वो बरसात की हसीन शाम-1

(Wo Barsat Ki Haseen Sham- Part 1)

अन्तर्वासना के सभी पाठक पाठिकाओं को नमस्ते. मैं पहली बार अपनी स्टोरी यहां शेयर कर रहा हूं.

यह बात कुछ महीने पहले की है, मैंने और मेरे दो दोस्तों ने मिलकर हमारे मोहल्ले की एक लड़की के साथ खूब मस्ती की थी. उसी की ये कहानी है, बहुत बार हम कहानी पढ़ते हैं कि कोई लड़की, भाभी मिली, जो सेक्स के लिए तड़प रही हो और उसके साथ सेक्स किया, मगर हमारे जिंदगी में ऐसा नहीं होता. एक तो ऐसी लड़की मिलती नहीं, मिली तो सेक्स के लिए आसानी से तैयार होती नहीं और हमने कुछ करने की कोशिश की तो हंगामा अलग से होने का खतरा रहता है.

सच बताओ बहुत बार ऐसा ही होता है ना?

हम सिर्फ किसी की याद करके आहें भरेंगे और मुठ मारेंगे, शादीशुदा हो, या गर्लफ्रेंड होगी तो हमें जिसके साथ सेक्स करना है, उसे सोच कर उसके साथ सेक्स कर लो. मगर मेरी कहानी में हम जिस लड़की के लिए पागल थे, उसी को मना के बहला फुसला के सेक्स किया. पहले वो तैयार नहीं हुई, मगर हमने जैसे तैसे उसे राजी किया और मजे लिए.

इधर पहले मैं अपने बारे में बता दूँ, मेरा नाम राहुल है. मैं 36 साल का शादीशुदा बंदा हूँ.. पूना में रहता हूँ. दिखने में मैं गोराचिट्टा हूँ, बॉडी भी मस्त है.. मतलब हीरो नहीं, पर कम भी नहीं हूँ. हमारे घर से थोड़ी दूरी पे पायल नाम की एक कमसिन कली रहती थी, जिसकी आठ महीने पहले शादी हमारे यहां रहने वाले एक सोहेल नाम के एक मवाली किस्म के लड़ाके के साथ हुई थी, जो पायल ने घरवालों के खिलाफ जा के लव मैरेज की है. ये सोहेल इधर उधर के काम और गुंडागर्दी करता था. उसके घर में पायल और सोहेल दोनों ही रहते थे. सोहेल शादी के बाद एक प्रायवेट कंपनी में रिकवरी का काम करता था, इसीलिए उसे बाहर भी रहना पड़ता था

जब ये शादी हुई तो हम लोग यही सोचने लगे कि ये फूल जैसी नाजुक और सुंदर सेक्सी परी ने इस जंगली भैंसे में ऐसा क्या देखा? जो प्यार कर बैठी.

पायल के बारे में भी कुछ लिख दूँ, ताकि आपको भी उसकी सुन्दरता का भान हो जाए. पायल सिर्फ 22 साल की है और बहुत ही अमीर खानदान से है. दिखने में वो एकदम सुंदर और मादक है. उसकी साईज भी 38-28-36 की होगी. उसकी स्किन एकदम गोरी नाजुक और मुलायम थी. होंठ ऐसे नाजुक कि रगडूँगा तो शहद गिर जाएगा. पूरी स्किन पर एक भी दाग नहीं.. बिल्कुल अजंता की मूरत की तरह तराशा हुआ जिस्म था. वो कपड़े भी सेक्सी पहनती थी. उसके हिप और मम्मे देख के ही हमारा पानी निकल जाता था.

हम मोहल्ले के सब लोग उस पे लट्टू थे और उसे जी भर के चोदना चाहते थे, मगर उसका पति बहुत ही हरामी था इसलिए लाईन नहीं मार सकते थे. लेकिन पीने बैठने के वक्त, चाय पे ठेले पे उसी की बातें करते थे और घर में आकर मुठ मारते थे.

मोहल्ले की औरतों का भी ग्रुप बना हुआ था, इसलिए धीरे धीरे पायल भी उसी ग्रुप में आने लगी. वो किटी पार्टी वगैरह में जाने लगी, इसलिए उसका मेरे घर में भी आना जाना शुरू हो गया.

वो मुझे जीजू और मेरी पत्नी को दीदी बुलाती थी. धीरे धीरे वो मेरी बीवी से बहुत बातें करने लगी और उसकी बातों से ही हमें पता चला कि वो इस शादी से इतनी खुश नहीं है, उसका पति सोहेल सिर्फ हवस का पुजारी है. उसे सेक्स को छोड़ कर और कुछ नहीं दिखता. वो घर खर्च के लिए पैसे भी नहीं देता. इसी सब को लेकर उन दोनों में बहुत झगड़े भी शुरू हो गए थे. सोहेल रोज शराब के नशे में पायल पे वहशी दरिन्दे की तरह टूट पड़ता था और वो दर्द और डर से कांपती रहती थी. उसने मेरी बीवी को सोहेल के दांतों से काटने के निशान वगैरह भी दिखाये थे. सोहेल भी उस पर बहुत शक करने लगा था. सोहेल का बाहर भी चक्कर था और वो बाहर की लड़कियों को घर में ला के पायल के सामने चोदता था.. वगैरह वगैरह.

इतना सब होते हुए भी पायल का प्यार कम नहीं हुआ था. वो सोहेल को बेइंतहा प्यार करती थी और कोई पूछता. तो बोलती थी कि सोहेल कुछ भी करे. मैंने उससे प्यार किया है और मैं अपने प्यार से उसे बदल दूँगी.. अब यही मेरा नसीब है.

इसी लिए सभी औरतों ने मिलकर पायल को भी काम करने के लिए और खुद के पैरों पर खड़ा होने के लिए बहुत समझाया.

पर जब सोहेल नहीं माना, तो पायल ने घर से ही किराना सामान का बिजनेस शुरू किया. वो फोन पे हल्दी, मिर्ची, चीनी, मसाला वगैरह चीजों का ऑर्डर ले कर डिलीवरी दे देती थी. हम सभी लोग उससे ही सब सामान लेते थे. इसी बहाने उसे मदद भी हो जाती थी और उसका दीदार भी हो जाता था.

पर सोहेल ने हमारा मोहल्ला छोड़ के हमारे यहां से 3-4 किमी दूरी पर घर शिफ्ट कर लिया था. लेकिन पायल ने अपना बिजनेस नहीं छोड़ा था. वो ऑर्डर ले कर सभी जगह सामान पहुंचाती थी और मिले पैसों से घर चलाती थी.

अब उस हसीन रात की तरफ आता हूँ. उस दिन घने बादल छाये थे और जोर से बारिश का भी अंदाजा था. ऐसी वो मदहोश करने वाली शाम थी और हम मर्द अकेले थे. जैसे क्योंकि कुछ हुआ यूं मेरी हमारी मोहल्ले की औरतों ने आठ दिन का घूमने का प्लान बनाया था. ये सब ग्रुप बना कर प्रायवेट बस से निकलने वाली थीं. आठ दिन अपनी अपनी बीवियों से छुटकारा मिलेगा तो कौन पागल ना बोलेगा? सभी मर्द झट से मान गए.

उसी समय पे घर का सामान भी खत्म होने को आया था. मेरी बीवी को सामान मंगाने का ऑर्डर दिए चार दिन हो गए थे, लेकिन पायल आ नहीं सकी थी. तो जिस दिन औरतें निकलने वाली थीं, उसी दिन बीवी ने पायल को कहा कि आज सामान भेज दो.

पायल भी मान गयी और मेरी बीवी मुझे बोल कर चली गयी कि सामान लेकर रख देना. कामवाली बाई दूसरे दिन वो सब लगा देगी.

पूरे दिन पायल नहीं आयी तो शाम को मैंने मेरे जिगरी और कमीने दोस्तों को घर पे बुलाया और पीना शुरू कर दिया.

अब मैं मेरे दोस्तों का भी परिचय दे देता हूँ. एक था सुनील जो पुलिस में डीवाय एसपी है और दूसरा रशीद, जिसका स्क्रेप का बिजनेस है. हम बहुत जिगरी दोस्त हैं.

हमने शाम को मेरे घर पे पीना शुरू कर दिया. उसी समय बारिश भी जोर की शुरू हो गयी. हम बाल्कनी में ही मजा लेने बैठ गए और हंसी मजाक नॉनवेज जोक, अपनी बीवियों की बुराईयां करना, कुछ प्लान बनाना शुरू हुआ.. जैसे कि दोस्तों में अक्सर होता है.

जैसे ही दो दो पैग पूरे हुए और मजा आने लगा, तभी बीवी का फोन आ गया कि पायल थोड़ी देर बाद घर आ के सामान दे कर जाएगी, तुम सामान उतरवा लेना.

यह सुनते ही मेरी तो हवा निकल गयी, हम ऐसे इंटरनेशनल हालत में, कोई कच्छे में, कोई शॉर्ट में, मैं तौलिया लपेट के बैठा था, सभी ऊपर नंगे बदन ही बैठे थे. सभी सामान चखना बोतलें बिखरा हुआ था.
मालूम चला कि पायल आ रही है, ये बताते ही सब उछलने लगे. बोलने लगे कि साले राहुल तू रोज अकेले उसकी लेता है. तेरी वाईफ की वो फ्रेंड है आज हमें भी मौका दे.. जन्नत की सैर करेंगे.

उन दोनों ने पायल को ले कर गंदे जोक शुरू कर दिए और मैं भी उनकी मस्ती में शामिल हो गया. हम सभी पायल का इन्तजार करने लगे. बारिश इतनी तेज होने लगी थी कि सभी जगह पानी भर गया था और मुझे लगने लगा कि इतने तेज बारिश में पायल अब नहीं आएगी.

ये अभी सोच ही रहे थे कि उतने में डोरबेल बज गयी और पायल की आवाज आयी- जीजू, दरवाजा तो खोलो ना…
वो बेचारी इतनी बारिश में आयी थी, मैंने ऊपर कंधे पर दूसरा तौलिया डाल दिया और दरवाजा खोला तो बाहर पायल पूरी तरह से भीगी हुई खड़ी थी. वो पूरी तरह से भीग चुकी थी, उसके बालों में से कपड़ों में से पानी टपक रहा था. मेरे ख्याल से उसके ऊपर के कपड़े ही नहीं.. ब्रेसियर और चड्डी भी पूरी तरह से भीग गए होंगे.

वो ठंड से कांप रही थी. मगर दोस्तों … क्या माल लग रही थी, उसने गहरे लाल रंग की साड़ी पहनी थी, जो जिस्म पे चिपक कर ग़दर मचा रही थी. उसके ब्लाऊज में से उसके मम्मे ही नहीं, मम्मों के निप्पल्स भी उभर के दिख रहे थे. मैं तो उसे देखता ही रह गया.

तभी वो मुझे चिढ़ाने के अंदाज में बोली- क्या जीजू.. क्या चल रहा है.. दरवाजा खोलने में इतनी देर? दीदी नहीं तो दोस्तों की महफिल? बताऊं क्या दीदी को कि जीजू को सामान उठाने का भी होश नहीं था.
उसकी इस मस्ती पर मैं शरमा गया और हंस कर बाहर बंगले के पार्किंग में उसकी स्कूटर थी, जिस पर सामान की थैलियाँ रखी थीं, वो उठाने लगा. सभी जगह पे पानी भरा था.

मैं वो थैलियाँ अन्दर ले कर आया और पूछा- इतनी बारिश में आने की क्या जरूरत थी, सोहेल को भेज देती.
वो बोली- सोहेल आज ही टूर पे गया है, चार दिन बाद आएगा.
यह सुनकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे.

हम दोनों मिल कर सामान अन्दर लाने लगे. अन्दर का नजारा देख के वो हंसने लगी और मेरे कमीने दोस्त उसे हवस भरी नजरों से देखने लगे.
तो वो बोली- लाईये जीजू मैं सब सामान किचन में रख देती हूँ. आपका प्रोग्राम चलने दो, अगर कुछ चाहिये होगा, तो बना के दे दूँगी.
मैं बोला- अरे नहीं पायल, तू पहले बदन पौंछ ले… मैं तुझे तेरी दीदी के कपड़े दे देता हूं, तू पहले चेंज कर, चाहे बाथरूम जाके गर्म पानी से सेंक ले ले.. तब तक मैं गर्म कॉफी बना देता हूं.
मैंने मेरा बेडरूम खोल के बाथरूम की लाईट को चालू कर दिया.

इसके बाद मैंने मेरी बीवी का एक सेक्सी सफेद रंग का ओपन नेकवाला ड्रेस वॉर्डरोब से निकाल लिया, जिससे ब्रेस्ट उभर के दिखाई देते थे.. जो उतारने में भी आसान था, उसे पीछे सिर्फ एक नॉट थी.

उसे वो ड्रेस देते समय एकदम जोर से बिजली कड़की और लाईट चली गयी, वो एकदम से डर गयी और मुझे पकड़ लिया.
मैंने बोला- घबराओ नहीं, मैं अभी इनवर्टर शुरू कर देता हूँ.

मैं चला गया, वो बाथरूम में चली गयी. इनवर्टर से हमारे बंगले की लाईट शुरू हो गई. कुछ देर बाद वो बाहर आयी, तब उस ड्रेस में वो इतना पटाखा माल लग रही थी. उसकी ब्रा और निक्कर लाल रंग की थी और ड्रेस सफेद, उसकी पूरी फिगर दिख रही थी.

मैंने उसे गर्म कॉफी थमा दी और उसे थोड़ी देर रुक के बारिश रुकने का इंतजार करने को बोला. वो मान गयी और बाहर आके मेरे साथ बैठ गयी. तब तक मेरे दोस्तों का तीसरा पैग भी खत्म हो गया था.

पायल मुझे ड्रिंक कंटीन्यू करने के लिए बोली और कहा- मैं कुछ बना के दे दूँ क्या?
मैंने ना बोल के उसके लिए टीवी शुरू कर दिया और दोस्तों के साथ चालू हो गया.

इधर फिर से दोस्तों की टुन्नी में गंदी बातें शुरू हो गईं- अरे उसे पकोड़े कवाब वगैरह बनाने के लिए बोल ना. हमें पायल कवाब खाना है.

तभी टीवी पे बारिश की न्यूज दिखाने लगे, पूरे शहर में पानी भरा था और रास्ते बंद होने लगे थे और बिजली का भी प्रॉब्लम हुआ था. ये सुनते ही पायल ने न्यूज देखने के लिए मुझे अन्दर बुलाया.
मैं अन्दर आ गया. मेरे पीछे रशीद भी आ गया और पायल के पीछे खड़ा हो गया. दो मिनट में सुनील भी न्यूज के बहाने आ गया. हम सभी सिर्फ शॉर्ट में थे, रशीद तो जानवर जैसा ही दिखने में सांड था.
वो सब पायल के आस पास थे, लेकिन अब भी पायल को कुछ गलत नहीं लग रहा था. या शायद वो भी कुछ मजे लेने के मूड में आ गई थी.

तभी मेरे हाथ में खाली ग्लास देख के पायल बोली- लाओ जीजू, मैं आपका पैग बना देती हूं.
उसके पैग बनाए जाने के बाद देखा तो सभी के लौड़े तने हुए थे.

रशीद बोला- अबे राहुल कुछ भी जुगाड़ कर.. इसे पटा, इसपे टूट पड़ना है, कंट्रोल नहीं होता रे अब.

तभी वो आ गयी, मैंने मेरे दोस्तों का परिचय करवा दिया और वो सभी से हंस के बोलने लगी. उसने रशीद का भी पैग बनाया. हम सिर्फ मौके की तलाश में थे.

तभी रशीद बोला- पायल जी, पूरे शहर में पानी भर गया है, शहर की बिजली भी चली गयी है, अब आप घर कैसी जाओगी?
मैं बोला- पायल डोंट वरी … कुछ प्रॉब्लेम हो, तो यहीं रुक जा.. इतना बड़ा बंगला है. तू ऊपर के बेडरूम में सो जाना और कल उठ के चली जाना.
कुछ हाँ ना करते हुए वो मान गयी.

हमने सोचा मछली फंस गयी, सिर्फ अब पकाना बाकी है. मेरे दोस्तों ने उसकी तारीफ करना शुरू किया, वो भी हमारे पैग बनाने लगी.
सुनील ने उसे ड्रिंक ऑफर की लेकिन उसने ‘मैं नहीं पीती…’ बोल के टाल दिया.
सुनील बोला- जी.. आप खुद अपने आप में ही शराब हो, तो ऐसे शवाब को और शराब जरूरत ही क्या है?
ये सुनते ही पायल शरमा गयी और कहने लगी- क्या सर… कुछ भी बोलते हो.

बस हमारी बातें और रंग लाने लगीं. वो भी घुलमिल गई, तालियां देना, उसे छूना आदि भी शुरू हो गया.
वो पैग बनाने लगी. तभी रशीद ने पूछा- पायल, तुम्हारी उंगलियां ग्लास में डूबी थीं क्या?
वो बात समझी नहीं, तो बोली- नहीं.. पर क्यों?
रशीद बोला- अगर नहीं डूबी थीं, तो मेरा जाम इतना कड़क कैसे हो गया.. साला चढ़ने लगा.
तभी सुनील बोला- अरे वाह … उंगलियों में इतना नशा है.. अगर ग्लास को होंठों से लगा कर देती तो हम मर ही जाते. सिर्फ पायल जी हमारे ग्लास को अपने होंठों का जाम लगा कर दे दो प्लीज़. हमें भी आपकी खूबसूरती का नशा करने दो.
पायल बिंदास हंसने लगी.

तभी रशीद ने चैनल चेंज करके मूवी चैनल लगा दिया. एक सेक्सी मूवी चल रही थी, उसका हॉट सीन चल रहा था. यह देख कर और हमारी बातें सुन के पायल थोड़ी सहम गयी. लेकिन बाद में हमने उस सीन पे बोलना शुरू किया और नॉनवेज, डबल मीनिंग बोलना शुरू किया.

हम सभी पायल के बहुत ही करीब आ गए थे, पीछे से रशीद का तना हुआ लंड पायल के पीठ को टच करने लगा और सुनील उससे चिपक कर बैठ गया. वो कुछ समझ नहीं पा रही थी, तभी रशीद ने उसके बालों को सहलाते हुए उसके बालों की तारीफ करना शुरू किया और सुनील बदन की खुशबू लेने लगा.
यह देख के पायल डर गयी और बोली- जीजू, प्लीज रोको इन्हें.. ये क्या कर रहे हैं?
मैंने उसके कंधे जकड़ कर बोला- पायल डर मत.. आज हमारा साथ दो, हम जबरदस्ती नहीं करेंगे, प्यार करने दो … तुम्हें बिल्कुल तकलीफ नहीं देंगे.. फिर तेरी मर्जी.

मैंने उसके मम्मे पकड़ कर उसे कस के हग किया. तभी रशीद उसकी पीठ को चूमने लगा और मैंने गले को किस करना शुरू किया. न जाने क्यों मुझे लग रहा था कि भी यही सब चाहती है.
तभी सुनील ने उसे समझाया- हमें तो तुझे चोदना है.. तू भी एंजॉय कर न.
वो कहने लगी- सोहेल को पता चला तो वो मेरा बुरा हाल करेगा, दीदी को कैसे मुँह दिखाऊंगी.
मैं बोला- वो तू मुझ पे छोड़ दे.. हमें तीनों के अलावा किसी की खबर नहीं होगी.

मैं पायल के मन की बात समझ गया था कि साली चुदने को ही फिर रही है बस ड्रामा कर रही है.

इस चुदाई की कहानी का पूरा मजा आपको अगले भाग में मिलेगा. तब तक आप मुझे अपने मेल करके लिखिएगा कि आपको कैसा लगा.
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कहानी का अगला भाग: वो बरसात की हसीन शाम-2

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