बहन का लौड़ा -54

(Bahan Ka Lauda-54)

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अभी तक आपने पढ़ा..

रोमा के जलवे देख कर नीरज का लौड़ा तना हुआ था। जब उसने लंड को आज़ाद किया.. वो रोमा को सलामी देने लगा। रोमा तो लंड देखते ही बेताब हो गई और झट से अपने घुटनों पर बैठ कर लंड को चूसने लगी।

अब आगे..

नीरज ने जल्दी से फ़ोन दोबारा उठा लिया और उस सीन को रिकॉर्ड करने लग गया, रोमा अपनी धुन में लगी रही।
नीरज- आह्ह.. चूस मेरी जान.. आह्ह.. ले पूरा मुँह में ले.. आह्ह.. तू साली बहुत कमाल का चूसती है।

कुछ देर तक रोमा लंड को चूस कर मज़ा लेती रही.. उसके बाद उसकी चूत की गर्मी बढ़ गई.. तो वो घोड़ी बन गई और उसने नीरज से कहा- जल्दी से घुसा दो लौड़ा.. अब बर्दाश्त नहीं होता..

नीरज ने जल्दी से फ़ोन सैट किया और रोमा की ताबड़तोड़ चुदाई में लग गया।

रोमा- आह्ह.. आह्ह.. चोदो मेरे जानू.. आह्ह.. मज़ा आ रहा है.. अफ सस्स एयेए..

नीरज स्पीड से रोमा को चोद रहा था और उसकी गाण्ड पर हाथ घुमा रहा था।
नीरज- आह्ह.. ले जान.. उफ़फ्फ़ तेरी गाण्ड भी बहुत मस्त है.. आह्ह.. आज इसका भी मुहूरत कर ही देता हूँ.. आह्ह.. आह्ह..
रोमा- वो बाद की बात है.. आह्ह.. फास्ट.. फास्ट.. अफ चोदो आह..
करीब 20 मिनट तक नीरज रोमा को पेलता रहा.. उसके बाद दोनों ठंडे पड़ गए और आराम से लेट गए।

दोस्तो, 20 मिनट का यह खेल कैमरे में कैद हो गया या यूँ कहो कि रोमा की जिंदगी कैद हो गई। अब यह वीडियो क्या खेल दिखाएगा.. ये तो वक़्त आने पर पता लग ही जाएगा।

नीरज और रोमा ठंडे पड़े हुए बस एक-दूसरे को देख रहे थे.. पता नहीं क्या सोच कर रोमा हँसने लगी।
नीरज- अरे क्या हुआ मेरी जान.. तुम क्यों हंस रही हो?

रोमा- कुछ नहीं अपने लौड़े को देखो.. कैसे मुरझा कर दोनों पैरों में घुसा हुआ है जैसे मुझसे डर रहा हो।
नीरज- अच्छा इसलिए हँसी आ रही है.. ये डर नहीं रहा.. बस जरा नाराज़ है तुमसे.. समझी..
रोमा- अरे नाराज़ क्यों होगा भला.. अभी तो इसने चूत का मज़ा लिया है।
नीरज- नहीं.. ये कह रहा है.. इतने दिन से बस चूत का मज़ा दे रही है.. अपनी मखमली गाण्ड में क्यों नहीं घुसवाती मुझे..
रोमा- नहीं नीरज प्लीज़.. तुम्हें मेरे प्यार की कसम है.. तुम गाण्ड का नाम भी मत लेना..

नीरज- अरे तुमने इतनी सी बात के लिए कसम दे दी जान..

रोमा- यह इतनी सी बात नहीं है.. प्यार में मैंने अपनी चूत तुमको दे दी.. अब जब हम शादी करेंगे.. तो सुहागरात में क्या नया होगा.. कुछ भी तो नहीं ना.. बस ऐसे ही चुदाई और क्या?
नीरज- मैं कुछ समझा नहीं.. गाण्ड का सुहागरात से क्या सम्बन्ध?
रोमा- है मेरे जानू.. ज़रा सोचो.. अगर उस रात तुम मेरी चूत के बजाय गाण्ड मारोगे.. तो तुमको कितना मज़ा आएगा और मुझे दर्द होगा तभी तो लगेगा ना.. हमारी सुहागरात बनी है.. समझे तुम?
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नीरज- चल ठीक है.. तुमने कसम दी तो मैं मान लेता हूँ.. मगर एक और बात है जो तुम्हें आज ही करनी होगी..
रोमा- गाण्ड नहीं मरवाऊँगी.. इसके अलावा जो कहोगे कर लूँगी.. बोलो..

अरे बस बस बस.. ब्रेक लगाओ यार.. वहाँ मेन हेरोइन गुस्से में लाल है.. और आप लोग यहाँ बैठे हो.. चलो अब यहाँ से यार.. कुछ तो रहस्य बाकी रहने दो.. कि नीरज क्या कहेगा.. तो चलो वहाँ का हाल देख लेते हैं।

राधे ज़बरदस्ती मीरा को कमरे में ले गया और बिस्तर पर बैठा दिया।
मीरा- राधे क्या है ये.. छोड़ो मेरा हाथ.. यहाँ क्यों लाए मुझे?

राधे- मेरी जान.. गुस्से को काबू करो.. ऐसा क्या हो गया.. जो तुम आग बबूला हो रही हो?
मीरा- उस ममता ने क्या किया.. तुम नहीं जानते.. क्या ऐसे कैसे अन्दर आ गई.. और मेरे सामने तुम्हारा लौड़ा चूस रही थी.. छी: उसको ज़रा भी शर्म नहीं आई?

राधे- अरे इतना भी कोई पहाड़ नहीं टूट गया.. तूने ही तो उसको मुझसे चुदवाया है.. अब उसने लौड़ा चूस लिया तो क्या हो गया.. समझो..

मीरा- हाँ.. मैंने उसकी भलाई के लिए ऐसा किया.. मगर उसको सोचना चाहिए कि हम पति-पत्नी हैं.. शादी नहीं हुई तो क्या हुआ.. दिल से मैंने आपको पति मान लिया है और दुनिया की कोई भी औरत अपने सामने अपने पति को किसी और के साथ नहीं देख सकती।

राधे- अरे बाप रे.. तू तो आज डेंजर जोन में चली गई.. अच्छा ठीक है उसको प्यार से समझा देंगे.. देख मेरी जान.. पापा को कुछ ना पता लगे इसलिए ममता को खुश रखना होगा.. कहीं जल्दबाज़ी में लिया फैसला हमारे लिए गलत हो सकता है.. तुम समझ गई ना.. अब चलो मूड ठीक करो.. वो बेचारी खुद बहुत ज़्यादा डरी हुई है।

मीरा- हाँ तुमने ठीक कहा… पता नहीं मुझे इतना गुस्सा क्यों आ गया.. चलो अब नास्ता करते हैं.. बहुत भूख लगी है.. वैसे भी रात को तुम जल्दी सो गए थे क्या?
राधे- मैं नहीं जानेमन.. तुम सो गई थीं.. मेरा लौड़ा तो ‘टन.. टन..’ करता रह गया। एक बार मैं इसकी भूख कहाँ मिटने वाली थी.. तू तो सो गई.. मरता क्या ना करता.. मैं भी सो गया..

मीरा- अले.. अले.. मेले भोले आशिक को तकलीफ़ हुई होगी..
राधे- बस बस.. अब मेरा मूड बिगड़ जाएगा.. तुम तो ममता को गुस्सा करोगी नहीं.. मैं तुम पर चढ़ जाऊँगा..
मीरा- तो चढ़ जाओ ना मेरे आशिक.. रोका किसने है?

राधे- सुबह-सुबह मस्ती में आ गई क्या.. अभी तो तुम गुस्से में लाल हो रही थीं।
मीरा- अरे सॉरी मेरे आशिक.. रात को ज़्यादा पी गई.. होश ही नहीं रहा मगर तुम तो होश में थे ना.. मैं सो गई तो क्या था.. लौड़ा घुसा देते मेरी चूत में.. मैं उठ जाती..

राधे- नहीं मीरा.. मैंने पहले भी कहा था मैं तुमसे सच्चा प्यार करता हूँ। ऐसी हरकत वो करते हैं जिनको सिर्फ़ जिस्म की भूख होती है.. उनका प्यार एक हवस होता है.. मैं तुम्हारे जिस्म से नहीं.. तुमसे प्यार करता हूँ।
राधे की बात सुनकर मीरा बहुत खुश हो गई और ‘आई लव यू राधे’ कह कर उसके लिपट गई।

अब दोनों साथ-साथ बाहर गए और ममता को देख कर हँसने लगे क्योंकि बेचारी वो बहुत डरी हुई थी। मीरा ने उसे प्यार से समझा दिया कि उसके स्कूल जाने के बाद जो चाहो करो.. मगर उसके सामने ऐसी हरकत दोबारा मत करना।
तो बस सब ठीक हो गया।

मीरा ने नाश्ता किया और स्कूल चली गई। इधर राधे तो रात का भूखा था.. वो कहाँ ममता को छोड़ने वाला था। बस मौका मिला नहीं.. कि ममता को ले गया कमरे में.. और शुरू हो गया चुदाई में..

दोस्तो, उम्मीद है कि आप को मेरी कहानी पसंद आ रही होगी.. मैं कहानी के अगले भाग में आपका इन्तजार करूँगी.. पढ़ना न भूलिएगा.. और हाँ आपके पत्रों का भी बेसब्री से इन्तजार है।
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