चंडीगढ़ की नशीली जवानी को चोदा

(Chandigarh Ki Nashili Jawani Ko Choda)

दोस्तो, आज मैं आपको अपना एक नया तजुरबा सुनाता हूँ. मेरा नाम नीरज है और मैं एक साधारण से परिवार से हूँ. अक्सर सोचता हूँ, कोई लड़की मिले जिसे मैं चोद सकूँ, मगर ऐसा कोई मौका नहीं मिल रहा था.

मेरा मौसी चंडीगढ़ में रहती हैं, उसके बेटे से मेरी बहुत बनती है. हम दोनों लगभग एक ही उम्र के हैं. एक बार मैं अपनी मौसी के घर गया हुआ था, तो अपनी मौसी के बेटे से बात की- यार, लगता है ये जवानी ऐसे ही निकल जाएगी, साली कोई लड़की ही नहीं पटती.
वो बोला- यार अपना भी यही हल है, मगर एक तरीका है, जिससे हमें किसी लड़की को चोदने का मौका मिल सकता है, अगर अपनी किस्मत ने साथ दिया तो!
मैंने पूछा- कैसे?
वो बोला- फ्राइडे या सेटर डे को ट्राई करके देखते हैं.

शुक्रवार शाम को हमने घर में कह दिया कि हम लेट नाईट शो देखने जा रहे हैं. फिल्म रात को 10 बजे शुरू होगी और साढ़े बारह बजे ख़त्म होगी, तो रात को देर से ही आएंगे.
रात को 9 बजे हम दोनों गाड़ी ले कर घर से निकले और बजाए पीवीआर जाने के हम एक रेस्तरां के बाहर जा रुके. गाड़ी को पार्किंग में लगा कर हम दोनों रेस्तरां के बाहर ही एक एक कोक की बोतल लेकर बैठ गए और बातें करने लगे.

मैंने सुमित से पूछा- यहाँ क्या है?
वो बोला- इस रेस्तरां में डिस्को है, नाईट क्लब है, बड़े बड़े लोगों के बच्चे यहाँ रात को ज़िंदगी के मज़े करने आते हैं. लड़के लड़कियाँ यहाँ नशे करते हैं, नाचते हैं, खाते पीते हैं.
मैंने पूछा- तो हम भी अंदर चलते हैं.
वो बोला- पहली बात यहाँ पे कपल एंट्री है, सिर्फ एक लड़का और एक लड़की ही अंदर जा सकते हैं. दूसरी बात, एंट्री के लिए या तो आप इस क्लब के मेम्बर हों, मैम्बरशिप फीस है 25000 या फिर सिंगल एंट्री 2200 रुपये, जिसमे एंट्री और 2 गिलास बीयर के मिलेंगे.

अब 4400 रुपये तो हमारे पास थे नहीं.
‘तो फिर हम यहाँ क्यों आये हैं?’ मैंने पूछा तो सुमित ने बताया- अभी थोड़ी देर में जिन लड़के लड़कियों की शराब ज़्यादा हो जाएगी, या जो नशे में अंदर गलत हरकतें करेंगे, बाउंसर उन्हें उठा कर बाहर फेंक देंगे. बहुत सी लड़कियाँ इतना नशा कर लेती हैं कि वो खुद घर तक नहीं जा सकती. उन्हें या तो उनके दोस्त घर छोड़ कर आते हैं, या फिर हमारे जैसे शिकारी, जो पहले उनसे घर छोड़ने की फीस लेते हैं, फिर सुबह होने से पहले उनको घर पहुंचा देते हैं.

उस ‘फीस’ से मैं बहुत खुश हुआ, मैं समझ गया, फीस का मतलब चुदाई. मैंने बड़ी उत्सुकता से पूछा- तो यहाँ से बाहर निकलने वाली सभी लड़कियाँ क्या चुदवाती हैं?
वो बोला- अरे नहीं रे पगले, ज़्यादातर तो अपने दोस्तों के साथ ही होती हैं, हम तो कोई एक ढूंढते हैं, जो अकेली हो.

हम वहाँ बैठे रहे, आते जाते लोगों को देखते रहे, एक से एक बढ़िया गाड़ी, एक से एक बढ़िया नौजवान लड़के लकड़ियाँ, शानदार कपड़े पहने हुये, महंगे परफ्यूम लगाए हुये. लड़के तो ज़्यादातर जीन्स, टी शर्ट और कमीज़ पहने थे, मगर असली आग लगाई हुई थी लड़कियों ने, हरेक की ड्रेस एक से बढ़ कर एक थी. जीन्स, टी शिर्ट्स, शॉर्ट्स, निकर, टॉप, गाउन, मिनी स्कर्ट, शॉर्ट स्कर्ट. पर बहुत सी लड़कियाँ ऐसी थी जो छोटी छोटी निकर पहन कर आई थी, अमीरी के नाम पर सिर्फ नंगापन, क्या इनके साथ आने वाले लड़कों को गर्मी नहीं लग रही थी जो जीन्स पहन कर आए थे और ये निकर पहन कर दिखा रही थी कि उनको गर्मी ज़्यादा लगती है, या फिर उनमें गर्मी ज़्यादा है.

गोरी, चिकनी जांघें, कोई मोटी, कोई पतली, गोरी, चिकनी बाहें, कोई गदराई, कोई सूखी सूखी. हर तरह की आइटम वहाँ आ रही थी. मगर हम दोनों बाहर बैठे दूर से उनको देख रहे थे.

रात के करीब 11 बज गए थे, इस वक़्त तक हमें एक भी ऐसी लड़की नहीं देखी जो नशे में धुत्त अकेली बाहर निकली हो. एक घंटा और बीत गया, लड़के लड़कियाँ अंदर आते जाते रहे, बहुत से लड़के लड़कियाँ ऐसे थे, जो नशे में धुत्त थे, मगर सब बड़ी ज़िम्मेदारी से अपने दोस्तो को संभाल कर ले जा रहे थे.

मैंने सुमित से पूछा- यार कोई मिलेगी भी या नहीं?
वो बोला- अरे सब्र कर, यहाँ तो हर रोज़ मौके मिलते हैं, थोड़ा और इंतज़ार करते हैं.

हम देखते रहे.

थोड़ी देर बाद एक लड़का लड़की बाहर निकले, दोनों नशे में थे और आपस में झगड़ भी रहे थे.
सुमित बोला- इनको देखो, साली इतनी सुंदर लड़की है और ये चूतिया इस सुंदर लड़की से लड़ रहा है. भैणचोद इसे कमरे ले जा कर चोद, इससे लड़ मत, भोंसड़ी मार इसकी!
मैंने कहा- क्या हुआ सुमित, बहुत एकसाईटेड हो रहा है?
वो बोला- अरे यार, इतनी सुंदर लड़कियाँ लड़ने के लिए थोड़े ही होती हैं.

लड़की को शायद ज़्यादा चढ़ गई थी, वो लड़खड़ा रही थी और इसी वजह से वो लड़का उस लड़की को डांट रहा था. सफ़ेद शॉर्ट स्कर्ट और रेड टाइट टी शर्ट में वो लड़की बहुत ही हॉट लग रही थी.

इतने में अंदर से एक और लड़की आई और उस लड़के को खींच एक वापिस अंदर ले गई. इतने में जो लड़की बाहर रह गई थी, वो कार पार्किंग की तरफ जाने लगी मगर रास्ते में ही उसे उल्टी आ गई.
सुमित बोला- चल उठ, उसे मदद की ज़रूरत है.

हम उस लड़की के पास पहुंचे, सुमित ने उस से पूछा- यू नीड हेल्प, मिस?
उसने सुमित की तरफ देखा और बोली- हू द फक आर यू?
मगर सुमित बोला- मैं नीरज का दोस्त हूँ.

शायद वो समझ ही नहीं पाई कि ये नीरज कौन है. सुमित ने उसे अपनी कार में से पानी की बोतल निकाल कर दी. लड़की ने उससे अपना मुँह धोया, और सुमित के रुमाल से ही अपना मुँह साफ किया.
सुमित ने पूछा- तुम्हें घर छोड़ दूँ?
वो लड़की बोली- तुम मेरा घर जानते हो?
सुमित ने कहा- तुम बता देना, मैं छोड़ दूँगा.
और मेरी तरफ देखा और मुझे आँख मार कर बोला- जा गाड़ी निकाल कर ला जल्दी!

मैं झट से भाग कर गया और सुमित वाली कार लेकर आया. सुमित ने उस लड़की को कर में बैठाया, थोड़ा आगे गए तो उसने एक दारू की दुकान के पास गाड़ी रुकवाई और बाहर चला गया.
मैंने देखा लड़की पीछे वाली सीट पर गिरी पड़ी थी, आँखें बंद… मुझे लगा अकेली लड़की, बेसुध, मैंने मौका देख कर पीछे को हाथ बढ़ाया और उसका एक बूब दबाया, नर्म, मुलायम बोबा.

लड़की हल्का सा जागी और ‘ऊं… हटो’ बोली मगर उसने अपनी आँखें नहीं खोली.

मैंने सुमित के आने से पहले ही उसकी जांघों को भी सहला कर देखा. कितनी मुलायम टांगे थी उसकी. स्कर्ट से दिख रही उसकी टाँगें मुझे बहका रही थी. मैंने उससे पूछा- तुम्हारा नाम क्या है?
वो बोली- कीकू.
मैंने कहा- कीकू, तुम्हारी चूत गुलाबी है क्या?
उसने कोई जवाब नहीं दिया.

इतने में सुमित आ गया, उसके हाथ में एक दारू का पव्वा और एक कोक की बोतल थी. कोक की बोतल में एक दारू का पेग डाल कर उस लड़की को दिया- ये पी लो, पेट ठीक हो जाएगा.
लड़की ने दो तीन बड़े बड़े घूंट भरे.
मैंने पूछा- ये क्या था?
वो बोला- इसको सेट करने के लिए!
मैंने गाड़ी आगे बढ़ा दी.

कुछ देर हम वैसे ही इधर उधर गाड़ी घुमाते रहे. फिर हम एक पार्क के पास गए और अपनी गाड़ी अंधेरे से कोने में पार्क की. सुमित ने मुझसे पूछा- क्या कहता है, शुरू करें?
मैं पीछे को देखने लगा, सुमित गाड़ी से उतरा और पीछे जा कर कीकू के पास बैठ गया. मैं उन दोनों को देखने लगा. कीकू बेशक नशे में थी, मगर बेहोश नहीं थी, वो सब देख, समझ रही थी.

जब सुमित उसके पास जाकर बैठा और उसके नंगे घुटने पर हाथ रख कर बोला- देखो बेबी, तुम भी जानती हो कि हम न तो तुम्हारे भाई हैं, न दोस्त हैं, न बॉय फ्रेंड हैं. हम रूप नगर के चीते है और शिकार पर ही जीते हैं, और तुम हो हमारा शिकार. सीधी बात यह है कि हमारा प्रोग्राम तुम्हारी चूत मारने का है. न तुम हमें जानती हो, न हम तुम्हें जानते हैं. अब मर्ज़ी तुम्हारी है.

कीकू बोली- इतनी अंजान भी नहीं हूँ, और इतनी बेसुध भी नहीं हूँ. मुझे पता है, तुम मेरी इस नशीली हालत का फायदा उठाना चाहते हो. मेरे साथ भी ये पहली बार नहीं हो रहा है. मुझे पता है, नशे में धुत्त लड़की हर एक के लिए मौका होती है.
सुमित बोला- अरे वाह, तुम तो बहुत समझदार हो, क्या संभाल लोगी हम दोनों को?
कीकू बोली- जिस दिन मेरे साथ पहली बार हुआ था, उस दिन 5 लड़के थे, जिन्होंने मुझे शराब पिला कर बेसुध कर दिया, और फिर बारी बारी मेरे साथ सेक्स किया. तुम दो तो कोई बड़ी बात नहीं हो.

सुमित ने खुश होकर कीकू के गाल पर चूम लिया और अपनी पेंट और चड्डी उतारने लगा, झटपट वो बिल्कुल नंगा हो गया, उसका तना हुआ लंड हवा में लहरा रहा था. उसने कीकू की स्कर्ट में हाथ डाल कर उसकी चड्डी उतार दी और मेरी तरफ फेंकी, मैंने वो चड्डी कैच की और अपने मुँह के पास ले जा कर सूंघी. साली की चड्डी में से भी खुशबू आ रही थी. मैंने भी अपनी पैन्ट और चड्डी उतार दी और कीकू की चड्डी को अपने लंड पे लपेट लिया.

सुमित ने कीकू की टीशर्ट ऊपर उठाई, नीचे उसने ब्रा पहनी थी, वो फ्रंट ओपन था. कीकू ने खुद ही उसका हुक खोल दिया और उसके दोनों गुलाबी बोबे आज़ाद हो गए. सुमित ने उसके दोनों बोबे पकड़ कर दबा दिये और एक निपल को मुँह में लेकर चूसने लगा.
मैंने भी अपना हाथ आगे बढ़ा कर कीकू के नर्म बदन को सहलाया. कीकू आराम से लेटी रही, उसने अपनी आँखें बंद कर ली, पता नहीं वो सो गई, या मज़ा ले रही थी, या क्या था, पता नहीं, मगर वो बिलकुल शांत लेटी रही.

थोड़ा देर उसके बोबे चूसने के बाद सुमित ने कीकू की स्कर्ट ऊपर उठाई और नीचे से उसकी गोरी टाँगे सामने आई. बेशक बहुत अंधेरा था, मगर फिर भी थोड़ा बहुत दिख रहा था. सुमित ने उसकी टाँगें पकड़ कर खींची और उसको अपने नीचे सेट करके उसकी चूत पर अपना लंड सेट किया और फिर सुमित ने अपनी कमर हिलाई और ‘आह, मज़ा आ गया यार’ कहा.

मैंने पूछा- क्या हुआ भाई?
सुमित बोला- यार क्या मस्त चूत है साली की, नर्म, गरम, गीली और टाईट. बहुत ही पर्फेक्ट चूत है. ये अमीरज़ादियाँ पता नहीं क्या खाती हैं, जो इनकी चूत इतनी मस्त होती है.

मैं अंधेरे में आँखें फाड़ फाड़ कर सुमित को कीकू की चुदाई करते देखता रहा. सुमित ‘आह, आह, मज़ा आ गया, उम्म्ह… अहह… हय… याह… मादरचोद, साली बहुत मस्त है तू तो’ और न जाने क्या क्या बकता हुआ उसे चोदे जा रहा था.
मैं बैठ अपने लंड को सहला रहा था, और एक हाथ से कीकू के कभी बोबे तो कभी उसकी जांघ को सहला रहा था. मैं चाहता था कि सुमित जल्दी से फारिग हो ताकि मैं कीकू को चोदने का मज़ा ले सकूँ.

करीब 8-10 मिनट सुमित ने कीकू को चोदा, और फिर कीकू को माँ बहन की गालियाँ देता उसकी चूत में ही झड़ गया. फिर मुझसे बोला- चल बे आ जा, टिका के चूत मारना साली की!

उसने कार से बाहर निकल कर अपने कपड़े पहने और आगे ड्राइविंग सीट पर आ कर बैठ गया. मैंने कार का दरवाजा खोला और अंदर घुसा. बहुत हल्की सी रोशनी में भी कीकू का गोरा बदन चमक रहा था.
मैं उसकी टाँगें, पेट, बोबे चेहरा सब देख सकता था. मैंने कीकू को अपने हिसाब से सेट किया और अपना लंड उसकी चूत में डाला तो अंदर सुमित का माल भरा पड़ा था. बेशक मुझे बड़ा गंदा सा लगा, पहले ही चूत चिप चिप सी कर रही थी, मगर मुफ्त का माल था, तो नखरे करने का मतलब ही नहीं बनता था. बड़े आराम से मेरा लंड उसकी चूत में घुसा. मैंने उसके होंठ चूमने चाहे मगर उसके मुँह से गंदी बू मार रही थी, इसलिए मैंने उसके बोबे पकड़ कर ज़ोर से दबाये, मगर कीकू ने कोई दर्द महसूस नहीं किया, कुछ नहीं बोली.

इस से मेरे अंदर का जानवर और भड़क गया. मैंने बड़ी बेदर्दी से कीकू की चूत में लंड पेला. मगर चिप चिप बहुत हो रही थी. मैंने सुमित से कहा- सुमित, आगे इसकी चड्डी पड़ी होगी, देना ज़रा! उसने कीकू की चड्डी उठा कर मुझे दी- क्यों क्या हुआ? उसने पूछा.
मैंने कहा- यार तेरे माल की वजह से बहुत चिप चिप हो रही है. बहुत गीली चूत है इसकी, थोड़ा ड्राई करनी है.

मैंने चड्डी पकड़ी, अपना लंड उसकी चूत से निकाला, पहले अपना लंड साफ किया, फिर उसकी चूत. ऐसा मैं कई बार किया और मेरा लंड और उसकी चूत बिल्कुल ड्राई हो गई, तो मैंने फिर से अपना लंड थोड़ा थूक लगा कर उसकी चूत में डाला.
इस बार बहुत टाईट लंड उसकी चूत में गया, तो कीकू थोड़ा सा तड़पी- अरे धीरे से यार!
कह कर वो फिर चुप हो गई.

मैं थूक लगा कर उसको चोद रहा था. उसकी चूत ने कोई पानी नहीं छोड़ा, पता नहीं उसको मज़ा नहीं आ रहा था, या उसको पता ही नहीं था कि क्या हो रहा था. इसी वजह से वो खुश्क थी. मगर इस में कोई उस बेहद खूबसूरत लड़की को चोद कर मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.
6-7 मिनट में ही मेरा भी पानी गिर गया, मैंने भी उसकी चूत के अंदर ही अपना माल गिराया. गर्मी की वजह से मैं इतनी सी देर में ही पसीना पसीना हो रहा था.

जब हम दोनों ने उसे चोद लिया, तो सुमित ने उसे पूछा- अरे बताओ, तुम्हें कहाँ छोड़ें?
वो बोली- जहां से उठाया था, वहीं छोड़ दो, मेरे बहुत से दोस्त हैं, वहाँ!

हम वापिस गाड़ी चला कर वापिस उसी क्लब के पास ले गए, मगर गाड़ी से उतारने से पहले हमने उसकी ब्रा भी उतरवा ली. बिना ब्रा और बिना पेंटी के हमने उसे वहीं छोड़ कर वापिस अपने घर आ गए.
घर आकर हमने उसकी ब्रा और पेंटी सुमित की अलमारी में रख दी और सो गए.

सुबह उठ कर हमने अलमारी खोली और उसका ब्रा और पेंटी देखी, शायद कोई बाहर की कंपनी थी, मगर ब्रा और पेंटी दोनों ही बहुत ही सुंदर थे.
हम दोनों भाइयों में कभी कोई पर्दा नहीं था, रात की बात याद कर के हम दोनों उसकी ब्रा और पेंटी को सूंघते हुये मुट्ठ मारी और कीकू की ब्रा के एक एक कप में अपना अपना माल गिराया. जब
मैं अपने घर वापिस आया, तो मैंने सुमित से ब्रा या पेंटी में से एक चीज़ मांग ली.
सुमित ने मुझे कीकू की पेंटी दे दी.
उसके बाद कभी मुझे दोबारा ऐसा मौका तो नहीं मिला, मगर मैंने अक्सर कीकू की चड्डी पर मुट्ठ मारी है.

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