भाई की साली की चूत बरसात ने दिलवाई

(Bhai Ki Sali Ki Choot Barsat Ne dilwai)

प्रिय पाठको, मैं आपका दोस्त देवेन्द्र कुमार एक बार फिर अपने जीवन की सच्ची घटना लेकर आया हूँ।

आपने मेरी पहली हिन्दी सेक्स स्टोरी
चूतिये ने चूत फाड़ी
को बेहद पसंद किया, इसके लिए में आपको धन्यवाद देता हूँ।

दोस्तो, मैं अपने जीवन में डॉक्टर बनना चाहता था, इसके लिए मैंने कई वर्षों तक तैयारी भी की, इसी दौरान मुझे अक्सर कानपुर जाना पड़ता था, मेरे बड़े भाई वहां एक सरकारी विभाग में काम करते थे, उनकी ससुराल भी वहीं पर थी।

उनकी एक साली थी उसका नाम प्रिया (परिवर्तित) था, प्रिया देखने में सांवली, सुन्दर नैन नक्श और भरे बदन की मालकिन थी। वह भी परीक्षा की तैयारी किया करती थी और डॉक्टर बनना चाहती थी।
प्रिया मेरे मन में बसी हुई थी और मैं अक्सर उसे चोदने के सपने देखा करता था।

एक बार भगवन ने मेरी यह मुराद पूरी कर दी।

मैं पेपर देने की लिए अगस्त के माह में कानपुर गया था, प्रिया से मेरी अच्छी दोस्ती थी और वह मेरे साथ ही पेपर देने जाया करती थी। हम दोनों अक्सर मजाक में एक दूसरे को खूब छेड़ते थे, वो भी अक्सर मेरे बदन से लिपट कर मुझे गर्म कर देती और अचानक मुझसे अलग होकर हिरनी की तरह छिटककर भाग जाती थी।
उसकी यह अदा मुझे बहुत पसंद थी।

मुझे याद है उस दिन काफी बारिश हो रही थी, मैं और प्रिया दोनों भीगते हुए घर तक आये, देखा तो वहाँ पर ताला लगा हुआ था। चाबी नीचे मकान मालकिन के पास थी। पता चला कि सभी लोग प्रिया के एक चाचा के अचानक के बीमार पड़ने के कारण उन्हें देखने के लिए लखनऊ गए थे।

बारिश अधिक होने के कारण उनकी सुबह से पहले लौटने की कोई उम्मीद नहीं थी।
मैं मन ही मन में बहुत खुश हुआ कि शायद आज गीता की तरह मुझे प्रिया की भी चूत मारने मिल जाये।

रात नौ बजे तक हम दोनों ने खाना खा लिया और अपने अपने कमरों में चले गए। मैं बहुत थका हुआ था और मुझे लेटते ही नींद आ गयी।
रात मैं साढ़े बारह बजे करीब मैं पेशाब करने के लिए गया। जब मैं लौटा तो प्रिया के कमरे की लाइट जल रही थी।

मैंने उत्सुकतावश खिड़की से झांक कर देखा तो वो बेधड़क सो रही थी जैसे बहुत थकी हो!
जैसे ही मैं प्रिया के कमरे के अन्दर पहुँचा मेरा खून गर्म हो गया।
वह बेड पर सो रही थी और उसका गाउन गहरी नींद में होने के कारण जांघों तक उठा हुआ था।

मेरा लंड झटके खाने लगा, मैंने सोचा ट्राई करने में क्या हर्ज़ है।
मैं बेड पर उसके पास बैठ गया। उसकी सांवली रंग की गदराई हुई जांघें बहुत सेक्सी लग रही थी।

मैंने उसके गाउन को सरका कर कमर तक कर दिया, वह काले रंग की पेंटी पहने थी जो बहुत टाइट लग रही थी। मैंने उसकी पेंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाना शुरू कर दिया।

एक मिनट बाद ही उसकी पेंटी गीली होने लगी।
मैं समझ गया कि वह सोने का नाटक कर रही है और लेटकर मज़ा ले रही है।

मैंने धीरे धीरे नीचे खिसका कर उसकी पेंटी उतार दी। उसने अपना शरीर ढीला छोड़ दिया था।

क्या गजब की गुलाबी चूत थी उसकी… जिस पर छोटे छोटे बाल थे। मैंने उसकी चूत को सहलाना शुरू किया तो उसने अपनी टाँगें फैला दी।
मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया।

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