मेरी चूत को लगी दूसरे लंड की प्यास

(Meri Chut ko Lagi Dusre Lund ki Pyas)

दोस्तो, आप लोगों ने मेरी पहली चुदाई की स्टोरी
मेरी फर्स्ट टाइम सेक्स की कहानी
पढ़ी. उस स्टोरी से संबंधित मुझे काफी सारे मेल आये. मुझे काफी खुशी हुई कि आप लोगों ने मेरी स्टोरी को पसंद किया. अब मैं आप लोगों को अपनी आगे की कहानी बताने जा रही हूं. पिछली कहानी की तरह इस कहानी को भी आप लोग उतना ही प्यार देना.

जैसा कि पिछली कहानी में मैंने आपको बताया था कि मैं अपने कॉलेज के दोस्त राहुल के लंड से पहली बार चुदी थी. मैंने इससे पहले न तो कभी लंड को हाथ में लिया था और न ही चूत में लिया था. राहुल ने मुझे अपने जवान लंड से चोद कर चुदाई का पहला मजा दिया.

उसके बाद जब भी हम लोगों को मौका मिलता था हम चुदाई कर लेते थे. उसके दोस्तों के फ्लैट पर जाकर भी मैंने अपनी चूत चुदवाई थी. अब मेरी चूत को लंड की प्यास लगी रहती थी. बिना चुदाई के मेरा मन ही नहीं लगता था. मैं अब हर वक्त लड़कों पर ही ध्यान देती रहती थी. देखती रहती थी कि किसका लंड कैसा होगा. किसका लंड मुझे ज्यादा मजा दे सकता है.

अब मेरा मन भी बॉयफ्रेंड बनाने को करने लगा था. राहुल तो मेरा दोस्त था. इसलिए उसको मैं बॉयफ्रेंड नहीं कहूंगी. उसके साथ मैंने चुदाई का पहला सबक सीखा था. अब बाकी लड़कियों की तरह मैं भी अपना एक बॉयफ्रेंड बनाना चाह रही थी.

मेरे कॉलेज में मुझसे सीनियर एक लड़का था. उसका नाम था करण. वो देखने में भी बहुत हैंडसम था और उसकी बॉडी भी बहुत अच्छी बनाई हुई थी उसने. वो जिम करता था. इसलिए मेरा ध्यान बार-बार उस पर जाता रहता था.
वो मेरे दोस्त राहुल का अच्छा दोस्त था. मुझसे दो साल सीनियर था. राहुल की और उसकी दोस्ती काफी गहरी थी.

एक दिन की बात है जब मैं राहुल के साथ मूवी देखने के लिए गयी हुई थी. मूवी कुछ खास नहीं थी. वैसे हम लोग मूवी देखने नहीं गये थे. हम तो बस वहां पर मजा करने के लिए गये हुए थे. राहुल ने सिनेमा हॉल में ही मेरे बूब्स दबाये. मैंने उसके लंड को चूसा और इस तरह से हमने थोड़े मजे किये. राहुल ने अपना माल मुझे पिलाया था उस दिन.

फिर जब मूवी खत्म हो गई तो हम लोग बाहर आ रहे थे. पीछे से किसी ने राहुल को आवाज दी. हमने देखा तो वो करण ही था. वह भी वहां पर मूवी देखने के लिए आया हुआ था. करण को देख कर राहुल ने उसको हैल्लो किया और पास आकर वो दोनों बातें करने लगे.

करण- हैल्लो, कहां घूम रहे हो यार?
राहुल- कहीं नहीं भैया, बस मूवी देखने आये थे.
करण- अच्छा तो कैसी लगी मूवी?
राहुल- बोरिंग है भैया!
करण- हां, बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड बोरिंग मूवी देखने ही आते हैं.
इतना कहकर करण ने मेरी तरफ देखा और हंसने लगा.

राहुल- अरे नहीं भैया, ये मेरी दोस्त है.
करण ने मुझसे हैलो कहा और मैंने उसको हाय कहा. उस दिन पहली बार उसने मुझसे बात की थी.
करण- अरे तान्या, तुम तो मुझसे कभी बात ही नहीं करती. इतना भी बुरा नहीं हूं मैं यार.

मैं बोली- नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है. मैं बस ऐसे ही थोड़ी बिजी रहती हूं पढ़ाई में.
करण- अच्छा तो कैसी चल रही है पढ़ाई?
इतने में राहुल बोला- तुम लोग बातें करो, मैं बाइक ले कर आता हूं.
और वो बाइक लेने चला गया.

करण ने मुझसे कहा- मैं तो सोचता था कि तुम राहुल की गर्लफ्रेंड हो!
मैं- नहीं, हम दोस्त हैं. मैं तो सिंगल हूं अभी.
करण- ओ वाओ… रियली? तुम्हें देख कर लगता नहीं है।
मैं बोली- क्यूं मुझे क्या हुआ है जो मुझे देख कर ऐसा नहीं लगता आपको.

उसने कहा- कुछ नहीं, छोड़ो।
इतने में ही राहुल बाइक लेकर आ गया और हम घर वापस आ गये. उसके कुछ दिन के बाद मेरे फोन पर एक मैसेज आया. उसमें किसी अन्जान नम्बर से हैलो लिखा हुआ था.
मैंने पूछा- आप कौन?

उधर से रिप्लाई आया- मैं राहुल का दोस्त करण बात कर रहा हूं. भूल गयी या याद है?
मैंने कहा- हां जी, याद है.
इस तरह से हम दोनों में बातें होने लगीं. बातें करते-करते करण भी मुझे पसंद करने लग गया. मैं भी उसकी तरफ आकर्षित हो गई थी.

एक दिन करण ने मुझसे मूवी देखने चलने के लिए पूछा तो मैंने तुरंत हां कर दी क्योंकि मुझे उम्मीद थी कि मेरी चूत की नए लंड की प्यास शायद मिटने वाली है.
वो बोला- ठीक है, तो फिर संडे को प्लान करते हैं.
मैंने कहा- ठीक है. मैं रेडी रहूंगी. तुम फोन कर देना आने से पहले.

फिर उस दिन संडे को करण का फोन आया कि वो तैयार है.
मैं भी घर से तैयार होकर निकल गई. उस दिन मैंने शर्ट और शॉर्ट्स पहने हुए थे.

मैं कुछ ही दूर चली थी कि करण कार लेकर आ पहुंचा. मैं कार में बैठी और हम चल पड़े. हम मूवी देखने पहुंच गए. मूवी स्टार्ट हुई और इधर करण के हाथ मेरी जांघों पर आकर रुक गये थे.

एक बार मैंने देखा और फिर सामने देखने लगी. मैंने उससे कुछ नहीं कहा. फिर वो धीरे-धीरे मेरी जांघों को सहलाने लगा. मुझे भी अच्छा लग रहा था. उसके हाथ काफी सख्त लग रहे थे. मुझे अपनी कोमल नर्म जांघों पर उसके हाथों की छुअन अच्छी लग रही थी और मजा आने लगा था.

थोड़ी देर के बाद उसने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया. मैं समझ गई थी कि अब ये क्या करने वाला है. उसने धीरे से अपने हाथ को मेरे बूब्स पर रख दिया. लेकिन मैंने उसके हाथ को तुरंत हटा दिया और कहा कि यहां पर कोई देख लेगा.
वो बोला- कोई नहीं देख रहा. अंधेरे में किसी को कुछ नहीं दिख रहा. रखने दो न जान … तुम मेरे लिए इतना भी नहीं कर सकती हो क्या?

उसके रिक्वेस्ट करने पर मैं मान गई और उसने मेरे बूब्स पर हाथ रख दिया और उनको दबाने लगा. मैं भी उसके हाथों से चूचों को दबवाने का मजा लेने लगी. मेरी चूत गीली होने लगी. फिर तभी इंटरवल हो गया.

इंटरवल होने के बाद हम दोनों उठ कर बाहर आ गये. मैं बाथरूम में जाने लगी तो वो मेरे पीछे आकर मेरे कान में कहने लगा कि अपनी ब्रा को उतार लेना अंदर जाकर.
मैं बोली- तुम पागल हो क्या?
वो बोला- अरे कुछ नहीं होगा. मैं जैसा कह रहा हूं वैसा ही करो तुम.

मैं अंदर गई और अपनी ब्रा उतार कर मैंने बैग में रख ली. अब मैंने केवल टी-शर्ट पहनी हुई थी. नीचे से ब्रा नहीं थी.
मैं बाहर निकली तो वह वहीं पर खड़ा हुआ था.
मुझे देख कर चुपके से बोला- आइ लव यू मेरी जान.

उसको शायद पता चल गया था कि मैंने ब्रा उतार ली है.

उसके बाद हम अंदर चले गये और मूवी फिर से स्टार्ट हो गई. अब उसने बिल्कुल भी देर किये बिना मेरी टी-शर्ट के अंदर से हाथ डाल दिया. वो मेरे खुले बूब्स को दबाने लगा और मुझे भी मजा आने लगा. मेरी चूत को पहले से ही गीली थी. मैंने पेशाब भी कर ली थी. इसलिए अब और ज्यादा मजा आ रहा था.

वो मेरे बूब्स को दबा रहा था और मेरे अंदर सेक्स भरता जा रहा था. मेरे मुंह से बस सिसकारियां निकलने ही वाली थीं लेकिन मैंने खुद को रोका हुआ था. फिर उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी जीन्स पर रखवा दिया. उसका लंड उसकी जीन्स में उठा हुआ था. मेरे हाथ रखने पर मुझे महसूस हुआ कि उसका लंड उठ उठ कर झटके दे रहा है.

फिर करण ने अपनी जीन्स की चेन खोल ली और मेरे हाथ को अंदर डाल दिया. उसके लंड पर हाथ लगा तो मेरे बदन में करंट सा झनझना गया. उसके अंडरवियर के अंदर उसका लंड एकदम सख्त हो गया था. वो बार-बार उछल कर ऊपर उठ रहा था. मैं तो मदहोश होने लगी.

करण का लंड राहुल के लंड के काफी बड़ा था और मोटा भी ज्यादा था. इसका अंदाजा मुझे उसके लंड को हाथ में लेते ही हो गया था. मैंने उसके लंड को ऐसे ही अंडरवियर के ऊपर से पकड़ लिया. वो अभी भी मेरे बूब्स के साथ खेल रहा था लेकिन अब उसकी पकड़ और ज्यादा तेज हो गई थी. मुझे भी अब और ज्यादा जोश आने लगा था.

कुछ देर के बाद वो कहने लगा- यह मूवी तो बहुत ही बोरिंग है यार तान्या. चलो हम कहीं लॉन्ग ड्राइव पर चलते हैं. यहां पर कुछ मजा नहीं आ रहा है.
उसने मेरे टीशर्ट से हाथ निकाल लिया. उसने अपनी जीन्स की चेन भी बंद कर ली. मुझे भी लंड की प्यास लगी थी तो हम दोनों उठ कर बाहर आ गये.

अब तक मैं भी फुल गर्म हो चुकी थी. फिर हम बाहर आकर कार में बैठ कर चल पड़े.

कुछ ही दूर चले थे कि तभी राहुल का फोन आ गया.
मैंने हैल्लो किया तो वो बोला- क्या कर रही है? करण से चुद गई क्या?
मैंने कहा- नहीं, अभी उसमें थोड़ा टाइम है. मगर जल्दी ही वो भी होने वाला है.
वो बोला- ठीक है. जब तेरी लंड की प्यास मिट जाये तो मुझे कॉल करना.
फिर उसने फोन रख दिया.

बीच रास्ते में करण ने एक जगह गाड़ी रोक दी.
मैं बोली- ये कहां ले आये हो तुम?
वो बोला- ये मेरा घर है.
मैंने कहा- ओके.
मैं जानती थी कि घर जाकर मेरी चुदाई होने वाली है.

जब हम उसके घर के अंदर गये तो वहां पर कोई नहीं था.
मैंने पूछा तो उसने बताया कि सब लोग शादी में गये हुए हैं. रात को देर से लौटेंगे.
मैंने कहा- ओके.
फिर कुछ देर तक हम दोनों इधर-उधर की बातें करते रहे और फिर जब मैं बेड के साथ खड़ी हुई थी उसने मुझे एकदम से अपनी बांहों में जकड़ लिया.

उसने तुरंत मेरी टी-शर्ट को उतार दिया और मेरे चूचों को नंगे कर दिया. फिर वो एकदम से उनको हाथ में लेकर दबाने लगा. मुझे किस करने लगा. उसके होंठों को मैं भी चूसते हुए उसका साथ देने लगी. उसके हाथ मेरे चूचों को जोर से दबा रहे थे. फिर उसने मेरे चूचों को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.

मैं बोली- आह्ह … करण, आराम से करो. कोई आ जायेगा यार!
वो बोला- भाड़ में जायें आने वाले. अब तो मैं किसी हाल में नहीं रुक सकता. बस तुम्हारे जिस्म की खुशबू में खो जाना चाहता हूं.
वो तेजी से मेरे चूचों को पीते हुए मेरे निप्पलों को काटने लगा. मैं भी उसके सिर को सहलाने लगी. मुझे पूरा मजा आने लगा था.

उसके बाद उसने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरे जिस्म के साथ खेलने लगा. वो मेरे बदन को हर कोने में किस कर रहा था. कभी गर्दन पर तो कभी होंठों पर. कभी कंधों पर तो कभी चूचों पर. कभी माथे पर और कभी नाभि पर. जैसे जैसे उसके होंठ मेरी चूत के नजदीक पहुंच रहे थे मेरे अंदर सेक्स की आग और तेज होती जा रही थी.

कुछ देर तक उसने मेरे जिस्म को चूमा-चाटा और चूसा. फिर उसने मेरे शॉर्ट्स को निकाल दिया. अब मेरी चूत पर एक छोटी सी चड्डी रह गई थी. उसके बाद उसने अपने कपड़े उतारने भी शुरू कर दिये. उसने अपने सारे कपड़े उतार डाले और उसके अंडरवियर में तना हुआ उसका लंड देख कर मेरी आंखें खुली सी रह गईं.

उसके बाद उसने अपनी चड्डी को भी उतार दिया और फिर उसका लंड मेरे सामने एकदम से आजाद हो गया. उसका लंड उछल रहा था.
वो बोला- देखो जानेमन, ये तुम्हारी ‘उसकी’ के लिए कैसे तड़प रहा है. इसको अपनी ‘उसके’ दर्शन तो करवा दो.
मैं बोली- मैं इतना पढ़ी लिखी नहीं हूं कि तुम्हारी इन सब बातों के मतलब समझ सकूं. साफ साफ कहो क्या कह रहे हो.

वो बोला- अपनी फु्द्दी, अपनी चूत… जो भी कहती हो उसको, उसे दिखा दो अब।
उसके कहने पर फिर मैंने अपनी चड्डी उतार दी. मेरी चूत उसके सामने नंगी थी. वो एकदम से मेरी चूत पर टूट पड़ा और उसको जोर से चूसने लगा.

जैसे ही उसने अपनी ज़ुबान मेरी चूत पर रख कर अन्दर की, मेरी चूत तो उछल पड़ी. गीली तो वो पहले से ही थी. वो अपनी उंगलियों से मेरे चूत के दाने को दबाने भी लगा.
उम्म्ह… अहह… हय… याह… करते हुए मैं तो जैसे जन्नत में जाने लगी थी। आह्ह … मेरी जान … करण … ओह्ह … और जोर से करो डार्लिंग।

उसका लंड पूरा फनफना रहा था और आपे से बाहर हो रहा था. उसने मुझे बातों में लगा कर झट से अपना लंड मेरी चूत के मुँह पर रख दिया और जब तक मैं कुछ समझ पाती, उसने एक धक्का मार दिया. जिसका नतीजा यह हुआ कि लंड का सुपारा मेरी चूत में घुस गया.

अभी मैं उससे कुछ कहना चाह रही थी कि यह क्या किया, तभी उसने एक और करारा सा धक्का दे मारा और उसका तीन चौथाई लंड मेरी चूत के अन्दर घुस गया था. अब कुछ भी कहने का कोई फ़ायदा नहीं था क्योंकि उसके लंड के लिए चूत तो मेरी भी तड़प रही थी.

इतने में उसने एक और जोरदार झटका मारा और पूरा लंड मेरी चूत की जड़ तक घुसा दिया. मुझे दर्द होने लगा था लेकिन मुझे लगा कि अब मेरी लंड की प्यास अच्छे से मिट जायेगी. अब तक मैंने राहुल का लंड ही अपनी चूत में लिया था और करण का लण्ड राहुल के लंड से काफी बड़ा और मोटा था. मैं तड़प उठी थी. मगर कुछ ही पलों के दर्द के बाद मेरी पीड़ा खत्म हो गई.

अब मेरी चूत उछलना चाह रही थी, मगर उसने अपना पूरा वजन मेरे ऊपर दबा कर रखा हुआ था. जिससे मैं हिल नहीं पा रही थी. उसने चुदाई शुरू कर दी. आज पहली बार मेरी चूत को मेरे दोस्त राहुल के लंड अलावा किसी और का लण्ड नसीब हुआ था. वो तो खुशी से फूल कर कुप्पा बन गई और करण के हर धक्के का जवाब नीचे से उछल कर देने लगी थी.

वो काफी तेज़ धक्के मार रहा था. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.
करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद वो झड़ गया. मगर अभी मेरा पानी नहीं निकला था, मेरी लंड की प्यास अधूरी रह गयी थी.

करण हांफता हुआ मेरे ऊपर ही गिर गया. पूरी चुदाई करके जब वो चूत के ऊपर से उतरा, तो बोला- सच-सच बताना कि तुमको कैसा लगा?

मैंने उससे लिपटते हुए कहा- तुम अपनी बताओ, तुम्हें मजा आया कि नहीं?
उसने कहा- मेरी तो आज लॉटरी लगी है, जो तुम्हारी चूत के आज दर्शन ही नहीं बल्कि मेरा लंड इसमें अन्दर तक सैर भी करके आ गया है.

मेरा मन एक राउंड और करने का था लेकिन वो मुझे बोला- चलो टाइम हो रहा है, मेरे घर वाले आ जायेंगे. चलो मैं तुम्हें तुम्हारे घर पर छोड़ दूं.
यह सुन कर मेरा दिमाग खराब हो गया. मैं करण के लंड से चुद कर अपना पानी निकालना चाह रही थी लेकिन उसने सारे अरमानों पर पानी फेर दिया.
गुस्से में उठ कर मैं अपने कपड़े पहनने लगी.

कपड़े पहनने के बाद मैं खुद ही बाहर जाने लगी तो वो कहने लगा- मैं तुम्हें छोड़ देता हूं.
मैं बोली- नहीं, मैं राहुल को बुला लूंगी. तुम्हारे साथ जाऊंगी तो घर में पता चल जायेगा.
वो बोला- ठीक है, जैसी तुम्हारी मर्जी.

उसके बाद मैं बाहर आ गई और बाहर आने के बाद मैंने राहुल को कॉल की. मैंने उससे कहा कि मुझे यहां से पिक कर ले. मैं वहीं पर खड़ी होकर उसका इंतजार करने लगी. कुछ देर इंतजार करने के बाद राहुल आ गया और हम वहां से चले आये.

रास्ते में राहुल ने पूछा- कैसी रही तुम्हरी चुदाई?
मैं बोली- उसकी तो बात ही मत करो. मेरा पानी तक नहीं निकल पाया. मेरा दिमाग ख़राब हो रहा है.
राहुल ये सुन कर हंसने लगा.

मैंने कहा- अब तुम और दिमाग खराब मत करो. चुपचाप गाड़ी चलाओ.
वो बोला- अगर तुम कहो तो मैं आ जाऊं रात में तुम्हारे घर. वैसे भी हम दोनों को चुदाई किये हुए काफी दिन हो गये हैं.
मैंने कहा- नहीं, आज तो नहीं हो पायेगा. प्लान बन पाना मुश्किल है.

उसके बाद उसने गाड़ी हाईवे पर मोड़ दी.
मैं बोली- कहां जा रहे हो?
वो बोला- रुक जाओ. बताता हूं.
हाईवे से एक कच्चा रास्ता जा रहा था जो जंगल जैसा लग रहा था. उसने उस रास्ते पर कुछ आगे जाकर गाड़ी रोक दी.

उसने गाड़ी से बाहर आने के लिए कहा. हम दोनों उतर गये.
मैं बोली- हम यहां पर क्या कर रहे हैं?
वो बोला- अगर घर में सेक्स नहीं कर सकते तो यहां पर कर लेते हैं.
मैं बोली- पागल हो गये हो क्या? यहां खुले में? कोई आ जायेगा तो?
वो बोला- कोई नहीं आयेगा. मैं अपनी गर्लफ्रेंड को यहीं पर लेकर आता हूं. यहीं पर लाकर उसकी चुदाई की है मैंने कई बार. सेफ है बिल्कुल.

उसका आइडिया मुझे अच्छा नहीं लगा और मैं मना करके वापस जाने लगी लेकिन तभी उसने मुझे पकड़ कर मेरे बूब्स दबाते हुए मुझे किस करना शुरू कर दिया. दो मिनट के अंदर ही राहुल ने मेरा मूड बना दिया. हम दोनों वहीं पर खुले में चालू हो गये.

कुछ देर किसिंग हुई और फिर उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया. फिर उसने मुझे शॉर्ट्स निकालने के लिए कहा. मैंने निकाल लिया तो बोला कि अब गाड़ी पर झुक जाओ. उसके कहने पर मैं झुक गई और उसने पीछे से मेरी प्यासी, चुदासी और गीली चूत में अपना लंड घुसा दिया.

लंड को घुसाने के बाद वो मेरे ऊपर लेट कर मेरी चूत को चोदने लगा. चूंकि मैं कुछ देर पहले ही करण के लंड से चुद कर आई थी तो राहुल का लंड आराम से मेरी चूत में चला गया. फिर उसने धक्के लगाना शुरू कर दिया और मुझे भी चुदाई का मजा आने लगा.

कुछ ही देर में मुझे बहुत मजा आने लगा और मैं जोर से आवाजें करने लगी. आह्ह … राहुल … चोदो … और तेज चोदो … आह्ह … मजा आ रहा है. वो तेजी से मेरी चूत को पेलने लगा. फिर पांच मिनट में ऐसे ही सिसकारियां लेते हुए मैं झड़ गई.

अब राहुल का पानी भी निकलने वाला था और उसने एकदम से मेरी चूत से लंड को निकाल कर मेरी गांड पर अपना माल गिराना शुरू कर दिया. वो मेरी गांड को पकड़ कर कुछ देर ऐसे ही खड़ा रहा. उसके बाद उसने गाड़ी से कपड़ा निकाला और मेरी गांड पर गिरे माल को साफ किया.

चुदाई का एक राउंड वहीं खुले में होने के बाद हम घर चले गये. मैं घर जाकर खाना खाकर सो गई.

उसके अगले दिन फिर करण से बात होने लगी. अब वो रोज मेरी चुदाई करने लगा. कुछ दिन के बाद उसने मेरे घर पर आना भी शुरू कर दिया.

अब मुझे उससे ब्रेक-अप करने का बहाना मिल गया और मैंने करण के साथ ब्रेक-अप कर लिया क्योंकि मेरे भाई ने मुझे करण के साथ चुदाई करते हुए देख लिया था. उसके बाद हम दोनों अलग हो गये. लेकिन मेरी चूत में फिर से प्यास जगने लगी और अब मैं कोई नया लंड ढूंढने लगी.

तो दोस्तो, ये थी मेरे बॉयफ्रेंड के साथ मेरी चुदाई की कहानी जिसमें मुझे लंड तो मिला बड़ा सा लेकिन लंड की प्यास नहीं मिटी.
आप लोगों को मेरी कहानी पसंद आई? मुझे बताना.

अगली स्टोरी में मैं बताऊंगी कि कैसे मैंने लंड की प्यास के चलते एक और नया बॉयफ्रेंड बनाया और उसने मेरी चूत को चोदने के साथ ही मेरी गांड भी मारी.
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