सेक्स चैट का मज़ा – फोन सेक्स

(Sex Chat Ka Maja- Phone Sex)

नमस्कार दोस्तो.. मेरी सभी कहानियों को आप इतना प्यार देते हो.. उसके लिए आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद।
मेरी फीमेल दोस्तों की चूतों को अपने बड़े और कड़क लंड से.. गीली चूतों को चुदने की शुभकामनाएं।
सभी पाठिकाओं की चूतें फड़कती रहें और मोटे लंडों से चुदती रहें।
मेल साथियों को भी नस्मते।

अब मैं आता हूँ अपनी कहानी पर।

मेरी कहानियों के कुछ पाठक आज मेरे अच्छे दोस्त भी हैं.. परन्तु मैं उन्हें कभी मिला नहीं हूँ और हो सकता है कि मिलूँ भी न.. या मिलना चाहूँ भी न।

यh कहानी.. मेरी कहानियों की एक पाठिका की है.. जिसने अपनी चूत का मज़ा लेने के लिए मेरे साथ अक्सर फोन सेक्स किया और करती भी रहती है।

यह कहानी उसके कहने पर ही लिख रहा हूँ। मेरी इस पाठिका दोस्त.. जिसका नाम नेहा जो कि पंजाब साइड से है.. वो मेरी कहानियों की जबरदस्त फैन थी और मेरी हर कहानी को पढ़ने के बाद मुझे अक्सर मेल किया करती थी, आज भी मुझे वो मेल करती है।
ऐसे ही वो मेरे साथ धीरे-धीरे दोस्ती बढ़ाती गई।

फिर वो मेरे साथ ऑनलाइन चैट करने लगी.. तो एक दिन हमने अपने व्हाट्सैप के नंबर शेयर कर लिए। अब हमारी हर रोज़ फ्री टाइम में व्हाट्सैप पर बातें होने लगीं।

नेहा अक्सर मेरे साथ सेक्स चैट करती और व्हाट्सैप पर डर्टी टाइप बातें करती। उसे चुदाई चैट और चुदाई की गन्दी से गन्दी बातें करना पसंद है, वो हर रोज़ चुदाई में कुछ नया करने का सोचती रहती है।

उसने मुझसे कहा- रवि जी जैसी चैट हम करते हैं.. मैं चाहती हूँ आप एक कहानी में वैसी ही चैट लिखो।

नेहा अक्सर सेक्स चैट दिन में करती थी.. क्योंकि रात को तो मेरे पास भी टाइम नहीं होता और वो भी अपने घर वालों के साथ ही सोती है.. नेहा की शादी नहीं हुई है अभी इसलिए वो हर रोज़ अपनी तड़पती चूत लेकर सो जाती है।

एक दिन नेहा की मुझे काल आई.. मैं उस वक्त अपनी कार में कहीं जा रहा था, मैंने कार को रोड के किनारे रोक दिया और वो जगह भी सुनसान सी थी, मैंने उसका फ़ोन पिक किया।

वो कहने लगी- हाय डियर डार्लिंग.. कहाँ हो यार.. इधर तुम्हारी जान मर रही है..
मैंने कहा- अरे क्या हुआ जानेमन?
बोली- यार तुम्हारी जान की ‘वो’ तड़प रही है।
मैंने कहा- ‘वो’ क्या यार?
बोली- तुम्हें पता ही है जानू।

मैंने कहा- नहीं डार्लिंग.. अपने मुँह से बताओ क्या?
तो बोली- ‘फुद्दी’.. तड़प रही है।
मैंने कहा- तो अपने यार के पास आ जा जानेमन।
वो बोली- ले.. समझ ले आ गई.. तेरी रांड तेरी गोद में.. चूस ले मेरी जवानी।

उसके बाद की जो फ़ोन चुदाई हुई.. वो ऐसी हैं!

मैं- ये देख साली.. कुतिया.. मैंने तुझे अपनी गोद में बिठा लिया और तेरे बदन पर हाथ फिरा रहा हूँ और तेरे कपड़े उतार रहा हूँ।

नेहा- हाँ जानू.. चोद दे आज.. अपनी नेहा को.. ले उतार दे मेरे कपड़े और नंगी कर दे.. मैं भी तुम्हारे लंड को पैंट से निकाल रही हूँ।

मैं- हाँ साली.. वाओ ग्रेट.. ये देख मेरी जान.. तेरे ऊपर के कपड़े उतार दिए और अब बस ये तेरी पिंक ब्रा और पैंटी रह गई।

नेहा- हाँ जानू.. देख मैंने पैंट से तुम्हारे लंड को निकाल लिया है और अपने होंठों में लेने लगी हूँ।

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