोल रहा था जिसको सुनकर उसकी माँ अपने हाथों और घुटनों के बल हो गई। उसके बाद वो आदमी उसके पीछे आकर अपना खड़ा हुआ लंड माँ की चूत में डालकर धक्के मारने लगा। अब माँ के मम्‍मे लटके हुए थे और मां की चूत को मिलने वाले हर धक्के के साथ झूले की तरह हिल हिलकर आगे पीछे डोल रहे थे। थोड़ी देर बाद उसने देखा कि उसकी माँ भी अपनी चूत से लंड को पीछे से धक्का मार रही थी। अब उसे पता लगा कि उसकी माँ उस आदमी को घर पर बुलाकर अपनी चूत चुदवाती है।

यह सब देखकर अमीषा की चूत में कुछ होने लगा और वो अपनी चूत को खुजलाने लगी। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था, कि क्या हो रहा है? उसने खारिश करते हुए चूत के दाने को दबाना और मसलना शुरू किया और उसे अच्छा भी लगने लगा।

अगले दिन वो अपनी माँ लीना के कमरे में जब गई तो उसने देखा कि आज माँ अलमारी बंद करना भूल गई थी। उसने अलमारी को खोला तो कुछ खास नजर नहीं आया। तभी उसकी नजर कपड़ों के नीचे पड़े एक छोटे से बैग पर गई जिसमें कुछ डीवीडी थी। उसको लगा कि इसमें कुछ खास ही होगा जो माँ ने इतना छुपाकर रखा हुआ है वरना बहुत सारी डीवीडी तो बाहर ही रखी हुई हैं।

यही सोचकर उसने वो बैग उठा लिया और उसको डीवीडी प्लेयर पर लगाकर देखने लगी। जैसे ही वो चलनी शुरू हुई उसमें पूरी चुदाई थी। मगर हैरानी की बात तो यह थी उसमें उसकी माँ मज़े लेकर चुदवा रही थी। उसने देखा कि लीना जिससे चुद रही थी उसको बोल रही थी ‘जोर जोर से चोद साले … तेरी बहन की चूत नहीं है।’ फिर उसको बोली ‘हट साले, चल नीचे आ मेरे… मैं चोदूंगी आज तुझे।’

इसके बाद वो उठकर उसके लंड पर बैठ गई और ज़ोर ज़ोर से उछलने लगी उसके मम्‍में ऊपर नीचे हो रहे थे, जैसे की वो कोई नाच कर रहे हों।
कभी माँ नीचे होती हुई और कभी लंड के ऊपर कभी हाथों और घुटनों के बल झुकी हुई पीछे से लंड लेती, कभी उस की गोदी में बैठकर।

इस तरह से अमीषा ने एक डीवीडी पूरी होते ही जिज्ञासावश दूसरी भी लगा ली इसमें भी वो ही सबकुछ हो रहा था मगर लड़का कोई और था। जब तीसरी डीवीडी लगाई तो उसमें दो लड़के थे जो माँ को चोद रहे थे। इस तरह से उसने देखा कि सभी डीवीडी में उसकी माँ की चुदाई हो रही थी। जब उसका ध्यान गया तो उसे पता लगा कि बहुत टाइम हो चुका है और माँ कभी भी आ सकती है तो उसने जल्दी से सभी डीवीडी उसी तरह से बैग में डालकर जहाँ से उठाई थी वहीं रखकर वापिस कमरे से बाहर आ गई।

यह सब देखकर उसका भी दिल मचलने लगा। उनकी लगातार अपनी चूत में मीठी मीठी खुजली का अहसास बहुत अच्‍छा लगता।

अगले दिन जब वो कॉलेज गई तो उसने अपनी एक खास सहेली सुमन से योनि पर उंगली लगाकर बिना उसका नाम लिये ही पूछा- क्या तुझे कभी इसमें कुछ अहसास होता है?
परन्‍तु सुमन पूरी तरह से चूत की खिलाड़ी थी वो तुरन्‍त बोली- क्यों तूने कभी इसका यार इसके अन्‍दर नहीं लिया क्‍या?
अमीषा ने कहा- क्या मतलब? इसका यार कौन है?
“पगली, मैं लण्‍ड की बात कर रही हूँ वो ही इसका यार होता है।” सुमन ने जवाब दिया।

अमीषा ने भी झिझकते हुए उससे पूछा ही लिया- तुमने लिया है क्‍या?
उसने कहा- बहुत बार… बहुत मज़ा मिलता है। मगर पहली बार कुछ मज़ा नहीं आयेगा बस कुछ दर्द होगा और खून भी निकलेगा। इसके बाद तो मत पूछ कि कितना मज़ा मिलता है। जब आदत पड़ जाएगी तो इस मज़े के बिना रहा भी नहीं जाएगा। तुम कहो तो तुम्‍हारी चूत को भी मिलवा दूं किसी यार से?
अमीषा बोली- मिलवा दे मगर तू भी साथ में रहना क्योंकि मुझे डर लगता है।
“ठीक है तुम छुट्टी के बाद मेरे साथ चलना..” सुमन बोली।

छुट्टी के बाद अमीषा सुमन के साथ उसके घर चली गई।
सुमन बोली- कुछ देर आराम कर ले, तेरी चूत का यार अभी आता ही होगा।

खैर अभी आधा घंटा भी नहीं बीता कि एक लड़का आ गया वो उससे बोली- रवि भैया, यह मेरी सहेली है। इसकी भी चूत आजकल अपने यार को ढूंढ रही है। इधर तुम्हारा लंड भी कोई नई चूत ढूंढ रहा है।
इतना सुनते ही रवि की पैंट में ही उसका लंड फड़फड़ाने लगा; वो बोला- ठीक है, मैं अभी आता हूँ।

वो दूसरे कमरे जाकर अपने कपड़े उतार कर आ गया। उसका टाईट लंड छत को सलामी मार रहा था। उसने बिना झिझके अमीषा को पकड़कर नंगी कर दिया और सुमन को वहां से जाने को बोला। सुमन ने कहा- नहीं … यह घबराएगी इसलिए मुझे भी यहीं पर रहना है। मुझसे क्या शर्म कर रहे हो। मैं तो कई बार तुम्हें एन्‍जॉय कर चुकी हूं।

इधर रवि का पूरा ध्‍यान अब अमीषा की तरफ था, वो अमीषा के छोटे छोटे मम्मो को सहलाकर उसके होंठों को चूमने लगा। उसकी जीभ को अपनी जीभ से लड़ाने लगा। अब अमीषा को भी हल्‍की हल्‍की खुमारी छाने लगी। उसकी चूत गीली हो गई।

रवि पक्का चूत का खिलाड़ी था। उसने जब देखा कि चूत से पानी निकलने लगा है उसने अपने लण्‍ड का टोपा नीचे करके उसकी चूत के मुँह पे टिकाया और अपना मुँह उसके मुँह पर लगाकर बल्कि दबाकर ताकि उसकी आवाज़ ना निकले एक जोरदार शॉट मारा पहले ही शॉट से उसने अपना टोपा अंदर कर दिया था अब क्योंकि अमीषा के मुँह से कोई आवाज़ नहीं निकल रही थी मगर वो दर्द के मारे अपने हाथ पैर जोर ज़ोर से पटकने लगी।
मगर रवि को कोई फर्क नहीं पड़ा, उस पर ऐसा जनून सवार हो चुका था कि पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में उतार दूं। अगले तीर चार शॉट्स में वो काम भी पूरा कर लिया। फिर उसने अपना मुँह उसके मुँह से हटाया वो चिल्ला रही थी और बोल रही थी- इसको निकालो मैं मर रही हूँ…

सुमन ने उससे कहा- तुम को बोला था कि पहली बार जब इसका यार इसको मिलेगा तो यह उसे अपने अंदर लेते हुए रोएगी। मगर फिर बार बार उसी को याद करेगी। अब रोना छोड़ो, यह अंदर चला गया है, और पूरा प्यार करके ही बाहर आयगा। अब तुम इसका आनंद लो।

कुछ देर बाद रवि ने लंड का काम करना शुरू कर दिया। वो अपना लंड आधे से ज़्यादा बाहर निकलकर फिर जोर का ध्‍क्का मारकर अंदर करता। मगर अमीषा इससे तड़फ़ रही थी।

धीरे धीरे अमीषा को भी कुछ मज़ा आने लगा। अब वो रोना छोड़ चुकी थी और अपनी टाँगें फैलाकर रवि का लंड अंदर करवा रही थी।
20 मिनट की चुदाई के बाद रवि ने अपना लंड बाहर निकाल लिया और लंड का माल उसके मुँह, मम्मों पर गिरा दिया।

कहानी जारी रहेगी.
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कहानी का अगला भाग: अपने चोदू को माँ का पति बनवाया-2

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