वो सात दिन कैसे बीते-8

अब दो रातें बची, पहली रात हमने बाथरूम सेक्स का मजा लिया, पहली बार उसने मेरा वीर्य मुँह में लिया। दूसरी रात हमने सुहागरात की तरह मनाई। कहानी पढ़ कर मज़ा लें।

वो सात दिन कैसे बीते-7

मेरी पड़ोसन की लड़की प्रतिबन्धों के दायरों में रह कर उन सभी कामों का आनन्द मेरी मदद से उठा रही थी। अक्षतयोनि रखने की चाहत में उसने गांड में लिंग का स्वाद चखा।

वो सात दिन कैसे बीते-6

गौसिया मेरा लंड अपने बदन के अन्दर चाहती थी। मैंने उसे गांड मराने का सुझाव दिया तो वो फ़ौरन तैयार हो गई। कहानी में पढ़िए कि कैसे मैंने उसकी गुदा को तैयार किया।

वो सात दिन कैसे बीते-5

गौसिया हर वो काम करके देख लेना चाहती थी जिससे उसे रोका जाता था और उसके साथ की लड़कियाँ किया करती थी। आज पांचवे भाग में देखिये कि क्या क्या किया उसने!

वो सात दिन कैसे बीते-4

चरमोत्कर्ष के बाद गौसिया फ़िर उत्तेजित होने लगी और इस बार तो वो मेरा लंड अपने अन्दर ले लेना चहती थी। तो क्या मैंने उसकी अक्षत योनि में लिंग प्रवेश कराया?

वो सात दिन कैसे बीते-3

मेरे पड़ोस की कुंवारी लड़की आधुनिक लड़कियों की भान्ति हर चीज का आनन्द लेना चाहती थी। इसके लिये उसने मुझे चुना। पढ़ें कि कैसे मैं उसे प्रथम चरमोत्कर्ष तक ले गया।

वो सात दिन कैसे बीते-2

पड़ोसन पर्दानशीं लड़की ने मुझे मिलने बुलाया। वो वो सब करके देखना चाहती थी जो उसकी हमउम्र लड़कियाँ करती हैं सिवाये कौमार्य को खोने के! तो क्या हुआ हमारे बीच?

वो सात दिन कैसे बीते-1

लखनऊ में मैं अकेला रह रहा था कि दो पड़ोसी लड़कियों से लगभग साथ साथ ही नजरें लड़ी! एक घर के सामने एक दफ्तर में काम करती थी तो दूसरी पड़ोस के घर की पर्दानशीं थी.