बहन का लौड़ा -23

(Bahan Ka Lauda -23)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

अभी तक आपने पढ़ा..

अब तो बस नीरज होंठों को ऐसे चूसने लगा जैसे कभी दोबारा रोमा हाथ में नहीं आएगी। उसकी वासना जाग उठी और उसके हाथ रोमा के चूतड़ों पर चले गए। वो उनको दबाने लगा।

रोमा ने जब यह महसूस किया तो जल्दी से नीरज को धक्का देकर उससे अलग हो गई। उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं।

नीरज- अरे क्या हुआ रोमा..?
रोमा- नहीं.. यह ग़लत है.. आपके हाथ कहाँ तक पहुँच गए थे.. हर बात की एक हद होती है।

नीरज- आई एम सॉरी रोमा.. मुझे नहीं पता था.. प्यार की भी कोई हद होती है.. मैं तो बस सच्चे दिल से तुम्हें प्यार कर रहा था.. आई एम सॉरी..
इतना कहकर नीरज मायूस सा होकर एक तरफ़ बैठ गया।

रोमा का दिल भर आया। उसको लगा शायद उसने नीरज को दु:ख पहुँचाया है.. वो नीरज के करीब आ गई।
रोमा- आई एम सॉरी नीरज.. मैं घबरा गई थी.. सॉरी.. प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो.. मैंने पहली बार ये सब किया.. तो समझ नहीं आया कि मुझे क्या कहना चाहिए।

नीरज- नहीं रोमा.. तुम जाओ.. ग़लती मेरी ही है.. जो मैं तुम्हारे प्यार में बहक गया था।
रोमा- प्लीज़ नीरज.. मुझे और शरमिंदा मत करो.. अब मैं कभी आपको किसी बात के लिए माना नहीं करूँगी.. प्लीज़ मान जाओ ना..

नीरज मन ही मन मुस्कुरा रहा था.. अब चिड़िया जाल में फंसने लगी थी।
नीरज- नहीं रोमा.. तुम नहीं जानती.. ये प्यार ऐसा ही होता है.. आदमी कहाँ से कहाँ पहुँच जाता है.. तुम ये सब नहीं समझ पाओगी।

रोमा- मैं सब समझती हूँ.. प्लीज़ मान जाओ.. मुझे एक बार आजमा कर तो देखो.. अब मैं कुछ नहीं कहूँगी।
नीरज- ठीक है.. मान जाता हूँ.. एक बात कहूँ.. मैं तुम्हें खुल कर प्यार करना चाहता हूँ.. क्या तुम मुझे इजाज़त देती हो?
रोमा- हाँ मेरे प्यारे नीरज.. जैसे प्यार करना चाहते हो.. कर लो.. मैं नहीं रोकूंगी.. आ जाओ.. अपनी रोमा को जैसे चाहो आजमा लो..

लो दोस्तो, गई रोमा काम से.. नीरज ने जो जाल फेंका.. बेचारी फँस गई जाल में.. खुद चूत ऑफर कर रही है..

नीरज ने रोमा के कंधे पकड़ लिए और बस उसको देखता रहा.. उसकी आँखों में एक अजीब सा नशा था। रोमा ने अपना जिस्म ढीला छोड़ दिया और बस नीरज की आँखों में देखने लगी।
नीरज ने रोमा को अपनी गोद में उठा लिया और बिस्तर पर ले जाकर लेटा दिया। रोमा के दिल की धड़कन बढ़ने लगी थीं।

अरे अरे ये क्या हो गया दोस्तो, सॉरी यह सीन आप बाद में देखना.. वहाँ ममता से थोड़ी गड़बड़ हो गई है.. चलो वहाँ चलते हैं।

शाम को मीरा और राधे बैठे हुए बातें कर रहे थे.. तभी डोर बेल बजी..

मीरा- ओह.. माँ.. कौन आया होगा.. राधे तुम अन्दर चले जाओ.. क्या पता कौन है?

राधे कमरे में चला गया और मीरा ने दरवाजा खोला तो सामने ममता का पति सरजू खड़ा था।

दोस्तों मैं आपको बताना भूल गई.. कभी-कभी सरजू यहाँ दिलीप जी से पैसे माँगने आ जाता था। हालाँकि दिलीप जी हमेशा उस पर गुस्सा करते रहते हैं कि वो दारू ना पिए.. मगर कहते हैं ना कुत्ते की दुम को 100 साल नली में रखो.. सीधी नहीं होती। यह सरजू भी वही कुत्ते की दुम है।

सरजू- नमस्ते मेमसाब।
मीरा- सरजू तुम यहाँ.. इस वक़्त क्यों आए हो… पापा घर में नहीं हैं.. जाओ यहाँ से..

सरजू- मेमसाब मैं आपसे ही मिलने आया हूँ.. वो ममता आज बड़ी खुश लग रही थी। मैंने पूछा तो कहने लगी मेमसाब उसको एक दवा लाकर देगी.. जिससे वो माँ बन जाएगी.. बस इसी लिए आपसे मिलने आया हूँ..

सरजू की बात सुनकर एक बार तो मीरा डर गई कि ये ममता ने क्या कर दिया। सरजू को बताने की क्या जरूरत थी..
मीरा- हाँ मैंने कहा था.. लेकिन तुम यहाँ क्यों आए हो?

सरजू- आपका शुक्रिया अदा करने आया हूँ मेमसाब.. बस जल्दी से वो दवा ला दो.. ताकि मैं बाप बन सकूँ। वैसे एक बात पूछू.. आप बुरा तो नहीं मानोगी ना?
मीरा- हाँ पूछो.. क्या बात है?
सरजू- वो क्या है ना मेमसाब.. मैं अक्सर रात को दारू पीकर टुन्न हो जाता हूँ और घर आकर सो जाता हूँ.. ममता को पति का सुख नहीं दे पाता.. बेचारी खुद ही सब करती है.. मैं तो बस सोया रहता हूँ.. ऐसे में वो दवा काम करेगी ना?

मीरा के चेहरे पर थोड़ी शर्म आ गई हालाँकि सरजू ने शॉर्ट में कहा.. मगर मीरा सब समझ गई।

मीरा- ये तुम मेरे साथ कैसी बातें कर रहे हो.. जाओ यहाँ से.. वो दवा मैं ला दूँगी और वो ऐसे भी काम करेगी.. समझ गए ना.. अब जाओ यहाँ से.. दोबारा मत आना.. नहीं तो पापा को बोल दूँगी।

सरजू घबरा गया और माफी माँगता हुआ वहाँ से चला गया.. मगर उसके दिल में इस बात की ख़ुशी थी कि ममता अब माँ बन जाएगी।

मीरा बड़बड़ाती हुई कमरे में आई.. उसके चेहरे पर थोड़ा गुस्सा भी था।

राधे- अरे मेरी जान क्या हुआ?
मीरा- होना क्या था.. वो ममता के पेट में कोई बात पचती ही नहीं.. जाकर बोल दिया अपने पति को..
राधे- अरे मैंने सब सुना है.. बेचारी ने दवा का नाम लिया है और कुछ तो नहीं कहा ना?

मीरा- क्या जरूरत थी दवा का नाम लेने की.. चुप नहीं रह सकती थी क्या.. और हाँ तुमने बताया नहीं.. दोपहर में मेरे जाने के बाद क्या किया तुम दोनों ने?
राधे- अरे करना क्या था.. बस मेरा लौड़ा चुसवाया उसको.. बड़ा अच्छा चूसती है।
मीरा- बस सिर्फ़ चुसवाया उसको.. और कुछ नहीं किया?

राधे- अरे उसने साफ मना कर दिया.. बोली कल अपनी चूत क साथ जलवा दिखाएगी।
मीरा- ओह.. लगता है.. वो कल चूत को साफ करके आएगी।
राधे- हाँ शायद मुझे भी ऐसा ही लगता है।

मीरा- चलो रेडी हो जाओ.. पिक्चर देख कर आएँगे.. आज खाना भी बाहर खाकर आएँगे।
राधे- मेरी जान.. अगर बुरा ना मानो तो आज थोड़ी ड्रिंक हो जाए.. प्लीज़।
मीरा- ओके मेरे आशिक.. वैसे मुझे शराब से नफ़रत है.. मगर आज तुम्हारे लिए ये भी सही.. अब चलो..

दोनों रेडी होकर बाहर निकल जाते हैं।

दोस्तो, इनको घूमने दो.. चलो वापस आपको रोमा के पास ले चलती हूँ.. वहाँ क्या हो रहा है.. कहीं वहाँ नीरज ने रोमा को चोद तो नहीं दिया ना..

नीरज ने रोमा को अपनी गोद में उठा लिया और बिस्तर पर ले जाकर लेटा दिया। रोमा के दिल की धड़कन बढ़ने लगी थीं, रोमा बस नीरज को देख रही थी और नीरज उसके एकदम करीब आ गया था.. रोमा ने अपनी आँखें बन्द कर ली थीं।

नीरज उसके होंठों को चूसने लगा.. अपने नीचे उसे दबा लिया। अब नीरज का लौड़ा ठीक रोमा की चूत पर सैट हो गया था.. बस कपड़े बीच में आ रहे थे।

रोमा की साँसें तेज होने लगी थीं.. उसका जिस्म जलने लगा था.. मगर वो चुपचाप मज़ा ले रही थी.. अब नीरज के हाथ हरकत करने लगे थे। वो रोमा के अनछुए अमरूदों को सहलाने लगा था.. साथ ही अपने लौड़े को चूत पर रगड़ने लगा था।

करीब 5 मिनट तक ये सब चलता रहा.. रोमा बहुत ज़्यादा उत्तेज़ित हो गई थी.. मगर वो डर भी रही थी। आज से पहले कभी किसी मर्द ने उसके जिस्म को ऐसे टच नहीं किया था और नीरज तो पक्का चोदू था।

अब उसने अपना हाथ रोमा के टॉप में घुसा दिया और ब्रा के ऊपर से मम्मों को दबाने लगा। दूसरे हाथ को स्कर्ट में डाल कर चूत को मसलने लगा।
रोमा की चूत से पानी रिसने लगा था उसकी पैन्टी पूरी गीली हो गई थी। रोमा को डर था.. कहीं उसके सफ़ेद स्कर्ट पर दाग ना लग जाए..। अब उसकी बर्दाश्त की सीमा पार हो गई थी।

रोमा- आह्ह.. नीरज.. उई सस्स.. प्लीज़ अब बस भी करो.. एयेए.. बहुत देर हो गई आह्ह.. मुझे घर जाना होगा आह्ह..
नीरज- बस थोड़ी देर और मुझे प्यार कर लेने दो.. देखो तुमने वादा किया था.. मना नहीं करोगी.. प्लीज़ बस थोड़ा और मज़ा लेने दो.. तुम्हारे महकते जिस्म ने मुझे मदहोश कर दिया है..
रोमा- आह्ह.. मैं मना नहीं कर रही हूँ कककक.. प्लीज़ आह्ह.. दोबारा आऊँगी आह्ह.. बाकी का तब कर लेना.. आह्ह.. मेरे कपड़े गंदे हो जाएँगे ऐइ…

नीरज समझ गया.. कि रोमा की बातों का क्या मतलब है और उसने ऐसी हरकत कर दी.. जिसका रोमा ने अंदाज़ा भी नहीं लगाया होगा।

नीरज बैठ गया और एक ही झटके में उसने रोमा के स्कर्ट को पकड़ कर खींच दिया। अब रोमा की सफेद पैन्टी में से उसकी गीली चूत साफ नज़र आने लगी.. जिसे देख कर नीरज का दिमाग़ घूम गया।

रोमा- ओह.. माय गॉड.. ये क्या किया आपने.. नहीं ये ग़लत है.. छोड़ो मुझे प्लीज़.. नीरज मुझे शर्म आ रही है।
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नीरज- अरे घबराओ मत.. मैं कुछ नहीं करूँगा.. बस प्यार करूँगा.. ये मैंने इसलिए निकाली है.. ताकि खराब ना हो.. प्लीज़ रोमा.. तुम्हें मेरी कसम है बस.. थोड़ी देर मुझे करने दो.. मैं वादा करता हूँ.. बस होंठों से प्यार करूँगा और कुछ नहीं प्लीज़..

दोस्तो, उम्मीद है कि आप को मेरी कहानी पसंद आ रही होगी.. मैं कहानी के अगले भाग में आपका इन्तजार करूँगी.. पढ़ना न भूलिएगा.. और हाँ आपके पत्रों का भी बेसब्री से इन्तजार है।
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