कमसिन कच्ची कली मेरे बिस्तर पर फ़ूल बनी

(Kamsin Kachchi Kali Mere Bistar Par Phool Bani)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

हैलो दोस्तो, मैं आरुष इलाहाबाद का रहने वाला हूँ।
सबसे पहले मेरे चाहने वालों को मेरा नमस्कार और आपके ई-मेल्स के लिए ढेर सारा प्यार। कई सालों के बाद आज फिर मैं आप लोगों के लिए मेरी सेक्स स्टोरी लेकर आया हूँ, मैं उम्मीद करता हूँ कि यह भी आपको बहुत पसंद आएगी।

मेरी पहली कहानी थी- प्यार हो ही जाता है

बात करीब 3 साल पहले की है, मैं लगभग 23 साल का था, मैंने दिल्ली मैं नया-नया मकान लिया था।

स्टोरी आगे बढ़ने से पहले अपने बारे में बता दूँ कि मैं बहुत स्मार्ट या बहुत आकर्षक नहीं हूँ, बस एक नॉर्मल सा लड़का हूँ।

खैर.. जब मैंने मकान शिफ्ट किया तो देखा कि जिस गली में मेरा मकान था, उस गली में काफ़ी सुकून और शांति है, साथ ही में इधर के लोग बहुत व्यवहारिक हैं।

चूंकि मेरी छुट्टी शनिवार और रविवार दोनों दिन हुआ करती थी, तो मैं अक्सर अपने मकान के आस-पास के लोगों से काफ़ी बातचीत करता रहता था ताकि माहौल बना सकूँ।

मैं स्वाभाव से बहुत हंसमुख हूँ.. लोगों से जल्दी घुलमिल भी जाता हूँ।

मेरे घर के बगल वाली आंटी के यहाँ 5-6 किरायेदार रहा करते थे। उन किराएदारों में एक आंटी थीं, जिनकी एक बेटी थी, उसका नाम था मुस्कान (बदला हुआ नाम) था, वो बहुत चंचल थी।
जब मैं उससे किसी बात पर मजाक करता, तो वो बहुत खुश होती और मुझसे खूब बातें करने की कोशिश करती। वो किशोरावस्था में रही होगी, लेकिन उसका शारीरिक और मानसिक विकास भरपूर हो चुका था।

वो मेरे बारे में क्या सोचती थी.. इसका अहसास मुझे उसकी बातों से होने लगा था। हालांकि मैं उसके बारे में इतना नहीं सोचता था, क्योंकि वो मुझसे बहुत छोटी थी।

दोस्तो, वो कहते हैं ना कि मर्द चाहे कितनी भी कोशिश कर ले, लेकिन लड़की को वो उसकी मर्ज़ी के बिना अपनी तरफ खींच नहीं सकता, जबकि लड़की जब चाहे तब एक लड़के को अपनी ओर खींच सकती है।

हुआ यूं कि मैं बगल वाली आंटी से बहुत घुलमिल गया था.. इसलिए मैं कभी भी उनके घर या वो मेरे घर आ जाती थीं। जब मैं घर पर होता तो मुस्कान भी आंटी के साथ-साथ मेरे कमरे में आ जाती।
हम लोग इतने अधिक घुलेमिले हुए थे कि कभी कभी तो मुस्कान तब भी आ जाती, जब आंटी नहीं आती थीं।

वो मुझसे अलग अलग चीजों के बारे में बात करती रहती थी। कभी टीवी, कभी बुक्स, कभी स्कूल.. तो कभी कुछ और के बारे में मुझसे लगातार बात करने की कोशिश करती रहती थी।

मैं उसे घर जाने को कहता, तो वो उदास सा मन लिए चली जाती। मुझे बहुत हद तक मालूम हो चुका था कि उसके मन में मेरे लिए कुछ है, साथ ही वो भी इस बात को समझती थी कि वो अभी छोटी है।

एक बात और थी कि वो मुझे भैया भी बोलती थी, शायद इसी लिए वो मुझसे अपनी फीलिंग्स के बारे में कुछ कह नहीं पाती थी।

एक रविवार मैं सोया हुआ था, दस्तक हुई, मैंने दरवाजा खोला तो देखा वो हल्के पीले रंग की ड्रेस में आई हुई थी। मैंने उसे अन्दर बुलाया और बैठने को कहा।

उसने सबसे पहले यही पूछा- मैं कैसी लग रही हूँ?
मैं बहुत मजाकिया हूँ, इसलिए मैंने मजाक में कहा- एकदम जोकर लग रही हो!
सीधी सी बात है लड़कियों को ऐसा मजाक कभी पसंद नहीं आएगा, इसलिए उसने भी मुझे घूर कर देखा और कहा- सच बताओ?
मैंने उसकी फीलिंग्स को समझते हुए कहा- एकदम माल लग रही हो।

उसके गाल शर्म से लाल हो गए, वो बोली- मजाक कर रहे हो आप?
मैं- तुम्हारी कसम सच कह रहा हूँ!
मुस्कान- मेरी कसम ख़ाकर मुझे मारना चाहते हो क्या?
मैं- नहीं यार अपनी कसम, तुम आज बहुत खूबसूरत लग रही हो.. एकदम कटरीना कैफ़ की तरह!
मुस्कान- अच्छा तो आज आपको मैं ही मिली हूँ उल्लू बनाने के लिए?

मैंने हँसते हुए कहा- अभी तुम मिली कहाँ हो, मिलोगी तो उल्लू नहीं कुछ और बनाऊँगा।
मुस्कान- ये सब अपनी वाइफ के साथ करना.. मैं वैसी लड़की नहीं हूँ।
मैं- तो मैं भी उन जैसी लड़कियों से इतनी बात नहीं करता।
मुस्कान- बड़े गंदे हो आप!
यह कहकर और मुस्कुरा कर वो चली गई।

मैं अब पूरी तरह समझ चुका था कि वो मुझे मन ही मन चाहने लगी है। अब मेरा दिमाग़ भी पता नहीं कैसे, उसकी तरफ जाने लगा था। वो जब भी घर आती मुझे अच्छा लगता.. और नहीं आती तो हर पल निगाहें दरवाजे पर होतीं कि शायद वो अब आ जाए।

ऐसे ही करीब दो महीने निकल गए और हम आपस में हर तरह की बात करने लगे.. चाहे वो फ्रेंडशिप की हो, या सेक्स की।

लेकिन हमने एक-दूसरे को अभी तक छुआ नहीं था.. क्योंकि शायद हम दोनों ही डर रहे थे। पर अब मन में सुगबुगाहट होने लगी थी कि कब मैं उसे अपने गले से लगा लूँ और कब उसके यौवन का रस पी लूँ।

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