कभी सोचा न था कि वो खुद चूत देगी -1

(Kabhi Socha Na Tha Ki Vo Khud Chut Degi- Part 1)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

उसने बताया कि ‘आज किस डे है.. और मैं तुम्हारे साथ इस दिन को मनाना चाहती हूँ।’
मैं एकदम से हक्का-बक्का रह गया।

मैंने कहा- तुम्हारा बॉयफ्रेंड तो है?
तो वो बोली- बस एक बार मुझे तुमसे प्यार चाहिए.. प्लीज़!

नमस्ते अन्तर्वासना के दोस्तो.. भाभियों और पटाखा लौंडियो.. मैं महाराष्ट्र में नांदेड से हूँ.. पर अभी मैं पुणे में इंजीनीयरिंग कर रहा हूँ। अभी मैं 21 साल का हूँ।मैं एक मराठी मानुस.. बहुत ही साधारण से ढंग से रहने वाला.. पर आकर्षक दिखने वाला लड़का हूँ। मेरी सादगी ही मेरी खासियत है।

मैं अन्तर्वासना का 6 साल से पाठक हूँ। इसकी सब कहानियों को पढ़ चुका हूँ।
सच तो यह है कि अब मुझे इस पर प्रकाशित कहानी को पढ़े बिना नींद ही नहीं आती है।
बहुत सालों से लगता था कि मेरी भी कोई स्टोरी हो.. पर कभी कुछ ऐसा हुआ ही नहीं.. जो मैं आप सबसे साझा कर सकूँ।

बहुत से लड़कियाँ मुझे आज तक अपना हसीन सा लुक देती आई हैं.. कुछ लाइन भी देती हैं.. पर मेरी किसी से बात करने की हिम्मत भी नहीं हुई.. तो अब तक मैं कुँवारा ही था.. या मैंने अपनी पढ़ाई की वजह से ज्यादा कोशिश नहीं की.. यूँ भी समझ सकते हैं।

बरहराल मुझे शादीशुदा लड़कियाँ, भाभियाँ बहुत पसंद हैं, मुझे सेक्स के टॉपिक बहुत पसंद हैं, सेक्स करने के लिए मैं मरा जाता रहा हूँ।
मेरी कहानी तब शुरू हुई.. जब ‘वैलेंटाइन-डे’ का मौका चल रहा था

बात 12 फरवरी की है। मेरी एक दोस्त थी.. जो कि मेरी स्कूलमेट थी उससे मैं बहुत साल बाद फेसबुक पर मिला था। हमारी चैटिंग होती थी.. उसने बताया था कि उसका कोई बॉयफ्रेंड है।
हालांकि उसकी इस बात को जानकर मुझे थोड़ी मायूसी भी हुई थी.. पर मैं तब भी उससे बात करता रहा।

हमारी करीब दो साल फेसबुक और व्हाट्सएप पर बातें चलती रहीं.. बीच में कभी-कभी बहुत दिन बातें नहीं भी होती थीं।
मैं भी उससे कुछ ज्यादा उम्मीद नहीं रखता था।

पर उस 12 फरवरी के दिन उसका मैसेज आया.. उसके साथ थोड़ी बहुत बातें हुईं।
उसने पूछा- आज कौन सा डे है?
मुझे कुछ नहीं पता था.. कि क्या कहूँ.. तो मैंने कहा- तुम बताओ?
उसने बताया- आज किस डे है और मैं ये दिन तुम्हारे साथ मनाना चाहती हूँ।

मैं एकदम से हक्का-बक्का रह गया।
मैंने कहा- तुम्हारा बॉयफ्रेंड तो है न?
तो वो बोली- मैं तुमसे 6 वीं क्लास से ही बहुत प्यार करती हूँ.. पर ये तो मेरी बदनसीबी थी कि तुम मुझे बाद में मिले ही नहीं।
वो सच कह रही थी क्योंकि मैंने 7वीं कक्षा के बाद स्कूल बदल लिया था।

वो बोलने लगी- तुम मुझे पहले मिल जाते.. तो आज मेरे बॉयफ्रेंड तुम होते। आई रियली लव यू..!
मैं पूरा शॉक में था।
वो बोलने लगी- मुझे एक किस दो।
तो मैंने किस वाली स्माइली भेज दी।

वो बोलने लगी- कुछ रोमाँटिक बातें करो न।
मैं बोला- मुझे नहीं आतीं.. मुझे इस सब का कुछ भी मालूम नहीं है।
वो बोली- अरे यार तुम कुछ भी बोलो न..

मुझे कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि क्या बोलूँ।

मैंने बोला- यदि मैं कुछ उल्टा-सीधा बोल दूँगा.. तो तुम्हें बुरा लगेगा.. मैं किस लिमिट तक बोलूँ?
वो बोली- जो बातें हस्बैंड-वाइफ में होती है.. तुमको उस लिमिट तक की छूट है।

तब भी कंफर्म करने के लिए मैंने फिर से पूछा.. तो वो नाराज हो गई।
फिर मैं अन्तर्वासना की स्टोरी के अपने अनुभवों से उससे बातें करने लगा।
मैं- तुम्हें किस करूँगा.. फिर तुम्हारे गालों पर चुम्मी लूँगा.. फिर नेक पर किस करूँगा।
‘फिर..’
‘फिर तुम्हारी शर्ट की चैन खोलूंगा..’

मैं ये शब्द बहुत डरते-डरते बोल रहा था।
वो- और.. आगे कुछ नहीं करोगे?

मैं अभी भी डर रहा था- फिर तुम्हारे स्तनों को दबाऊंगा। उन्हें चूस-चूस कर लाल कर दूँगा..
वो- ओह्ह.. उहम्म.. आगे बोलो न..
उसकी ‘ऊह.. आह्ह..’ से मेरी हिम्मत अब बढ़ गई थी।

मैं खुल कर बोला- तुम्हारी ब्रा और शर्ट निकाल दूँगा।
वो- आगे..
मैं- तुम्हें बेतहाशा किस करूँगा.. तुम्हारे जिस्म के हर अंग पर मेरा अधिकार जाहिर कर दूँगा।

वो- ओह..हम्म.. मुझे कुछ हो रहा है.. मेरे नीचे कुछ सनसनी सी हो रही है.. आह्ह.. तुम मुझे अपनी बाँहों में भर लो.. कस कर जकड़ लो.. मुझे कभी छोड़ो मत..
मैं- नहीं छोड़ूंगा.. आ जाओ मेरी बाँहों में..
‘जान तुम आगे क्या करोगे.. वो भी बोलो न..’
‘अब मैं तुम्हारी पैंट निकालूंगा और तुम्हारी पैंटी पर से ही तुम्हारी ‘उसे’ चूमूँगा।

दोस्तो, ये बातें सुनने में जरा अजीब सी थीं.. थोड़ा सा पागलपन सा था.. बेवकूफों की तरह हम दोनों की बातें चालू थीं।

वो- मैं पूरी पागल हो गई हूँ.. प्लीज़ जल्दी आओ न..
मैं- मैं तुम्हारे पास ही हूँ.. तुम अपनी उंगली अपनी चूत में डाल लो.. मैं तुम्हारी फड़कती चूत को देख कर अपना लौड़ा हिला रहा हूँ.. मुझको तुम्हें देखने की बहुत इच्छा हो रही है।

वो- तो मेरा प्रोफाइल पिक देखो ना..
मैं- वैसे नहीं.. तुम्हें पूरी तरह से ओपन देखना चाह रहा हूँ।
वो- तो फ़ोटो भेजूँ?
मैं- हाँ डार्लिंग.. जल्दी भेजो न.. मैं मरा जा रहा हूँ।

वो- ऐसा ना कहो मेरे जानू.. मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती.. मैं भेजती हूँ।
फिर उसके खुले मम्मों के फ़ोटो आए।
यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

मैं- आह्ह.. बहुत सुन्दर हैं ये तो.. कपड़ों के बाहर से इतने बड़े नहीं लगते थे.. जब खुले की झलक दिखी तो बहुत बड़े दिख रहे हैं.. मुझे इनका रस को पिलाओ न..
वो- हाँ अन्दर से बहुत बड़े हैं 32 के हैं तुम जब चूसोगे तो 36 के कर देना।
‘कब चुसवाओगी?’

‘हाँ जानू.. ये हैं ही तुम्हारे लिए.. अब जल्दी चूसो न.. मुझसे प्यार करो.. मुझे बहुत दर्द हो रहा है।
मैं- फिर मैं तुम्हारी चूत चाटूँगा.. उसमें 2 उंगलियाँ डालूँगा.. तुम्हारी चूत के दाने को छेड़ूँगा।
वो- हम्म.. मुझे नीचे कुछ हो रहा है..

मैं- अब तुम मेरे हथियार को सहलाओगी.. उसे चूमोगी?
वो- हाँ बहुत.. उसे मारूँगी भी!
मैं- मारना मत यार.. उसे दर्द होगा.. उससे प्यार करो.. उसे सहलाओ।
वो- मुँह में लूँ उसे?
मैं- हाँ लो मुँह में.. और बहुत चूसो.. मजे से चूसो..

वो- मुझे फोटो भेजो ना अपने लण्ड की..
मैंने उसे मेरे 7 इंच मोटे लंड का फोटो भेजा।
वो- बहुत मोटा है.. मस्त है.. ये तो मेरी चूत को पूरा फाड़ देगा.. मुझे बहुत दर्द दोगे?
मैं- हाँ मैं तुम्हें बहुत दर्द दूँगा.. तुम्हारी चूत फाड़ दूँगा।

वो- ओह्ह मुझे तो अभी से तुम्हारा लौड़ा चूत में घुसता सा महसूस हो रहा है.. अब जल्दी से करो न..
मैं- हाँ अब मैं तुम्हारी पैन्टी निकाल कर तुम्हारी चूत चूसूँगा.. तुम अपनी चूत की फोटो भेजो न।
‘ओके जान जरा रुको.. मैं बाथरूम में जाकर फोटो निकाल कर लाती हूँ।’

उसने बाथरूम में जाके फोटो निकाल कर सेंड किया.. उस पर थोड़े से बाल उगे थे और चूत थोड़ी सी सांवली सी गेहुआं से रंग की थी।

मैं आज बहुत खुश हुआ.. बिना मांगे मुझे उसकी चूत मिलने वाली थी।
मैं- बहुत हॉट है तेरी चूत.. मुझे मारनी है तेरी चूत..
वो- तो मारो ना.. कौन रोक रहा है तुम्हें?

उस रात हमने 4.30 बजे सुबह तक बातें की..
फिर इसके बाद इसी तरह हमारी बातें खुल्लम-खुल्ला होने लगीं। अब मेरे एग्जाम आ गए.. तो मैं थोड़ा बिजी हो गया.. हम दोनों की कुछ दिन बातें नहीं हुईं।

जब एग्जाम खत्म हो गए.. तो बातें फिर शुरू हो गईं।
वो मेरे साथ सेक्स करने के लिए मरी जा रही थी।

फिर जब मैं छुट्टियों में अपने घर नांदेड गया.. तो उससे मेरी बातें बहुत अधिक होने लगी थीं।
वो मुझसे मिलने के लिए बातें कर रही थी, उससे अब कंट्रोल नहीं हो रहा था और वैसे मुझे भी सेक्स करने की चुल्ल सवार हो चुकी थी।
मैं भी जोश में था.. कहीं से कुछ अरेंज होता है क्या.. बस ये सब देख रहा था।

दोस्तो, मुझे इस कहानी को लिखने में बहुत मजा आ रहा है और इसके अगले हिस्से में मैं वो लिखना चाहता हूँ जो वास्तविक मुलाक़ात करने में होता है.. मेरी कहानी एकदम सत्य है और आपसे गुजारिश है कि आप अपने कमेंट्स मुझे जरूर मेल कीजिएगा।

कहानी जारी है।
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