बहन का लौड़ा -28

(Bahan Ka Lauda-28)

This story is part of a series:

अब तक आपने पढ़ा..

नीरज रोमा के साथ फोन सेक्स कर रहा था।
नीरज- अब मैंने तुम्हारी ब्रा भी निकाल दी.. तुम्हारे मस्त मम्मों को दबा रहा हूँ..
रोमा सच में गर्म हो गई थी.. उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी थी, वो अपने मम्मे खुद दबाने लगी थी।

नीरज- अब मैंने तुम्हारी पैन्टी भी निकाल दी.. तुम्हारी गुलाबी चूत अब आज़ाद हो गई। अब मैं कभी तुम्हारे मम्मों को चूस रहा हूँ.. चूत को चाट रहा हूँ.. तुम पागल हो रही हो।
रोमा- आह्ह.. ऐइ.. मज़ा आ रहा है.. करते रहो आह्ह..
नीरज- अब मैंने अपने कपड़े निकाल दिए.. मेरे लौड़े को तुम्हारी चूत पर रगड़ रहा हूँ..
रोमा- आह्ह.. ऐइ.. नहीं ऐसा मत करो.. आह्ह.. तुम्हारा बहुत बड़ा है आह्ह..
नीरज- नहीं मेरी जान.. घबराओ मत.. मैं बड़े आराम से तुम्हारी चूत को चोदूँगा.. बस तुम मज़ा लो। अब मैं धीरे-धीरे लौड़े को चूत में घुसा रहा हूँ..

अब आगे..

रोमा ने नाईटी में हाथ डाल दिया और चूत को रगड़ने लगी।
नीरज- अब मैं लंड को चूत में घुसा रहा हूँ.. महसूस करो तुम.. आह्ह.. तुम्हारी चूत बहुत टाइट है.. आह्ह.. जा नहीं रहा आह्ह…
रोमा इतनी उत्तेजित हो गई थी कि चूत को ज़ोर-ज़ोर से रगड़ने लगी। उसका फुव्वारा निकल गया- आह्ह.. आईईइ उईईइ.. बस करो.. आह्ह.. मेरा पानी निकल गया.. अब घुसाने की जरूरत नहीं..

नीरज- धत तेरी की.. लौड़ा अन्दर गया नहीं कि तुम झड़ गईं..

रोमा- आप बहुत बदमाश हो.. मुझे नहीं घुसवाना आपका.. ऐसे ही मुझे मज़ा आ गया.. समझे अब सो जाओ.. रात बहुत हो गई है.. सुबह मुझे स्कूल भी जाना है।

नीरज- रोमा.. मैं तुम्हें बहुत चाहता हूँ कल मिल सकती हो क्या?
रोमा- ना बाबा.. आज ही आपने मेरी हालत खराब कर दी.. अब दोबारा मिलूंगी तो पता नहीं क्या करोगे।
नीरज- अपने दिल पर हाथ रख कर कहो.. मैंने कुछ भी तुम्हारी मर्ज़ी के खिलाफ किया क्या..? या कुछ ऐसा किया जो गलत हो? बताओ रोमा क्या तुम्हें मेरा प्यार करना अच्छा नहीं लगा?

रोमा- नहीं नहीं नीरज.. ऐसी बात नहीं है.. यहाँ तक तो ठीक है.. मगर सेक्स करना ठीक नहीं होगा.. किसी को पता लग गया तो?

नीरज- मैं कब कह रहा हूँ सेक्स के लिए.. तुम कहोगी तो ही करूँगा.. वरना नहीं करूँगा.. बस तुम्हारी मस्त चूत को चूस कर तुम्हें मज़ा दूँगा.. हाँ हो सके तो अपनी चूत के बाल साफ कर लेना.. चिकनी चूत चूसने में ज़्यादा मज़ा आता है.. प्लीज़ कल किसी भी तरह आ जाओ ना.. प्लीज़ तुम्हें मेरी कसम है।

रोमा- अच्छा बाबा.. मैं कोशिश करूँगी अब सो जाओ.. बाय लव यू मेरे जानू..
नीरज ने भी रोमा को ‘लव यू’ कहा और फ़ोन काट दिया।

लो दोस्तो, फ़ोन सेक्स तो हो गया.. अब अपने हीरो के पास भी देख लेते हैं, अब तक तो उनका खाना ख़त्म हो गया होगा।

मीरा- आह.. बहुत खा लिया मैंने.. अब तो हिला भी नहीं जा रहा।
राधे- बिस्तर पर चल मेरी जान.. अभी खाना हजम कर देता हूँ।
मीरा- हाँ चलो.. मैं डरती हूँ क्या.. देखती हूँ कितना दम है तुम्हारे अन्दर.. आ जाओ..

दोनों बिस्तर पर लेट गए। राधे तो बीयर की धुन में मस्त था। हाँ मीरा ने एक गिलास ही लिया था.. जिसका उस पर इतना असर नहीं हुआ।
राधे मीरा के मम्मों को सहलाने लगता है..

मीरा- जानू मेरी चूत को चाटो ना.. मन कर रहा है..
राधे- मन तो मेरा भी लौड़ा चुसवाने का हो रहा है.. चल ऐसा कर 69 के पोज़ में हो जाते हैं.. दोनों का मन रह जाएगा..

दोनों 69 के पोज़ में हो गए.. राधे मज़े से चूत को चाट रहा था.. वहीं मीरा भी पीछे नहीं थी.. पूरा लौड़ा जड़ तक चूस रही थी।
कुछ देर बाद राधे सीधा लेट गया और मीरा को कहा- अब तुम धीरे से लौड़े पर बैठ जाओ..

मीरा लौड़े पर बैठ गई.. सर्रर.. से लौड़ा चूत में घुस गया..
मीरा- आह्ह.. मज़ा आ गया.. अब चोदो..
यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

राधे- मैं नहीं.. मेरी जान तुम चोदोगी.. खुद चलो अपने जिस्म का पूरा भार पैरों पर ले लो और गाण्ड को ऊपर-नीचे करो.. मज़ा आएगा..

मीरा समझ गई कि उसको क्या करना है। अब वो लौड़े पर कूदने लगी और मस्ती में अजीब सी आवाजें निकालने लगी।
मीरा- आह्ह.. आह.. आईईइ फक मी… आह्ह.. फक मी.. माय टार्जन.. आह्ह.. तुम्हारा लौड़ा किसी जंगली जैसा है.. आह्ह.. बहुत बड़ा है आह्ह.. आह्ह..

उसकी बातों से राधे भी उत्तेजित हो गया और नीचे से धक्के मारने लगा।
दस मिनट तक मीरा वैसे ही उछलती रही.. उसको मज़ा तो बहुत आ रहा था.. मगर पैर दुखने लगे थे।
मीरा- आह्ह.. आह.. मेरे प्यारे राधे आह्ह.. प्लीज़.. अब मैं नीचे आई.. आह्ह.. आह्ह.. आ जाऊँ.. पैर दुखने लगे हैं आह्ह.. खाना भी हजम हो गया.. ऐइ चूत में मीठा सा दर्द भी हो रहा है आह्ह..

राधे कुछ बोला नहीं.. बस मुस्कुराता रहा। अचानक उसने मीरा को ऊपर से हटा दिया। अभी वो संभल पाती कि उसके पहले उसके सर को पकड़ कर तकिये पर लगा दिया और उसकी पीठ पकड़ कर उसको घोड़ी बना दिया और एक ही झटके में पूरा लौड़ा चूत में घुसा दिया।

मीरा- आह्ह.. आईईइ.. ये क्या है.. आह्ह.. जो भी है.. आह्ह.. अच्छा है.. चोदो आह्ह.. फास्ट मज़ा आ रहा है.. आह्ह…
राधे- मेरी जान तुम्हें घोड़ी बनाकर चोदने में ज़्यादा मज़ा आ रहा है.. आह्ह.. अब मेरा पानी निकलने वाला है.. आह्ह.. उहह उहह.. आह्ह.. उहह..
मीरा- आह्ह.. आह्ह.. मेरी चूत भी आह्ह.. ठंडी होने वाली है आह्ह.. आह्ह.. फास्ट..
राधे स्पीड से घपाघप लौड़ा पेलने लगा। कुछ ही देर में दोनों शांत हो गए।

मीरा- ओह्ह.. राधे.. तुम कितना मज़ा देते हो.. मेरी चूत तो मस्त हो गई.. तुम्हारे लौड़े से..
राधे- मेरी जान ये तो शुरूआत है.. आगे और मज़ा आएगा.. बस तेरी ये मुलायम गाण्ड भी मरवाले.. तब मज़ा दुगुना हो जाएगा!

मीरा- मरवा लूँगी मेरे राजा.. सब्र करो और हाँ ये पानी जो चूत में भर कर आए हो.. कहीं मुझे बच्चा ना हो जाए।

राधे- अरे गोली ले रही हो ना.. कुछ नहीं होगा बच्चा तो ममता को देना है।
मीरा- अरे हाँ.. अच्छा याद दिलाया.. कल सुबह ही शुरू हो जाना.. बेचारी बहुत परेशान है। अब मुझे सोने दो.. वरना कल लौड़े में ताक़त नहीं रहेगी..

राधे- मेरी जान अभी कहाँ सोने दूँ.. आज पूरी रात चोदूँगा तुझे और कल का तू टेंशन मत ले.. मेरा लौड़ा बहुत पावर वाला है.. कल भी ममता को बराबर चोदेगा..
मीरा- नहीं नहीं.. अब सो जाओ.. कल मुझे स्कूल भी जाना है प्लीज़.. समझो बात को.. सोने दो…
राधे- अच्छा ठीक है मेरी जान.. चल आजा चिपक कर सोते हैं.. मज़ा आएगा..

दोनों एक-दूसरे को बाँहों में लेकर नंगे ही सो गए.. कब उनको नींद ने अपने आगोश में ले लिया.. पता भी नहीं चला।

दोस्तो, उम्मीद है कि आप को मेरी कहानी पसंद आ रही होगी.. मैं कहानी के अगले भाग में आपका इन्तजार करूँगी.. पढ़ना न भूलिएगा.. और हाँ आपके पत्रों का भी बेसब्री से इन्तजार है।
[email protected]

Download a PDF Copy of this Story बहन का लौड़ा -28