अंदर से गीली और नर्म है

जब टिका देते हो इस जगह तुम अपनी जुबान
मेरे जिस्म में उठा देते हो तुम एक तूफ़ान
जी चाहता है बस यूँ ही तुम चूमते रहो प्यार से
चाट चाट के मेरी इसे हो जाओ हलकान
इसका इलाज बस यही है प्यार से खा जाओ इसे
यह तंग मुझे बहुत करती है, करती है मुझे परेशान
जब भी देख लेती है तुम्हें, यह फुदकने लगती है
तुम से मिल के कुछ करने का सोचने लगती है
चूमने चाटने के बाद जब यह हो जाय गीली और मस्त
इसकी आग बुझा दो मेरे साजन, यह तो है आतिश फ़िशाँ
चाट चाट के तुम बना दो इसको बदमस्त और दिवानी
फिर डाल के अंदर कर दो इसके पूरे सारे अरमान
भट्टी की तरह गर्म है अंदर से गीली और नर्म है
बहुत ही ज्यादा बेशर्म है बेहया है, है यह नादान
ढीठ है बहुत लाज आती नहीं मुझे तुम्हें सब कुछ देते हुए
तुमसे करवाने के लिए इसके लबों पे रहती है हमेशा हाँ…

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