किराये के घर में मिली कुंवारी चूत-2

(Kiraye Ke Ghar Mein Mili Kunwari Chut- Part 2)

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दोस्तो, मेरी कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा कि मैं जॉब तलाश करने के लिए दिल्ली में पी.जी. में रह रहा था. जहाँ पर मेरी मुलाकात शिखा से हुई जो मेरी फील्ड में जॉब ढूंढ रही थी. एक दिन वह मुझसे अपने बॉयफ्रेंड की बात करने लगी और उसने मुझे किस करने के लिए अपना चेहरा आगे कर दिया. मगर मैंने आगे कदम नहीं बढ़ाया. कुछ दिन के बाद फिर से वह रूम में आई और उसके बाद …
अब आगे:
शिखा एकदम से मेरे पास आकर मुझसे सट गई और मुझे उसने बिना कुछ सोचे समझे ही किस करना शुरू कर दिया.
इससे पहले कि मैं कुछ सोच पाता और उसकी हरकत पर कुछ रिएक्ट कर पाता वह मेरे होंठों को चूसने लगी थी और कुछ पल तक होंठों को चूस कर वह फिर से मुझ से अलग हो गई.

ऐसा करने के बाद वह दूर हटी और बोली- यही मौका उस दिन भी मैं तुम्हें दे रही थी और तुम बेवकूफों की तरह मेरी शक्ल देख रहे थे.
उसके बाद मैंने भी शिखा को अपना जोश दिखाया. मैंने शिखा को पकड़ लिया और उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया. वह तो पहले ही मेरे होंठों को चूस चुकी थी इसलिए उसने फिर से मेरा साथ देना शुरू कर दिया. इस बार हम काफी देर तक एक-दूसरे को किस करते रहे.

उसके होंठों को चूसते-चूसते मेरा हाथ उसकी चूची पर चला गया. मैं उसकी चूचियों को उसके टॉप के ऊपर से ही सहला रहा था. वह मेरी पीठ को सहला रही थी. उसने पिंक कलर का टॉप और सफेद रंग की स्कर्ट पहनी हुई थी. हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने में लगे हुए थे.

उसके बाद मैंने अपना एक हाथ उसके टॉप के अंदर डाल दिया तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया. मैंने अपना हाथ बाहर निकाल लिया. हम एक दूसरे से अलग हो गये. शिखा मुझे ऐसे देख रही थी जैसे उसको बहुत दिनों से प्यास लगी हो. उसे न जाने कितने दिनों से सेक्स का पानी नसीब नहीं हुआ था. उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने टॉप के अंदर डाल दिया. इस तरह मैं किस करते हुए साथ ही साथ उसकी चूची को भी मसलने लगा. मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था. मैंने उसके हाथ को पकड़ लिया और अपने लंड पर रखवा दिया. पहले तो उसने अपना हाथ मेरे लंड पर से वापस हटा लिया मगर कुछ पल के बाद खुद ही अपने हाथ को मेरे लंड पर ले जाकर रख दिया.

वह मेरे लंड को मेरी पैंट के ऊपर से ही सहलाने लगी. मैंने ट्रैक पैंट पहन रखी थी. रूम में मैं ट्रैक पैंट ही पहन कर रखता था. ट्रैक पैंट में खड़े हुए मेरे लंड पर शिखा का हाथ अच्छे तरीके से पकड़ बनाने लगा था.
हम दोनों एक दूसरे को चेहरे पर, कभी गाल पर, कभी आंखों पर और कभी कानों पर किस कर रहे थे. अब मैं अपने हाथ से उसके बालों को सहला रहा था. मैं दूसरे हाथ को धीरे-धीरे उसकी चूत के पास ले गया. एक हाथ से मैं उसकी चूची को मसल रहा था.

फिर मैंने स्कर्ट के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाना शुरू कर दिया. उसने एक बार मेरी आंखों में देखा और फिर अपनी आंखों को बंद किया और मेरे हाथ का मजा लेने लगी. उसकी चूत को सहलाते हुए मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे वह फूली हुई है.
मैंने पूछा- चड्डी में अंदर तुमने कुछ पहना हुआ है क्या?
वह बोली- मेरे पीरियड्स चल रहे हैं. मैंने नीचे पैड लगाया हुआ है.

मैंने उसको बेड पर लेटा दिया और खुद भी उसकी बगल में लेट गया. मैं उसकी चूची को जोर से मसलते हुए उसको किस करने लगा. वह अपनी आंखें बंद करके मजा लेने लगी. मैंने एक हाथ से उसके स्कर्ट को ऊपर कर दिया. उसकी चड्डी के अंदर हाथ डालकर मैं उसको छूना चाहता मगर उसने मना कर दिया.
उसने कहा- इससे हाथ गंदे हो जाएंगे.
मैंने कहा- कोई बात नहीं!

मगर वह नहीं मानी. फिर मैंने भी उसको ज्यादा फोर्स नहीं किया. उसके बाद मैंने उसकी चड्डी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाना जारी रखा. शिखा मेरी हरकत का मजा ले रही थी. मैंने उसकी गांड को दबा दिया और उसमें उंगली घुसाने की कोशिश करने लगा. मेरी उंगली उसकी गांड के छेद तक पहुंच जाती थी मगर वह अपनी गांड को भींच लेती थी और मैं फिर से उसकी गांड को ऊपर से ही सहलाने लगता था. मैं उंगली को उसकी गांड के अंदर डालना चाहता था मगर उसने ऐसा करने नहीं दिया.

अब मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही थी. मैंने उसकी चूत में अचानक से उंगली डाल दी तो वह चिहुँक गई. उसने मेरी उंगली को पकड़ कर वापस से बाहर खींच दिया. मैंने देखा कि मेरी उंगली पर खून लग गया था.
मैंने कहा- तुम वर्जिन हो क्या?
वह बोली- हाँ, ऐसा ही समझ लो.
मैंने कहा- तब तो मैं बहुत लकी हूँ. अपने कपड़े उतार लो प्लीज…
वह बोली- नहीं, मेरे तो पीरियड्स चल रहे हैं अभी.
मैंने कहा- ठीक है, मैं ज्यादा फोर्स नहीं करूंगा, मगर तुम अंदर नहीं करवा सकती तो ऊपर से ही दिखा दो. मैं बस देख लूंगा कि तुम्हारी कैसी है.
वह बोली- क्यों, तुम्हारा मन नहीं भरा क्या अभी?
मैंने कहा- तुम्हारा भर गया क्या?

शिखा ने एकदम से मेरे गले में बांहें डाल दीं और फिर बोली- नहीं, मेरा मन भी नहीं भरा है. आइ लव यू.
उसके बाद हम दोनों अलग हो गये. उसके बाद कुछ देर यहाँ-वहाँ की बातें हुईं. हम दोनों के मुख पर खुशी आ गई थी. उसके बाद शिखा नीचे चली गई। उसकी दीदी के आने का टाइम हो गया था.
अब मेरे अंदर उसके लिए प्यार पैदा हो गया था. मेरा मन करता था कि वह बस मेरे साथ ही रहे. मैं उसके साथ ही हर पल बिताना चाहता था. या फिर यूं कहें कि मेरे अंदर भी वासना भड़क चुकी थी.

रात को जब खाने का टाइम हो गया और हम तीनों ही साथ में बैठ कर खाना खा रहे थे. मैं पैर से उसको छेड़ रहा था. फिर मैंने दीदी से नजर बचाकर उससे बोल दिया कि आज रात को मेरे कमरे में ही आ जाना.
वह बोली- पागल हो गये हो क्या? मरवाओगे मुझे?

शिखा ने मना कर दिया तो मेरा मन उदास हो गया. मैं अपने कमरे में गया और उसके बारे में सोचता रहा. पढ़ाई में भी मन नहीं लग रहा था. सोचते हुए रात के दो बज गए. अचानक से मेरे दरवाजे पर आवाज हुई. मैंने पूछा- कौन?
उधर से आवाज आई- शिखा …
मैंने उठ कर फटाक से दरवाजा खोल दिया और वह अंदर आ गई.
मैंने कहा- तुम सोई नहीं अभी तक?
वह बोली- तुम भी तो जाग रहे हो.

वह आकर मेरे साथ बेड पर लेट गयी और हम दोनों एक-दूसरे को किस करने लगे. मैंने जल्दी ही उसके टॉप को ऊपर उठा दिया और उसने कोई ऐतराज भी नहीं किया. उसने नीचे से एक सफेद रंग ब्रा पहन रखी थी. मैंने पल भर की देर किये बिना ही उसकी ब्रा के हुक को खोल दिया. खुलते ही उसके कबूतर मेरे सामने फड़फड़ाने लगे. मैंने पहली बार किसी लड़की को अपनी आंखों के सामने ऐसी हालत में देखा था.
वह बोली- क्या देख रहे हो?
मैंने कहा- तुमको ही देख रहा हूँ.

उसके बाद उसने मेरे हाथों को पकड़ कर अपनी चूचियों पर रखवा दिया. मैंने अच्छे तरीके से उसकी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया. उसकी चूचियों को पहली बार मैंने बिना ब्रा के हाथ में लिया था. मेरे लंड की हालत खराब हो रही थी. मैंने उसकी चूत में फिर से उंगली डालने की कोशिश की तो उसने मुझे रोक दिया.
मैंने फिर उसकी चूचियों को अपने मुंह में भर लिया और उनको पीने लगा. आधे घंटे तक उसकी चूचियों को मैं पीता ही रहा.

कुछ देर के बाद वह उठने लगी और कहने लगी- अब जाना होगा नहीं तो दीदी उठ जाएगी. अगर दीदी को इस बारे में पता चल गया तो सब गड़बड़ हो जायेगी.
उसने अपने कपड़े पहने और चली गयी.

अगले दिन हम फिर साथ बैठ कर पढ़ाई कर रहे थे.
मैंने कहा- शिखा, एक बात पूछूं? ये पीरियड्स कितने दिन में खत्म होते हैं?
वह बोली- चार से पांच दिनों तक रहते हैं. मगर तुम ज्यादा उतावले मत हो जाओ.

उसके बाद हम दोनों पढ़ने लगे. मैं बीच-बीच में उसको छेड़ देता था. वह मेरा पहला प्यार जो थी. जब मैं कॉलेज में था उस वक्त मेरे दोस्त सब अपनी गर्लफ्रेंड की बातें बताया करते थे. मैं तो बस अपने लंड को हिला कर रह जाता था. मगर अब मेरी भी गर्लफ्रेंड बन गई थी. मैं उसको कभी भी कहीं भी हाथ लगा देता था. वह कभी कुछ नहीं कहती थी.
हम लोगों के बीच में पहले ही बहुत कुछ हो चुका था इसलिए बुरा मानने की तो कोई बात ही नहीं थी. इसी तरह एक सप्ताह बीत गया. इन दिनों में हमारे बीच किसिंग के अलावा कुछ और नहीं हुआ.

एक दिन मैं रात को तीन बजे तक पढ़ता रहा और सुबह उठा तो 9 बज गये थे. शिखा ही मुझे सुबह की चाय देने मेरे रूम में आई. उसके बाद उसने मुझे नीचे नाश्ते के लिए आने को कहा. मैं फ्रेश होकर नीचे गया.

नीचे जाकर मैंने दीदी को आवाज दी तो शिखा ने बताया कि वह घर पर नहीं हैं. उनकी किसी सहेली की तबियत खराब हो गई थी. शिखा ने बताया कि दीदी शाम तक वापस आएंगी.
मैंने शिखा से कहा- तो क्या आज हम दोनों घर पर अकेले हैं?
शिखा ने कहा- जी हाँ … और वह मेरी तरफ देख कर मुस्कराने लगी.

बस फिर क्या था. मेरी तो किस्मत जाग गई थी जैसे. मेरी भूख तो यह सुनने के साथ ही मर गई. पेट की भूख की जगह वासना की भूख जाग गई थी. मैंने शिखा को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और अपनी गोद में बैठा लिया.
वह बोली- अरे-अरे … पहले खाना तो खा लो.
मैंने कहा- तुम ही अपने हाथों से खिला दो न?

शिखा ने रोटी का एक टुकड़ा तोड़ा और मुझे खिला दिया. उसके बाद मैंने दूसरा टुकड़ा पूरा नहीं खाया और आधा अपने होंठों के बाहर ही रहने दिया. शिखा भी समझ गई कि मैं क्या चाहता हूँ. उसने मेरे होंठों की तरफ अपने होंठ बढ़ा दिये और हम दोनों की किसिंग चालू हो गई.
वह बोली- चलो, मेरे रूम में चलते हैं.

मैंने शिखा को गोद में उठाया और उसको उसके रूम में ले गया. मैंने उसको बिस्तर पर पटक दिया और उस पर टूट पड़ा. मैंने उसको जोर से चूमना-चाटना शुरू कर दिया. जल्दी से उसकी टी-शर्ट को निकाल दिया.

उसने काले रंग की ब्रा पहन रखी थी. मैंने जल्दी से उसको खोल दिया और एक तरफ फेंक दिया. वह ऊपर से नंगी हो गई. मैंने एक हाथ से उसकी चूची तो दूसरे हाथ से पजामे के ऊपर से उसकी चूत को सहलाना शुरू कर दिया.
आज मैं रुकने वाला नहीं था. मैंने उसके पजामे को खींचना शुरू कर दिया. वह भी मेरा साथ दे रही थी. उसने अपनी गांड उठा दी और मैंने पजामे को नीचे खींच दिया. नीचे उसने काले रंग की ही चड्डी पहन रखी थी. अगले ही पल मैंने उसकी पैंटी को भी निकाल दिया और निकालते समय मुझे ये पता चला कि उसकी पैंटी थोड़ी गीली हो चुकी थी. उसके बाद मैंने उसकी चूत को पहली बार देखा. मैं उसकी चूत को ध्यान से देख रहा था. वह ज्यादा सुंदर तो नहीं थी मगर मैंने चूत पहली बार देखी थी अपनी आंखों के सामने. इससे पहले मैंने चूत को पॉर्न मूवी में ही देखा था.

शिखा मेरे सामने बिल्कुल नंगी पड़ी थी और उसकी फिगर मस्त लग रही थी. उसकी चूत पर हल्के से बाल भी थे. ऐसा लग रहा था कि उसने दस दिन पहले जैसे शेविंग की हो.
वह बोली- क्या देख रहे हो?
मैंने कहा- मैं पहली बार किसी जवान लड़की को नंगी देख रहा हूँ.

मैं शिखा की चूत को अपने हाथों से छूकर देखने लगा. मुझे पहली नंगी चूत को छूने का अहसास मिल रहा था. यह अहसास मेरे अंदर एक सेक्स का तूफान सा पैदा कर रहा था. चूत को देखने की मेरी जो ख्वाहिश थी वह पूरी हो रही थी. मैं उसकी चूत के फलकों को अपने हाथों से अलग-अलग करके देख रहा था. बाहर से तो उसकी चूत सांवली थी मगर अंदर से वह जैसे गाजर की तरह लाल थी.
मैंने शिखा की चूत को बड़े ही ध्यान से देखा और फिर उसकी चूत के पास अपने नाक को ले जा कर सूंघने लगा. उसकी चूत से बहुत ही अच्छी खुशबू जैसी गंध आ रही थी.

मन कर रहा था कि उसकी चूत पर अपने होंठों को रख दूँ मगर अभी मैं उसकी चूत को और ज्यादा खोल कर देखना चाहता था. मेरे मन में चूत के प्रति जो जिज्ञासा थी मैं उसको पूरी तरह से शांत कर देना चाहता था.
शिखा मेरी हर हरकत को महसूस कर रही थी. वह धीरे-धीरे कसमसाने लगी थी. मगर कुछ बोल नहीं रही थी. उसके चूचे बिल्कुल तने हुए थे. मैंने उसकी टांगों को थोड़ा सा और चौड़ा कर दिया जिससे उसकी चूत को मेरे हाथ अच्छे तरीके से खोल सकें.
उंगलियों से चूत को छुआ तो शिखा की सिसकारी निकल गई. उसने मेरी तरफ देखा और मुस्कराने लगी.

वह बोली- अगर देख लिया हो तो मुझे भी दिखा दो कि लड़के नंगे होने के बाद कैसे लगते हैं! तुम भी अपने कपड़े उतार दो न यार, मैं भी तुमको नंगा देखना चाहती हूँ।
मैंने कहा- तुम ही उतार दो अगर ऐसी बात है तो.

शिखा उठ कर मेरे कपड़ों की तरफ बढ़ी. उसने मेरी टी-शर्ट को उतारा. मेरी छाती नंगी हो गई. उसके बाद उसने मेरी ट्रैक पैंट को पकड़ कर नीचे खींच दिया और मेरी टांगों से बाहर निकाल दिया. मैं अगले ही पल केवल अंडरवियर में रह गया था. मेरा लंड मेरे अंडरवियर में खड़ा था और ट्रैक पैंट उतरते ही उसने जोर का झटका दिया और मेरे अंडरवियर को उछाल दिया. मेरे लंड में बहुत ज्यादा तनाव था क्योंकि पहली बार मैं किसी लड़की के साथ इस तरह का आनंद ले रहा था.

उसके बाद शिखा ने मेरे अंडरवियर को भी खींच दिया और मेरा लंड उछल कर बाहर आ खड़ा हुआ.
वह बोली- इतना बड़ा?
मैंने कहा- क्यूँ, इससे पहले तुमने लंड नहीं देखा क्या?
वह बोली- मैंने तुम्हें बताया तो था कि मैं वर्जिन हूँ. मगर मैंने ब्लू फिल्म में लंड देखा हुआ है.

मैं उसकी बात सुनकर हैरान रह गया कि वो ब्लू फिल्म भी देखती है. मैंने कभी किसी लड़की के मुंह से नहीं सुना था कि वह ब्लू फिल्म देखती है. मगर सुनता भी कैसे शिखा तो मेरी जिंदगी में पहली ऐसी लड़की थी जिससे मैं ये सब बातें कर रहा था.

कहानी कैसी लग रही है आपको इसके बारे में मुझे जरूर मेल करें और कमेंट भी करें. कहानी के दो भाग शेष हैं.
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