काजल की चुदाई: दूध वाला राजकुमार-7

(Kajal Ki Chudai: Doodh Wala Rajkumar- Part 7)

मेरी सेक्सी कहानी के पिछले भाग
काजल की चुदाई: दूध वाला राजकुमार-6
में आपने पढ़ा कि कैसे मैं काजल को सुबह सुबह रत्नेश भैया की दूकान पर ले गया और वहां भैया ने कया किया.
अब आगे:

मेरी आवाज़ सुनते ही रत्नेश भैया ने काजल से अपनी पकड़ थोड़ी ढीली करी और उसके मोटे मोटे मम्मों को दोनों हाथों से तेज़ दबा दिया और एक सेकेंड में ही लेगी के ऊपर से ही चूत को मसल दिया।

क्या बताऊं आपको कि क्या हालत हो गयी थी काजल की। काजल पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी क्योंकि सुबह का समय चाहे लन्ड हो या चूत दोनों ही बिल्कुल तैयार होते हैं चुदाई के लिए। रत्नेश भैया का लन्ड भी जीन्स में से किसी लंबे खीरे की तरह दिख रहा था।

काजल की सांसें तेज़ हो चुकी थी और उसकी लेगी पर हल्का से गीला भी लग रहा था. रत्नेश भैया के मज़बूत पहलवानी जिस्म और कड़क लन्ड के अनुभव से थोड़ा पानी शायद काजल की चूत से निकल चुका था।
वहीं रत्नेश भैया बिल्कुल कूल अंदाज़ में थे, मानो कुछ हुआ ही ना हो!
वो तुरंत दुकान से बाहर आ गए।

मैंने काजल को पानी की बोतल दी और कुर्सी पर बिठाया ताकि उसकी उत्तेजना थोड़ी कम हो जाए। दो मिनट बैठने के बाद मैंने दोनों डिब्बे काजल के हाथ में पकड़ा दिए और काजल मेरे पीछे एक्टिवा पर बैठ गयी।

मैंने रत्नेश भैया के कहा- भैया, मैं कॉल करता हूँ आपको…
अब काजल रत्नेश भैया के मूसल लन्ड का माल अपनी चिकनी चूत में डलवाने के लिए उतावली हो रही थी और अब उसने खुद ही रत्नेश भैया से चुदने की इच्छा ज़ाहिर की। मुझे थोड़ी खुशी हुई क्योंकि मैंने रत्नेश भैया से जो वादा किया था वो पूरा होता नज़र आ रहा था।

काजल को इस तरह कामवासना में गर्म होते देख मेरा भी लन्ड तन चुका था. अपार्टमेंट की पार्किंग में गाड़ी पार्क करते हुए एक बार मैंने भी काजल के फूले मम्मों को एक बार दबाकर आनन्द ले ही लिया।
काजल ने कहा- मत करो लव… बहुत तड़पने लगती हूँ मैं… अब घर भी आ गया है… मम्मी को सब समझ आता है।
मैंने कहा- ठीक है, तुम पहले चलो, मैं आता हूँ, और ये लेगी गीली हो रही है, ध्यान से जाना और फटाफट कपड़े बदल लेना।

अब तो मिया बीवी राज़ी हो चुके थे लेकिन काज़ी मतलब मुझे बस यही चिंता थी कि आखिर लन्ड महाराजा और कमसिन चूत का मिलन समारोह कहाँ रखा जाए। वैसे पहले से ही मेरे दिमाग में एक प्लान था और अब लग रहा था कि वही प्लान लागू करना पड़ेगा।

जो कुछ करना था मुझे आज ही करना था क्योंकि कल तो मैं इंदौर से जाने वाला था इसीलिए मैंने रत्नेश भैया को बताया की कार्यक्रम आज दोपहर का ही रखते है ।मैं काजल के नम्बर ले चुका था जिससे टेक्स्ट मेसेज से हमलोग बात कर रहे थे।

दोपहर के 1 बजे का समय तय हुआ। जब जगह की बात आयी तो पूरी ज़िम्मेदारी मेरे ऊपर थी। दरसल हमारे अपार्टमेंट के पांचवें और छटे माले पर कुछ फ्लैट खाली थे जिनमें से एक फ्लैट मेरे भाभी के मामाजी का था जो खाली ही पड़ा था और वो लोग किराये से देना चाहते थे इसलिए चाबी हमारे ही घर पर रखी हुई थी ताकि कोई किरायेदार आये तो हम लोग दिखा सकें।

अब इंतज़ार था तो सब लोगों के घर से चले जाने का। हालांकि हमारे पास जगह तो थी लेकिन फिर भी अपार्टमेंट में यदि ऊपर नीचे आते जाते भाभी या काजल की मम्मी देख ले तो शक तो हो ही जाता है। ऊपर से मुझे नए फ्लैट का ताला भी खोलना था जो रिस्की काम था।

भाभी और काजल की मम्मी का दोपहर में घर से जाना पक्का था क्योंकि पास ही में सात दिवसीय कथा चल रही थी और काजल की मम्मी मेरी भाभी को रोज़ वहाँ ले जाती थी। हालांकि मेरी भाभी को कोई ज़्यादा रूचि नहीं थी लेकिन काजल की मम्मी की उम्र लगभग 45 साल थी इसलिए उन्हें तो काफी रुचि थी भजन कीर्तन में।

सब कुछ बिल्कुल मेरे सोचे अनुसार ही हो रहा था, मैं मानो उस समय रत्नेश भैया के लन्ड के काजल की चूत में विस्फोट का मास्टरमाइंड था।

दोपहर 11 बजे भाभी ने बच्चों को स्कूल भेजा और तैयार होकर साढ़े बारह बजे भाभी और काजल की मम्मी दोनों घर से चले गए। काजल के पापा और मेरे भैया पहले ही ऑफिस जा चुके थे।

काजल भी कॉलेज जा चुकी थी अपनी मम्मी की नज़रों में। लेकिन अपनी मम्मी के जाते ही काजल वापस आ गयी और रत्नेश भैया भी 1 बजे अपार्टमेंट पहुंच गए।

मैंने काजल को मैसेज किया- काजल, सबकुछ परफेक्ट है… रत्नेश भैया नीचे मेरे घर आ गए है… मैंने ऊपर 604 नम्बर का फ्लैट खोल दिया है, तुम आस पास देखकर पहुँचो। हम लोग 5-7 मिनट में मौका देखकर आते हैं।
रत्नेश भैया मेरी तरफ देख रहे थे और उन्होंने खुशी से मुझे अपनी मज़बूत बाजुओं में जकड़ लिया और कहा- थेंक्स यार भाई… बहुत जुगाड़ जमाया है यार तूने।

मैंने अपने फ्लैट को लॉक किया, हम लोग आहिस्ता से फ्लैट नम्बर 604 के गेट पर पहुँच गए। गेट खोलते ही सामने काजल खड़ी थी और आज उसने अलग ही ड्रेस पहनी थी। अपने पतले गोरे जिस्म पर उसने सिर्फ एक सफेद रंग की लम्बी सी बनियान जैसा कुछ पहन रखा था और नीचे सिर्फ लाल रंग की पेंटी पहन रखी थी जिसमें जाली लगी हुई थी।

काजल को इस तरह देखकर मेरी आंखें फ़टी रह गयी।

उस समय के काजल के हुस्न की क्या तारीफ करूँ… 22 साल की 32-28-32 फिगर की मस्त चिकनी और गोरी लड़की। गाय के दूध के रंग का सा चेहरा, थोड़े से दिखते मस्त फूले हुए गोल और कसे हुए बूब्स जिनके तने हुए निप्पल उसके कपड़ों में अलग ही उभार बना रहे थे और कह रहे थे कि मसल दो इन चूचियों को… काट लो इन्हें अपने दांतों से।

नीचे दिखती मस्त गोरी जांघें, पतली टांगें और ऊपर के टॉप के हिलने डुलने से दिखती लाल पेंटी और उसमें लगी हुई लाल रंग की जाली से दिखते हुए बिल्कुल हल्के बाल… मानो चूत को भोसड़ा बना देने का आमंत्रण दे रहे थे।

आज मुझे भी काजल की खूबसूरती का सही अंदाज़ हुआ था. जिस तरह रत्नेश भैया कड़क मस्त कसरती और खूबसूरत जिस्म के मालिक हैं, उसी तरह काजल भी कमसिन कली लग रही थी जो सिर्फ रत्नेश भंवरे को ही अपना कामरस देना चाहती थी।

हम लोग तुरन्त दरवाज़े से अंदर हुए और मैंने दरवाज़ा लगा दिया। आज काजल फूल मूड में थी और अपने चूतड़ और चूत को चुदवा चुदवा कर मानो फड़वान चाहती थी रत्नेश भैया से, क्योंकि रत्नेश भैया ने सुबह ही अपनी मस्त जवानी और ताकतवर चुदाई का ट्रेलर दिखा दिया था।

वैसे रत्नेश भैया थे ही इतने सेक्सी और हैंडसम। उनका कसरती जिस्म कातिलाना अंदाज़ और चोदू लुक किसी भी लड़की की चूत गीली करने के लिए काफी था।

आज रत्नेश भैया ने भी सफेद रंग की शर्ट पहनी थी जो पेपर कॉटन की थी, जिसमें से उनकी 5 इंच की फूली छाती और 14-15 इंच के फूले हुए डोले शोले साफ दिखाई दे रहे थे। मोटी मज़बूत टांगों पर नीले रंग का जीन्स।
शर्ट की एक खुली बटन से बहुत ही हल्के दिखते बाल और ढेर सारा छाती का उभार ने काजल को उतावली कर दिया था रत्नेश भैया के जिस्म से लिपट जाने के लिए।

वह पास आयी और रत्नेश भैया की छाती पर अपना सर रख लिया और उनसे कस कर लिपट गयी। काजल तो मानो इंतज़ार ही कर रही थी दरवाज़े के बन्द हो जाने का।

काजल के गोल गोल बिल्कुल कड़क हो चुके बूब्स के उनकी छाती से छूते ही रत्नेश भैया में भी सनसनी सी फैल गयी और उन्होंने भी काजल को अपनी छाती पर इस तरह दबाया कि उसके बूब्स अच्छी तरह से उनकी छाती से दब जायें… काजल के मुँह से आह आह रत्नेश राजा की सिसकारी निकलने लगी। गजब की पहलवानों वाली तरकीब थी यह भी लड़की के बूब्स दबाने की।

इसके बाद काजल ने रत्नेश भैया के मस्त गुलाबी होंठों पर एक किस कर दिया और बार बार किस करके अपने होंठ दूर कर लेती और रत्नेश भैया को किस नहीं करने दे रही थी। काजल अपने दोनों हाथों की उंगलियों से रत्नेश भैया के बालो में उंगलियां चलते हुए किस कर रही थी और रत्नेश भैया किसी हीरो की तरह अपनी हीरोइन को मज़बूत बांहों में जकड़े हुए खड़े थे।

अब मौका मिलते ही रत्नेश भैया ने काजल के छोटे छोटे गुलाबी होंठों को अपने होंठों में दबा लिया और काजल के कोशिश करने पर भी नहीं छोड़ा। काजल ने भी अपनी जुबान उनके मुँह में डाल दी और दोनों एक दूसरे की जुबान और होंठ जमकर चूसने लगे।

मैं यहाँ वहाँ पूरे फ्लैट में घूम कर मुआयना कर रहा था क्योंकि मुझे भी ऐसे देखना अच्छा नहीं लग रहा था। हालांकि मेरा लन्ड भी तनकर तम्बू बन चुका था लेकिन अब क्या कर सकते हैं। वैसे मैं ज़्यादा गौर से और पास से उन लोगों को नहीं देख रहा था, मैं अपना कुछ भी काम कर रहा था लेकिन मेरा पूरा ध्यान उन दोनों पर ही था।

अब रत्नेश भैया ने जोश में धकाते हुए काजल को सामने दीवार से टिकाकर खड़ा कर दिया और उसकी कॉटन की बनियान से दिखते बूब्स की गहरी काली और बिल्कुल सख्त चूचियों को अपने दोनों हाथों की उंगलियों की चिमटी से पकड़ लिया और किसी किशमिश की तरह मसलने लगे।

चूचियों के मसलने से काजल आंखें बन्द करके आहें भरने लगी और किसी मछली की तरह लहराने लगी, काजल ने रत्नेश भैया की छाती पर हाथ रखा और उनके शर्ट के दिखती मज़बूत फूली छाती को सहलाने लगी। कंट्रोल ना होने पर काजल ने रत्नेश भैया की शर्ट को छाती के ऊपर से दोनों हाथों से पकड़कर खींच दिया।

रतनेश भैया की चिट बटन वाली शर्ट खुल गयी और उनकी मर्दाना छाती आज़ाद हो गयी जिस पर काजल ने पहले तो ढेर सारा चूमा और फिर पागलों की तरह चाटने लगी।
अब रत्नेश भैया ने अपने हाथ काजल के मुलायम चिकने चूतड़ पर रख दिए थे और कॉलेज गर्ल काजल के चूतड़ों को बेइंतहा मसलने सहलाने का आनन्द ले रहे थे।

करीब 5 मिनट के बाद रत्नेश भैया ने काजल की पेंटी पर से अपने हाथों से सहलाना शुरू कर दिया, लाल रंग की जालीदार पेंटी से हल्की दिखती चूत को वे बहुत आहिस्ता से सहला रहे थे और अपनी बड़ी वाली उंगली कभी कभी काजल की चूत में हल्के से डालते।

काजल बहुत गर्म हो चुकी थी और रत्नेश भैया अभी भी उसे तड़पा रहे थे। काजल आह आह की आवाज़ करते हुए मानो रोने सी लगी थी और अपने हाथ से भैया का रॉड से कड़क हो चुका लन्ड जीन्स के ऊपर से ही सहलाने लगी।

कहानी के अगले भाग में जानेंगे कि कामुकता की अग्नि में जल रही काजल बिन पानी किसी मछली की तरह कैसे तड़पने लगी और क्या वह अपनी चिकनी चूत में मूसल जैसा लन्ड ले पाई।

मुझे मिल रहे आपके प्यार के लिये पाठकों और अन्तरवासना का धन्यवाद। आपका प्यार ही मेरी प्रेरणा है। अपनी प्रतिक्रियाएँ ज़रूर दें!
लव शर्मा
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कहानी का अगला भाग: काजल की चुदाई: दूध वाला राजकुमार-8