जोधपुर की कुंवारी लड़की -1

(Jodhpur Ki Kunvari Ladki- Part 1)

This story is part of a series:

कार में लंड चुसाई की कहानी

सभी टपकती हुई चूतों और खड़े हुए लंड को मेरा सलाम!
दोस्तो, आज मैं आपको अपने जीवन की सच्ची घटना के बारे में बताऊंगा। सच कहूँ तो अन्तर्वासना पर कहानी लिखने के बाद मेरे भाग्य खुल गए, आज तक अन्तर्वासना की बदौलत मैंने 9 चूतों का रसपान किया है जिनमें से 3 की नथ भी मैंने ही उतारी थी. और क्या बताऊँ दोस्तो, कुंवारी चूत को चोदने और चूसने का मजा ही कुछ और है।
इस कहानी के माध्यम से मैं अन्तर्वासना को धन्यवाद भी देना चाहता हूँ।

खैर मैं अपनी कहानी पे आता हूँ।

आज से कुछ वर्ष पहले मैंने अपनी एक कहानी
कंडोम की जरूरत नहीं
अन्तर्वासना पर डाली थी। उस कहानी के बाद मुझे कई लड़कियों के मेल भी आये, सच कहूँ तो ज्यादातर लड़के ही थे जो लड़की बन कर बात कर रहे थे। उस वक़्त वीडियो कॉल इतना आसान नहीं था वरना एक सेकंड में पता चल जाता। इसी कारण मैंने कई इमेल को लड़की समझ कर जवाब दिया पर अंतत वो लड़के निकले!

खैर कोयले की खान में से ही हीरा निकलता है. और मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ, जो निकला वो हीरा ही था, अनछुआ हीरा, भगवान का तराशा हुआ एक बेशकीमती नगीना जो अपने जौहरी को तलाश कर रहा था और वो जौहरी मैं था।

मेरी कहानी आन्तार्वसना पर प्रकाशित होने के कुछ दिनों बाद मुझे कई सारे इमेल आये; पर चूंकि मैं जोधपुर में रहता हूँ और मेरा किसी अन्य शहर जाना पारिवारिक कारणों से संभव नहीं था, तो मैं देख रहा था कि कोई जोधपुर की ही लड़की का मेल आये, और आया भी… पर वो एक लड़का निकला; मैं थोड़ा मायूस हो गया।
कुछ दिन तक फिर मैंने मेल भी चेक नहीं किया।

पर फिर एक दिन सोचा कि आज देखते है कि कुछ मिलता है क्या?
देखा तो एक ईमेल आई हुई थी, वो एक लड़की की थी। उसका नाम रिया (बदला हुआ) उसे मेरी कहानी पसंद आई, पर ‘कहाँ की है’ नहीं जान पाया।

चूंकि मैं सॉफ्टवेयर में दिलचस्पी लेता हूँ, इसलिये ईमेल की आई पी एड्रेस से जान लिया कि वो जोधपुर की ही है। कई बार हमारे बीच ईमेल हुई, फिर फेसबुक पे भी बात हुई और फ़ोन पर भी, आवाज से तो बहुत महमोहक लग रही थी, पर फिर भी मन आशंकित था।
कई बार मिलने को बोला पर वो हर बार टाल जाती।

मेरे दिमाग में एक आईडिया आया, मैंने उससे बोला- मेरा बर्थडे आ रहा है, और अगर आज तुम मुझसे नहीं मिली तो मैं कभी बात नहीं करूँगा।
वह मान गयी, हमारा मिलना तय हुआ, यह भी तय हुआ कि मैं उसे गाड़ी से पिक करूँगा।

तय वक़्त पर हम एक जगह मिले, उसे फ़ोन लगाया तो उसने बोला कि वो एक रेस्टोरेंट में रेड कलर की ड्रेस में बैठी है।
चूंकि रिया की पीठ मेरी तरफ थी तो मैं उसे पहचान नहीं पाया।

जैसे जैसे मैं उसके करीब जा रहा था, दिल जोर जोर से धड़क रहा था क्योंकि मैं पहली बार किसी लड़की से मिलने रेस्टोरेंट में जा रहा था।
पीछे से तो बिल्कुल क़यामत लग रही थी। लाल स्लीवलेस ड्रेस, काले मोती के डिज़ाइनर झुमके, बालों में हल्का सा लाल रंग ( हम लड़कों के लिए तो लाल ही, बाकि कोई और नाम भी हो सकता है.)

कसम से… पीछे से यह हाल था, दिल जोरों से धड़क रहा था पर जब सामने गया तो मानो रुक ही गया। यह तो अर्पिता है, वही अर्पिता जो दो साल पहले तक क्लास में गंदे से कपड़ों में आती थी, शक्ल से ही लगता था कि यह एक सीधी सादी और सरल लड़की है जिसको सजने संवरने, लड़कियों वाली अदायें नहीं आती थी, या शायद अपने घर की आर्थिक स्थिति के कारण कर नहीं सकती थी।

जितना मैं उसे देख कर हैरान था, उतना ही वो भी मुझे देख कर चकित रह गई थी. क्योंकि दो साल पहले मैं भी सीधा सादा दब्बू सा लड़का था और आज चूत चैंपियन बॉडी शोडी के साथ हूँ।

खैर हमारे बीच यहाँ वहाँ की बातें हुई और फिर हम मेरी कार में बाहर चले गए.

मैंने कहा- यार अर्पी, तुम तो काफी हॉट हो गयी हो, कोई सोच भी नहीं सकता था कि तुम वही अर्पिता हो।
अर्पिता- सब तुम्हारे कारण!
“वो कैसे?” मैंने चौंक कर पूछा- मैं तो अभी अभी मिला हूँ।
अर्पिता- मेरा मतलब, सब अन्तर्वासना और उस पर तुम्हारे जैसे लोगों की लिखी हुई कहानी का असर है!
“सच? तुम्हें मेरी कहानी अच्छी लगी?”
अर्पिता- हाँ, बहुत अच्छी कहानी थी, कहानी अच्छी बना लेते हो!

“वो कहानी नहीं है, मेरी सच्चाई है.”
अर्पिता- चल झूठा, तेरे जैसा दब्बू इन्सान किसी लड़की को चोदे वो भी शायना जैसी लड़की(मेरी पिछली कहानी की नायिका) को पटा ले? नॉट पोसिबल! अच्छा चल यह बता कि तूने शुरुआत कैसे की?
“कुछ नहीं… मैं और वो कहीं जा रहे थे कार में… जैसे आज!”

अर्पिता- फिर?
“बातों बातों में मैंने गियर बदलने के बहाने उसकी जांघों को टच किया” इतना बोल कर मैंने मैंने गियर बदला और बदलते वक़्त अर्पिता की जांघों को छुआ.
अर्पिता- फिर?
“धीरे धीरे उसका हाथ अपने हाथों में लिया और कार चलते हुए ही हाथ पर किस किया.”
इतना बोल कर मैंने अर्पिता के हाथ को हाथ में लेकर उस पर किस किया.

अर्पिता- उसके बाद?
“उसके बाद मैंने उसकी जांघों पर हाथ रखा और मसलने लगा, उसकी साँसें बढ़ने लगी और वो सिसकारियाँ लेने लगी.”
और ठीक इसी वक़्त मैंने अर्पिता की जांघ पर हाथ रख दिया और अर्पिता की भी साँसें तेज हो गयी।
अर्पिता- उसके बाद?
“उसके बाद मैंने उसके टीशर्ट में हाथ डाला नीचे की तरफ से और पेट पर हाथ फेरने लगा.”

अर्पिता- फिर?
“फिर क्या… धीरे धीरे उसकी जीन्स में हाथ डाला और वो भी मेरी जांघों से होती हुई मेरी जीन्स पर हाथ पहुँचा चुकी थी इस तरह से!” इतना बोल कर मैंने अर्पिता का हाथ अपने लंड पर रख दिया जो पहले से ही सलामी दे रहा था.
अर्पिता- सच्ची?? उसके बाद?

“उसके बाद क्या… वो मेरे लंड से खेल रही थी और मैं उसकी चूत से, पर चूंकि हम उस वक़्त शहर के बीचों बीच थे तो गाड़ी तेज नहीं चला सकता था और न ही गाड़ी पर से कण्ट्रोल छोड़ सकता था तो मैंने गाड़ी हाईवे की तरफ मोड़ ली।”
“हाईवे पर आते ही मैंने उसे चूसने को बोला और वो झुक कर मेरा लंड चूसने लग गयी। मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं स्वर्ग में हूँ, पर गाड़ी पर भी ध्यान देना था… वरना स्वर्गवासी हो जाता। पर एक बात है कि वो इतना जोश में लंड चूस रही थी कि आज तक सोचता हूँ किसे ज्यादा मजा आया होगा।”

अर्पिता- उसे क्या मजा आएगा, तेरा चूस रही थी तो तुझे ही मजा आएगा ना!
“मुझे तो नहीं लगता, लड़कियों को भी लंड चूसने में मजा आता है, जैसे हमें चूत चाटने में… एक काम क्यों नहीं करती, तुम खुद देख लो लड़कियों को मजा आता है या नहीं!”
इतना बोल कर मैंने अपनी जीन्स की ज़िप खोल दी और लंड जो पहले से ही जीन्स का तम्बू बना चुका था, वो आज़ाद हो गया और अर्पिता के सामने एक काला 7 इंच लम्बा 3 इंच मोटा लंड आ गया, वो बार बार मेरे लंड को फिर गाड़ी के गियर स्टिक को देख रही हूँ, मानो तुलना कर रही हो कि कौन ज्यादा मोटा काला और सख्त है।

“हेल्लो अर्पी, कहां खो गयी?” मैं उसकी तन्द्रा भंग करते हुए बोला.
“जब से तुम्हें देखा है, तुम्हारे सम्मान में खड़ा है, थक गया है बेचारा, थोड़ी से मालिश दे दो”
इतना बोल कर मैंने उसके हाथ में लंड पकड़ा कर मुठ मरने का तरीका बताया।

लगभग 4-5 मिनट मुठ मारने के बाद धीरे धीरे लंड के पास आने लगी, शायद लंड की खुशबू ले रही थी, जो उसको मदहोश कर रही थी, ऐसा लग रहा था कि उसने पहली बार किसी मर्द का लंड देखा है।
कभी ऊपर की चमड़ी हटा कर मेरे लाल लाल सुपारे को देखती, तो कभी लंड को हाथ के दम से नीचे सुलाने की कोशिश करती। पर हर कोशिश बेकार, जितना वो लंड को बैठाने की कोशिश करती, उतना ही वो कड़क हो जाता और सर उठा के सलामी देता, जैसे कोई सैनिक झंडे को देता है।

मुझे अर्पिता की गर्म साँसें अपने लंड पर महसूस हो रही थी, धीरे धीरे अर्पिता के अधर अधीर होने लगे और आखिरकर मेरे लंड को अर्पिता के मुख में जगह मिल ही गयी.
चलती गाड़ी में कोई आपका लंड चूस रही हो तो उस फीलिंग को शब्दों में बयाँ नहीं कर सकते।
और ऊपर से कोई लड़की पहली बार लंड का स्वाद चख रही हो तो कहना ही क्या!

मेरे लंड की चुसाई और गाड़ी की स्पीड दोनों लगातार बढ़ रहे थे। आखिरकर मेरे लंड ने कुछ मिनट बाद हार मान ली और एक गरम धार अर्पिता के मुख में डाल दी. हालांकि अर्पिता का पहली बार था, तो उसको थोड़ी उबकायी जैसा लगा, पर फिर धीरे धीरे सही हो गया.
इधर अर्पिता की चूत ने भी पानी छोड़ना शुरू कर दिया क्योंकि मेरी उंगली अर्पिता की चूत में हलचल मचा रही थी।

इसी के साथ हम दोनों सामान्य हो गए, एक दम शांति, पर शायद ये तूफ़ान के पहले की शांति थी।

अभी मुझे लगता है कि कहानी को एक विराम देना चाहिए. आगे की कहानी में मैं बताऊंगा, कैसे मैंने अर्पिता की चूत चोदी, वो भी बहुत तड़पा तड़पा कर!
जब तक लड़की खुद न कहे कि “अब बस चोद दो, फ़क मी, फ़क मी हार्डर!” तब तक मजा नहीं आता।

मित्रो, आपको मेरी सेक्स कहानी का यह पहला भाग कैसा लगा, जरूर बताना!
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