बहन की सहेली की चुदाई- एक भाई की कश्मकश…-5

(Behan Ki Saheli Ki Chudayi- Ek Bhai Ki Kashmkash- Part 5)

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मेरी रोमांटिक स्टोरी के पिछले भाग में आपने पढ़ा कि मेरी बहन की सहेली काजल ने मुझे इतना कामोत्तेजित कर दिया कि मैंने अपने लंड को बुरी तरह से रगड़ डाला. फिर मेरी बड़ी बहन सुमिना ने मुझे काजल को उसके घर तक छोड़ने के लिए कहा क्योंकि उस दिन काजल देर तक हमारे घर पर ही रुकी हुई थी. रात बस होने ही वाली थी और सुमिना को लग रहा था कि इस समय काजल का अकेले जाना ठीक नहीं है।
अब आगे:

काजल मेरे साथ गाड़ी में बैठी हुई थी। पहले मैंने सुमिना के कपड़े ड्राइक्लीनर की दुकान पर दिये और फिर मैं काजल से उसके घर का पता पूछने लगा. उसने अपने घर का पता बताया तो और फिर हम दोनों में बातों का दौर शुरू हो गया.

अब मेरे अंदर काजल के लिए प्यार और वासना दोनों का मिला-जुला भाव उमड़ रहा था. मैं काजल से आज की घटना के बारे में बात करना चाह रहा था लेकिन शुरूआत कहां से करूं इस असमंजस में फंसा था. मैं जानता था कि काजल भी मेरी तरफ उतनी ही आकर्षित है जितना कि मैं उसकी तरफ हूँ लेकिन पता नहीं क्यों हम दोनों के बीच खुल कर कुछ बात हो नहीं पा रही थी इस बारे में।

फिर मैंने ही हिम्मत करके मैंने कुछ बात छेड़ दी, मैंने कहा- आपकी लाइफ में भी मेरी तरह कोई नहीं है क्या?
वो बोली- क्या मतलब?
मैंने कहा- मतलब, जैसे मैं अभी सिंगल हूँ, आपकी जिंदगी में भी कोई नहीं है क्या?
वो बोली- ये तो बहुत पर्सनल सवाल है। मगर आप ऐसा क्यों पूछ रहे हैं?
मैंने कहा- बस ऐसे ही, आज मॉल से आते वक्त गाड़ी में जो हुआ?

मेरी बात पूरी होने से पहले ही उसने मेरी बात को काटते हुए कहा- क्या हुआ आज गाड़ी में?
मैंने कहा- वो … आप … आपका … हाथ …
उसने अचानक से फिर मेरी जांघ पर हाथ रख दिया.

मैंने उसकी तरफ देखा तो वो मेरे चेहरे को देख रही थी. मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी कि काजल इतनी जल्दी आगे बढ़ जायेगी. उसकी आंखों में मुझे मेरे लिए एक प्यास सी दिखाई दी. जैसे वो मेरे करीब आना चाहती हो।
मेरा लंड तुरंत मेरी लोअर में खड़ा होकर पूरे तनाव में आ गया. अब जब हम दोनों गाड़ी में अकेले थे तो लंड में जोश भी दोगुना था मगर लंड मुट्ठ मारने के बाद दुख रहा था.

मैंने कहा- काजल सच बताना, आपको मैं पसंद हूं क्या?
वो बोली- अगर पसंद नहीं होते तो क्या मैं ऐसा करती … उसने मेरे लंड पर हाथ फेरते हुए कहा.

मेरे मन में लड्डू से फूट पड़े। जिसको मैं पटाने की कोशिश कर रहा था वो तो पहले से ही पटी हुई थी.
मैंने कहा- कोई देख लेगा, यहां रोड पर …
वो बोली- प्यार भी करते हो और डरते भी हो?

मैंने कहा- कहीं और चलें?
वो बोली- कहाँ?
मैंने कहा- जहां मैं कुछ पल तुम्हारे साथ अकेले में बिता सकूँ!

मैंने दिमाग दौड़ाया. किसी ऐसी जगह के बारे में सोचने लगा जहां पर मैं काजल को ले जाकर उसको चूस सकूँ. फिर मुझे ध्यान आया कि बगल में ही हाइवे के पास एक खाली मैदान है जहां पर लोग अक्सर गाड़ी चलाने की प्रैक्टिस करने के लिए आते रहते हैं. उससे अच्छी जगह काजल को चूसने की और हो ही नहीं सकती थी. गाड़ी में किसी को शक भी नहीं होने वाला था.

मैंने गाड़ी को हाइवे की तरफ मोड़ दिया. हाइवे के पास पहुंच कर एक कच्चा रास्ता हाइवे की तलहटी की ओर जा रहा था. मैं गाड़ी को उसी रास्ते पर ले गया. उस वक्त वहाँ पर दो-तीन गाड़ियां और चलती हुई दिखाई दे रही थीं. मैं जानता था कि वहाँ पर चलती हुई गाड़ियों में इस तरह चूसा-चुसाई के काम बहुत होते हैं. मैंने अपने दोस्तों से कई बार उस जगह के बारे में सुना हुआ था.

वहां पर जाकर मैंने गाड़ी की स्पीड धीमी कर दी. मेरा लंड तो पहले से ही तना हुआ था. अंधेरी सी जगह पर जाकर मैंने एक हाथ से स्टेयरिंग को संभाल लिया और दूसरे हाथ को काजल की गर्दन पर ले जाकर उसे अपनी तरफ खींच लिया.

हम दोनों एक-दूसरे के होंठों को चूसने लगे. आह्ह .. उम्म … कुछ ही पलों में चुदास की आग दोनों के अंदर भभकने लगी. मैंने उसके होंठों को चूसते हुए उसके चूचों को एक हाथ से ही छेड़ना, दबाना शुरू कर दिया. उसका हाथ मेरी लोअर में तने हुए लौड़े को पकड़ कर उसको दबा रहा था.

मैंने अपनी गांड को थोड़ी सी ऊपर उठाते हुए अपनी लोअर की इलास्टिक समेत फ्रेंची को भी खींच दिया. मेरी फ्रेंची और लोअर मेरे टट्टों के नीचे जा अटकी और लंड निकल कर बाहर आ गया. मैंने अपना लंड काजल के हाथ में दे दिया जिसे वो अपने हाथ में पकड़ कर उसकी मुट्ठ मारने लगी.

कल तक जिस लड़की के ख्यालों में जाकर मैं उसके नाम की मुट्ठ मार रहा था, आज उसका कोमल हाथ खुद ही मेरे लंड की मुट्ठ मार रहा था. जब मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ तो मैंन गाड़ी वहीं एक तरफ साइड में लगा दी.

मैंने काजल की सीट को नीचे कर दिया और उसे वहीं सीट पर लेटा दिया. उसके चूचों को जोर से दबाते हुए उसके होंठों को चूसने लगा. अब हम दोनों की लार की अदला-बदला हो रही थी. उसकी लार मेरे मुंह में आ रही थी और मैं अपनी लार उसके मुंह में छोड़ रहा था. मैंने उसके सूट को ऊपर उठाते हुए उसको निकालने की कोशिश की लेकिन सूट टाइट था इसलिए निकल नहीं सका और उसके चूचों के पास आकर फंस गया.

वो बोली- नहीं, अभी इतना सब करना ठीक नहीं है.
मैंने कहा- बस एक बार काजल, एक बार थोड़ा सा निकाल लो, प्लीज!

वो मना करने लगी तो मैंने उसके चूचों को फिर जोर से दबाना शुरू कर दिया. उसकी गर्दन पर किस करने लगा. उसके कानों को चूसने-काटने लगा. मैं उसे पूरी तरह गर्म कर देना चाहता था ताकि वो खुद ही कपड़े उतारने पर मजबूर हो जाये.

काजल के चूचों को दबाते हुए मैं उसके नंगे पेट पर किस करने लगा. उसकी नाभि के नीचे उसके सलवार के नाड़े के पास चूमने लगा. उसकी सलवार को खींचने लगा लेकिन वो बंधी हुई थी. वो मेरे हाथों को हटा रही थी. मैंने उसकी सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत को टटोलकर उस पर हाथ रख दिया और फिर से ऊपर जाकर उसके होंठों को चूसने लगा.

उसने मुझे बांहों में भर लिया और मुझे अपने जिस्म से चिपकाने लगी. मैंने हाथ को चूत से हटाया और मेरा लंड उसकी चूत पर सलवार के ऊपर से ही टकराने लगा.
मैंने उसके कमीज को जोर लगाकर खींचा तो उसकी ब्रा तक शर्ट ऊपर उठ गया. मैंने उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके चूचों को चाटना और चूसना चालू कर दिया. मेरा लंड उसकी चूत की तरफ धक्के देने लगा था. मैं उसको चोद देना चाहता था.

मैंने कहा- जान, बस एक बार उतार लो, प्लीज …

वो कमीज उतारने के लिए तैयार हो गई. जैसे ही उसने कमीज उतारा, मैं उसकी ब्रा पर टूट पड़ा और उसकी ब्रा के ऊपर से उसके चूचों को दबाते हुए उसके होंठों को काटने लगा. अब मैं खुद को रोक नहीं सकता था. मैंने उसकी ब्रा को ऊपर चढ़ा दिया और उसके चूचे नंगे हो गये.

अंधेरे में ज्यादा कुछ दिखाई तो नहीं दे रहा था लेकिन उसके चूचे बहुत मस्त लग रहे थे और बिल्कुल कसे हुए थे. मैंने उसकी एक चूची को मुंह में भर लिया और उसको पीने लगा. दूसरी चूची को अपने हाथ से दबाते हुए उसके निप्पल को कचोटने लगा.
उसके मुंह से आह्ह … स्स्स … की सिसकारी निकलने लगी.

फिर मैंने उसकी सलवार के नाड़े को खोज लिया और उसको खोलने लगा. एक बार तो उसने मुझे रोका लेकिन अब मैं रुकने वाला नहीं था. मैंने उसके हाथों को हटाया और उसके नाड़े को खोल कर उसको नीचे से नंगी कर दिया. उसकी पैंटी पर जीभ फिरा कर उसको चूमने लगा. उसकी चूत से कामरस की खुशबू आ रही थी. मुझे वो ज्यादा पसंद तो नहीं आई लेकिन सेक्स करने का ऐसा खुमार चढ़ा था कि पसंद-नापसंद के बारे में सोचने के लिए वक्त ही नहीं था.

मैंने उसकी पैंटी को नीचे खींचना चाहा तो उसने पैंटी को पकड़ लिया.
वो बोली- नहीं सुधीर, ये नहीं प्लीज …
“बस मेरी जान, बस एक बार देखने दो अपनी चूत को … एक किस करने के बाद वापस पहन लेना!”

फिर भी उसने पैंटी को पकड़े रखा लेकिन मेरे जोर के आगे उसका जोर नहीं चला और उसकी चूत नंगी हो गई. मैंने उसकी चूत को बुरी तरह से चाट डाला और उसके मुंह से सीत्कार फूट पड़े- आह्ह् … आआ …आह सुधीर … बस करो ना यार …

मगर अब मैं कहां रुकने वाला था. मैंने और जोर से उसकी चूत पर जीभ फेरी और उसके हाथ खुद ही मेरे बालों को सहलाने लगे.
दो मिनट तक उसकी चूत को चाटने के बाद मैंने अपने लंड को हाथ में पकड़ कर उसकी चूत पर सेट किया और उसके ऊपर लेट गया. यहां-वहां लंड को आजू-बाजू हिलाते हुए उसकी चूत में घुसाने की कोशिश करते हुए उसके चूचों को चूसता रहा और थोड़े ही प्रयास के बाद मेरे लंड ने उसकी चूत में प्रवेश करने का द्वार खोजते हुए अंदर एंट्री मार दी.

लंड गच्च से उसकी चिकनी हो चुकी चूत में उतरता चला गया. उसने कसमसाते हुए मुझे कस कर अपनी बांहों में जकड़ लिया.

तेजी के साथ मैं उसके होंठों को चूसते हुए उसकी चूत को चोदने लगा. गाड़ी की सीट चर्र… चर्र … ऊपर नीचे हो रही थी. मन कर रहा था उसकी चूत को फाड़ दूं. सेक्स का ऐसा जोश चढ़ा हुआ था कि पांच मिनट से कम समय में ही मेरा वीर्य छूटने को हो गया. मगर अभी मैं अपनी बहन की सहेली की चूत चुदाई के इस आनंद को खोना नहीं चाहता था इसलिए मैंने धक्के रोक दिये.

मैंने अब सिर्फ उसके होंठों को चूसना जारी रखा और मेरा लंड उसकी चूत में ही था. एक मिनट का विराम देने के बाद फिर से उसकी चूत की चुदाई चालू की. अबकी बार मन बना लिया कि अगर वीर्य निकलता है तो निकल जाने दे, लेकिन चुदाई का पूरा मजा लेना है.

मैंने तेजी से मजा लेते हुए उसकी चूत को फिर से चोदना शुरू कर दिया. स्स्स … आह्ह् … हम्म्म … ओह्ह … आआ आह्ह् … काजल के साथ पहली चुदाई थी इसलिए दो मिनट के भीतर ही मेरे लंड ने काजल की चूत में अपना लावा फेंकना शुरू कर दिया.

मेरी गति धीमी पड़ने लगी. पूरा वीर्य खाली होने के बाद मैं शांत होकर उस पर लेटा रहा. कुछ ही क्षण बाद वो मुझे उठाने लगी.
बोली- चलो अब … कोई आ जायेगा नहीं तो…

मैं उसके ऊपर से उठा और मैंने अपनी लोअर और फ्रेंची को ऊपर खींचते हुए पहन लिया. फिर उसने भी सूट को नीचे किया और गांड को उठाकर सलवार को फिर से बांधने लगी. मैंने गाड़ी स्टार्ट की और हम फिर से हाइवे की तरफ बाहर निकल आये.
मैंने कहा- सॉरी काजल … मैं कुछ ज्यादा ही जोश में आ गया था.

उसने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया. वो चुपचाप बैठी रही. फिर हम उसके घर की तरफ निकल गये. मैंने उसको घर के बाहर ड्रॉप कर दिया.

उस दिन के बाद वो दो दिन तक हमारे घर नहीं आई. मैंने सोचा कि शायद मैंने उसे चोदने की ज्यादा ही जल्दी कर दी. मुझे अपने किये पर थोड़ा पछतावा हो रहा था.

मगर फिर तीसरे दिन वो फिर से घर आ गई. मैंने मौका पाकर उसको सॉरी कहा और वो बोली- कोई बात नहीं।

फिर उसका आना हमारे घर पर बदस्तूर जारी रहा. सुमिना भी उसके घर चली जाया करती थी. इस बीच मैंने एक बार और उसकी चूत उसी जगह ले जाकर मारी. लेकिन उस दिन दोपहर का समय था. हमारे अलावा बस एक गाड़ी और वहां पर थी. इसलिए चुदाई में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई. मैंने उस दिन उसके नंगे बदन को अच्छी तरह देखा. उसी के फोन में अपनी और उसकी कुछ फोटोज भी निकाली ताकि उसको ये न लगे कि मैं उसकी नंगी तस्वीरों का कहीं पर दुरूपयोग कर लूंगा. अब हम दोनों खुल गये थे. मैं भी खुश रहने लगा था.

एक दिन मैं सुमिना के साथ दोपहर में कैरम खेल रहा था. तभी दरवाजे की बेल बजी। आशा (हमारी नौकरानी) ने दरवाजा खोला तो एक सुंदर सा नौजवान घर में दाखिल हुआ. उम्र करीबन 20-22 के आस-पास रही होगी उसकी. लगभग 6 फीट लम्बा और देखने में भी हैंडसम था. चेहरे पर काली घनी दाढ़ी थी जिसको उसने स्टाइल में मेंटेन किया हुआ था. मूछों के साथ जंच रहा था लौंडा।

उसने हम भाई-बहनों को साथ बैठे देख कर पूछा- काजल आपके घर आई है क्या?
मैंने सुमिना की तरफ देखा तो वो जैसे उत्साहित सी लगी और उठते हुए बोली- नहीं, मेरे पास तो नहीं आई है।
उसका सवाल सुमिना से ही था.

फिर वो बोला- वो घर पर भी नहीं है. मैंने सोचा कि आपके पास आई होगी.
सुमिना ने फिर कहा- नहीं, आज वो मेरे पास नहीं आई है अभी तक। आप बैठिये न, मैं आपके लिए चाय बनाती हूँ.
वो बोला- नहीं, फिर कभी पी लूंगा.
सुमिना बोली- अरे बैठो न कुणाल! चाय तो पीकर ही जाना.
सुमिना ने जबरदस्ती उसको वहां पर बैठा लिया.

मैंने उसको देखा और उसने मुझे. पता नहीं क्यों मुझे ऐसा लगा कि वो मुझे जैसे पहले से ही जानता हो और उसने मुझे देखा हुआ हो. उसके चेहरे पर किसी तरह के भाव नहीं थे. बस आराम से बैठा हुआ यहां-वहां घर को देख रहा था.
मैंने उसकी तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दिया. न ही उसने मुझसे बात करने में कुछ दिलचस्पी दिखाई. हम दोनों एक-दूसरे के लिए अजनबी थे.
इतने में ही सुमिना उसके लिए चाय बनाकर ले आई. उसने चाय उसे दी और वो बैठ कर पीने लगा.

मैं उठकर अपने कमरे में चला गया. मगर सुमिना के बर्ताव से मैं हैरान था. वो आशा को भी तो बोल सकती थी चाय बनाने के लिए? मगर वो तो उस मुच्छड़ को देख कर ऐसे खुश हो रही थी कि पता नहीं किसी सुपर स्टार को देख लिया हो उसने।

खैर, उसके जाने के बाद मैंने सुमिना से उसके बारे में पूछा तो उसने बताया कि ये काजल का भाई था कुणाल।
हॉट गर्ल की सेक्स कहानी अगले भाग में जारी रहेगी।

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