चुद गई टॉप और स्कर्ट में-1

नीलम अग्रवाल
मैं नीलम अग्रवाल इन्दौर मध्यप्रदेश की निवासी हूँ। मेरा फ़िगर 34-30-34 का है, मेरा कद 5’5″ इंच का और मेरा रंग कश्मीरी गोरा (दूधिया गोरा) है और मेरे गुलाबी होंठों पर बाईं तरफ़ ऊपर एक तिल है जो कि शारीरिक और मानसिक कामुकता और वासना की निशानी होता है।
यह मेरी सच्ची कहानी है जिसमें मैंने पहली बार किसी गैर लड़के के साथ सेक्स किया था।
मैं तब इन्जीनियरिंग के प्रथम वर्ष में थी, तभी मेरा चक्कर द्वितीय वर्ष के सीनियर गौरव के साथ हो गया था।
अफ़ेयर शुरु होने के एक सप्ताह के बाद ही गौरव का फोन मेरे पास सुबह 7 बजे आया, उसने कहा- तुए कालेज जाने की जगह मेरे रूम पर आ जाओ, फिल्म देखेंगे।
मैंने फोन रखा, मैं समझ गई कुछ गड़बड़ है, सेक्स के लिए मैं भी आतुर थी, इसलिए मैं भी अच्छे से तैयार होने लगी।
नहाते वक्त मैंने अपने बदन को अच्छे से सहलाया और कपड़े पहनने शुरु किए।
मैंने हल्के गुलाबी रंग की ब्रा और पैन्टी का विदेशी सैट पहना जो कि पारदर्शी और मुलायम कपड़े का होता है और जो मम्मों को इलास्टिक की मदद से कामुकता से हिलने देता है और चूचियों को सुडौल बनाता है।
उसके ऊपर मैंने लॉन्ग स्कर्ट (लहंगे जैसा) जो कि सेंडल तक आता है और टॉप पहना।
स्कर्ट सफ़ेद रंग का था, जिसमें रोशनी पड़ने पर आर-पार दिखाई देता था। टॉप हल्के आसमानी रंग का था, जिसमें सीने पर चूचियों के बीच में 6 बटन थे, जो चूचियों को कसे रखते थे और चूचियाँ तनी हुई और कड़ी दिखती थीं।
मैं कपड़े पहनने और मेकअप के बाद स्कूटी से गौरव के रूम पर पहुँची।
वो जीन्स और बनियान पहने था, बनियान में उसकी बॉडी साफ़ नज़र आ रही थी, उसका सीना कड़क और बाहर निकला हुआ था।
मुझे देखते ही वो मेरे पास आया और कहा- हाय नीलू डार्लिंग..!
और मेरी कमर से मुझे पकड़ कर मेरे गालों पर चूम लिया और मुझे कसके गले लगाकर मेरी गर्दन पर चूमा, मेरी चूचियाँ उनके सीने से दबने लगे, मुझे बहुत अच्छा लगा।
फिर उसने मुझे बिस्तर पर बैठने के लिए कहा, मैं बैठ गई और पूछा- तुम्हारे दोस्त कहाँ हैं..!
उसने जवाब दिया- वो घर गए हैं।
मैंने पूछा- तुम अकेले बोर नहीं होते क्या?
उसने कहा- इसलिए तो तुम्हें बुलाया है।
मैंने गुस्से में कहा- क्या मैं टाइमपास के लिए हूँ?
उसने कहा- तुम तो बुरा मान गई… मैं तो मज़ाक कर रहा था।
मैं फिर भी नहीं मानी, फिर उसने कहा- तुम्हें मनाने का मेरे पास एक रास्ता है।
मैं चुप रही, वो तुरन्त रसोई में गया और रसोई से दो कप आइसक्रीम ले आया।
फिर हम बिस्तर पर बैठकर खाने लगे।
थोड़ी देर बाद उसने आइस्क्रीम मेरे गालों पर लगा दी।
मैं साफ ही कर ही रही थी कि उसने कहा- लाओ मैं साफ़ कर देता हूँ..!
मैंने कहा- ठीक है..!
वो अपने होंठ पास लाया और गालों की आइसक्रीम चूस कर और जुबान से चाटकर खाने लगा।
मैंने उसे दूर कर दिया और कहा- गौरव अभी नहीं..!
हम फिर आइसक्रीम खाने लगे। उसने कप साइड में रख दिया, अचानक उसने मेरी जाँघ पर हाथ रखा और स्कर्ट के ऊपर से ही जाँघ हाथ फेर कर सहलाने लगा।
मुझे अजीब सा अहसास होने लगा, मैं उसका हाथ हटाकर कप रखने रसोई में चली गई।
मैं कप रख कर खड़ी हुई ही थी कि अचानक मुझे कमर पर दो हाथ महसूस हुए, वो गौरव थे।
उसने मुझे पीछे से जकड़ लिया और मेरी कमर और पेट पर हाथ फेरते हुए मेरी गर्दन, कंधे और गालों को पीछे से चूमने लगे और मेरी गाण्ड उनके लण्ड से घिसने लगी।
मेरे तन-बदन में एक मीठी सी लहर दौड़ने लगी। ना चाहते हुए भी अपने आप को छुड़ाने की नाकाम कोशिश करने लगी। ऐसा लग रहा था, मानो किसी ने मेरे तन-बदन में आग लगा दी हो।
वो मेरी दाई तरफ़ से मेरे गर्दन, कंधे और गालों को चूमते ही जा रहा था। उसका कठोर बदन मेरे मुलायम बदन को पीछे से दबा रहा था। मैं कुछ सोच ही नहीं पा रही थी। मैं अपने आप को बेबस महसूस कर रही थी।
उसके हाथ मेरी कमर और पेट पर हलचल कर रहे थे। मैं उसके हाथ पर हाथ रखकर दबा कर रोकने की नाकाम कोशिश कर रही थी। मैंने देखा कि मेरी साँसों की गति तेज़ होने लगी थी और मैं ‘आहें’ भरने लगी थी।
उसकी गर्म साँसें मुझे विचलित कर रही थीं। उसके गीले होंठ ज्यों ही चूमते, एक अलग ही अहसास हो रहा था।
तभी मैंने मेरे शरीर में बदलाव महसूस किया। मेरे शरीर का तापमान बढ़ गया था। तभी मेरी नज़र मेरे मम्मों पर गई। मैंने देखा कि वो तिल-तिल कर बढ़ने लगे थे, वो कड़क होते जा रहे थे।
मेरे मम्मों में गर्मी उस समय मेरे शरीर से दुगनी और खून का प्रवाह बहुत तेज़ था, मानो अन्दर दूध उबल रहा हो।
मैंने देखा कि उनका आकार धीरे-धीरे बढ़ रहा था, न सिर्फ़ उनका आकार बल्कि उनकी गोलाई भी बढ़ती जा रही थी, वो कड़क और सीधे तने हुए दिखाई दे रहे थे।
मैंने मेरे मम्मों को इतना बढ़ा हुआ पहले कभी नहीं देखा था। वो ऐसे फूल रहे थे, मानो उनमें कोई हवा भर रहा हो।
मैं भी मचलते हुए गौरव के बदन से अपना बदन रगड़ रही थी। उसने मेरी दाईं तरफ़ से गर्दन को चूमते हुए मेरी बाईं ओर आकर मुझे कस कर अपनी ओर दबाया और मेरी बाईं ओर से गर्दन, कन्धे और गालों को चूमने लगा।
मैं और गर्म होने लगी। मुझे लगा मेरे मम्मे फूलकर मेरी ब्रा और टॉप को फ़ाड़कर बाहर आने को बेताब हो रहे थे, पर उनका आकार कुछ ही समय में स्थिर हो गया। फिर भी उनकी गर्मी बढ़ती जा रही थी।
फिर मेरा ध्यान मेरे होंठों पर गया, वो कुछ गीले हो गए थे, जो कि मेरे अन्दर की कामुकता को दिखा रहे थे, क्योंकि लड़की के होंठ गीले होना कामुकता और वासना की निशानी है।
लेकिन मेरी चूचियों की गर्मी बढ़ती ही जा रही थी। उनके कड़क हो जाने के कारण मेरे निप्पल इतने कड़क हो गए थे कि उनका नुकीलापन मेरे टॉप के बाहर से ही नज़र आ रहा था।
फिर गौरव के हाथों की हलचल में कुछ बदलाव आया, उसके हाथ मेरी कमर से सरकते हुए मेरी चूत की तरफ बढ़ रहे थे।
मैं थोड़ी शान्त हो गई, पर अगले ही क्षण वो मेरी चूत पर स्कर्ट के ऊपर से ही हाथों को रगड़ने लगा।

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मेरे बदन में फिर से सिरहन सी होने लगी, मानो किसी ने फिर से करंट लगा दिया हो। मैं आगे की ओर झुक कर अपनी गाण्ड उसके लण्ड पर रगड़ने लगी।
एक मीठा सा आनन्द तो मुझे भी हो रहा था, तो मैं भी इसका मजा लेने लगी।
मेरे मुँह से कामुकता भरी आवाजें, “आह उह उम्म्म अह्ह्ह..!” निकली ही जा रही थीं।
उसकी ऊँगलियाँ स्कर्ट के ऊपर से ही मेरी चूत की दीवारों के बीच रग़ड़ रही थीं।
अब मेरी चूत में मुझे कुछ गीलापन भी महसूस हो रहा था। इसी दौरान उसने मेरी गर्दन और गाल पर चूमना जारी रखा।
मन तो मेरा भी था कि पलटकर मैं भी उसे चूम लूँ, पर उसकी बाँहें मुझे कुछ सोच सकने का भी समय नहीं दे रही थीं।
काफी देर मेरी चूत रगड़ने के बाद उसके हाथों में फिर हलचल हुई, उसके हाथ सरक कर ऊपर की ओर होने लगे।
अब मेरी चूत उसके हाथों से आजाद थी। फिर मैंने सीधी खड़ी होकर कुछ साँसें ही ली थीं कि उसके हाथ अब और ऊपर मेरी चूचियों की ओर बढ़ने लगे।
मैं अपने दोनों हाथ उसके दोनों हाथों पर हाथ चिपकाए हुए थी, उसके हाथ मेरी कमर से पेट पर रगड़ते हुए मेरी चूचियों के नीचे पहुँचे। चूचियाँ दबने के अनछुए अहसास से से रोमांचित होने लगीं, लेकिन मैंने देखा कि गौरव के हाथों की पकड़ कुछ ढीली पड़ने लगी थी।
बाकी कहानी अगले हिस्से में।
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