कोटा की स्टूडेंट की कुंवारी चूत-1

(Kota Ki Student Ki Kunvari Choot- Part 1)

This story is part of a series:

फ्रेंड्स, मेरा नाम आर्यन है और मैं कोटा में रहता हूं। कद-काठी और शरीर से नार्मल हूँ मगर फिर भी चुदाई में जबरदस्त हूँ जो आपको मेरी कहानी पढ़कर पता लग जाएगा। कहानी पहली बार लिख रहा हूँ तो कुछ गलती हो तो एडजस्ट कर लें।

तो कहानी शुरू करने से पहले मैं कोटा के बारे में बता दूँ जो कोटा शहर से वाकिफ नहीं हैं। कोटा एजुकेशन हब कहलाता है जहां से भारत में हर जगह से लड़कियां और लड़के पढ़ने आते है मगर पढ़ाई कम और गुलछर्रे और अपनी कामवासना को शांत करते हैं जो सीधी सी बात है कि परिवार के साथ रहते नहीं कर सकते और मेरा मानना है कि करे भी क्यों नहीं, जवानी है ही ऐसी चीज़।

अपनी कहानी पर लौटते हैं। मैं प्रॉपर कोटा से ही हूँ और 26 साल का हूँ। अपना खुद का प्रॉपर्टी का बिज़नेस है जो ठीक-ठाक चलता है और मज़े में जीता हूँ. मैं कोटा में अकेला रहता हूं।
जैसा कि शीर्षक से मालूम होता है कि मुझे चुदाई का बहुत शौक है। खासकर नई-नवेली भाभियां ज़्यादा ललचाती है। मैंने अपनी पहली चुदाई तब की थी जब मैं छोटा था।

यह किस्सा 2 साल पुराना है। ये मेरा और कोटा की ही एक मस्त कली का है जो कोटा पढ़ने आयी थी। हुआ यह कि मैं एक दिन अकेला मॉल में बैठा था तो एक लड़की वहां थी जो उदास थी, थी मस्त माल मगर मुझे लगा शायद हाथ न लगेगी तो ज़्यादा ध्यान नहीं दिया।
फिर कुछ देर में उसकी फ्रेंड आयी और वो उसे देखकर गुस्सा हुई और कुछ कहा-सुनी हुई। आवाज़ धीमी करके बहस कर रही थी और मैं ज़्यादा दूर नहीं था तो सुन पा रहा था कि बॉयफ्रेंड का मसला है। जो पहले ही मॉल में थी उसके बॉयफ्रेंड का उसकी ही सहेली से अफेयर है। और जब पता चला उसे तो ब्रेकअप हुआ और उसकी सहेली से भी नहीं मिलने का बोल रही थी।

मुझे थोड़ी हँसी आयी सुनकर तो उसने मुझे देख लिया हँसते हुए। तो उसे देखकर में फिर अपने मोबाइल को देखने लगा। मगर मोबाइल से ज़्यादा मेरा ध्यान उनकी बातों में लगा था।

फिर कुछ दिन बाद मैं और मेरे दोस्त यहां पार्क में (सामान्य पार्क नहीं है) घूम रहे थे तो एक बच्चा आया और पैसे मांगने लगा। ध्यान दिया तो उसके हाथ का अंगूठा कटा हुआ था और खून निकल रहा था और पैर में भी लगी हुई थी तो मेरे दोस्त उसे साथ लेकर वहां बैठे और में वहां से निकल कर जल्दी से पास ही मेडिकल स्टोर से एक दवाई और पट्टी लाकर उसे फर्स्ट एड दिया और थोड़ा कुछ खिला दिया।

2 दिन बाद फिर मैं मॉल में था तो एक लड़की पास आयी देखा तो वही थी। मैं कुछ नहीं बोला और फिर से मोबाइल पर ध्यान देने लगा। मुझे लगा था कि चेयर ख़ाली देख कर बैठने आयी होगी।
अब लड़की पास बैठे और लड़के का ध्यान न भटके ऐसा कैसे हो सकता है। लड़कियों में यही एक बात अच्छी लगती है कि परफ्यूम लगाए बिना भी अच्छी महकती हैं।
वो भी समझ रही थी कि मैं तिरछी नज़रों से देख रहा हूँ उसे।

अब वो आगे हो कर ‘हेलो’ बोली। मैं भी ‘हेलो’ बोला। उसने अपना नाम बताया स्नेहा(बदल हुआ नाम)।
स्नेहा- आप वही हो न जो उस दिन मेरी और मेरी सहेली की बात सुन कर हंस रहे थे?
मैंने सीधा बोल दिया- हाँ जी, वही हूँ। आप लड़कियां लड़ती ही ऐसे हो कि कोई भी बंदा हंस दे। वैसे भी जो ध्यान दे रहे थे, सब हंस ही रहे थे।
स्नेहा- समझ तो गए होंगे। वो सब छोड़ो, मुझे एक बात अच्छी लगी कि आप हैल्पफुल हो।
मैं- मैंने आपकी क्या हेल्प करी?
स्नेहा- मैं अपनी नहीं उस लड़के की बात कर रही हूँ जिसे आप और आपके दोस्तों ने पार्क में पट्टी बांधी थी।
मैं- मैंने कहा इसमें हेल्प केसी, कोई भी करता। हम नहीं तो कोई और!

मैं आप सबको एक बात बताना भूल गया कि पार्क में उस बच्चे की पट्टी करते हुए हमें 8-10 लोग देख रहे थे। मगर किसी ने हाथ नहीं बंटाया।
स्नेहा- ज़्यादातर लोग नहीं करते ऐसा। आपने सही किया।

मैं- एक बात पूछ सकता हूं अगर माइंड न करो तो?
स्नेहा- मुझे पता है क्या पूछोगे फिर भी पूछिए!
मैं- वो उस दिन लड़ क्यों रहे थे आप? मुझे डाउट है इसलिए पूछ रहा हूं।
स्नेहा- जो जानते हो वही बात है।
मै(धीरे से)- बॉयफ्रेंड का मसला है ना आपकी और आपकी फ्रेंड के बीच?
स्नेहा- मेरी फ्रेंड नहीं, दुश्मन है मेरी वो!
मैं धीरे से हंस पड़ा।

तो ऐसे ही बात शुरू हो गई। मैंने उसे अपना नाम बताया। उसने फिर बताया कि वो यहां एक कोचिंग से आई.आई.टी. की तैयारी कर रही है और होस्टल में रहती है। और मैंने उसे अपने बारे में बता दिया।
मैंने उससे पूछा कि अगर वो होस्टल में रहती है तो इस टाइम बाहर कैसे है। तो उसने बताया कि कोचिंग वाले सब स्टूडेंट्स को फ़िल्म दिखाने ले गए हैं। उसका मन नहीं था तो वो नहीं गयी और मॉल आ गई।

फिर मुझे देर हो रही थी तो मैं आफिस होकर घर चला गया।
शाम को थोड़ा फेसबुक चलाया। फिर चलाते-चलाते मुझे स्नेहा याद आयी तो मैंने उसे सर्च किया और वो मिल भी गई तो मैंने उसे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी। शायद वो भी ऑनलाइन थी तो उसने एक्सेप्ट भी कर लिया।
मैंने उसे ‘वेव’ किया तो बदले में उसने भी किया।
अब बात होने लगी कभी कभी।

अब मुझे उसमें दिलचस्पी होने लगी। तो मैं उसकी सुंदरता की तारीफ करने लगा। स्नेहा पहले तो खुश लगी फिर कुछ देर बाद बोली- फ़्लर्ट कर रहे हो?
तो मैंने भी लिखके भेज दिया- तो क्या प्रोपोज़ करूँ?
स्नेहा का जवाब आया- भूल कर भी मत करना। वैसे भी कोई फायदा नहीं होगा आपका और क्या पता हम दोस्त भी न रहें।

मैं थोड़ा डर गया कि इतनी मस्त माल हाथ से न चली जाए। तो मैंने ‘सॉरी’ बोला और बोला- मैंने तो ऐसे ही मज़ाक में पूछ लिया मगर तुम तो सीरियस हो गयी डिअर।
फिर स्नेहा का जवाब आया- ओके, सी यू लेटर।
और ऑफलाइन हो गई।
मैं सोचने लगा कि स्नेहा इतनी आसानी से हाथ नहीं लगेगी, कुछ सोचना पड़ेगा।

इतना कुछ सोच ही रहा था कि स्नेहा का मैसेज आया- गुड नाईट।
साथ में एक स्वीट स्माइली भी थी।
तो मैंने भी जवाब दिया- गुड नाईट डिअर।
मैं सोचने लगा कि कैसे इसे अपना बनाऊँ मगर कोई तरकीब नहीं सूझी और फिर सो गया।

फिर अगले दिन रात के 12:30 हुए होंगे कि स्नेहा का मैसेज आया- सोते नहीं हो क्या, रात इतनी हो गयी है।
मैंने जवाब दिया- आप भी तो नहीं सोई मैडम।
स्नेहा- फ्रेंड से चैट कर रही थी बिलासपुर की। अब सोने जा रही थी तो आपको ऑनलाइन देखा। तब पता लगा कि वो बिलासपुर, छत्तीसगढ़ से है।
तो मैंने पूछा- आप फेसबुक में ही चैट करती हो या व्हाट्सएप भी चलाती हो?
स्नेहा का जवाब आया- व्हाट्सअप है तो सही मगर अपना नम्बर नहीं दे सकती किसी को।
मैं- मैं बस चैट के लिए पूछ रहा था। कोई कॉल नहीं करूँगा कभी। जब तक आप न चाहो। विश्वास कर सकती हो!
स्नेहा- विश्वास है तभी आपको फ़्रेंड बनाया है, नहीं तो रिक्वेस्ट एक्सेप्ट नहीं करती। चलो, आप अपना नम्बर दो, मुझे लगा कि आपको देना चाहिए तो दे दूंगी।

मैंने कोई देर न करते हुए अपना नम्बर दे दिया।
कुछ देर में स्नेहा का मैसेज आया- हाय, मैं हूं स्नेहा, ये मेरा नम्बर है।
मेरी खुशी का ठिकाना न रहा। मैंने भी ‘हाय’ बोला।
स्नेहा- विश्वास है, इसलिए दे रही हूं नम्बर। और मुझसे पूछे बगैर किसी को मत देना मेरा नम्बर। बात करनी हो तो कर लेना, कोई परेशानी नहीं है मगर कॉल करने से पहले मैसेज करके बता देना।
मैं- ठीक है, मैं किसी को नहीं देने वाला आपका नम्बर। इतनी सुंदर दोस्त को खोना थोड़ी है मुझे।

फिर कुछ दिन तक लगातार बात होने लगी तो एक दिन बातों बातों में उसकी बॉयफ्रेंड की बात छिड़ी तो मैंने थोड़ा सीरियस बनकर पूछ लिया- आपने अपने बॉयफ्रेंड के साथ कुछ किया तो नहीं था ना?
स्नेहा- क्यूं, क्यों पूछ रहे हो?
मैं- ऐसे ही पूछ रहा हूं क्योंकि कुछ लड़के लड़की का फायदा लेकर छोड़ देते हैं।
स्नेहा- ओह, ऐसा? एक महीने के रिलेशनशिप में क्या कर लेती। बस टचिंग ही हुई है। डोंट वरी।
मैं- फिर ठीक है।
स्नेहा- केयर करते हो इसलिए पूछा था या कोई और इरादा था।
मैं- कोई इरादा नहीं था। दोस्त हो इसलिए पूछ लिया। सॉरी, बुरा लगा हो तो।
स्नेहा हँसने के स्माइली के साथ- बुरा नहीं लगा, लगता तो रिप्लाई नहीं देती।

फिर ऐसे ही लगातार बात होती रही तो उसका बर्थडे आया तो मैंने मिलने के लिए बोला तो वो बोली- आज तो नहीं मिल सकती। मोम-डैड आये हुए हैं, कल चले जाएंगे, परसों मिलो।
मैं- बर्थडे गिफ्ट देना था, कोई बात नहीं, परसों दे दूंगा।
दो दिन बाद हम मॉल ही मिले। मैंने उसे गिफ्ट दिया और बोला- अभी खोलोगी या रूम में जाकर?
स्नेहा ‘वहां कोई देख लेगा’ बोलकर खोलने लगी।

मैंने उसमें एक क्रिस्टल हार्ट में ‘लव’ लिखा हुआ ब्रेसलेट दिया था। उसे पसंद आया और मुझे देखा तो मैंने सीधे बोल दिया- प्रोपोज़ नहीं कर पा रहा तो ऐसे किया।
स्नेहा- मुझे पता था कि आप कुछ ऐसा ही गिफ्ट दोगे, कुछ प्यार भरा।
मैंने पूछा- कैसे पता?
तो बोली- जब हम चैट करते थे तो आप ही ने तो पूछा था कि प्रोपोज़ करूं? मुझे तभी पता था कि वो ऐसे ही नहीं जानबूझ कर पूछा था।
मैं समझा अब स्नेहा गई और बात भी नहीं करेगी।

थोड़ा रुकने के बाद फिर बोली- अगर उस दिन थोड़ा और ट्राइ करते तो शायद मैं मान जाती मगर आप तो मेरे जवाब से जैसे डर से गए थे.
मैं चौन्क गया यह सुनकर … फिर बोला- मतलब तुम्हें कोई ऐतराज नहीं है?
स्नेहा- क्यों होगा? एक बॉयफ्रेंड ऐसा निकला जो मेरी फ्रेंड से ही प्यार करता था। एक महीने के रिलेशन में कोई गिफ्ट नहीं दिया आज तक। और एक आप हो, करीब 2 महीने ही हुए हमारी दोस्ती को, ना कोई टच, ना कुछ गलत बात की और ये गिफ्ट भी मेरे हाथ में है। और अब मैं चाहती भी थी एक लोकल (कोटा सिटी का ही) बन्दे को जिसपे विश्वास भी हो और यहां सिक्योर भी महसूस करूँ। और इंतज़ार में थी कि कब आप प्रोपोज़ करो। सीधे तो नहीं बोल सकती थी पहली बार।
मैं- लोकल बंदे पर इतना विश्वास? अच्छी बात है। तो अब क्या प्लान है मेरी स्नेह का।
और उसका हाथ पकड़ लिया।

स्नेहा- अभी कुछ नहीं, अभी मुझे होस्टल से थोड़ी दूर ड्राप करो, वरना देरी हो जाएगी और कोई कारण बताना पड़ेगा देरी का।
मैं- अब फिर कब मिलेंगे हम? ठीक है, ड्राप कर दूंगा मगर एक किस चाहिए?
स्नेहा- पागल हो गए हो आप? और वैसे भी यहां कोई भी देख लेगा।
मैं- अच्छा अगर जगह मैं बता दूँ जहां कोई न देखे और कोई हो भी नहीं, तो दोगी?
स्नेहा- आप सच में … सिर फिर गया है आपका!
मैं- अच्छा तो फिर जाओ। मैं नहीं छोडूंगा।
और थोड़ा नाराज़ होते हुए बोला- पहला दिन है हमारे प्यार का और तुम एक किस के लिए मना कर रही हो। शुरुआत ऐसी है तो?
स्नेहा- अच्छा बाबा, ठीक है मगर यहां नहीं। कोई जगह बताओ और जल्दी, मुझे देरी हो जाएगी।
मैं- सीढ़ियों से कोई आता-जाता नहीं है और कोई आ भी रहा हो तो पता चल जाएगा। कितने ही कपल्स बैठते है यहां सीढ़ियों मे, वैसे ही हम भी, बैठेंगे नहीं, बस किस और गए।
स्नेहा- अब जल्दी चलो भी।

मुझे और क्या चाहिए था और वो मान भी गई थी मजबूरी में।
सीढ़ियों से थोड़ा उतरकर मैंने उसे रोका और बोला- नाउ किस मी!
स्नेहा बोली- मुझसे नहीं होगा। आप ही कर लो और जल्दी करो।
और अपना गाल आगे कर दिया और आंखें बंद कर ली।

मैंने स्नेहा का चेहरा पकड़ा और चेहरा घुमाकर सीधा उसके होठों पर किस कर दिया और कसकर पकड़े रहा। स्नेहा आंखें खोलकर देख रही थी अब और उसकी साँसें अटक रही थी तब मैंने उसे छोड़ा। मगर इतना करने पर भी उसने कोई विरोध नहीं किया था।
स्नेहा हांफ रही थी और बोली- मुझे लगा था गाल पर किस करोगे पर आपने तो … सांस रुक गई थी मेरी! बस अब चलो।

मैं पार्किंग से बाइक निकाल कर मॉल से बाहर निकला जहां स्नेहा खड़ी थी अपना चेहरा छुपाकर। उसे बिठाया और होस्टल से कुछ दूरी में छोड़कर घर लौट गया।

कहानी जारी रहेगी.
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कहानी का अगला भाग: कोटा की स्टूडेंट की कुंवारी चूत-2

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