मेरी कमसिन जवानी की आग-2

(Meri Kamsin Jawani Ki Aag- Part 2)

This story is part of a series:

मैं बहुत डर गई और घबराने लगी, मैंने भी जल्दी से अपने कपड़े पहने और खड़ी हुई, अंकित से बोली- प्लीज़ मुझे बचा लो! ऐसे हम दोनों को टायलेट में अंदर देख लेंगे तो मैं किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं बचूंगी।
अंकित बोला- तू डर मत, कुछ नहीं होगा बस अंदर रहना, जब मैं बोलूं तभी बाहर आना! पहले मैं बाहर जाता हूं!
मैं बहुत डर रही थी.

तभी अंकित ने दरवाजा खोला और बाहर गया.
बाहर उसके पापा थे, उसने पापा से बोला- अंदर पानी नहीं है, मुझे भी बाल्टी चाहिए, अंदर पानी डालूंगा टायलेट में, तब आपके जाने लायक होगा.
उसके पापा जैसे ही वहाँ से हटे, अंकित ने जल्दी से गेट खोला और मुझे बोला- जल्दी बाहर आ वन्द्या!
मेरे बाहर आते ही मुझे अंकित बोला- यहीं खड़ी रह और बोलना मुझे जाना है अंदर!

इतने में तुंरत अंकित के पापा आ गए बाल्टी लेकर … मुझे खड़े देखे तो बोले- सोनू तू कब आ गई?
मैं बोली- अभी आई हूं मौसा!
अंकित के पापा बोले- ठीक है, पहले तू चली जा, बाद में मैं जाऊंगा.

अब मेरी जान में जान आई, मैं अंदर जाकर पांच मिनट बाद निकली और वहाँ से चली गई. पर अब मेरी हालत बहुत खराब थी, मुझे अंकित प्यासा छोड़ गया था, मेरा पूरा जिस्म अकड़ रहा था, पूरा बदन टूट रहा था, कभी भी लड़की को ऐसे नहीं छोड़ना चाहिए।
मैं बता नहीं सकती कि मुझे क्या फील हो रहा था.

सुबह ग्यारह बजे तक मैं तीन पैंटी बदल चुकी थी, इतनी गीली हो जा रही थी, कोई मर्द जात दिखे तो उसकी जिप के पास मेरी निगाह चली जा रही थी.
मैं बस यही सोचती कि काश कैसे भी आकर मुझे कोई अपनी बांहों में भर ले, और मेरे जिस्म को मसल दे … आज मेरी तमन्ना पूरी कर दे … मेरी प्यास बुझा दे, मेरे साथ जमकर सब वो करे जो मेरे गर्मी को शांत कर सके।
परंतु ऐसा कोई नहीं मिला, कैसे मिलता जब तक कि कोई बातचीत ना हुई हो.

ऐसे ही तड़पते हुए रात हो गई. खाना खाने के बाद अब मैं सोने के लिए गई तो हालत और खराब हो गई. पहले तो यह बता दूं कि मौसी के यहाँ उनके परिवार और रिश्तेदार सबका बिस्तर एक हॉल में लगा करता है. मौसी के यहाँ ज्यादा बड़ा घर नहीं है, एक कमरे में सब सामान था और एक कमरा छोटा था इसलिए हाल के फर्श में ही 15-16 लोग एक साथ नीचे बिछा के लेटते थे. करीब 6-7 लेडीज थी और 10-12 जेन्ट्स!

जब मैं लेटी तो करीब 10:30 बजे रात का समय हो चुका था पर मुझे बिल्कुल नींद नहीं आ रही थी, मेरे को सुबह के बाद अंकित भी नहीं दिखा, पता नहीं कहाँ चला गया था. मेरे बगल में बिस्तर खाली पड़ा था पर बिछा हुआ था उस बिस्तर में तीन जेन्ट्स आ गए. उनमें से एक अंकल को पहचानती थी, वो मेरी मौसी की ननद के पति थे, वो आर्मी से रिटायर्ड हो चुके हैं.
और दो कौन है नहीं जानती थी, पर थे मौसी के रिलेटिव ही.
मेरी दूसरी तरफ मौसी की सास लेटी थी.

रात को करीब एक बजे लगभग सब सो गए थे तब अचानक मेरे कंधे को पकड़ कर किसी ने दबाया. आंख खोली तो पूरा अंधेरा था, हाल में कुछ भी नहीं दिख रहा था.
तभी धीरे से अंकित की आवाज मेरे कानों में आई, वह बोला- मैं हूं, घबराओ नहीं, अंकित हूं, थोड़ा इधर खिसको, मुझे भी बगल से लिटा लो.

मैं जैसे ही अंकित की आवाज सुनी, मुझे लगा जैसे कोई अपना हो, मैं बहुत धीरे से बोली- यहाँ जगह नहीं है, कहाँ लेटोगे? जहाँ रोज लेटते हो, वहीं जाओ, यहाँ जगह नहीं है.
अंकित बोला- मुझे यहीं तुम्हारे बगल से लेटना है, थोड़ा खिसको, तुमसे बहुत जरूरी बात करनी है, यहाँ बन जाएगा थोड़ा और खिसको!
मैं बोली- उधर, अंकल लोग लेटे हैं.
तो अंकित बोला- अंकल की तरफ खिसको, इधर दादी हैं, इस तरफ मैं लेट जाऊंगा, तुम्हें बहुत जरूरी बात बताने आया हूं प्लीज खिसको.
और मैं पता नहीं क्यों … पर खिसक गई.

जैसे ही उधर खिसकी तो देखा कि अंकल को मैं टच हो गई क्योंकि जगह बिल्कुल कम थी पर थोड़ी जगह निकल आई और अंकित लेट गया.
अब जिधर दादी लेटी थी, उधर अंकित हो गया और दूसरे साइट में अंकल लोग लेटे थे, बीच में मैं हो गई. अंकित और मेरे बीच में पांच अंगुल का फासला था उधर दूसरे बगल अंकल से तो सिर्फ दो ही अंगुल का फासला बचा बस अगर मैं करवट लूं तो अंकल को टच कर जाती, मैं अंकल की तरफ अपना चेहरा कर ली थी और अंकित की तरफ पीठ इस तरह लेटी हुई थी।

करीब तीस मिनट तक अंकित चुपचाप लेटा रहा, उसके बाद बहुत धीरे से अंकित ने कान में आवाज दी- वन्द्या सुनो, सुन रही हो वन्द्या?
मैं सुन रही थी, जग भी रही थी पर कुछ नहीं बोली, सोई हुई बन गई.
चार पांच बार और आवाज लगाई अंकित ने, फिर बोला- बड़ी जल्दी तुझे नींद आ गई? मैं तुझसे मिलने आया हूं, और तुझे कुछ बताने भी आया हूं और तू कुंभकरण की तरह सो गयी.

करीब 15 मिनट और बिल्कुल किसी बिना हरकत के अंकित लेटा रहा मुझे भी नींद आने लगी थी, मैं सोची शायद अंकित सो गया, अचानक पीछे तरफ से अंकित ने अपना हाथ मेरे सीने में रख दिया और वैसे ही हालत में तीन चार मिनट रखे रहा तो मुझे लगा कि नींद में आ गया होगा.
परन्तु पांच मिनट बाद मेरे पिछवाड़े में कुछ लम्बी सख्त चीज चुभने लगी और तुंरत जो पांच अंगुल का फासला मेरे और अंकित के बीच था वह खत्म हो गया और अंकित मेरी तरफ थोड़ा खिसक के आया और मेरी पीठ तरफ चिपक गया, मैं नीचे स्कर्ट पहने हुई थी और ऊपर टाप, टाप ढीली थी टाप के नीचे समीज पहनी थी, दिन में मेरी 2 पैंटी खराब हो चुकी थी इस लिए धोकर सुखाने डाल दी थी, मेरे पास अब पैंटी नहीं बची थी इसलिए सिर्फ स्कर्ट पहनी थी, स्कर्ट के नीचे पैंटी नहीं थी.

जैसे अंकित मेरी पीठ से चिपका, उसका जो मेरे पीछे चुभ रहा था, मैं समझ गई कि अंकित का लन्ड है और अंकित सो नहीं रहा क्योंकि उसका लन्ड खड़ा हुआ था. अब मेरे मन के अंदर कौतूहल शुरू हो गया. तभी अंकित मेरे बूब्स को धीरे धीरे दबाने लगा वो भी टॉप के ऊपर से ही, अंदर ही अंदर मेरे अजीब सी हरकत शुरू हो गई, पर मुझे डर भी लगा कि कहीं कोई जग ना जाए पर मैं पता नहीं क्यों अंकित को मना नहीं कर पायी और उसे यह भी नहीं लगने दिया कि मैं जग रही हूं, मैं सोई ही बनी रही.

वो थोड़ी देर टॉप के ऊपर से धीरे-धीरे से मेरे बूब्स दबाता रहा, अचानक उसने मेरे पीछे जो मेरी गांड में उसका लन्ड टच हो रहा था, उसे स्कर्ट के ऊपर से ही दबाना रगड़ना शुरू कर दिया, उसकी इन हरकतों से मुझे अजीब सा लगने लगा और वही सुबह बाली फीलिंग मेरे अंदर बढ़ने लगी.

मेरे चुप रहने से अंकित की हिम्मत बढ़ने लगी और अब वो मेरे बूब्ज़ जोर से दबाने लगा. जैसे ही मेरे बूब्स दबे, मुझे कुछ-कुछ होने लगा और मेरे को आप बहुत समय नहीं लगा और मैं भूलने लगी कि मैं कहाँ लेटी हूं और सच कहूं तो भूल ही गई की यहाँ 15-20 लोग इस हाल में लेटे हैं.

अचानक अंकित अपना एक हाथ नीचे ले गया और मेरी स्कर्ट उठाने लगा. जैसे ही स्कर्ट के अंदर हाथ डाला, सीधे उसकी हथेली मेरी पिछवाड़े गांड में टच हो गई और पूरी नंगी मेरे गांड में अपनी हथेली चलाने लगा. उसकी इस हरकत से मेरी हालत और तेजी से खराब होने लगी.

तभी वो अपनी दो उंगलियां मेरी पीछे तरफ मेरी जांघों को थोड़ा फैला कर जहाँ सुराख था, उसमें डालने लगा तो मुझे गुदगुदी सी हुई. और वो मेरी स्कर्ट उतारने लगा और धीरे-धीरे खिसका कर उतार भी दी. फिर मेरे कान में बोला- वन्द्या तू जाग रही है क्या?
मैं कुछ नहीं बोली और सोई ही बनी रही. मेरे नीचे कुछ भी नहीं बचा, मैं पूरी नंगी हो गई क्योंकि स्कर्ट के अलावा और कुछ भी नहीं पहनी थी नीचे … ऊपर टॉप और समीज पहनी हुई थी. मैं सोने का नाटक करती ही रही.

इतने में अंकित ने अपना हाथ मेरी समीज के अंदर घुसा दिया और मेरे पेट मेरी नाभि को हाथ से रगड़ने लगा, मेरी नाभि में उंगली भी डाल कर घुमाने लगा, मुझे अजीब सा कुछ होना शुरू हो गया.
इसके बाद सीधे अंकित अपना लोवर और अंडरवियर उतारने लगा. जैसे ही उसका लोवर और अंडरवियर उतरा, उसने अपना नंगा सख्त लन्ड मेरी गांड में टच करा दिया और उसे धीरे-धीरे मेरे कूल्हों में घुमाने लगा.

उसकी इस हरकत से मेरे अंदर बिल्कुल आग सी लग गई. इसके बाद उसने मेरे टाप और समीज को ऊपर करना शुरू कर दिया, दोनों को ऊपर सीने के ऊपर गर्दन के पास कर दिया. अब मेरे बूब्स बिल्कुल खुले नंगे हो गए तो गर्दन के नीचे से पूरा का पूरा मेरा जिस्म बिना कपड़ों के हो गया, मतलब पूरी नंगी हो चुकी थी.

अंकित अपने हथेली से मेरे बूब्स को दबाने लगा सहलाने लगा, थोड़ी देर बाद अब अंकित मेरे बूब्स जोर जोर से दबाने लगा और मेरी गांड के छेद के पास अपना लन्ड रगड़ने लगा. मेरी हालत बहुत नाजुक स्थिति में पहुंच गई, मैं अब बर्दाश्त कर पाने की स्थिति में नहीं बची थी।

तभी वह एक हाथ नीचे लाकर मेरी नाभि से कमल पर हाथ चलाता हुआ नीचे की तरफ लाया और अपनी हथेली मेरी चूत में रख दी और अपनी हथेली से हल्के हल्के चूत के बालों को सहलाने लगा. थोड़ी देर तक उसकी यह हरकत चलती रही और फिर अचानक मेरी चूत में अपनी उंगली डाल दी.

जैसे ही उंगली मेरी चूत में गई, मैं बिल्कुल तड़प उठी, मुझे कुछ समझ नहीं आया कि मैं क्या करूं. मुझे पहले लगा कि मैं घूम के लिपट जाऊं अंकित से और उसको गले लगा कर उससे जमके चोदन करवा लूं. पर मैंने पता नहीं क्यों इतना धैर्य दिखाया और अभी भी सोने का नाटक ही करती रही.

तभी अचानक अंकित मेरे चूत में उंगली पूरी घुसा दी और उसे अंदर बाहर करने लगा, और मेरे कान में बिल्कुल पास आकर धीरे-धीरे बोलने भी लगा- वन्द्या तू बहुत मस्त माल है तेरी चूत इतनी गर्म है कि लग रहा है कि मेरी उंगली जल जाएगी, आज मैं तुझे जन्नत की सैर कराऊंगा, तू बहुत मस्त है. जब से तुझे सुबह से टच किया और तेरी चूत को चाटा था, वही तेरे चूत की महक मेरे जिस्म में समा गई है मैं सुबह से तीन चार बार मुट्ठ मार चुका हूं तुझे सोच सोच कर!

और इतना कहते ही अंकित जोर-जोर से अपनी उंगली मेरी चूत में अंदर बाहर करने लगा. मेरी चूत पूरी गीली हो चुकी और बहने लगी तो अब वही चूत का रस अंकित निकाल कर मेरे पिछवाड़े में मेरी गांड में लगाने लगा मेरे कूल्हे फैलाकर मेरी गांड के सुराख में जहाँ छेद था वहाँ एक उंगली हल्के से डालने लगा.
मैं अब बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी पूरी पागल सी हो रही थी.

इतने में अंकित ने अपना लन्ड मेरे गान्ड के छेद में टिका दिया और अपने मुंह से ढेर सारा थूक निकालकर लंड पर लगाया. अंकित ने मेरे कूल्हों को अपने हाथ से फैलाया और थोड़ा सा मेरे पैर को और किनारे किया, वो भी अपने हाथ से … अब उसका लौड़ा पूरी तरह मेरी गान्ड में सेट हो चुका था.
अंकित बोला- वन्द्या, अब तू तैयार हो जा … मैं तुझे आज बहुत चोदने वाला हूं, मैं और मेरा लन्ड बहुत तड़प रहे हैं, मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा. मैं तेरी मस्त गांड का दीवाना हूं.

और इस तरह से अचानक, मुझे अंदाजा नहीं था, उसने पूरा जोर लगाकर मेरी गांड में अपना लन्ड इतनी जोर से घुसा दिया कि मुझे लगा कि मैं दर्द के मारे मर गई. मुझे कुछ होश नहीं रहा दर्द के कारण अब मुझे कुछ समझ नहीं आया और मेरे मुंह से चीख निकल गई. ऐसा लगा कि मेरी गान्ड फट गई, मेरे बगल से चार अंगुल के अंतर में जो अंकल लेटे थे, मेरी मौसी के ननद के पति, उनसे लिपट गई दर्द के मारे, और इतनी जोर से पकड़ा उनको कि अंकल की नींद खुल गई. वो अंकल आर्मी में थे तो चौकन्ने रहना उनकी आदत में है. वो तुरंत उठ कर बैठ गए और सीधे अपने मोबाइल की लाइट जला कर देखा. कुछ बोले बिना उन्होंने अपने मोबाइल की लाइट से सब देख लिया और अपने मोबाइल से विडियो रिकार्डिंग भी कर ली अंकित जब लन्ड मेरी गान्ड में डाले था.

मैं उनसे लिपटी ही हुई थी, उन्होंने चुदाई की हालत में मुझे और अंकित को देखा तो अंकित घबरा गया, उसने जल्दी से अपना लन्ड मेरी गांड में से निकाला तो भी मुझे बहुत दर्द हुआ.

अंकल के बगल में दो अंकल और लेटे हुए थे, उनमें से तुरंत एक अंकल को उन अंकल ने उठाया, बोले- मुन्ना भाई उठो!
वो भी उठ के बैठ गये, पर अंकित तब तक अपनी अंडरवियर और लोवर पहनकर चुपचाप लेट चुका था.

पर मैं वैसी ही हालत में आंख बंद किए लेटी हुई थी, सोई बनी हुई थी परन्तु मुझे इतना डर लग रहा था इतनी घबराहट कि लगता था धरती फट जाए और मैं उसमें समा जाऊं. डर के मारे मेरी हालत बहुत खराब हो गई, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं, मैं अपने कपड़े पहन लूं इतनी हिम्मत और इतनी समझ नहीं आई, बस वैसी ही हालत में आंख बंद करके लेटी रही। तभी आर्मी वाले अंकल बोले- देखो मुन्ना भाई, ये लड़की और ये जो बगल में लड़का लेटा है, दोनों चुदाई कर रहे थे. ये देख, छोटी सी विडियो क्लिप बनाई है दस पन्द्रह सेकंड की!
और उन अंकल को दिखाई.

दूसरे अंकल का पहला रिएक्शन यही था- राज भाई, ये लड़की बहुत मस्त माल है, ये तो हिरोइनों की तरह दिखती है, किसकी लड़की है तुम पहचानते हो?
आर्मी वाले अंकल का नाम राजधर त्रिपाठी है, उनको सब राज ही कहते हैं, राज अंकल ने कहा- हाँ मुन्ना भाई, ये मेरे साले की साली जो तपा में ब्याही है, उसकी सबसे छोटी बेटी है इसका नाम वन्द्या है पर घर में सब लोग इसे सोनू कहते हैं, मैं भी सोनू ही कहता हूं। और इस लड़के को तो मुन्ना भाई तुम पहचान ही गये होगे?

तब वो अंकल बोले- बिल्कुल सही, ये तो अपना अंकित है.
वो दूसरे जो मुन्ना अंकल थे, वो बोले- राज भाई, अंकित की कोई गलती नहीं, वो तो अभी नया लड़का है, यह लड़की इतनी सेक्सी मस्त पटाखा माल है कि इस हालत में जैसे अभी नंगी लेटी है ऐसे किसी मुर्दा के सामने आ जाये तो वह मुर्दा भी जिन्दा होकर इसे चोदेगा, राज भाई तुम्हें इन दोनों का खेल नहीं बिगाड़ना चाहिए था, सारी गलती तुम्हारी है, अब राज भाई तुम इसकी भरपाई करो.

मुन्ना अंकल बोले- हम लोग तो 50 साल के ऊपर हैं, तब भी देखो अपनी हालत … तुम्हारा भी लन्ड खड़ा हो चुका है, और मेरी हालत तो इस आइटम को देखकर बिगड़ती ही जा रही है, क्या गजब की माल है, देखो नंगी लेटी हुई एक कयामत लग रही है, ऐसा लग रहा है कि हुस्न का समंदर है. चलो राज भाई, यह अधूरी प्यासी है बेचारी … अपन दोनों मिलकर इसको आज तृप्त कर देते हैं.
राज अंकल बोले- यार रिश्तेदारी में आती है, कहीं कुछ गड़बड़ ना हो जाए, किसी को पता चल गया तो बहुत बदनामी होगी.
मुन्ना अंकल बोले- अरे किसी को कुछ नहीं पता चलने वाला है, तुम इतना क्यों डर रहे हो, कौन सी तुम्हारी सगी है? आजकल तो अपनी बहन बेटी से तक से संबंध बना लेते हैं. यह तो तुम्हारे साले की साली की बेटी है, वैसे भी इसकी मां से तुम्हारे सेक्सी मजाक का रिश्ता कहलाएगा, फिर ये वन्द्या उसकी बेटी है तो इसे आराम से चोद सकते हो!

राज अंकल बोले- यार, हालत तो मेरी भी बहुत खराब हो रही है. यह ऐसी माल है, ऐसी मस्त आइटम है कि लगता है कि बस इसको चोद दिया जाए।
तो मुन्ना अंकल बोले- राज भाई, सोचो नहीं, बस शुरू करते हैं. वन्द्या को थोड़ा इधर खिसका के जगह बना कर मस्त जमकर इसकी चुदाई करते हैं.
मुन्ना अंकल ने मेरे पास आकर सीधे मेरे पिछवाड़े में अपना हाथ रख दिया और जैसे ही हाथ मेरी गांड में छुआ, उन्हें चिपचिपा सा लगा तो बोले- यह तो चुदाई करवा चुकी है, लगता है उसके लन्ड का रस निकल चुका होगा।

मुन्ना अंकल ने मेरे चूतड़ों को फैलाकर देखा, फिर बोले- नहीं, यह लंड का रस नहीं है, कुछ और रहा होगा.
राज अंकल बोले- यार इसे उधर कहीं ले चलें? क्या है कि यहाँ बहुत लोग सो रहे हैं, किसी ने देख लिया तो गड़बड़ हो जाएगी, इसलिए यहाँ ठीक नहीं है.

राज अंकल ने अंकित को उठाया, धीरे से बोले- अंकित उठ … उठ जा!
जैसे ही अंकित उठा तो अंकल बोले- तू घबरा नहीं, डर नहीं, हमारी सारी बातें तो तूने सुन ही ली होंगी, अब तुझे डरने की जरूरत नहीं, तूने कुछ गलत नहीं किया, ना इस सोनू की गलती है, यह जवान है, सेक्सी है, इस उम्र में सबका मन करता है. वन्द्या इतनी मस्त लड़की है, कोई कैसे कंट्रोल कर सकता है, इसलिए इस वन्द्या को चोदकर तो तूने कोई गलती नहीं की, तूने इसे ठीक चोदा है, पर तेरा काम पूरा नहीं हुआ अंकित, पहले थोड़ी हम लोगों की भी मदद कर दे तो तेरी बात किसी को नहीं बताएंगे. बस हम दोनों और तू भी साथ में आ जा … वन्द्या की जवानी का मजा लेते हैं, और इसको जमके चोदते हैं. बहुत मस्त माल है, देखो कैसे लेटी है नंगी और ऐसे नंगी कितनी मस्त लग रही है. हम तो वन्द्या के लिए दीवाने हुए जा रहे हैं.

राज अंकल अंकित के सगे फूफा हैं, अंकित राज अंकल से बोला- फूफा जी, किसी को मत बताना, मैं वन्द्या की चुदाई आप लोगों से अच्छे से करवा दूंगा, कोई दिक्कत नहीं है, यह बहुत सेक्सी लड़की है, बहुत चुदाती है और इसका कोई जवाब भी नहीं.
तभी मुन्ना अंकल ने कहा- इसको कहाँ करेंगे? तू जगह देख फिर इसे उठाकर ले चलेंगे.

कहानी जारी रहेगी.
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