जाट छोरे नै जाट छोरी की सीलपैक चूत चोदी-1

(Jat Chhore Nai Jat Chhori Ki Sealpack Chut Chodi- Part 1)


हैलो साथियो, नमस्कार. मेरा नाम नेहा है. मैं अन्तर्वासना की 2015 से पाठिका हूँ. मैं हरियाणा के पानीपत से हूँ. मेरा गांव पानीपत के बहुत पास है, तो मैं कॉलेज में पढ़ने के लिए पानीपत जाती हूँ. मेरी उम्र 22 साल है, मेरी हाइट 5 फुट 3 इंच है. मेरा फिगर देखने में काफी अच्छा है. ये लगभग 32-30-34 का है. कटावदार फिगर होने के साथ ही मेरा रंग एकदम दूध सा गोरा है. मेरे बाल मेरे चूतड़ों तक लहराते हैं, ये इतने लंबे हैं.

जब मैं 20 साल की थी, तो कॉलेज में पढ़ने के साथ ही मैंने पानीपत में ही कोचिंग लेने का फैसला किया. मेरे गांव से पानीपत सिटी में पहुंचने के लिए 25 तो 30 मिनट लगते हैं, मैं ऑटो से जाती हूँ. मैं कॉलेज के बाद 2 से 5 बजे तक कोचिंग करने लगी. वहां मेरी क्लास में करीब 90 छात्र थे. कोचिंग के क्लास में मेरी कुछ फ्रेंड बन गई थीं.

उन सभी में से एक के अलावा मेरी कोई इतनी क्लोज़ नहीं थी, वो फ्रेंड शादीशुदा थी. वैसे तो वो पंजाब की थी, लेकिन उसके हज़्बेंड अपनी जॉब के लिए यहां काफ़ी दिनों से रह रहे थे. हम दोनों में बहुत बनती थी. मैं दिखने में काफ़ी सुन्दर हूँ. क्योंकि आपको तो मालूम ही है कि हरियाणा के जाटों की छोरियां बहुत सुन्दर होती हैं. मेरी फ्रेंड अपने घर में अपने पति और सासू माँ के साथ रहती थी. मुझे कोचिंग लेते एक महीना हो गया था. अब तक सब नॉर्मल चल रहा था.

एक दिन मेरी फ्रेंड क्लास में नहीं आई. मैंने फोन किया, तो उसने बताया कि वो उसकी सासू माँ को दवा दिलाने दिल्ली जा रही है. उसकी सासू माँ को घुटनों में दर्द रहता था.

इधर आज मैं क्लास में थोड़ा पहले आ गई थी. अब तक एक दो छात्र ही आए थे. पूरी क्लास खाली थी. सो मैं बिल्कुल आगे की बेंच पर बैठ गयी.
अब लड़के तो सभी गर्ल्स को नोटिस करते ही हैं.

उस दिन गणित का पहला लेक्चर था, तो एक छोरा आकर मेरे पास बैठ गया. मैंने उसे क्लास में काफ़ी बार देखा था क्योंकि मेरी क्लास का ही था, लेकिन हमारी बात नहीं होती थी.

आज का टॉपिक उस दिन काफी कठिन था, मुझे ज्यादा समझ में नहीं आया. ब्रेक में उस छोरे ने मुझसे बात की- कैसा रहा लेक्चर. कुछ समझ आया या नहीं?

उसने यही सब नॉर्मल बात की. तो मैंने उसे बता दिया कि मुझे ज्यादा कुछ समझ नहीं आया क्योंकि मेरी गणित कमजोर है.
तो वो मुझे सवाल समझाने लगा. हमारी थोड़ी बात हुई. मुझे उसके समझाने का तरीका ठीक लगा. इसलिए क्लास के एक घंटा बाद तक उसने मुझे सवाल क्लियर कराए.

इसके बाद ऐसे ही कभी कभी उससे मेरी हाय हैलो हो जाती.

एक दिन में क्लास में जल्दी आ कर बैठी थी, तो मेरी उससे हाय हैलो हुई, वो मेरे पास बैठ गया. उसका नाम अमित था. उसकी हाइट करीब 5.9 फीट होगी. वो ना तो ज्यादा तगड़ा था, ना ही कमजोर था. मतलब सामान्य जाट था. उसका रंग भी गोरा था. बातचीत से पता चला कि वो भी मेरी ही बिरादरी का ही है और मेरे साथ वाले कॉलेज में ही पढ़ता है.

हमारी कुछ देर बातें हुईं. तब तक मेरी फ्रेंड आ गई. वो क्लास खत्म करके चला गया.

एक बार मैं और मेरी फ्रेंड मार्केट गए, तो वहां वो हमें मिला. उसने मुझे देख कर स्माइल पास की और चला गया. उससे मेरी दोस्ती बढ़ती ही जा रही थी. ऐसे ही क्लास में भी उससे हाय हैलो हो जाती.

एक बार हम दोनों सहलियों की किसी कारणवश गणित की दो दिन की क्लास मिस हो गई. तो मैंने अमित से उसके नोट्स देने को कहा.

उसने मुझे घर ले जाने के लिए नोट्स दे दिए. मुझे घर पर सवाल समझ नहीं आ रहे थे, तो मैंने देखा कि अमित की नोटबुक पर उसका नंबर लिखा था.

मैंने उसे फोन किया और उससे कहा- यह मेरा पर्सनल नंबर है. सेव कर लो.
उसने फोन पर ही मुझे सवाल क्लियर करा दिए.

अब ऐसे ही कुछ दिन बीत गए, कभी कभी उससे व्हाट्सैप पर थोड़ी बहुत बात हो जाती. हम क्लास में कभी कभी तीनों फ्रेंड्स एक साथ बैठ जाते थे.

एक बार रात के 10 बजे उसने हाय का मैसेज भेजा, मैंने रिप्लाइ किया.
नेहा- हैलो, सोए नहीं क्या?
अमित- नहीं अभी नहीं.
नेहा- क्यों जीएफ से बात कर रहे थे क्या?
अमित- अरे नहीं यार. मेरी कोई जीएफ नहीं है. मेरे भाई बाहर रहते हैं. वो आर्मी में हैं, उनसे ही बात कर रहा था.
नेहा- वाउ आर्मी में हैं. नाइस.

मैं आपको बता दूँ कि यहां हरियाणा में हमारी जात बहुत बहादुर मानी जाती है. हमारे जाट छोरे बहुत लंबे चौड़े होते हैं, इसलिए ज्यादातर पुलिस या आर्मी में नौकरी करते हैं.
अमित- नेहा तुम नहीं सोई?
नेहा- नहीं.. बस स्टडी कर रही हूँ.
अमित- स्टडी या ब्वॉयफ्रेंड से बात कर रही हो.
नेहा- अरे प्लीज़ यार बकवास मत करो. मेरा कोई ब्वॉयफ्रेंड नहीं है.
अमित- ओके यार जस्ट किडिंग. (मैं तो मजाक कर रहा था.)
नेहा- इट्स ओके यार (ठीक है)

फिर मैंने ही उससे पूछा- तुम कहां से आते हो अमित?
उसने बताया तो पता चला वो मेरे गांव से अगले वाले गांव से ही आता है. वो कभी बस से, कभी बाइक से आता है.

नेहा- ओके अमित. मैं सो जाऊं अब? गुड नाइट.
अमित- ओके बाय सो जाओ गुड नाइट. फिर कल कॉलेज के बाद क्लास में मिलते हैं.
हमारी ऐसे ही व्हाट्सैप पर थोड़ी थोड़ी बात होती रही.

एक दिन रात को उसने कहा कि नेहा मेरा एक सवाल सॉल्व कर दो.
मैंने कहा- हां दो.
अमित- बहुत कठिन है शायद तुमसे नहीं हल नहीं हो सकेगा.
नेहा- बकवास मत करो. सवाल दो.
अमित- जो नहीं हुआ तो लगी शर्त. जो मैं बोलूँगा, वो करोगी?
नेहा- ओके ठीक है.

मुझसे सवाल सॉल्व नहीं हुआ और मैं शर्त हार गयी.
मैंने उससे बोला- बोलो अब मुझे क्या करना है?
उसने कहा- तुम मेरी फ्रेंड हो ना.
मैंने कहा- हां बोलो.
वो कहने लगा कि यार तुम्हारे पास एक ब्लैक और एक येलो सूट है ना, जो तुम पहन कर भी आई थी एक बार?
मैंने कहा- हां है.. तो!
वो- तो तुमको कल उनमें से ही एक पहन कर आना है.
मैंने कहा- लेकिन ऐसा क्यों?
उसने कहा- बस ऐसे ही यार.

उस रात को मेरे मन में अजीब से विचार आ रहे थे कि उसने ऐसा क्यों बोला?

अगले दिन मैं काले रंग का सूट पहन कर गयी. वो मुझे देखते ही स्माइल पास करने लगा. मैंने भी उसकी तरफ देख कर हंस दिया.
फिर क्लास में जा कर मैंने सारी बात अपनी फ्रेंड को बताई.

उसने कहा- मरता है ये तुझ पर.
मैंने कहा- नहीं यार.. वो बस फ्रेंड है.. तो उसने बोल दिया होगा.
उसने कहा- मैं सब नोटिस करती हूँ, वो तुझे ही घूरता रहता है.

तभी अमित ने मुझे फोन किया और मेरी तरफ देखते हुए मुझको ब्लैक सूट में आने के लिए थैंक्स कहा.

मेरी सहेली बोली- देख ले, क्या खिचड़ी पक रही है.
मैंने कहा- यार तू तो ना बस यूं ही लगी पड़ी है.
अपनी सहेली की बात मैंने हंस कर टाल दी.

लेकिन मेरे दिमाग में मेरी सहेली की बातें घर कर गयी थीं. रात को फिर अमित से थोड़ी बात हुई और वो सो गया.

मैं रात को उसी के बारे में सोचती हुई सो गई कि क्या वो मुझ पर आकर्षित है या मैं उसकी तरफ आकर्षित हूँ या आग दोनों तरफ बराबर लगी है?

अगली सुबह उसने मुझे मैसेज किया किया कि वो बाइक पर है और मुझे ले लेगा, दोनों साथ में ही चल पड़ेंगे.
मैंने भी हां कर दी.

मैं अपने गांव के स्टॉपेज पर पहुंची ही थी कि वो वहां पहले से ही बिना बाइक के खड़ा था. उसने कहा- यार सॉरी बाइक खराब हो गयी, रास्ते में ही मैकेनिक के पास खड़ी कर दी.
मैंने कहा- कोई नहीं, बस से चलते हैं.

कुछ देर बाद एक बस आई वो बहुत फुल थी. बहुत भीड़ देखते हुए उसने मना कर दिया. मैं भी मान गयी.

फिर देखा तो टाइम 9 बजने वाले थे, हम दोनों ही क्लास के लिए लेट हो गए थे.

ये जुलाई का महीना था, मानसूनी मौसम था, सो कुछ ही देर में बारिश होने लगी. उसने जीन्स शर्ट पहनी थी और मैंने भी जींस और टी-शर्ट पहनी थी. बारिश तेज होने लगी तो मैं थोड़ी भीग गयी.

अगली बस आई, तो ये तो पहले वाली से भी ज्यादा भरी थी, लेकिन टाइम ज्यादा हो जाने की वजह से हम दोनों बस में चढ़ गए. जैसे तैसे करके हम बस में चढ़ सके. अन्दर एकदम फुल ठसाठस भरी थी. मुझसे तो खड़ा भी ठीक से नहीं हुआ जा रहा था. बहुत धक्का मुक्की हो रही थी.

मैं अमित के आगे थी, वो मेरे पीछे था. बहुत भीड़ होने के कारण धक्के से अमित मेरे ऊपर आया और उसका पूरी बॉडी मेरी पूरी पीठ से रगड़ खा गयी.

भीड़ बहुत थी. मेरे आगे एक 30 साल का जवान लड़का खड़ा था. मेरे चुचे बार बार उसकी पीठ से रगड़ खा रहे थे, वो भी मेरे मम्मों की मस्ती लेने के लिए पीछे को ही हो रहा था. मैं उसकी इस बात को समझ गयी थी. मैंने अमित की तरफ मुँह कर लिया.

अब मैं हाइट में अमित की ठोड़ी पर आ रही थी. भीड़ में फिर धक्का लगा, तो अमित मेरे ऊपर आ गया. मैंने उस कमर से पकड़ा और उसने मुझे मेरे कंधों से पकड़ कर संभाला.

पता नहीं आज मुझे अजीब से फीलिंग हो रही थी. शायद किसी मेल के साथ फर्स्ट टाइम इतना करीब होने से हो रही होगी.

मैं अमित की शर्ट में लगे परफ्यूम की हल्की हल्की खुशबू को एंजाय कर रही थी. वो भी मेरे बॉडी स्प्रे की महक को अपनी सांसों में अन्दर तक ले रहा था. मैं उसकी कमर को जोर से पकड़ कर खड़ी थी, ताकि कोई भीड़ का धक्का लगे, तो मैं उसके ऊपर गिर न जाऊं. लेकिन तभी बस ने ब्रेक लगाए और एक झटका इतनी जोर लगा कि मुझसे सम्भला ही न गया और मेरे चुचे उसकी छाती से रगड़ खा गए. मैंने उसकी मर्दाना छाती को अपने मम्मों से रगड़ कर एक अजीब सा सुख पाया.

जैसे तैसे करके हम दोनों पानीपत पहुंचे. वो अपनी मंजिल पर उतर गया. मेरे कॉलेज पहुंच जाने के बाद उसने मुझे फोन किया और पूछा- तुम ठीक हो ना?
मैंने कहा- हां.
वो बोला- ठीक है, कोचिंग पर मिलते हैं. ओके!
मैंने ओके कह कर फोन काट दिया.

कोचिंग पहुंच कर मैंने सारी बात अपनी सहेली को बताई. वो मुझसे मज़ाक करने लगी.
मैंने कहा- चल पागल ऐसा कुछ नहीं है.
वो कहने लगी- तू मान या ना मान … ये तुझ पर मरता है.
मैंने उसकी बात को हंसी में टाल दिया.

लेकिन मैं सोचने लगी कि मैं उसकी हर बात अपनी सहेली को क्यों बता देती हूँ. क्या मुझे उसके बारे में बात करके अच्छा लगता है.

कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा.

एक रात मैं अमित से बात कर रही थी. वो इमोशनल हो गया और उसने मुझे ‘आई लव यू’ बोल दिया. मैंने बिना कोई रिप्लाइ करे व्हाट्सअप बंद कर दिया.
मैं अमित के बारे में सोचती रही कि वो सुन्दर है, सेम कास्ट का है.. लंबा है केयरिंग भी है.. और क्या चाहिए यार. लेकिन अब मैं उससे हां कैसे करूं. हां करने में भी मुझे बहुत शर्म आ रही थी.
दो दिन हमारी कोई बात नहीं हुई.

क्लास में मैंने बात अपनी सहेली को ये बात बताई तो उसने कहा- शादी से पहले मेरा भी एक ब्वॉयफ्रेंड था. मेरे साथ भी शर्म के कारण ऐसा हुआ था, ज़ुबान ही नहीं खुलती पहली बार तो … लेकिन तुम हां कर दो यार … लड़का शरीफ है.

रात को फिर अमित का मैसेज आया और उसने फिर पूछा.
मैंने कहा- अगर किसी को पता चल गया ना फैमिली में … तो दोनों मरेंगे.
उसने फिर हां या ना पूछी.
मैंने हां कर दी.

उस रात हम सुबह 5 बजे तक बात करते रहे.

अमित मेरा प्यार बन चुका था. उसके साथ मेरे सेक्स सम्बन्ध कैसे बने और इसमें मेरी सहेली की क्या भूमिका रही, इस सबके बारे में मैं खुल कर अगले भाग में लिखूंगी. मेरी इस लव एंड सेक्स कहानी पर आप अपने मेल भेज सकते हैं.

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कहानी का अगला भाग: जाट छोरे नै जाट छोरी की सीलपैक चूत चोदी-2

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