बहन का लौड़ा -55

(Bahan Ka Lauda-55)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

अभी तक आपने पढ़ा..

राधे- नहीं मीरा.. मैंने पहले भी कहा था मैं तुमसे सच्चा प्यार करता हूँ। ऐसी हरकत वो करते हैं जिनको सिर्फ़ जिस्म की भूख होती है.. उनका प्यार एक हवस होता है.. मैं तुम्हारे जिस्म से नहीं.. तुमसे प्यार करता हूँ।
राधे की बात सुनकर मीरा बहुत खुश हो गई और ‘आई लव यू राधे’ कह कर उसके लिपट गई।
अब दोनों साथ-साथ बाहर गए और ममता को देख कर हँसने लगे क्योंकि बेचारी वो बहुत डरी हुई थी। मीरा ने उसे प्यार से समझा दिया कि उसके स्कूल जाने के बाद जो चाहो करो.. मगर उसके सामने ऐसी हरकत दोबारा मत करना।
तो बस सब ठीक हो गया, मीरा ने नाश्ता किया और स्कूल चली गई। इधर राधे तो रात का भूखा था.. वो कहाँ ममता को छोड़ने वाला था। बस मौका मिला नहीं.. कि ममता को ले गया कमरे में.. और शुरू हो गया चुदाई में..

अब आगे..

दोस्तो, अब यहाँ की चुदाई होने दो.. रोज-रोज नहीं लिखूँगी.. वहाँ कुछ नया होगा तो वो देख लेना।

रोमा बस टकटकी लगाए नीरज को देख रही थी कि अब क्या बोलेगा..
नीरज- अरे क्या हुआ मेरी जान.. ऐसे क्या देख रही हो.. कोई बहुत बड़ा काम नहीं है.. बस आज मेरे लौड़े को चूस कर ठंडा कर दो.. तो मज़ा आ जाएगा।

रोमा- ओह्ह.. बस इतनी सी बात.. मैं डर गई थी.. क्या पता क्या कहोगे..
नीरज- तुम समझी नहीं जान.. लौड़े को मुँह में ठंडा करना है.. इसका रस पीना होगा.. अब ‘ना’ मत कहना..

इतने दिनों से रोमा लौड़े को चूस कर आदी हो गई थी.. थोड़ा-थोड़ा रस जो आता है.. उसको चाट भी चुकी थी.. तो अब उसको पूरा रस पीने में घिन नहीं आएगी.. यही सोच कर नीरज ने सब कहा।
रोमा- अरे ये क्या बात हुई.. चूस कर निकाल दूँगी ना.. लेकिन पीना होगा ये नहीं.. प्लीज़…

नीरज- अरे यार.. अब बस भी करो.. हर बार ना-ना.. कभी तो एक बार में मान लिया करो.. और वैसे भी कई बार लौड़े की चुसाई के वक्त थोड़ा रस तो गटक ही चुकी हो.. समझी..
रोमा- अच्छा मेरे जानू.. माफ़ करो.. लाओ आज इस निगोडे लंड को मुँह में ठंडा करती हूँ।

नीरज तो यही चाहता था.. तो बस वो बिस्तर पर पैर लटका कर बैठ गया और रोमा सोए हुए लौड़े को मुँह में लेकर जगाने लगी।
नीरज- गुड माय स्वीट जान.. ऐसे ही चूसती रहो.. आह्ह.. खड़ा हो रहा है मेरा राजा बाबू.. आह्ह.. चूस..

रोमा अब लौड़ा चुसाई में एक्सपर्ट हो गई थी। वो बड़े प्यार से पूरे लंड को जड़ तक मुँह में लेती और होंठ भींच कर पूरा बाहर निकालती.. जिससे नीरज स्वर्ग की सैर करने लगा था और उसकी आँखे बन्द थीं।

नीरज- आह्ह.. ऐइ उफ़फ्फ़.. चूस मेरी जान.. बहुत मज़ा आ रहा है.. आह्ह.. तू बहुत आह्ह.. अच्छा चूस रही है.. तेरी चूत से ज़्यादा मज़ा मुँह चोदने में आह्ह.. रहा है.. आह्ह.. चूस..

दस मिनट तक रोमा लौड़े को आम की तरह चूसती रही और अब आम चूसेगी तो उसमें से रस भी निकलेगा ना.. बस नीरज के आम से आमरस.. नहीं.. नहीं.. कामरस निकल कर सीधा रोमा के गले में गिरा.. जिसे बाहर निकालने का मौका भी नहीं मिला बेचारी को.. क्योंकि नीरज ने उसका सर पकड़ लिया था और ज़ोर-ज़ोर से दो-तीन झटके मुँह में मार कर वो झड़ने लगा।

नीरज- आह.. आह.. बस आह.. निकल गया जान.. आह्ह.. अब बस पूरा लंड चाट कर साफ कर दे.. आह्ह.. मज़ा आ जाएगा मुझे आह्ह.. उफ़फ्फ़..

रोमा को कामरस का टेस्ट थोड़ा अजीब लगा.. मगर इतना बुरा भी नहीं लगा। वो पूरा गटक गई और जीभ से लौड़े को चाट-चाट कर साफ कर दिया।
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उस वक्त नीरज के चेहरे की ख़ुशी देखने लायक थी.. और रोमा तो अंधविश्वास.. अरे नहीं.. नहीं.. लंड विश्वास में अंधी हो गई थी। उसको तो सब सावन के अंधे की तरह हरा-भरा नज़र आ रहा था। मगर नीरज जैसा हरामी उसको सच्चा प्यार करेगा.. ये वो नहीं जानती थी.. हाँ हो सकता है कि नीरज का दिल बदल जाए.. मगर ऐसा होगा या नहीं.. ये बात बाद में पता लग जाएगी। आज आप इसके बारे में सोच कर मज़ा खराब मत करो।

नीरज ने रोमा को पकड़ा और उसको गले से लगा लिया- ओह्ह.. माय स्वीट जान.. तुमने आज मुझे खुश कर दिया।
रोमा- हाँ जानू.. मुझे भी बहुत मज़ा आया आज..
नीरज- अच्छा रोमा.. तुम्हारी मॉम आज आएगी नहीं.. तो तुम अकेली घर में कैसे रहोगी?
रोमा- मॉम ने कहा है.. या तो मैं टीना के घर चली जाऊँ या उसको अपने घर बुला लूँ.. मगर मैं ऐसा कुछ नहीं करूँगी..

टीना का नाम सुनते ही नीरज की आँखों में चमक आ गई.. उसके दिल से आवाज़ आई कि एक और कुँवारी चूत का बंदोबस्त हो सकता है।
नीरज- तो तुम क्या करोगी?
रोमा- अरे मेरे जानू.. आज पूरा दिन और पूरी रात मैं तुम्हारे साथ रहूँगी.. खुल कर मज़ा करेंगे.. कोई टेन्शन नहीं है।
नीरज- नहीं नहीं.. तुम घर नहीं जाओगी तो पड़ोस वाले तुम्हारी माँ को बोल देंगे।
रोमा- अरे मैं उनसे कह दूँगी.. मैं टीना के घर थी।

नीरज- अरे मेरी भोली रोमा.. ऐसा कहोगी तो तुम्हारी मॉम टीना के घर जाएगी उसकी माँ का शुक्रिया अदा करने.. कि तुमको रात वहाँ रखा।
रोमा- अरे हाँ.. ये तो मैंने सोचा ही नहीं… हाँ, माँ जरूर वहाँ जाएगी।

नीरज- देख शाम तक तू मेरे साथ मज़े कर.. उसके बाद टीना को अपने घर लेकर जा.. रात को मैं चुपके से तुम्हारे घर आ जाऊँगा। उसके बाद वहीं मज़ा करेंगे ना..
रोमा- आप पागल हो गए हो क्या.. टीना को कहाँ कुछ पता है और उसके सामने कैसे होगा?
नीरज- तू बहुत भोली है.. उसको पता नहीं चलेगा.. उसके सो जाने के बाद मैं आऊँगा।

रोमा- नहीं नहीं.. वो उठ गई तो.. ना बाबा.. मैं ऐसा रिस्क नहीं ले सकती..
नीरज- अच्छा सुन.. मेरे पास नींद की दवा है.. तू उसको सोने के पहले किसी तरह वो दवा दे देना.. उसके बाद सुबह तक वो आराम से सोती रहेगी और हम पति-पत्नी की तरह पूरी रात मज़ा करेंगे।
रोमा- मगर ये सब ठीक नहीं होगा नीरज तुम..

नीरज- अरे अगर-मगर को मारो गोली.. ये सबसे बेस्ट आइडिया है.. मुझे तुम्हारे घर से ज़्यादा सेफ जगह नहीं दिख रही।
रोमा- नहीं अभी बहुत वक्त है.. रात होने में.. और शाम तक हम बहुत बार चुदाई कर सकते हैं उसके बाद तो थक जाएँगे ना.. फिर रात को कहाँ मूड बनेगा।

नीरज को लगा रोमा सही कह रही है मगर उसकी नज़र तो टीना पर थी और वो हरामी नंबर वन था। झट से उसके शैतानी दिमाग़ में आइडिया आ गया।

नीरज- अरे मेरी जान.. अगर शाम तक मैं तुम्हें चोद सकता तो कभी नहीं कहता ये बात, मुझे बहुत जरूरी काम से अभी जाना होगा.. अब एक बार तो चुदाई की हमने.. कहाँ मज़ा आया.. रात को पूरा मज़ा लेंगे ना..
रोमा- लेकिन कुछ देर पहले तो तुमने कहा था कि शाम तक मज़ा करेंगे?
नीरज- अरे मैं भूल गया था.. मेरे अंकल आने वाले हैं.. नहीं तो तुमको रात यहाँ ना रोक लेता.. अब तू सोच मत.. बस ‘हाँ’ कह दे..

रोमा बेचारी कहाँ उसके नापाक इरादों को जानती थी.. वो हर बार उसकी बातों में आ जाती.. बस उसने ‘हाँ’ कह दी।

रोमा- अच्छा बाबा.. उसको बुला लूँगी.. मगर वो दवा मुझे दे दो.. ऐसे वो उठ सकती है और हाँ एक बार और करेंगे अभी.. उसके बाद मुझे घर छोड़ आना। अब स्कूल का वक्त तो निकल ही गया है।
नीरज- अरे नहीं.. एक बार और करेंगे तो बहुत वक्त हो जाएगा.. अंकल कभी भी आ सकते हैं।

रोमा ने बहुत कहा मगर नीरज नहीं माना और उसको कपड़े पहना कर उसके घर के पास छोड़ आया। उसको नींद की दवा भी दे दी और खुद वहाँ से चला गया।

जाते हुए वो रोमा के उदास चेहरे को देख कर मुस्कुरा रहा था और अपने लौड़े पर हाथ रख कर बड़बड़ा रहा था।

नीरज- मेरी जान.. मैं जानता हूँ.. तू अधूरी रह गई.. मगर अभी तुझे पूरी कर देता तो तू रात को टीना को नहीं बुलाती और मुझे एक कच्ची चूत से हाथ धोना पड़ जाता। अब तू देख आज की रात में कैसे दो चूतों की सवारी करता हूँ।

हैलो दोस्तो.. कहाँ खो गए.. यह कहानी तो अजीब ही होती जा रही है.. मगर आपको मज़ा भी खूब आ रहा होगा ना.. तो अब रात का इन्तजार करो.. तब तक राधे के हाल देख लो।

ममता की चूत और गाण्ड को जम कर चोदने के बाद अब राधे आराम से लेटा हुआ था और ममता भी नंगी उसके सीने पर सर रख कर पड़ी थी.. तभी फ़ोन की घंटी बजी..

दोस्तो, उम्मीद है कि आप को मेरी कहानी पसंद आ रही होगी.. मैं कहानी के अगले भाग में आपका इन्तजार करूँगी.. पढ़ना न भूलिएगा.. और हाँ आपके पत्रों का भी बेसब्री से इन्तजार है।
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