सिमरन मैडम गोवा में-1

हेलो दोस्तो! मेरा नाम अमित है। मेरा रंग गोरा है, मेरा कद 6 फुट 1 इंच, जिम तो नहीं जाता पर अपने शरीर का मैं पूरा ध्यान रखता हूँ।

अन्तर्वासना पर पहली कहानी लिखने जा रहा हूँ, कोई गलती हो तो माफ़ करिएगा। इस कहानी में लड़की का नाम बदला हुआ है और शहर, स्कूल के नाम गोपनीय रखे गए हैं क्योंकि मैं उसके दिल को दुखाना नहीं चाहता।

यह कहानी एक साल पहले की है जब मैं क्लास 12 में पढ़ता था, तब मेरे स्कूल में एक मैडम जिनका नाम सिमरन था, आई जिनकी उम्र मुश्किल से 21-22 साल रही होगी। उनका कद 5 फुट 7 इंच था, देखने में एकदम खूबसूरत, वो उभरी-उभरी चूचियाँ, उनकी चलने की अदा! हमारे स्कूल में तो मानो तूफान मच जाता था!

वो अपने स्कूल में हमेशा फर्स्ट आती थी और अपनी पढ़ाई के बीच में समय निकाल कर हमें पढ़ाने आती थी। कक्षा में प्रथम आने की वजह से उन्हें हमारे स्कूल में पढ़ाने का मौका मिला।
मैडम हमें इंग्लिश पढ़ाती थी। स्कूल का हर लड़का मैडम को पेलने के बारे में सोचता परन्तु उसे मुठ मार कर ही रहना पड़ता और सबकी किस्मत एक जैसी कहाँ होती है।

हम दोस्त लोग पीछे बैठकर सिर्फ मैडम से फालतू सवाल पूछते रहते थे (लास्ट बेन्चर)। परन्तु नई मैडम होने की वजह से वो कुछ नहीं बोलती थी। कुछ समय बीता तो वो समझ गई थी कि यह सब मेरी शरारत है।

तो एक दिन कक्षा समाप्त हुई तो मैडम ने कहा- अमित, स्टाफ रूम में आओ।
मैं डर रहा था कि मैडम प्रिंसीपल से कुछ न कह दे। मैं स्टाफरूम में गया तो सब मैडम मुझको देख रही थी, मेरी फट रही थी।
फिर सिमरन मैडम मेरे पास आई और कहा- तुम लोग मुझको क्यों परेशान करते हो?
मैंने कहा- सॉरी मैडम!
और विनती की कि प्रिंसीपल सर से मत कहियेगा नहीं तो वे हमें स्कूल से निकाल देंगे।

वो हंस कर कहने लगी- नहीं कहूँगी!

फिर हम लोगों ने सिमरन मैडम को परेशान करना छोड़ दिया पर मैं उनकी चूचियों का दीवाना हो चुका था। क्या बताऊँ, एकदम सही आकार देख कर मुठ मारनी पड़ती थी। मैडम मुझको देखती तो मुस्कुराती थी और क्लास में मुझसे हर वक़्त पूछती रहती- समझ में आ रहा है ना?
मुझे झूठ में ही हाँ कहना पड़ता था।
मैं पढ़ने में बहुत ख़राब था, खास करके इंग्लिश में!

एक बार मैडम ने टेस्ट लिया तो मुझे 20 नंबर में से सिर्फ 3 नंबर का ही आता था। मैंने कॉपी में सवाल के साथ साथ सॉरी लिखा और नीचे अपना मोबाइल नंबर लिख दिया।
मैं डर रहा था, सच बोलूँ तो मेरी उस दिन फटी पड़ी थी।

फिर रात में मुझे मैडम ने मिस-कॉल किया। मैं समझा कि मेरे दोस्त हैं, मैंने कहा- सालो, परेशान मत करो।
मैडम ने धीमी आवाज़ में कहा- हेल्लो…
मैंने कहा- कौन बोल रहा है?
तो वो बोली- सिमरन।
मैंने कहा- सॉरी मैडम, मैं समझा मेरे दोस्त हैं।

मैडम ने कहा- कोई बात नहीं!
और पूछा- टेस्ट में क्यों इतना कम क्यों लिखा है?
मैंने कहा- आ नहीं रहा था।
वो बोली- कोई बात नहीं…
फिर मैंने मैडम से कहा- मुझे कोचिंग पढ़ा दीजिये…
पर वो बोली- मेरे पास समय नहीं है।

लेकिन मैडम स्कूल में खाली समय में मुझे अलग से पढ़ा देती थी।
मैं पढ़ता कम और उनकी चूचियाँ ज्यादा देखता।

फिर मेरा और मैडम का रोज़ फ़ोन-मेसेज शुरु हो गया। तब मैं उनका नाम लेकर बात करने लगा, जैसे सिमरन ये… सिमरन वो … फिर पढ़ाई कम मस्ती ज्यादा होती थी।
अब हमारे बीच हर तरह की बातें होने लगी थी।

तभी एक दिन हमारे स्कूल से टूर जाने वाला था। मैं जानता था कि मेरे घर वाले मुझे नहीं जाने देंगे लेकिन सिमरन ने बहुत ज़िद की, उन्होंने मेरे घर वालों से मैडम के रूप बात करके जाने के लिए तैयार किया और कहा- टूर में कोई दिक्कत हो तो इस नंबर पर फ़ोन कर लीजिएगा।

सिमरन मैडम के दिमाग में तो कुछ और ही था शायद। उन्होंने स्कूल में प्रिंसीपल से कहा कि वो टूर पर नहीं जाएँगी।
मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था…
फिर उन्होंने मुझसे पूछा- कभी गोवा गए हो?
मैंने कहा- नहीं!
उन्होंने कहा- जब टूर जायेगा तब हम दोनों साथ में गोवा चले जाँएगे।

फिर उन्होंने मुझे बात-बात में बताया कि बचपन से गोवा जाने का उनका मन है।
मैं बहुत खुश हुआ पर मैंने कहा- सिमरन, मेरे पास इतना पैसा नहीं और घर से किसी ने प्रिंसीपल को फ़ोन किया तब क्या होगा?
तो सिमरन ने कहा- उसकी चिंता मत करो! तुम्हारे घर वाले तुम्हें टूर का 5,000 रुपया देंगे, बाकी मेरे पास है।

उस दिन मैंने घर जाकर रात में खूब लौड़ा हिलाया और मुठ मारी और रात भर सपना देखता रहा, अब उन्हें पेलने की भी सोचने लगा.
हम लोग कॉलेज़ के टूर के समय पर निकले और स्टेशन पर मिले। फिर ट्रेन पर बैठ गए।

हमारी सीट वेटिंग लिस्ट में थी और सिर्फ एक सीट मिली, मैं बहुत खुश हुआ। शायद मुझसे ज्यादा सिमरन खुश हो रही थी क्योंकि उसे अपनी मुस्कान रोके नहीं रुक रही थी।
फिर हम लोगों ने रास्ते में बहुत बातें की।

अब रात हुई सोने का समय हो गया, हमने सोचा कि 69 की दशा में सोएँ क्योंकि एक ही सीट थी। मैंने ट्रेन में लोअर पहना था और अंडरवीयर जानबूझ कर नहीं पहना, उसने सलवार-कमीज पहना था। उसकी सलवार से ढकी जांघों को देख कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया और मैं उसे छूने लगा।
उसे अच्छा लग रहा था, वो उतेजित हो रही थी।

फिर मैंने उसके पैरों को चूमा और धीरे-धीरे उसकी जांघों सहलाने लगा। ट्रेन में काफ़ी लोग थे, मुझे डर लगा कि कोई देखेगा तो क्या कहेगा।
मैं उठकर टोइलेट में गया और मुठ मार कर आकर बैठ गया।
शायद सिमरन इससे और खुश हुई पर उसे भी सेक्स करने की इच्छा जग रही थी, मुझे साफ़ महसूस हो रहा था… पर वो कैसे कहती?

अगले दिन हम गोवा पहुँच गए।
हम लोग एक सस्ते होटल की तलाश में थे पर हमारे टैक्सी-ड्राईवर ने एक होटल बताया जो एकदम सही था। हमने 5 दिन के लिए कमरा लिया क्योंकि हमारे स्कूल का टूर 7 दिन का था।

हम लोग आराम करने लगे कमरे में और बात-बात में सिमरन ने मुझसे पूछा- कभी सेक्स किया है?
मैं चौंक गया और बहुत खुश हुआ, मैंने कहा- मेरी इतनी अच्छी किस्मत कहाँ?
उसने कहा- जो किस्मत को दोष देते हैं, वो ज़िन्दगी में कभी आगे नहीं बढ़ते! अपनी किस्मत खुद लिखो।
फिर मैंने कहा- अच्छा तुमने तो सेक्स किया होगा?
उसने कहा- नहीं किया… हिम्मत ही नहीं हुई और डर भी बहुत लगता है।

हम लोग तैयार होकर बीच पर घूमने गए।
बीच किसी स्वर्ग से कम नहीं था… चारो तरफ परियाँ ही परियाँ थी…! सिर्फ बिकनी-पैंटी में! यह सब देखकर मेरी अन्तर्वासना बढ़ रही थी और लण्ड खड़ा हो था…
और मुझे सिमरन को पेलने की इच्छा और बढ़ गई, मैंने देखा सिमरन मुझसे नज़र नहीं मिला रही थी।

हम दोनों घूम कर होटल जाने को थे कि मैंने सिमरन से कहा- तुम चलो, मैं आता हूँ.
मैंने पास में मार्केट से एक बिकनी खरीदी और कमरे पर गया।
सिमरन ने पूछा- कहाँ गए थे?
मैंने कहा- तुम्हारे लिए यह लेने!
वो पहले तो बॉक्स देखकर खुश हुई पर जब खोल कर देखा तो शरमा गई… कहने लगी- यह क्यों?
मैंने कहा- कल यही पहन कर घूमने चलना दूसरी लड़कियों की तरह!
उसने कहा- यह नहीं हो सकता!

कहानी जारी रहेगी।
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कहानी का अगला भाग : सिमरन मैडम गोवा में-2

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