कमसिन कम्मो की स्मार्ट चूत-5

(Kamsin Kammo Ki Smart Choot- Part 5)

This story is part of a series:

मेरी पुत्र वधू की भतीजी कम्मो मेरे साथ सेक्स करना चाहती थी लेकिन कोई मौक़ा नहीं मिल रहा था तो वो निराश हो चुकी थी.

मैं कम्मो से कुछ और कहने ही वाला था कि अदिति बहूरानी मेरी ओर आती दिखाई दी साथ में उसके चाचा जी भी थे.

“भाई साब, मैं आपको एक कष्ट देना चाहता हूं, अगर आप अन्यथा न लें तो?” अदिति के चाचा जी बोले.
“अरे कैसी बात करते हैं. आप तो आदेश दें मुझे. बताएं क्या करना है?” मैंने विनम्रता से कहा.

“देखिये बारात तो तैयार ही है और निकलने ही वाली है. आपको सिर्फ एक काम करना है कि बारात निकलने के बाद सारे कमरे आपको लॉक करने हैं बस. यहां चौकीदार रहता है बाकी वो देखता रहेगा, ये लीजिये चाभियां!” अदिति के चाचाजी बोले और चाभियों का गुच्छा मुझे थमा दिया.

“आप बेफिक्र रहें. सबके निकलने के बाद मैं सारे कमरे लॉक करके बारात में शामिल हो जाऊंगा, कोई कीमती सामान तो नहीं रखा है न?” मैंने उन्हें आश्वस्त किया और चाभियां उनसे ले लीं.

“अरे ऐसा कोई कीमती सामान नहीं है, पर सब जगह ताला तो लगाना ही पड़ेगा न!” उन्होंने कहा और अदिति को साथ लिए निकल लिए.

कम्मो मेरे पास ही खड़ी थी. अचानक मेरे दिमाग की ट्यूबलाइट भक्क से जल उठी. अब पूरी धर्मशाला मेरी थी. मैंने कम्मो के सामने चाभियों का गुच्छा लहराया तो उसने प्रश्नवाचक दृष्टि से मुझे देखा.
“अरे अब जगह ही जगह है अपने पास!” मैंने हंस कर कहा. मेरी सारी दुविधा, सारी भव बाधा किसी ने हर ली थी.
“मतलब?” वो बोली.

“देख कम्मो, अब मना मत करना प्लीज. बारात के यहां से निकलते ही मुझे सारे कमरे लॉक करके चाभियां अपने पास रखनी हैं फिर सारे कमरे हमारे; हम कुछ करें, यहां पर कोई देखने टोकने वाला नहीं रहेगा” मैंने खुश होकर कहा.
“अच्छा, और शादी में नहीं जाना क्या? कोई हमें पूछेगा तो क्या होगा?” वो बात को समझते हुए बोली.

“अरे तू ध्यान से तो सुन पहले. तुझे भी सब लेडीज के साथ बारात के साथ निकल जाना है. सब लोग डी जे पर नाचते हुए जायेंगे. यहां से ताला लगा कर मैं भी बारात में शामिल हो जाऊंगा.” इतना कह कर मैंने उसके ओर देखा.
“फिर?” उसकी संदेह भरीं नज़रें उठीं.

“अरे सुन तो सही, इस तरह हम सब बारात के संग संग चलेंगे. डांस वांस करके फोटो खिंचवा के हम लोग धीरे से बारात के पीछे होते जायेंगे और फिर चुपके से निकलकर यहीं धर्मशाला में आ जायेंगे. चाभियां तो मेरे पास ही हैं अब. धर्मशाला सुनसान रहेगी, हमें कोई देखने टोकने वाला नहीं होगा और हम मजे से दो घंटे तक तूतक तूतक तूतिया … आई लव यू करेंगे.” मैंने प्रसन्न होकर कहा.

“अच्छा, और कोई पूछेगा कि कम्मो कहां गयी तो, किसी ने आपको ही पूछ लिया तो फिर क्या होगा?”
“तू पगली है, अरे बारात में किसी को क्या होश रहता है कि कौन कहां है. आधे से ज्यादा लोग दारु पी कर टुन्न हैं वे तो डांस करेंगे और नोट उड़ायेंगे, लेडीज को भी नाचने और फोटो खिंचाने से ही फुर्सत नहीं होगी. ऐसे में किसी को क्या होश रहता है कि कौन कहां हैं. तू अपना फोन स्विच ऑफ करके रखना मेरा फोन ऑन रहेगा. हम लोग धर्मशाला में आराम से एक डेढ़ घंटे रुकेंगे, इतनी देर में मैं तुझे अच्छे से अपनी बना लूंगा; हम लोग निपट कर फिर वापिस बारात में शामिल हो जायेंगे; अरे किसी को कुछ पता नहीं चलने वाला कि कौन आया कौन गया.” मैंने उसे प्यार से समझाया.

“फिर भी. अंकल जी, मेरी हिम्मत नहीं है इतना करने की. रहने दो आप तो. आपको आना हो तो मेरे गांव ही आ जाना बस और वहीं पर आराम से बिना किसी डर के करना जो करना हो!” उसने अपना फैसला सुनाया.
“अरे तू ठीक से समझ तो सही. लड़की वालों के यहां तक बारात पहुँचते पहुँचते कम से कम दो घंटे तो लगेंगे ही. इतने में हम मिल लेंगे; एक दूसरे में समा जायेंगे और अपनी इच्छा पूरी करके वापिस लौट कर शादी में शामिल हो जायेंगे. अरे किसी को किसी की खबर नहीं रहती ऐसे माहौल में. बस तू थोड़ी सी हिम्मत तो कर!” मैंने उसका डर दूर करने का प्रयास किया.

“ठीक है अंकल जी. कुछ गड़बड़ हुई तो आप संभालना बस!” वो समर्पित भाव से बोली.
“अरे कम्मो बेटा, तेरी इज्जत की परवाह मुझे अपनी जान से भी ज्यादा प्यारी है, तू बिल्कुल भी फिकर न कर. मैं तुझ पर कोई आंच नहीं आने दूंगा.”

उसने सहमति में सिर हिलाया और दौड़ कर लेडीज के झुंड में शामिल हो गयी. इस तरह कम्मो चुदने को राजी हो गयी.

अब मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था. बात ही खुशी की थी उन्नीस बरस की गांव की कड़क जवान हसीन लौंडिया राजी खुशी अपनी चूत देने को तैयार थी तो कौन खुशी से पागल न हो जाय. सबसे पहले मैंने अपना बैग खोल कर सेक्स वर्धक गोली निगल ली; ऐसी दवा मैं हमेशा अपने साथ इसी प्रकार की इमरजेंसी के लिए रखता हूं; हालांकि सामान्य तौर पर इसकी जरूरत नहीं पड़ती लेकिन जब लड़की ‘चोदना’ हो तो अपना हथियार भी भीषण युद्ध के लिए तैयार होना चाहिये ताकि सामने वाली से अपना लोहा मनवा सके और कामयुद्ध को निर्णायक रूप से जीत सके; ऐसा न हो कि मेरे लंड के नाम पर बट्टा लगे. जवान लड़की की गर्मी जब तक उसकी चूत के रास्ते से न निकल जाए और उसकी चूत चरमरा न उठे तब तक उसकी चूत चुदाई मांगती है.

इतना सब करने के बाद मैं प्रसन्नचित्त होकर धर्मशाला के बाहर आ गया. घोड़ी सजी खड़ी थी और वो डी जे वाला फिर से कुड़कुड़ करने लगा था कि दो किलोमीटर दूर बारात जानी है कम से कम दो घंटे तो लगेंगे ही पहुँचने में और आठ यहीं बज चुके है.
अदिति के चाचा जी ने जैसे तैसे सबको हांक कर बारात साढ़े आठ तक दूल्हा निकासी करवाई और बारात निकल सकी, बहूरानी का भाई घोड़ी चढ़ चुका था और आगे आगे बारात में लोग नाचते हुए चलने लगे थे.

सबके जाने के बाद मैंने सारे कमरे लॉक किये और बाहर निकला. केटरिंग वाले बन्दे भी निकल लिए थे सब जगह सुनसान हो गया था. मैं बाहर निकलने ही वाला था कि धर्मशाला का वृद्ध चौकीदार मेरे सामने हाथ फैलाये आ खड़ा हुआ.
“साब कुछ इनाम, बख्शीश मिल जाती तो …” इतना कह कर उसने अपना फैला हुआ हाथ तीन चार बार अपने माथे से लगाया साथ में उसके मुंह से देशी दारु का भभका छूटा.

मेरे मन में भी एकदम विचार जागा कि इस चौकीदार का तो कुछ करना ही पड़ेगा नहीं तो जब मैं कम्मो को लेकर अभी यहां वापिस आऊंगा तो ये देख लेगा और कुछ गड़बड़ भी कर सकता है फिर.
“ये लो बाबा. और कुछ चाहिये तो बोलो” मैंने पचास का नोट उसकी तरफ बढ़ाते हुए पूछा.
“साब, दो घूंट और मिल जाती तो रात आराम से कट जाती; ठंड बहुत होती है रात में!” वो बोला.
“तूने पी तो रखी है अब और क्या पियेगा?” मैंने थोड़ा डांट कर कहा.
“साब छै बजे पी थी ठेके पे जाके, अब वो तो कबकी उतर गयी.” वो हंसते हुए बोला.

मैंने उसे रुकने का बोला और वापिस रूम खोल कर अपने बैग में से सिग्नेचर व्हिस्की का क्वार्टर निकाल के लाया.
“तू अपना गिलास ले के आ जल्दी” मैंने चौकीदार को बोला तो वह लगभग दौड़ता हुआ अपनी झोपड़ी में गया और गिलास ले आया. मैंने आधी व्हिस्की उसके गिलास में उंडेल दी.
“ले ऐश कर!” मैंने उसे कहा तो उसने गिलास माथे से लगाया और हाथ जोड़ दिये.

“और सुन, मेन गेट अन्दर से बंद नहीं करना. मैं अभी लौट के आता हूं. मुझे यहीं सोना है आज!” मैंने चौकीदार से कहा.
“जी साब, मैं इन्तजार करूंगा आपका!” वो बोला.
“अरे तू इन्तजार मत करना. मेरा कोई पक्का नहीं मैं कब लौटूं. तू तो दारु पी के सो जा आराम से.” मैंने उसे समझाया.
“ठीक है साब फिर आप बाहर का ताला लगा के चाभी ले जाओ अपने साथ!” उसने मुझे राय दी.

मैंने मेन गेट का ताला चाभी लेकर बाहर से गेट बंद किया और निकल लिया. अब मैं बिल्कुल निश्चिंत महसूस कर रहा था; सारी बाधाएं दूर हो गयीं थीं. बस अब तो ‘कम्मो की कुंवारी चूत और मेरा लंड’ मैंने खुश हो कर सोचा और जेब से क्वार्टर निकाल कर तीन चार तगड़े घूंट नीट ही गले से उतार लिए और खाली क्वार्टर वहीं फेंक कर तेज कदमों से बारात में शामिल होने चल दिया.

बारात में डी जे के कानफोडू गानों पर लोग नाचते हुए चल रहे थे. मेरी बहूरानी और कम्मो दोनों भी खूब जम के डांस कर रहीं थीं; मैंने जेब से रुपये निकाल कर उन दोनों के ऊपर से न्यौछावर कर बैंड वालों को दे दिये.
बहूरानी ने देखा तो उसने खुश होकर मुझे अपने होंठों से चूमने का इशारा किया. कोई पंद्रह मिनट बाद जब सब लोग अपनी अपनी धुन में मस्त हो गये तो मैंने कम्मो को लौटने का इशारा किया; आंखों ही आंखों में हमारी बात हुई और हम धीरे धीरे बारात के पीछे और पीछे होते चले गये और मौका देख कर स्पीड से धर्मशाला की ओर वापिस चल पड़े.

धर्मशाला में अंधेरा ही था क्योंकि सारी बत्तियां मैंने जानबूझ कर बुझा दी थीं. मैंने मेन गेट खोला और भीतर दाखिल हुआ. चौकीदार के कमरे में अंधेरा छाया था. जरूर वो टुन्न होकर सोया पड़ा होगा.
मेरे पीछे कम्मो भी आ गयी. हम लोग दबे पांव चलते हुए एक कोने वाले कमरे तक गये और उसे खोल कर अन्दर चले गये और फिर मैंने भीतर से दरवाजा बंद करके बत्तियां जला दीं. फिर सारी खिड़कियां बंद करके फर्श पर चार पांच गद्दे एक के ऊपर एक बिछा कर बढ़िया मोटा बिस्तर चुदाई के लिए तैयार कर लिया और कम्मो का हाथ पकड़ कर उसे बिस्तर पर गिरा लिया और उसे दबोच कर मैं उसके ऊपर चढ़ बैठा.

“हाय राम सबर तो बिल्कुल नहीं है आपको!” कम्मो कमरे में चारों ओर देखती हुई बोली.
“मेरी जान कल से तो सबर किये हुए हूं; कितने पापड़ बेलने के बाद तू हाथ आई है अब!” मैंने उसे प्यार से चूमते हुए कहा.

“हां वो तो मैं कल ही आपकी नज़रें देख कर समझ गयी थी कि आपकी नज़र मुझ पर है लेकिन ये पता नहीं था कि बात यहां तक पहुंचेगी.” वो धीरे से बोली.

सूट पहने हुए कम्मो का आलिंगन करने में मज़ा नहीं आ रहा था सो मैंने अपनी टाई निकाल दी और कोट भी उतार डाला. कम्मो के गले से दुपट्टा निकाल कर उसके मम्में सहलाते हुए उसे चूमने लगा, उसके शहद से मीठे होंठ चूसने लगा और सलवार के ऊपर से ही उसकी जांघें सहलाते हुए मेरा हाथ उसकी चूत तक पहुँचने लगा.

ऐसा थोड़ी देर तक करने से ही वो सुलगने लगी उसकी सांसें भारी होने लगीं और उसकी बांहें मुझे कसने लगीं. कड़क जवान छोरी थी सो जल्दी गर्म होनी ही थी.
“अंकल जी जल्दी करो जो करना हो. कोई आ जायेगा!” उसने वही पुराना राग अलापा.

“कम्मो मेरी जान … कोई नहीं आने वाला. तू सब कुछ भूल कर इन पलों का मज़ा ले; ऐसा हसीन मौका और समय ज़िन्दगी में बार बार नहीं मिलता!” मैंने उसे कहा और अपनी शर्ट और बनियान भी उतार कर फेंक दी.

कम्मो ने मेरे सीने को कुछ देर तक निहारा और फिर उठ कर मेरी छाती से लग गयी और अपना मुंह वहीं छुपा कर गहरी गहरी सांस लेने लगी, फिर वहीं पर दो तीन बार चूम लिया.

जवान चूत की कहानी जारी रहेगी.
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