कॉलेज गर्ल की इंडियन सेक्स स्टोरी-4

(College Girl Ki Indian Sex Story- Part 4)

This story is part of a series:

मेरी इस सेक्स स्टोरी में आपने पढ़ा था कि मेरा बॉयफ्रेंड अवी मुझे अपनी बांहों में भरे हुए था और मुझे बेतहाशा चूम रहा था. तभी किसी के आने से इस चुम्बन में खलल पड़ गया.
अब आगे..

अवी ने मुझे तुरंत छोड़ दिया. मैं भी डर के मारे दूर हो गई तो अवी ने कहा- डियर देखता हूँ मैं… तुम यहीं रहो, जब मैं कहूँ तब बाहर आना.
मैंने मारे डर के पूछा- कौन होगा.. कहीं तुम्हारे मम्मी पापा तो नहीं होंगे?
अवी- नहीं बेबी, कोई दोस्त होगा. मम्मी पापा आज नहीं आएंगे, वो बाहर गए हैं. तुम परेशान ना हो और यहीं रहो. मैं बस अभी 5 मिनट में आया.

अवी बाहर चला गया और अब मैं वही सब सोच कर अजीब सा महसूस कर रही थी. मेरे होंठ सूख से गए थे और मेरे कपड़े इधर उधर हो गए थे. अब मैं उन्हें सही करने लगी और पर्स से लिपबाम निकाल कर लगाई तो कुछ नमी आई, पर अहसास वही सूखेपन का हो रहा था, जो किस की वजह से था.

अब मैं कपड़े सही कर चुकी थी और टॉप के बटन भी बंद कर लिए थे ताकि ज्यादा कुछ ना दिखे. ये सब करके मैं वहीं बेड पर फूलों के ऊपर बैठ गई.

कुछ देर बैठे रहने के बाद अवी आया और कहा- सॉरी यार मेरे दोस्त हैं, मेरा बर्थडे है.. तो वही आए हैं.
मैं- तो कोई बात नहीं.. चले गए तुम्हारे दोस्त? और क्या कह रहे थे कितने दोस्त थे, जो बहुत समय लगा दिया.
अवी- दो दोस्त हैं और उनमें से एक दोस्त की गर्लफ्रेंड है. बस 3 लोग हैं और वो दूसरे कमरे में बैठे हैं. वो सब शाम तक रुकेंगे. तुम अपने आपको सही कर लो.. आओ उनसे मिलवाता हूँ.
मैं- रुकेंगे..? मुझे ना मिलवाओ.. मैं यहीं ठीक हूँ.
पर अवी ने दबाव डालते हुए कहा- नहीं मेरी जान.. तुम यहाँ अकेले बैठोगी चलो ना…

और मेरा हाथ पकड़ कर उठाने लगा.
मैं- अरे अरे रुको रुको.. सही तो हो लूँ.
यह कहते हुए मैंने अवी को रोका, जो वो खींच रहा था, मैंने कहा- तुम चलो मैं अभी आती हूँ.
अवी ने इशारा करते हुए कहा- ठीक है, सब लोग इधर वाले रूम में है.

फिर से मैंने अब अपने आपको अच्छे से ठीक किया और लिपस्टिक लगाई, ड्रेस से मैचिंग की और मैं बाहर आंगन में आ गई.
मैंने देखा कि अवी का घर तो बहुत बड़ा और अच्छा है. फिर मैं उस रूम में पहुँची, जहाँ सब लोग थे. मैं जैसे ही दरवाजा खोल कर अन्दर गई कि सभी लोग एकाएक खड़े हो गए और सभी के मुँह खुले रह गए, जैसे कोई भूत देख लिया हो.
मैं ऐसे रिएक्शन से घबरा गई और अपने आपको देखने लगी कि कहीं मेरी ड्रेस में कोई दिक्कत तो नहीं है.

इतने में अवी पीछे से आ गया और मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए बोला- यही वो लड़की है दोस्तों.. जिसके बारे में बताया था.
मैं चुप थी और उनके दोस्तों के नाम थे, लड़की का नाम स्वाति और लड़कों में एक का अरुण और दूसरे का शैलेष था. अवी ने मुझे आगे बढ़ाते हुए कहा कि तुम भी सभी से मिल लो. मैं कॉफ़ी लेकर आता हूँ.

सबसे पहले शैलेष ने हाथ बढ़ाया और कहा- आप काफी अच्छी लग रही हैं, मेरा नाम शैलेष है और आपका?
मैंने भी हाथ बढ़ा दिया और हाथ मिलाते हुए कहा- थैंक्यू.. मेरा नाम मिनी है.
फिर अरुण ने हाथ आगे बढ़ाया और कहा कि आप लाखों में एक हैं.
स्वाति अरुण की ही गर्लफ्रेंड थी, जवाब में मैंने भी हाथ बढ़ाया और उससे मिलाया. उसने हाथ पकड़ कर मेरे हाथ पर किस कर लिया और कहा- बहुत अच्छा लगा तुमसे मिल कर.
मैंने भी जवाब में कहा- मुझे भी!

फिर मैं स्वाति के गले से लगी और स्वाति के हालचाल पूछे और उसने भी बताया.
स्वाति ने मुझे बैठने को कहा. अब हम चारों लोग बैठे थे. मैंने देखा कि शैलेष और अरुण मुझे ही देखे जा रहे थे. तब तक अवी आ गया. फिर हम सभी ने कॉफ़ी पी और बातें करने लगे.

थोड़ी देर बाद स्वाति और मैं दूसरे रूम में चली गईं और हम दोनों बातें करने लगीं. स्वाति ने मुझसे कहा- तुम बहुत खूबसूरत हो.
मैं- तुम भी.
स्वाति- आज पार्टी में रुकोगी कि नहीं?
मैं- रुकूँगी और तुम?
स्वाति- मैं उसी की तैयारी करने के लिए आई हूँ, तुम रुकोगी तो सब तुम्हें ही देखेंगे.. भला बताओ पार्टी क्या एन्जॉय करेंगे?
मैं- ऐसा नहीं है तुम भी सुंदर हो.

फिर स्वाति और मैं बातें करने लगे, जिसमें स्वाति ने मेरी और मेरी ड्रेस की काफी तारीफ की और जिस रूम में अवी ने मुझे किस किया था, उस रूम को उसने बंद कर दिया था ताकि उसमें और कोई ना जाए. फिर हम सभी मिलकर पार्टी की तैयारी करने लगे और तैयारी पूरी होने के बाद सभी फ्रेश होकर पार्टी के लिए तैयार होने लगे थे.

अवी ने बताया था कि कम से कम 25 से 30 लोग आएंगे, तब मैं और स्वाति दूसरे रूम में चली गईं, ताकि ड्रेस बदल सकें.

कमरे में पहुँचने पर स्वाति ने कहा कि क्या तुम इसी ड्रेस में रहोगी या कोई और ड्रेस भी लाई हो? मैं तो ये लाई हूँ एक ड्रेस दिखाते हुए उसने आगे कहा- अगर लाई हो तुम भी बदल लो.
मैंने कहा- हाँ है.. मैं लेकर आती हूँ.

तब मैं अवी के पास गई और कहा- शाम को पहनने वाली ड्रेस लाए हो?
अवी ने कहा- हाँ लाया हूँ, उस रूम में जाओ, अलमारी में एक बैग रखा है, उसी में है, वो भी तुम्हारी है.

मैं गई और उस बैग को उठाकर स्वाति वाले रूम में चली गई और कमरा अन्दर से बंद करके ड्रेस बदलने लगी.

स्वाति ने अपने सारे कपड़े निकाल दिए वो मेरे सामने केवल ब्रा और पैंटी में थी उसका फिगर 34-28-32 का रहा होगा. वो थोड़ी मोटी लग रही थी क्योंकि उसके बूब्स तो अच्छे थे, लेकिन बूब्स से नीचे सब बराबर लग रहा था. मैं उसे ही देख रही थी, वो एक गाउन लाई थी, जिसमें उसके कंधे खुले थे.. बाकी पूरा शरीर बंद था.

मुझे तो पता ही नहीं था कि मेरे लिए अवी ने क्या ला कर रखा है.

तब तक उसके कई सारे दोस्त आ गए थे और बाहर शोर मचने लगा था. गाना भी तेज आवाज में बजा दिया गया था. मैं तो स्वाति को ही देख रही थी वो अब कपड़े बदल चुकी थी.

उसने मुझे देखा और कहा कि मिनी जल्दी बदलो.. फिर हम दोनों भी चलते हैं.

अब मैं अपने शरीर पर के कपड़े निकालने से पहले देख लेना चाहती थी कि इस बैग में क्या क्या है. जब मैंने बैग खोला और उसमें देखा तो एक फुल पैक सुबह की तरह, जिसमें सारी चीजें थीं. साथ ही एक स्मार्ट फ़ोन भी था सोनी कम्पनी का.
मैंने सोचा कि पहले कपड़े बदल लेती हूँ बाद में अवी से मोबाइल के बारे में पूछ लूँगी.

मैंने अपने कपड़े निकालने शुरू कर दिए अपना टॉप निकाला, फिर स्कर्ट निकालने के बाद मैंने स्वाति से तौलिया माँगा, जिससे मैं पैंटी बदल लूँ.

जब मैंने तौलिया माँगा तो स्वाति मेरी तरफ देखने लगी और हंसी- यार मिनी, यहाँ मैं अकेली हूँ.. ऐसे ही निकालो.. वैसे भी तुम्हारी ये पैंटी केवल तुम्हारी चूत ही बंद कर रही है और मेरे सामने कैसा शरमाना.. जल्दी करो लगता है सभी आ गए हैं.
यह सुन कर मैंने पैंटी और ब्रा भी निकाल दी और जो नई थी उस पैंटी को पहन लिया.

अब ब्रा निकाली और वो मैं पहन ना सकी क्योंकि वो रबड़ की तरह थी जैसे बालों में लगाने वाली रबड़ होती है. मैं कुछ देर परेशान होती रही कि इसे कैसे पहनूं, तब तक स्वाति तैयार हो चुकी थी और वो मेरे पास आई और उसने कहा- मिनी पहनो भी, क्या इतनी देर लगा रही हो?

तो मैंने भी कहा- ये कैसे पहनूं?
स्वाति ने कहा- आज पहली बार इस तरह की ली है क्या?
मैंने हां में सर हिलाया तो उसने कहा- अपने दोनों हाथ ऊपर करो.
मैंने ऊपर किए तो उसने मेरे हाथों में वो चढ़ा दिया और नीचे खिसकाने लगी.

उसने कहा कि इसे ऐसे पहनते हैं और उसे लाकर मेरे मम्मों पर करके सही करने लगी. उसने मेरी चुचियों को पकड़ कर उसमें घुसा दिया. अब मेरे चुचियों पर एक गेटिस जैसे चढ़ गई थी, उसमें बांधने के लिए ना कोई पट्टी थी, ना फंसाने के लिए कोई हुक था. वो अपने आप ही टाइट थी. उसमें मेरी चूचियां बिल्कुल खड़ी खड़ी सी थीं. बाहर की तरफ नुकीले नुकीले से मेरे निप्पल निकले निकले से लग रहे थे. स्वाति ने ब्रा पहनाने के बाद मेरी नई ड्रेस उठाई और पहनाने लगी. मेरे हाथों को ऊपर उठा कर उसमें डाल दिया और नीचे खींच कर मेरी चुचियों के पास रोक दिया.. और सही करने लगी.

ड्रेस सही करके उसने कहा कि मैं अब बाहर जा रही हूँ.. जल्दी से मेकअप करके तैयार हो कर बाहर आ जाना.
वो बाहर चली गई.

मैंने दरवाजा बंद कर लिया, दोस्त वो ड्रेस एक पार्ट वाली थी मतलब उसमें टॉप और स्कर्ट अलग अलग नहीं थे. लेकिन थी उसी तरह की. इस ड्रेस की ये खासियत थी कि इसे ब्रा के बिना पहना भी नहीं जा सकता था क्योंकि ये वहीं, मेरी चुचियों से शुरू हो रही थी और मेरे घुटनों तक नहीं पहुँच रही थी. ये मिनी स्कर्ट की तरह थी लेकिन इसमें पेट खुला या पीठ का कुछ भी खुला नहीं था. पीठ में एक चैन लगी थी, जो कमर तक थी. ये इतनी टाइट थी कि पूरे शरीर को दाब सी रही थी और हुक से ब्रा में बस फंसी थी. इसमें मेरी चुचियां बड़ी नुकीली लग रही थीं और वहीं से वो ड्रेस स्टार्ट हो रही थी. उसके ऊपर मेरा पूरा शरीर खुला था.

मुझे ये ड्रेस पसंद आई और मैं भी खुश थी. एक तो किस का मज़ा लिया था और ऊपर से दो ड्रेस मिली थीं. मैं भी जल्दी जल्दी से तैयार हो गई और अपने पहले वाली ड्रेस उसी बैग में रख कर बाहर आ गई. इसमें मेरा फिगर साफ साफ नजर आ रहा था तो लगभग सभी लोग मुझे देखने आ गए थे. मैं बाहर निकली ही ही थी कि सभी मुझे देखने लगे.

इतने में स्वाति मेरे पास आई और उसें सभी को बताते हुए कहा कि ये मेरी सहेली मिनी है.
मैं उसी के साथ हो ली.
फिर स्वाति ने कहा- अवी को बुला कर लाओ, वो केक काटे.

मैं उसे बुलाने जा रही थी कि अचानक अमित मेरे सामने आ गया और उसने मुझे ‘हाई..’ कह कर गले से लगाया और धीरे से मेरे कान में कहा कि मैं पटाखा लग रही हूँ.

उससे मिलने के बाद मैं अवी के कमरे में पहुँची. अब मैंने अवी से उस मोबाइल के बारे में पूछा.

अवी ने कहा- मेरी जान, वो तुम्हारे लिए ही है, तुम्हारे लिए ही लाया था.. अच्छा है ना..! वैसे काफी सुन्दर दिख रही है मेरी बेबी.. और अब जाओ, उस मोबाइल में अपनी सिम डाल लो.. मैं बस आ रहा हूँ.

अब मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था, मुझे स्मार्ट फ़ोन मिला था. मैं जल्दी जल्दी गई और उस मोबाइल में अपनी सिम डाल ली और अपना पुराना मोबाइल उसी बैग में रख कर आ गई.

अब तक अवी भी आ गया था तो केक कटा, फिर सभी डांस करने लगे मैं भी कर रही थी.
पहले अवी ने मेरी कमर में हाथ डाल कर और एक हाथ पकड़ कर डांस किया. फिर पता नहीं उसका कोई दोस्त था, उसने अवी से कहा कि क्या मैं भी कर लूँ, तो अवी मुझे छोड़ दिया और कहा कि बिल्कुल.

वो लड़का अवी की ही तरह मेरी कमर में हाथ डाल कर डांस करने लगा और डांस करते करते ही उसने कहा- तुम ही इस पार्टी की सबसे हसीन लड़की हो, चार चांद लगा रही हो. मैंने अब तक तुमसे सेक्सी लड़की के साथ डांस नहीं किया.

ये कहते हुए उसने मेरी कमर को कस के दबा दिया. इस पर मैं शरमा गई.

तभी अवी का कोई दूसरा दोस्त आया और उसने डांस करने को कहा. वो भी मेरी कमर में हाथ रख के डांस करने लगा. उसने भी मेरी तारीफ की. मैं मना नहीं कर पा रही थी, पर मैं मन ही मन खुश भी हो रही थी कि पार्टी में मुझसे ज्यादा खूबसूरत कोई और नहीं है.

इसी तरह अवी के 10-12 दोस्तों ने मुझे छुआ होगा. अमित ने भी किया और सभी ने मेरी कमर को दबाया और मेरी तारीफ की थी. मैं काफी खुश थी, पर मैं बहुत थक गई थी. अब तक पार्टी भी ख़त्म हो रही थी.

फिर सभी लोग चले गए थे. अब केवल मैं और अवी रह गए थे.

अवी ने मुझे रोमांटिक अंदाज में पकड़ा और आगे की तरफ झुककर मेरे दोनों चुचियों के ऊपर बीच की दरार में किस कर लिया.
उसने कहा- अब क्या इरादा है?
मैंने कहा- घर जाना है.

हम दोनों वहां से कार में निकले, एक होटल में गए, वहां कुछ खाना खाया क्योंकि अवी की इस पार्टी में मैं भूखी रह गई थी.

फिर उसने मुझे मेरे घर छोड़ दिया और मैं जब कार से बाहर निकल रही थी तो अवी ने मुझे अपनी तरफ खींच कर मेरे होंठों को चूमा और जोर से दांत से काट लिया. मैं लगभग चीख पड़ी, तब उसने मुझे छोड़ा. मुझे हल्का खून निकल आया था.

फिर वो बाय करके चला गया. मैं भी अन्दर आकर कपड़े निकाल कर बिना कुछ पहने केवल ब्रा और पैंटी में ही बेड पर बैठ कर नए मोबाइल को देखने लगी और लेट गई. मुझे कब नींद आ गई, पता ही नहीं चला और मैं सो गई.

मैं सुबह जगी तो अपने आपको ब्रा पैंटी में देख कर हैरान हो गई, पर बाद में ध्यान आया कि मैं रात में ऐसे ही सो गई थी. मैं उठ कर फ्रेश होने गई और नहाने लगी. नहाने के बाद मैं सिंपल ड्रेस पहन कर बैठी थी कि मुझे वो किस और डांस के समय कमर दबाना और होंठों को काटना और तारीफें सब ध्यान आने लगी और यही सोचते सोचते मैं फिर सो गई. इसके बाद जब उठी, तब दिव्या आ गई थी और बेल बजा रही थी.

मैंने जाकर दरवाजा खोला तो उसने कहा.

दिव्या- कहां खोई थीं मैडम.. इतनी देर से बेल बजा रही हूँ और कितनी बार कॉल भी किया.
मैं- सॉरी दिव्या.. मैं जान नहीं पाई और मोबाइल में रिंग ही नहीं बजी है..

मैं अपना मोबाइल उठा कर देखने लगी.

दिव्या- अरे मिनी ये किसका मोबाइल है और कहां मिला तुझे?
मैं- मेरा है.. अवी ने दिया है और इसके साथ दो ड्रेस भी दिए हैं.
ये कहते हुए मैंने उसे मोबाइल दे दिया और जो 4 ड्रेस मिली थीं.. 2 अवी और 2 अमित से.. सब उसके सामने रख दीं.

दिव्या- यार तू तो धनी हो गई.. इतनी ड्रेस मिलीं और मोबाइल भी, अरे यार ये देखो, साइलेंट मोड पे मोबाइल है, तो कहां से सुनोगी.
मैंने कहा- दिव्या मैंने ध्यान नहीं दिया.

दिव्या ने साइलेंट मोड हटा दिया और अब वो सभी ड्रेस देखने लगी.

दिव्या- यार ये मोबाइल 20000 का होगा और ये सारी ड्रेस 15000 की होंगी, तू तो बहुत चालू निकली.. केवल 4 महीने में ही 30-40 हजार कमा लिए.. अब आगे क्या करेगी मेरी छन्नो रानी?

इसी तरह बातें होती रहीं और दिन भी बीतने लगे. अवी जब मिलता तो मुझे गले से लगा कर किस करता. वैसे मैं उससे अकेले में नहीं मिल रही थी. अमित भी मुझसे जब मिलता तो मुझे गले लगाने लगा था.

अब मुझे लगा कि अमित दो गिफ्ट देकर हमेशा ही गले लगाने के प्लान में शुरू हो गया था.. एक दो बार होता तो ठीक था.

दिन इसी तरह से बीत रहे थे. ये सब हुए कोई 3-4 महीने बीत गए होंगे, मेरे आखिरी वाले एग्जाम होने लगे थे. कॉलेज में अब तक किसी को पता नहीं था कि मेरे बॉयफ्रेंड हैं, इसलिए मेरी क्लास के और 12 वीं के काफी लड़के मुझे लाइन मारा करते थे और परेशान भी थे क्योंकि दिव्या के हिसाब से अपनी क्लास में मैं सबसे खूबसूरत लड़की थी.

वो एग्जाम का आखिरी दिन था, मैं और दिव्या कॉलेज से एग्जाम दे कर वापस आ रहे थे. मेरे पीछे कई लड़के आ रहे थे उसमें से एक लड़के ने मुझे प्रपोज किया कि मुझसे दोस्ती कर लो. ये लगभग रोज ही होता था.. और इस तरह कहने वाले अब तक 42 लड़के हो गए थे. सभी ने मुझे अपना अपना नंबर दिए थे कि जब भी मन करे तो कॉल कर लेना. और वो सब नंबर मेरे घर पर एक डिब्बे में रखे थे. उस दिन मुझे 4 लड़कों ने कहा और अपने नंबर दिए. मैंने उनको भी लाकर उसी डिब्बे में रख दिए और उन्हें भूल गई.

अब मेरी छुट्टी होने वाली थी तो मैं अपने गांव जाने वाली थी. उसके दूसरे दिन मैं अवी से और दिव्या अमित से मिलने के लिए बिग बाजार में गए.

वहां हमने खाना खाया और बातें की और फिर मैंने कुछ घर में पहनने वाले सिंपल कपड़े ले लिए. दिव्या के पास थे क्योंकि वो घर जाया करती थी. उसका घर ज्यादा दूर नहीं था ना.. मेरा 550 किलोमीटर था और मैं अब कई दिनों बाद जा रही थी. इसलिए मैंने 10-12 जोड़े लिए. अवी मुझे और दिव्या को घर लेकर आया, इसके बाद उसे मुझको स्टेशन भेजने भी चलना था. हमने अपने अपने बैग लिए और चल दिए. अमित घर चला गया.

अवी ने दिव्या को बस स्टाप पर उतारा और मुझे आगे लेकर चल दिया. हम स्टेशन पहुँचने वाले थे तो अवी ने मेरा हाथ पकड़ा और किस करके कहा कि कितने दिन के लिए जा रही हो, फिर कब मिलोगी?

मैंने बताया कि 20 दिन बाद कॉलेज खुलेगा, तब आ जाऊँगी.
अवी ने मुझे गले से लगाया और मेरे पूरे चेहरे पर पागलों की तरह किस करने लगा. उसने होंठों पर भी किस किया और इसके बाद मुझे स्टेशन पर छोड़ा.
मैंने अवी से कहा- ज्यादा कॉल या एसएमएस ना करना, मैं बात नहीं कर पाऊँगी. बस 4-5 दिन में एक बार बात होगी और वो भी जब मैं पहले करूँगी.

उसके ओके किया और मुझे ट्रेन में बैठा दिया. थोड़ी देर बाद ट्रेन चल दी.. तब अवी गया.

फिर मैं अपनी सीट पर लेट गई और सो गई. मुझे घर पहुँचते पहुँचते सुबह हो गई. मैं गांव जा रही थी इसलिए बिल्कुल सिंपल जीन्स टॉप पहना था, जिसमें मेरे शरीर का कोई भी अंग नहीं दिख रहा था.

गाड़ी जब स्टेशन पर रुकी तो मेरे भैया जो मुझसे 2 साल बड़े थे, उन्हें मैंने सीट नंबर बताया था.. तो वो तुरंत वहां आ गए. मैंने भैया को नमस्ते कहा और उन्होंने सामान ले लिया. हम दोनों स्टेशन से बाहर आ गए.

मेरा गांव थोड़ा दूर था और पिछड़ा हुआ था तो हम दोनों (मैं और भैया) बाइक से घर के लिए निकले. घर पहुँचने पर मेरी मम्मी और पापा से मैंने नमस्ते किया और मम्मी ने गले से लगाया और कहा कि देखो पढ़ाई में मेरी बेटी कितनी पतली हो गई है, इतनी मेहनत करनी पड़ती है.

मैंने मन में कहा कि अरे मम्मी इसी पतले शरीर पर तो लड़के मरते हैं, मोटी हो जाऊँगी तो कोई पूछेगा भी नहीं.
फिर मम्मी ने कहा कि जाओ और मुँह हाथ धो लो.. मैं नाश्ता लगा देती हूँ.

मेरी मम्मी ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं हैं तो साधारण तरीके से ही बोलती हैं. इस तरह गांव में मेरी शराफत के दिन बीत रहे थे.

अब 3-4 दिन हो गए थे. गांव में मैं अवी से ज्यादा से ज्यादा 4-5 मिनट ही बात करती थी ताकि किसी को पता ना चले. वहां मुझे सलवार सूट पहनना पड़ता था.

गाँव में मेरी एक ही सहेली थी, जिसका नाम अंजू था और काफी अच्छी थी. लेकिन थोड़ी गरीब परिवार से थी. मैं अधिकतर समय उसी के साथ बिताती थी. वो मुझसे छोटी थी इसलिए मुझे दीदी कहती थी.

एक दिन मैं उसी के साथ अपने कमरे में बैठी थी कि मैंने उससे कहा- यार कहीं घुमाओगी नहीं.. चार दिन से बोर हो रही हूँ.
अंजू- घुमाउंगी क्यों नहीं.. बोलो कहां चलोगी?
मैं- कहीं भी.. जो अच्छी जगह हो.. खेत या कोई बाग, जहाँ शांति हो और अच्छा लगे बस..
अंजू- ले चलूंगी पर गांव शहर जैसा नहीं होता है. यहाँ लड़के गन्दी गन्दी बातें बोल देते हैं और तुम्हारे बारे में तो बहुत बातें गांव में लड़के करते हैं.
मैं- मेरे बारे में?
“हां..”
मैंने हैरानी से पूछा- क्या बात करते हैं, मैं यहाँ रहती नहीं हूँ फिर भी?
अंजू- हां दीदी कहते हैं कि तुम वह बहुत छोटे छोटे कपड़े पहनती होगी और रात को शराब पीती होगी, डांस करने जाती होगी और 4-5 बॉयफ्रेंड होंगे.
मैं- क्या? ऐसी बातें करते हैं? अच्छा तुम्हें क्या लगता है अंजू?
अंजू- आपको देख कर नहीं लगता कि आप छोटे कपड़े पहनती होंगी क्योंकि मैंने आपके सारे कपड़े देखे हैं, वो तो ऐसे ही हैं. ऐसे जीन्स टॉप तो अब यहाँ भी लड़कियां पहनने लगी हैं और शराब का तो सवाल ही नहीं उठता.

पहले तो मैं मन ही मन मैं हंसने लगी कि इतने छोटे छोटे कपड़े मैं पहनती हूँ कि अंजू देख ले, तो कहीं मर ही ना जाए और यहाँ सब अनुमान सही ही लगाते हैं.

मैं- थैंक गॉड अंजू.. तुम तो ऐसा नहीं सोचती हो, चलो फिर कहीं मुझे ले चलो कोई मुझे कुछ नहीं कहेगा. अच्छा अंजू मैं कौन से कपड़े पहन कर चलूँ.. तुम बताओ?
अंजू- दीदी, आप ये कपड़े पहनिए.

उसने एक जीन्स और टॉप निकाला था, टॉप था सिंपल ही.. लेकिन बस थोड़ा टाइट था. इसमें मुझे जो भी देखता तो उसे ये तो लग ही जाता कि मैं बाहर ही रहती हूँ.
मैं- ठीक है.. तुम बाहर चलो, मैं ये कपड़े पहन कर आ रही हूँ.

मैंने कपड़े पहने, मेकअप किया, लिप एंड आई लाइनर, लिपस्टिक आदि लगा ली ताकि यहाँ के लड़के भी मेरा जलवा देख सकें और बाहर आ गई.

मैं- मम्मी मैं अंजू के साथ खेत देखने जा रही हूँ.. थोड़ी देर में आ जाऊँगी.
माँ ने कहा- जाओ बेटी.
मैंने अंजू से कहा- चलो अंजू.
अंजू- दीदी एक बात कहूँ.
मैं- हां अंजू बताओ एक क्या हजार बातें कहो.. तुम्हें किसी ने रोका है क्या? और मुझे गांव के अन्दर से होकर ले चलना ताकि मैं सभी लोगों से मिल सकूँ.
अंजू- ठीक है दीदी पर आप इस ड्रेस में बहुत अच्छी लग रही हैं, आपको बहुत अच्छा पति मिलेगा क्योंकि आप खुद इतनी खूबसूरत हैं.
मैं- तुम भी अंजू..! मुझे अभी शादी थोड़ी करनी है, पहले जॉब, फिर कहीं शादी की बात सोचूंगी. तुम्हें भी अच्छा पति ही मिलेगा मेरी छोटी जान..

इस बात पर अंजू शरमा सी गई.

अब हम आगे जा रहे थे. मैं जिस रास्ते से निकल रही थी, वहां के सभी लोग मुझे देखने लगते थे. कुछ इसलिए कि मैं काफी दिन बाद आई थी और लड़के शायद मेरा जिस्म देख रहे थे.

हम धीरे धीरे खेत पहुँच गए और वहां हम बातें करने लगे.
मैंने अंजू से कहा- अंजू, तुम तो कह रही थीं कि लड़के कमेंट करते हैं? जिस किसी ने भी मुझे देखा.. कोई कमेन्ट नहीं किया.
अंजू- हाँ दीदी, हो सकता पहली बार देखा हो इसलिए… वैसे यहाँ के लड़के बहुत ख़राब हैं.
मैं- क्यों अंजू?
अंजू- दीदी, अब आप से क्या छुपाना वो जो उनका लड़का है ना.. एक बार मैं खेत पर से घर जा रही थी और शाम हो गई थी. उसने मुझे पीछे से पकड़ कर मेरी चुचियों को बहुत तेज दबा दिया था. वो अक्सर जानबूझ कर लड़ जाता है मुझसे. जब मैं लेट्रिन जाती हूँ ना तो रोज कोई ना कोई मेरा पीछा करता है, इसीलिए मैं अब अकेली बहुत कम आती हूँ.
मैं हंसने लगी- अरे अंजू तुम भी इतनी डरती हो.. कहो तो मैं अकेली आ जाऊं?
अंजू- दीदी आप आएँगी ना तो आपका पता नहीं क्या होगा.. आप इतनी अच्छी जो लगती हो, कहीं कोई चोदन ही ना कर दे.. आप अकेली मत आना.

मेरे जिस्म का जलवा पूरे गांव में आग की तरह फ़ैल गया और गांव के सारे लड़के मेरे आगे पीछे घूमने लगे. मुझे कई लड़कों ने दबी जुबान में ये भी कहा कि आज रात को एक घंटे के लिए गांव के बाहर आ जाना पूरे 500 रूपये दूंगा.

अब मैं ये सोच रही थी कि यहाँ 500 ही मिल रहे हैं और वहाँ मैं 40 हजार कमा चुकी हूँ.

हालांकि मैं गांव में ये सब करने नहीं गई थी, लेकिन मेरे वापस आने के पहले की बात है कि अंजू ने मुझसे कहा- दीदी, आज शाम को अपनी एक ड्रेस मुझे दे देना.. मुझे काम है.
मैं- ठीक है ले लेना वैसे काम क्या है किसी से मिलना है क्या?

अंजू शरमा गई तो मैं समझ गई. मैंने कहा कि ठीक है शाम को ले लेना.

वो शाम को आ गई तो उसने वही ड्रेस लिया जो मेरे लिए पसंद किया था और पहन लिया.

अंजू ने कहा कि दीदी यहाँ तक साथ में चलिए.. आप वहां रुक जाना.. बस 10 मिनट का काम है.
मैंने सोचा कि मैं क्या पहनूँ तो मैंने अंजू का सूट पहन लिया और उसके साथ में चल दी.
थोड़ी दूर जाने के बाद हमारे पीछे एक लड़का आ रहा था, तो मैंने अंजू से पूछा- ये कौन है?
उसने कहा कि इसी से मैं मिलने आई हूँ.

रात काफी हो गई थी तो चेहरा बहुत कम समझ आ रहा था. कुछ दूर जाकर मैं और अंजू अलग अलग हो गए और वो लड़का अंजू की तरफ चला गया. मैं रुक गई.

अब वे दोनों इतनी दूर जा चुके थे कि दिख नहीं रहे थे. मैं वहीं खड़ी ही थी कि मैंने देखा एक कोई आ रहा है तो मैं आगे की तरफ चलने लगी. मैं अभी चल ही रही थी कि वो दौड़ते हुए आया और पीछे से ही मुझे पकड़ कर उठा दिया.

मैं हैरान सी रह गई, मुझे उठाने के बाद वो आगे की तरफ बढ़ता ही गया. वो एक लुंगी और टी-शर्ट पहने था. उसने आगे बढ़ कर मुझे उतारा लेकिन छोड़ा नहीं और अपनी लुंगी खोल दी. वो अन्दर कुछ नहीं पहने था और अब तो उसने टी-शर्ट भी निकाल दी.

अब वो पूरा नंगा था लेकिन मैं पीछे नहीं देख रही थी. वो मुझे कुछ बोलने भी नहीं दे रहा था. फिर से उसने मुझे अपनी बांहों में दबा लिया और मेरे कुरते में हाथ डाल दिया. हाथ ऊपर ले जाकर उसने मेरी चुचियां पकड़ लीं. मेरा कुर्ता ऊपर उठ गया, मैंने ब्रा भी नहीं पहनी थी, तो सीधे उसके हाथों में मेरी दोनों चुचियां थीं. वो उनको कस कस के मसलने लगा. वो ऐसे मसल दबा रहा था कि मानो उनमें से उसे कुछ निकालने के मूड में है.

मैं सिसिया रही थी- आआह्ह्ह.. आआह्ह..

उसने मेरा एक हाथ पीछे ले जाकर अपना लंड पकड़ा दिया. पहले हाथ में लंड लगा तो मुझे अजीब सा लगा, मैंने बड़ी तेजी के साथ खींच लिया. ये पहला समय था जब मैंने किसी का लंड छुआ था और कोई मेरी चूचियां दबा रहा था.

उसने एक हाथ से मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया. सलवार इतनी ढीली हो गई थी कि तुरंत नीचे गिर गई.

अब उसने अपने एक हाथ को मेरी पैंटी में डाल दिया और एक हाथ से मेरे मम्मे दबाता रहा. उसने जो हाथ पैंटी में डाला था, उसी से मेरी पैंटी नीचे कर दी और मेरी गांड की तरफ अपना लंड मेरी पैंटी में डाल कर मेरी गांड में पेलने लगा.

जब लंड पेल रहा था तो वो केवल मेरी दोनों जांघों के बीच में लंड करके बहुत तेज आगे पीछे करने लगा. साथ ही दोनों हाथों से मेरे मम्मों को दबाए जा रहा था. मुश्किल से एक मिनट ऐसे किया होगा कि कुछ गर्म गर्म लगा नीचे, जहां वो लंड आगे पीछे कर रहा था. फिर उसने अपना एक हाथ निकाला और वही हाथ ऊपर की तरफ से डाल कर अन्दर वाला निकाला. तुरंत ऊपर वाला हाथ भी निकाला और बहुत तेजी के साथ भाग गया. मैं जब तक पीछे मुड़ी तब तक वो इतनी दूर निकल चुका था कि मैं उसे पहचान ही ना पाई. वो भाग गया.

मेरी इंडियन सेक्स स्टोरी कैसी लग रही है.. अपने विचार मुझे बताएं!
कहानी जारी है.
[email protected]