राजू और शब्बो की घमासान चुदाई-2

(Raju Aur Shabbo Ki Ghamasan Chudai- Part 2)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

अब तक आपने पढ़ा कि रश्मि ने देखा कि उसकी नौकरानी शब्बो ड्राईवर के साथ गैराज में चुदाई करवा रही थी और रश्मि के देखने के बाद भी राजू ड्राईवर ने चुदाई जारी रखी तथा बाद में रश्मि को भी अपना लौड़ा दिखा दिया।

अब आगे..

रश्मि राजू की हिमाक़त पर हैरान भी थी कि उसे देखने के बाद भी उसने अपनी हरक़त बन्द नहीं की। इतना ही नहीं बाद में नंगा ही उसके सामने खड़ा हो गया। अनायास ही रश्मि को राजू का मोटा लण्ड याद आ गया। रश्मि की साँसें थोड़ी तेज़ हो गईं।

राजू ने शब्बो को कैसे पटाया

इतने में शब्बो चाय लेकर आ गई और रश्मि के विचारों का सिलसिला टूट गया।
उसे चाय देकर शब्बो भी वहीं नीचे बैठ गई।

अड़तीस साल की रश्मि का वैसे तो एक भरा-पूरा परिवार था। रुपये-पैसे की कोई कमी नहीं थी.. किन्तु पति शुरू से ही कारोबार के सिलसिले में अधिकतर बाहर रहते थे। ऐसे में जब बेटा भी अपनी इन्जीनियरिंग की पढ़ाई के लिए होस्टल चला गया.. तो अकेलापन काटने के लिए क़रीब चार-पाँच साल पहले वो शब्बो को अपने मायके से ले आई।

कमसिन उम्र की शब्बो उसके मायके के पास रहती थी। वैसे नाम उसका शबनम था.. पर सब उसे शब्बो ही बुलाते थे। शब्बो की माँ मर चुकी थी और अकेला बाप तीन जवान होती लड़कियों का बोझ नहीं ढो पा रहा था।
तीन बहनों में सबसे छोटी और चुलबुली शब्बो रश्मि से बहुत हिली-मिली थी। अपनी मदद के लिए रश्मि उसे अपने साथ ले आई। अब वही उसके अकेलेपन का सहारा थी। घर के काम-काज़ के साथ वो प्राइवेट पढ़ाई भी कर रही थी।

रश्मि के यहाँ रहते हुए वो एक बच्ची से सुन्दर किशोरी कब बन गई.. रश्मि को पता ही नहीं चला। उसकी जवानी काफ़ी गदरा गई थी। छातियों के उभार और नितम्बों का आकार अब लोगों का ध्यान खींचने लगा था। लेकिन रश्मि के लिए तो वो एक चुलबुली बच्ची ही थी।

राजेन्द्र सिंह उनका ड्राईवर था.. जिसे सब राजू बुलाते थे.. बंगले के आउट हाउस में रहता था। अपने पति के दोस्त रमेश की सिफ़ारिश पर उसने राजू को छ: महिने पहले ही नौकरी पर रखा था। चौबीस-पच्चीस साल का राजू वैसे तो बहुत शालीन था। बंगले की रख-रखाव और बाज़ार से सौदा लाना उसके काम थे.. जिसे वो ईमानदारी से करता था।

लेकिन आज उसका ये रूप सामने आने के बाद से रश्मि हैरान थी।

और शब्बो?

उसे तो वो बच्ची समझ रही थी। लेकिन आज गैराज़ की टेबल पर वो एकदम खेली-खाई औरत जैसा बर्ताव कर रही थी। जिस बेशर्मी से वो चुदाई का मज़ा ले रही थी उससे साफ़ ज़ाहिर था कि वासना का ये खेल उसके लिए नया नहीं था।

‘कब से चल रहा हैं ये सब?’
रश्मि ने पूछा तो शब्बो की चाय उसके हलक में ही रह गई।

‘जी.. आज ही!’ शब्बो ने बा-मुश्किल चाय निगलते हुए कहा।
‘मुझे क्या बच्ची समझ रखा है?’ रश्मि ने मुस्कुराते हुए पूछा।

‘टेबल पर तेरे रंग-ढंग देख कर कोई बच्चा भी कह सकता हैं कि राजू ने तुझे ये खेल बहुत पहले ही सिखा दिया है, तुझे पूरी औरत बना दिया है.. बता कैसे शुरू हुआ ये सब?’ रश्मि के गुस्से पर अब जिज्ञासा हावी होती जा रही थी।
‘जी वो.. जी वो..’

शब्बो हिचकिचाई तो रश्मि बोली- अरे डर मत.. मैं तुझसे नाराज़ नहीं होऊँगी।
रश्मि ने कुछ प्यार से कहा तो शब्बो का हौसला कुछ बढ़ा।

‘दीदी.. ये जब से आया था ना.. मुझे घूरता था.. मुझसे बात करने की कोशिश करता रहता था। पहले तो मैंने उससे ज्यादा बात नहीं की.. लेकिन साथ-साथ काम करते-करते थोड़ी बहुत बातें होने लगीं और जब बातें होने लगी तो धीरे-धीरे वो चुटकुले सुनाने लगा। फ़िर उसके चुटकुले गंदे होते गए, अश्लील इशारे भी करने लगा..’ शब्बो ने बताया।

शब्बो ने रश्मि की ओर देखा, उसकी आँखों में गुस्से की जगह जिज्ञासा के भाव देख कर शब्बो को तसल्ली हुई और वो खुल कर बताने लगी- पहले पहले तो मुझे अजीब सा लगता था.. लेकिन धीरे-धीरे उसके मज़ाक मेरे जवान होते मन को अच्छे लगने लगे। वो जब गंदी बातें करता.. तो मेरे तन में एक फ़ुरफ़ुरी सी होती और मैं अन्दर से भीग जाती थी।

शब्बो की स्वीकारोक्ति सुन कर रश्मि के दिल में कुछ हलचल सी हुई।

राजू ने शब्बोk ओ लन्ड पकड़ाया

शब्बो ने आगे बताया-
एक दिन राजू बाज़ार से सामान लेकर आया.. तो बताया कि वो फ़िश मार्केट से काफ़ी बड़ी मछली लाया था। मैंने उससे बताने के लिए कहा.. तो वो बोला कि ऐसे नहीं.. ऐसी मछली तुमने आज तक नहीं देखी होगी। पहले आँखें बन्द करो फ़िर दिखाऊँगा।
उसने मुझे कुर्सी पर बिठाया और मैंने आँख बन्द की और उसने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया। कुछ क्षणों में उसने मेरे हाथ में एक बहुत बड़ी.. मोटी-ताज़ी मछली थमा दी।
लेकिन वो कुछ नई तरह की मछली थी। उसकी खाल पर काँटे नहीं थे और आम मछली से ज्यादा कड़क थी। मैंने जैसे ही उसे देखने को आँखें खोलनी चाही.. राजू ने हाथ से मेरी आँखें बन्द कर दीं.. और बोला कि इतनी होशियार हो तो हाथों से टटोल कर बताओ.. कौन सी मच्छी है?

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