बहन का लौड़ा -29

(Bahan Ka Lauda-29)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

अब तक आपने पढ़ा..

राधे- मेरी जान ये तो शुरूआत है.. आगे और मज़ा आएगा.. बस तेरी ये मुलायम गाण्ड भी मरवाले.. तब मज़ा दुगुना हो जाएगा।
मीरा- मरवा लूँगी मेरे राजा.. सब्र करो और हाँ ये पानी जो चूत में भर कर आए हो.. कहीं मुझे बच्चा ना हो जाए।
राधे- अरे गोली ले रही हो ना.. कुछ नहीं होगा बच्चा तो ममता को देना है।
मीरा- अरे हाँ.. अच्छा याद दिलाया.. कल सुबह ही शुरू हो जाना.. बेचारी बहुत परेशान है। अब मुझे सोने दो.. वरना कल लौड़े में ताक़त नहीं रहेगी।
राधे- मेरी जान अभी कहाँ सोने दूँ.. आज पूरी रात चोदूँगा तुझे और कल का तू टेंशन मत ले.. मेरा लौड़ा बहुत पावर वाला है.. कल भी ममता को बराबर चोदेगा।
मीरा- नहीं नहीं.. अब सो जाओ.. कल मुझे स्कूल भी जाना है प्लीज़.. समझो बात को.. सोने दो।
राधे- अच्छा ठीक है मेरी जान.. चल आजा चिपक कर सोते हैं.. मज़ा आएगा।

दोनों एक-दूसरे को बाँहों में लेकर नंगे ही सो गए.. कब उनको नींद ने अपने आगोश में ले लिया.. पता भी नहीं चला।

अब आगे..

आज का दिन अलग ही मोड़ लेकर आएगा। आज सुबह के 7 बजे ममता काम पर आ गई। आज उसको देख कर कोई नहीं कह सकता था कि ये वही ममता है। आज तो वो किसी गुलाब की तरह खिली हुई लग रही थी।
उसने गुलाबी साड़ी पहनी हुई थी.. बाल भी सलीके से बँधे हुए थे.. उसकी मटकती गाण्ड आज अलग ही समा बाँध रही थी।
ममता अन्दर आई और सबसे पहले मीरा के कमरे को देखा.. वो खुला है या बन्द है।

ममता बुदबुदाई- ये देखो 7 बज गए.. बीबी जी अभी तक सोई है।
ममता ने दरवाजा को ज़ोर से पीटा और आवाज़ लगाई.. तब कहीं मीरा की आँख खुली.. वो हड़बड़ा कर उठी।

मीरा- उठ गई ममता.. तुम जल्दी से नास्ता बनाओ.. मैं अभी रेडी होती हूँ।
ममता कुछ ना बोली और रसोई में नाश्ता बनाने चली गई।
मीरा जल्दी से नहाकर बाहर आई.. राधे अभी भी नंगा सोया हुआ था।

मीरा- राधे उठो.. देखो ममता आ गई है.. चलो फ्रेश हो जाओ.. मैं बाहर जा रही हूँ.. जल्दी करो।
राधे- अरे सोने दो ना.. ममता को यहीं भेज दो.. अब क्या फ्रेश होना.. उसकी चुदाई तो करनी है न.. जाओ।
मीरा- तुम तो बड़े बेशर्म हो.. उठो नहीं तो मार खाओगे।

मीरा ने मस्ती करके राधे को उठा दिया। वो बाथरूम चला गया और मीरा बाहर आ गई।

ममता- क्या बात है बीबी जी.. आजकल बहुत देर तक सोती रहती हो।
मीरा- अरे क्या बताऊँ ममता.. रात देर से सोई.. तो आँख नहीं खुली।

ममता- ओयएए होये.. बीबी जी.. क्या बात है.. लगता है साहब जी बहुत परेशान करते हैं आपको.. वैसे उनका भी कोई कसूर नहीं.. आप है ही इतनी अच्छी कि कोई भी आपको सोने ना दे।
मीरा- चल हट बदमाश.. तू अपने आप को देख.. कैसे तैयार होकर आई है.. आज तो राधे तुझे कच्ची खा जाएगा।

ममता शर्मा जाती है.. वो कुछ बोलना शुरू करती.. इसके पहले मीरा बोल पड़ी- बस अब बातें बन्द कर नाश्ता करवा.. मुझे स्कूल जाने में देर हो रही है। उसके बाद तू अपने साहब के मज़े लेना.. ठीक है।

मीरा की बात सुनकर ममता को कल का सीन याद आ गया.. उसके जिस्म में राधे के लौड़े को याद करके करंट सा दौड़ गया।
ममता ने मीरा को नाश्ता कराया.. तब तक राधे भी फ्रेश हो कर बाहर आ गया। उसकी नज़र ममता पर गई तो वो बस उसको देखता रह गया।

मीरा- ऐसे क्या देख रहे हो.. आज तुम्हारे लिए तैयार होकर आई है हा हा हा हा।

सभी हँसने लगे.. उसके बाद बस ऐसे ही एक-दूसरे को छेड़ते हुए नाश्ता करने लगे।

उधर रोमा बाथरूम में थी और ना जाने क्या सोच कर वो मुस्कुरा रही थी।

रोमा एकदम नंगी बैठी हुई थी और अपने हाथ-पाँव और चूत के बाल साफ कर रही थी.. शायद नीरज की बात उसको याद थी.. या आज उसका इरादा कुछ और ही था। चलो जो भी हो.. इसको चुदना तो पड़ेगा ही।
रोमा ने अच्छे से सारे बाल साफ किए और नास्ता करके स्कूल चली गई।

स्कूल के मेन गेट पर उसको टीना मिली।

टीना- हाय रोमा.. क्या हुआ.. कहाँ खोई हुई हो तुम?
रोमा- कहीं नहीं यार.. तुम सुनाओ क्या चल रहा है.. परसों स्कूल क्यों नहीं आई तुम?
टीना- अरे क्या बताऊँ.. पीरियड्स प्राब्लम.. दो दिन से.. आज आई हूँ.. क्लास में क्या चल रहा है?
रोमा- कुछ खास नहीं यार.. अच्छा हुआ तू आज आ गई.. मेरा एक काम करेगी?

टीना- हाँ बोल.. क्या काम है?
रोमा- यार मेरी छुट्टी की एप्लीकेशन दे देना.. आज मैं घर वापस जा रही हूँ.. कुछ काम है।
टीना- अरे काम था तो आई ही क्यों.. घर से फ़ोन कर देती यार।
रोमा- तब सोचा नहीं था यार.. और घर पर नहीं पता था.. तू ऐसा करना.. छुट्टी के बाद मैं तेरे घर आ रही हूँ.. आकर सब बताऊँगी।

टीना- अरे आख़िर बात क्या है.. कुछ तो बता.. ऐसे कहाँ जा रही है यार?
रोमा- आकर सब बताती हूँ ना.. प्लीज़ प्लीज़.. मेरी बेस्ट फ्रेण्ड है ना.. अब मैं जाती हूँ.. बाय।

रोमा वहाँ से चली गई और टीना बस उसको देखती रही कि आख़िर बात क्या है.. कहाँ गई है ये?

दोस्तों टीना याद है ना आपको.. या भूल गए.. इसका भी कहानी में एक अहम किरदार है.. मगर अभी नहीं.. वक़्त आने पर इसके बारे में भी बताऊँगी। अभी तो मीरा और रोमा पर ही ध्यान दो कि इनकी किश्ती किनारे लगती है या डूब जाती है।

रोमा चलती जा रही थी और उसने नीरज को फ़ोन किया कि वो स्कूल के पास उसको लेने आ जाए।

जब तक नीरज आता है.. हम वापस राधे के पास चलते हैं।

मीरा के स्कूल जाने के बाद ममता जल्दी से रसोई का काम कर रही थी।

राधे- ममता क्या कर रही हो?
ममता- साहब जी.. बस साफ-सफ़ाई करनी थी.. हो गई.. अब तो आपके हुकुम का इंतजार है।
राधे- कैसे हुकुम का.. मैं कुछ समझा नहीं?
ममता- साहब जी.. अब आप ऐसे शरमाओगे तो हो गया बच्चा।

राधे- ओह्ह.. अच्छा.. मैं कहाँ शर्मा रहा हूँ.. आ जाओ कमरे में.. आज तक तो सुहागरात मनाती थी.. आज हम सुहागदिन मना लेते हैं।

ममता का चेहरा शर्म से लाल हो गया था.. वो भाग कर राधे के सीने से चिपक गई।

दोस्तो, राधे ने बस शॉर्ट्स पहना था टी-शर्ट नहीं.. जब ममता उसके सीने से चिपकी.. तो राधे का नंगा सीना उसको बहुत अच्छा लगा।
अब वो राधे की पीठ पर हाथ घुमाने लगी।

दोस्तो, उम्मीद है कि आपको मेरी कहानी पसंद आ रही होगी.. मैं कहानी के अगले भाग में आपका इन्तजार करूँगी.. पढ़ना न भूलिएगा.. और हाँ आपके पत्रों का भी बेसब्री से इन्तजार है।
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