बहू रानी की तड़पती चूत-1

(Bahu Rani Ki Tadapti Choot- Part 1)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

अब तक आपने
कमसिन स्नेहा की फड़कती चूत
में पढ़ा कि स्नेहा जैन ने मुझे भोपाल बुलाया जहां वो कमरा किराए पर लेकर पढ़ रही थी. वो मुझसे चुद कर मजा ले चुकी थी और अब अपने मकान मालिक की बहु को चुदाई का मजा दिलवाने की फिराक में है..

मैं स्नेहा के साथ उसका हाथ पकड़े सीढ़ियाँ उतर कर नीचे आया और हम दोनों रानी के बेडरूम में जा पहुंचे.
वो एक कुर्सी पर बैठी कोई पुस्तक के पन्ने पलट रही थी. मुझे देख कर उसने हाथ जोड़ कर नमस्कार किया और मुझे सोफे पर बैठने को कहा.
मैं नमस्ते का जवाब देते हुए सोफे पर बैठ गया.

उसके बेडरूम में धार्मिक फोटो और संत मुनियों के चित्र लगे थे. कोई ऐसी सजावट इत्यादि नहीं दिखी जो वहाँ रहने वालों की रसिकता का परिचय देती. इसके पति से ऐसी कोई उम्मीद भी नहीं थी.
फिर मैंने रानी की ओर देखा.
जैसा कि स्नेहा ने उसके हुस्न के बारे में बताया था वो उससे बढ़ कर निकली. कोई साढ़े पांच फुट कद, गोरी गुलाबी रंगत, चित्ताकर्षक नयन नख्श, चेहरे पर सौम्य मुस्कान और हंसती हुई आँखें… भरा भरा निचला होंठ जिससे रस जैसे टपकने को ही था, उमर कोई ख़ास नहीं, तेईस चौबीस साल की ही लगी मुझे वो…
कॉटन की महरून कलर की साड़ी बांध रखी थी उसने जिसमें से उसके सीने के उभार छुपाये नहीं छुप रहे थे. उसके मम्मे इतने बड़े भी नहीं लगते थे कि भद्दे दिखें. ’34c’ मैंने मन ही मन उसकी ब्रा के साइज़ का अंदाज़ लगाया.

सिर से पांव तक सोने के आभूषणों से सजी थी रानी… गले में, कानों में, हाथों में; कमर में भी सोने कि करधनी और पांव में सोने की पायलें.
किसी को सोने की पायल पहने हुए पहली बार ही देख रहा था. उसके गोरे गोरे मुलायम पैरों में वो सोने कि पायलें बहुत ही जच रहीं थीं.
कुल मिला कर अप्सरा सा रूप लिए कमनीय काया की वो स्वामिनी किसी कुलीन कुल की विदुषी नारी ही लगती थी. उसे देख कर कोई अंदाज भी नहीं लगा सकता था कि ये स्त्री लंड की प्यासी अपनी चुदास से त्रस्त रहती होगी.

इस तरह कोई दो मिनट तक मैंने उसकी रूपराशि को निहारा. ऐसी मदमाती मस्त जवानी को चोदने के ख्याल से ही मेरे लंड में तनाव भरने लगा. वो मेरी ओर रह रह कर देखती और फिर नज़रें झुका लेती. शायद मेरे इस तरह नज़र गड़ा कर देखने से वो अन इजी फील करने लगी थी.

‘आप लोग बैठो मैं चाय बनाती हूँ!’ वो बोली और उठने लगी.
‘रहने दो भाभी… चाय पानी के चक्कर में टाइम ख़राब मत करो; आप लोग तो जल्दी से चुदाई का चक्कर चलाओ अब. देखो साढ़े छह तो हो ही गए हैं. हम लोगों के पास सिर्फ डेढ़ दो घंटा ही बचा है. मैं तो बाहर दरवाजे के पास जाकर बैठूंगी. आप लोग अपना मिलन शुरू करो!’ स्नेहा बोली और रानी का हाथ पकड़ कर उसे खड़ा कर लिया और मेरे पास लाकर उसका हाथ मेरे हाथ में दे दिया.

‘ये लो अंकल जी मेरी प्यारी भाभी… ज्यादा मत सताना इसे… और भाभी तुम भी ज्यादा मत शरमाना, ऐसा मौका ज़िन्दगी में फिर मिले न मिले इसलिये एक एक पल की कीमत समझो और बेझिझक खूब एन्जॉय करो. ध्यान रखना कि टाइम कम है और काम ज्यादा करना है. ओके… मैं बाहर ही रहूँगी अगर कोई खतरा दिखा तो मैं सावधान कर दूंगी!’ ऐसे कहते हुए स्नेहा ने रानी को मेरे हवाले किया और बाहर निकल गई.

मैंने भी दरवाजे को यूं ही भिड़ा दिया अन्दर से कुण्डी नहीं लगाई और रानी के साथ बेड पर बैठ गया.
वो सकुचाती सिमटी हुई सी मेरे पास बैठ गई. मैंने उसके गले में हाथ डाल उसे अपनी ओर खींचा उसका गाल चूमते हुए उससे हल्की फुल्की बातें करने लगा जैसे घर में कौन कौन है, एजुकेशन क्या है. इन जनरल बातों से वो भी थोड़ी सी सामान्य हुई और मेरे और निकट खिसक आई. वो अभी अभी नहा कर आई थी अतः उसके बदन की ताजगी, नमी और भीनी भीनी सुगंध मुझे उतावला करने लगी.

मैंने उसकी गर्दन को चूमते हुए उसके ब्लाउज के हुक खोल दिये. उसने हल्का सा प्रतिरोध किया, लेकिन मैंने उसे समझाया कि अपने पास समय कम है सब कुछ जल्दी जल्दी ही करना है.
फिर उसने खुद ही अपना ब्लाउज खोल दिया मैंने उसे उसके बदन से अलग किया और फिर उसकी ब्रा को भी उससे जुदा कर दिया.
दो भरे भरे अमृत कलश मेरे सामने थे, एल ई डी बल्ब की तेज रोशनी में उसके मम्में दमक उठे. मम्मों के ऊपर जैसे भूरे रंग के अंगूर चिपके हुए थे.

मैंने देर न करते हुए उन्हें चूसना शुरू कर दिया और दबाना मसलना शुरू कर दिया. ऐसे करने से रानी की आँखें नशीली हो चलीं और वो बिस्तर पर पैर फैला कर लेट गई. मैंने भी अपनी शर्ट उतार फेंकी और अपने नंगे सीने से उसके बूब्स दबा कर उसे अपने बाहुपाश में जकड़ लिया और उसका निचला होंठ चूसने लगा.

रानी भी अपनी बाहें मेरे गले में पहना कर मेरे चुम्बन का जवाब देने लगी. हमारी जीभ आपस में टकराती और गजब की सनसनी जिस्म में दौड़ जाती.
रानी की सोने की चूड़ियाँ आपस में टकरा के खनक बिखेर रहीं थीं.
उसने कब अपनी जीभ मेरे मुंह में धकेल दी, पता ही नहीं चला, मैं उसे चूसता रहा और फिर दोनों बूब्स दबाता मसलता रहा.

रानी भी मेरी पीठ सहलाये जा रही थी, कभी कभी अपने नाखून भी गड़ा देती और मुझे कसकर भींच लेती. उसकी कजरारी आँखों में अब वासना के गुलाबी डोरे तैरने लगे थे.
अचानक उसने अपना मुंह खोल दिया ‘आ’…मैंने भी उसका इशारा समझ के अपना मुंह उसके मुंह के ऊपर खोल दिया. लार का पतला सा तार मेरे मुंह से निकला और उसके मुंह में समाने लगा.

फिर मैंने उसे बाहों में बांध के करवट ली और वो मेरे ऊपर आ गई और अपना मुंह खोल दिया इस तरह उसका मुखरस मेरे मुंह में अमृत की बूंदों की तरह गिरने लगा और फिर हमारे होंठ फिर से जुड़ गए.

उफ्फ… कितना अपनापन, कितनी गर्माहट थी उसके चुम्बन में… मेरा बस चलता तो मैं सारी रात यूं ही चूमने चाटने और अधर चुम्बन में गुजार देता!
लेकिन समय की बंदिश थी, एक एक पल कीमती था, अतः मैं उसके ऊपर से थोड़ा उठा और उसका पेट नाभि चूमते हुये उसकी साड़ी निकाल दी और पेटीकोट के ऊपर से ही उसकी जांघें सहलाने लगा. चिकनी गुदाज जंघाओं का वो उष्ण स्पर्श पाकर मेरी उंगलियाँ उसकी चूत की तरफ बढ़ चलीं और मैंने उसकी चूत को पेटीकोट के ऊपर से ही मुट्ठी में भर लिया, लगा कि जैसे नीचे पेटीकोट के अलावा अन्य कोई आवरण चूत के ऊपर नहीं था और चूत मध्य रेखा में अपनी तर्जनी उंगली फिराई जिससे चूत का चीरा दिखने लगा और चूत का गीलापन झलकने लगा.

मैंने बरबस ही अपना मुंह वहाँ रख दिया और पेटीकोट के ऊपर से ही चाटने लगा.
धीरे से पूरी चूत मुंह में ले के दांतों से पकड़ कर हिलाने लगा.

रानी कसमसाई और उसने पेटीकोट का नाड़ा खोल कर ढीला किया और अपनी कमर उठा कर पेटीकोट अपने नीचे से निकाल दिया. मैंने भी देर न करते हुए पेटीकोट निकाल के फर्श पर फेंक दिया. रानी का अनावृत, नग्न जिस्म मेरे सामने था.
सांचे में ढला हुआ बदन, गोरा गुलाबी रंग जैसे दूध में केसर घोल दी हो! वासना की अगन में जलती हुई नवयौवना का मादरजात नंगा बेदाग़ जिस्म मुझे जैसे चीख चीख कर पुकार रहा था कि आओ और रौंद डालो मुझे…

उसके दोनों पुष्ट स्तन भी अभिमान से जैसे सिर उठाये मुझे चुनौती देने के अंदाज़ में तने हुए थे. उसकी कमर में दमकती सोने की करधनी जिसकी कई लड़ियाँ उसकी चूत के ऊपर तक आ रहीं थीं, उनके नीचे उसकी चकाचक फक्क गोरी बिना झांटों वाली चूत!

गुलाबी गोरी गदराई जाँघों के बीच वो सुन्दर सी चूत देख कर दिल खुश हो गया, ज्यादातर भारतीय लड़कियों की चूत श्यामलता लिए हुए सांवली सी होती है परन्तु रानी की चूत और उसकी जाँघों की स्किन एक ही रंगत की थी जिसे देख के चित्त प्रसन्न हो गया.
चूत का चीरा, आकार भी सामान्य से बड़ा था जो उसके डील डौल के अनुसार ही मनोरम था. मैंने उसकी ओर मुग्ध भाव से देखा, वो मेरी ही तरफ देख रही थी, मेरी आँखों में प्रशंसा का भाव पढ़ कर वो धीमे से मुस्कुराई.

‘ऐसे क्या देख रहे हो अंकल?’
‘तुम्हारा निश्छल सौन्दर्य निहार रहा हूँ रानी. कितनी प्यारी योनि है तुम्हारी किसी कुंवारी बालिका की तरह मासूम सी!’
‘आपके लिये ही चिकनी की है अंकल जी. और ये योनि व्योनि जैसे वजनदार शब्द मुझे इस टाइम अच्छे नहीं लगते अंकल जी, आज पहली बार मैंने अपनी चूत क्लीन शेव की हैं. पहले जब ये बाल ज्यादा लम्बे हो जाते थे तो इन्हें कैंची से कुतर देती थी. मैंने अपनी सुहागरात को भी चूत चिकनी नहीं की थी क्योंकि मेरी शादी मेरी मर्जी के खिलाफ इस बदसूरत से आदमी से हुई थी. मेरे पापा गरीब हैं न, दहेज़ तो दे नहीं सकते थे… खैर जाने दो इन बातों को!’

रानी के मुंह से चूत शब्द सुनकर मुझे आनन्द आ गया. रानी बिंदास स्वभाव की है ‘ये तो मस्त होकर चुदवायेगी’ मुझे लगा.

‘अंकल जी अब देखने में समय न गंवाओ. मुझे भोगो, चोदो जल्दी से. और कोई समय होता तो मैं शरमाती, लाज की गठरी बन जाती; आपको कहीं भी हाथ न लगाने देती आसानी से लेकिन आज इन सब बातों का समय नहीं है. कितने तरसने के बाद आज ये पल आये हैं मेरे जीवन में!’

‘अंकल जी… समय कम है मैं इस एक घंटे में सारा जीवन जी लेना चाहती हूँ. जो भी मेरे मन में रहता है मुझे बेचैन किये रहता है उसे मैं अभी पा लेना चाहती हूँ, भोग लेना चाहती हूँ… बस जैसे मैं चाहूँ, जैसे कहूँ आप बस वैसे ही चोदना मुझे. मैं शादी शुदा होकर भी कुंवारी जैसी ही हूँ और आपकी स्नेहा से भी कम चुदी हूँ. मुझे चूत लंड चुदाई शब्द खूब अच्छे लगते हैं इसलिए आप तो खुल कर खेलो मेरे साथ, मुझे कुछ भी बोलो! मैंने सारे शब्द बिना लाज शर्म के मुंह से निकाल दिये ताकि आपकी झिझक भी ख़त्म हो जाए और हम चुदाई का भरपूर मज़ा ले सकें.’

‘और अंकल जी, मेरी तमन्ना है कि मेरा पुरुष मुझे तरह तरह से चोदे, जैसे मैं चाहूँ वैसे मुझे रगड़ रगड़ कर रगड़े, मेरी प्यासी चूत को फाड़ के रख दे. मेरे ये सपने मेरा नाकारा पति तो पूरे नहीं कर सकता. आपसे उम्मीद है इसलिए आज मैंने सिर्फ आपके लिए अपनी चूत को आज पहली बार क्लीन शेव्ड किया है; यह मेरा उपहार है आपके लिए इसे स्वीकार करो!’ रानी कातर स्वर में बोली और उसकी आँखें नम हो गईं.

उसकी बातें सुनकर मेरा प्यार भी उस पर उमड़ आया और मैंने उसे हृदय से लगा लिया और उसके मस्तक को प्रेम से चूम लिया.
फिर उसके पैर ऊपर उठा के मोड़ दिये. पैर ऊपर मोड़ने से उसकी सोने की पायलें खिसक कर पिंडली में फंस गईं. जैसे ही मैंने रानी की टाँगें ऊपर कीं, उसने भी तुरंत अपनी चूत अपने हाथों से खोल दी.
मैंने प्यार से बहु रानी की चिकनी चूत को चूमा और खुली हुई चूत में जीभ रख दी. जीभ का स्पर्श चूत में पाते ही रानी के मुंह से कामुक कराह निकली- आह, प्यारे अंकल… आज पहली बार किसी मर्द की जीभ ने मेरी चूत को छुआ है. मेरी हमेशा से तमन्ना थी कि कोई पुरुष मेरी चूत भी चाटे!’ वो बोली और उसने अपनी चूत ऊपर उठा दी.

‘क्यों रानी, तेरा पति नहीं चाटता तेरी इस प्यारी चूत को?’
‘उसका तो नाम मत लो मेरे सामने. वो क्या चाटेगा. वो तो अपना लंड भी मुझे चूसने नहीं देता, कहता है गन्दी बात होती है!’ रानी थोड़ा तैश में आके बोली.
‘कमाल का चूतिया आदमी है? ऐसे आदमी को तो गोली मार देनी चाहिए!’ मैंने मन ही मन सोचा लेकिन कहा कुछ नहीं और रानी की चूत चाटता रहा.

उसकी चूत में से एक परिचित विशिष्ट गंध आ रही थी जो मुझे हमेशा अच्छी लगती है. ज्यों ही मैंने उसकी चूत के दाने पर अपनी जीभ फिराई वो उछली, जैसे करेंट लगा हो, उसने मेरे हाथ पकड़े और उठा कर अपने मम्मों पर रख लिये. चूत चाटने की धुन में मैं उसके मम्में जैसे भूल ही बैठा था.

उसके निप्पल को चुटकी में दबाये हुए मैं चूत को चाटता रहा.

‘बस अब नहीं. अब आप अपना लंड निकालो जल्दी से!’ रानी उत्तेजित स्वर में बोली. मैंने अपनी पेंट और शॉर्ट्स तुरंत निकाल फेंके. मेरा लंड मेरे पेट तक जम्प लगा के रानी को जैसे विश करने लगा. अब वो अब अपनी पूरी आन बान और शान से फहरा रहा था रानी बहू रानी की चूत के सामने!

‘वाओ… ग्रेट!’ रानी चहक कर बोली और मेरा लंड थाम लिया अपने हाथ में फिर इसे ऊपर नीचे कर के चार पांच बार मुठियाया और इसे मसल कर दबा कर इसकी कठोरता को परखा और संतुष्ट होकर मेरी तरफ मुस्कुरा के देखा.
रानी के हाथ में जाकर तो लंड और भी अकड़ गया जैसे ख़ुशी से फूला नहीं समा रहा हो!

‘मस्त है… इसे कहते हैं लंड…’ वो बोली और सुपारा चूम लिया. उसके मुंह से लंड शब्द सुनकर दिल बाग़ बाग़ हो गया.
‘चूस लूं इसे एक मिनट?’ उसने मेरी ओर देख के पूछा.
‘एक मिनट क्या… जितनी देर चाहो उतनी देर चूसो. अब तुम इसकी मालकिन हो!’
‘टाइम कम है. एक मिनट ही लूंगी मुंह में… अंकल जी, मुझे लंड चूसने से बहुत आत्म संतुष्टि मिलती है पता नहीं क्यों… आज बहुत दिनों बाद चूस रही हूँ. पहली बार मेरे मामा जी ने लंड चुसवाया था अपना लंड. ब्लू फिल्म में भी मुझे लंड चूसने के सीन बहुत अच्छे लगते हैं. कभी फिर मौका मिला तो सारे अरमान अच्छे से पूरे करूंगी अगली बार!’ वो बोली और लंड को चूसने लगी.

‘जरूर बहू रानी जी. एक बार ललितपुर आना स्नेहा के साथ फिर तुम्हारे सारे अरमान रात भर में पूरे कर दूंगा!’
‘आ सकी तो जरूर आऊंगी.’ वो लंड को बाहर निकाल कर बोली और फिर चूसने लगी.

‘बस अंकल, अब चढ़ जाओ मेरे ऊपर और ले लो मेरी चूत जी भर के… देखो कैसी गीली हो कर बह रही है. मैं ज्यादा देर नहीं रुक पाऊँगी, लगता है कि मैं बस झड़ने ही वाली हूँ!’ वासना की अगन में जलती हुई वो कामुक आवाज में बोली.
उसके मुंह से चूत लंड शब्द सुनकर मुझे मज़ा आ रहा था. चुदाई के टाइम मैं भी चाहता हूँ कि मेरे नीचे लेटी चूत वाली लाज संकोच शर्म त्याग के पूरी तरह लंड का मज़ा ले और चूत का मज़ा दे.

मैंने भी देर नहीं की और उसके दोनों पैर अच्छे से फैला लिए और दोनों के बीच में बैठ कर मम्में पकड़ कर उसके होंठ चूसने लगा. रानी भी चुम्बन का जवाब देने लगी साथ में वो अपना एक हाथ नीचे लाई और मेरे लंड को पकड़ कर चूत के छेद पर लगा लिया और अपनी एड़ियों पर उचक कर अपनी कमर उछाली.
लंड ने सट्ट से चूत में गोता लगाया. चूत की संकरी गली में मेरा बड़े आंवले जैसा सुपारा तमाम अवरोधों को दूर हटाता उसकी प्यासी चूत में धंस गया.

रानी के मुंह पर पीड़ा के चिह्न उभरे लेकिन वो दर्द को पी गई पर मुंह से कुछ न बोली.
‘आह राजा… आज पूरे साढ़े आठ महीने बाद लंड मिला है मेरी चूत को!’ वो मुझे चूमते हुए बोली.

‘रानी, मेरी जान, बहुत कसी हुई चूत है तेरी तो. बिल्कुल कुंवारियों की तरह लग रही है.’
‘मेरे राजा, अभी ये चुदी ही कहाँ है ढंग से. आज आप इसके पूरे कस बल निकाल दो, ढीली ढाली कर दो इसे चोद चोद के!’
‘तो ये ले फिर!’ मैं बोला और लंड को जरा सा पीछे ले के फिर धकेल दिया उसकी चूत की गहराई में. मेरी झांटें उसकी चूत से जा मिलीं.

‘उई माँ…’ उसके मुंह से निकला और उसने अपने नाखून मेरी पीठ में गड़ा दिये जोर से!
शुरूआती धक्के तो मैंने आराम से धीरे धीरे लगाए, जब चूत थोड़ी खुल गई और लंड सरपट दौड़ने लगा तो मैंने टॉप गियर में चुदाई शुरू की.
जल्दी ही बहूरानी की चूत गीत गाने लगी… फच फच फचाफाच की मुधुर ध्वनि से कमरा गूँज उठा.

मुश्किल से दो मिनट ही बीते होंगे कि रानी का बदन अकड़ने लगा.
‘मेरे राजा सुनो, धक्के लगाना बन्द करो और चुपचाप पड़े रहो चूत में लंड फंसाए, आप हिलना नहीं बिल्कुल. मैं बस आ ही गई; इस पल को अच्छे से महसूस करना चाहती हूँ; लंड की धड़कन को, इस सुखद अनुभूति को अपनी यादों में बसा लेना चाहती हूँ हमेशा के लिए!’ वो मेरा माथा चूमती हुई बोली और अपनी चूत ऊपर की ओर उठा दी.

उसकी बात सुनकर मैंने धक्के लगाना बन्द कर दिया और चुपचाप उसके ऊपर लेटा रहा.

‘हाँ… ऐसे ही अपना लंड मेरी चूत में दिये पड़े रहिये… मैं झड़ने वाली हूँ… लेकिन आप नहीं हिलना बस… थोड़ा सा ऊपर हो जाओ ताकि मैं अपनी चूत ऊपर उठा के दे सकूं आपको… इसे उलीच सकूँ आपके लंड पे!’ वो कामाग्नि में जलती हुई बोली.

उसकी बातें सुनता हुआ मैं शान्त चुपचाप पड़ा रहा उसके ऊपर!

‘राजा तुम धक्के मत लगाना… हाँ मैं आई… आ गई… मेरे दूध कस के पकड़ लो… मैं चुद रही हूँ अपने स्वप्न पुरुष से… झड़ रही हूँ अब… ये लो ये लो आह… आज मैं तृप्त हुई अंकल राजा!’ वो मिसमिसाते हुए ऐसे बोल बोल के झड़ने लगी.
मैंने भी उसके दोनों बूब्स कस के दबोच लिए. उसने मुझे अपने बाहुपाश में पूरी ताकत से जकड़ लिया साथ में अपनी टाँगें मेरी कमर में लपेट के किसी आक्टोपस की तरह मुझे अपनी गिरफ्त में ले लिया.

कोई दो तीन मिनट तक वो यूं ही मुझसे चिपटी रही उसकी चूत की मांसपेशियाँ स्वतः ही मेरे लंड को जकड़ती रहीं. फिर उसका भुजबंधन शिथिल पड़ गया. सम्भोग श्रम से उसके माथे पर पसीना छलकने लगा था.
‘थैंक्स अंकल!’ वो बोली.
मैंने समय देखा तो अभी सिर्फ सात बजकर दस मिनट ही हुए थे. मैंने अंदाज़ लगाया कि उसकी चूत में लंड पेलने के कोई चार पांच मिनट में ही अपने चरम पर पहुँच गई थी, कई महीने बाद चुदी थी शायद इसलिए!

प्यासी जवानी की चुदाई की कहानी जारी रहेगी.
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