तेरा साथ है कितना प्यारा-9

तुम एक नारी हो, मर्यादा में बंधी हो शायद इसीलिये खुद पर कंट्रोल कर पाई, अब तुम भी आखिर हो तो इंसान ही ना, और फिर जो भी हुआ वो तुमने आकर मुझे बता दिया।

तेरा साथ है कितना प्यारा-8

लिंग का अगला हिस्सा खुद ही मेरे मुंह में सरक गया। मैं उस पर जीभ फेर कर सॉस का स्वाद लेने लगी। अब तो वो मेरी मक्खनी योनि को पूरा मुंह में भरकर चाटने लगा, मेरी तो सांस ही रूकने लगी, इतना मजा जीवन में कभी नहीं आया…

तेरा साथ है कितना प्यारा-7

मुझे अपने पास खींच लिया, अपने सामने खड़ा करके वो मेरे दोनों चुचुकों से खेलने लगा। अजीब सी मस्ती मुझ पर छाने लगी, मेरा अंग-अंग थरथरा रहा था, टांगों में खड़े होने की हिम्मत नहीं बची थी।

तेरा साथ है कितना प्यारा-6

मैं सिर्फ तौलिये में ही बाथरूम से बाहर आ गई, मैंने जानबूझ कर अपना बदन भी नहीं पोंछा। मैं शीशे में देखकर अपने बाल ठीक करने लगी, मुकुल पीछे से मेरी गोरी टांगों को मेरी पिंडलियों को मेरी जांघों को लगातार घूर रहा था।

तेरा साथ है कितना प्यारा-5

आशीष लगातार मेरे स्तनों को दबा रहे थे, मेरे निप्पलों से खेल रहे थे परन्तु चूंकि मैं आशीष की टांगों के बीच में थी तो उनको बार बार मेरे स्तनों को सहलाने में परेशानी हो रही थी।

तेरा साथ है कितना प्यारा-4

आशीष अपने एक हाथ से मेरी इस चिकनी चमेली को सहला रहे थे और दूसरे हाथ से मेरी चूचियों से खेल रहे थे, उनके होंठों का रस लगातार मेरे चुचूकों पर गिर रहा था।

तेरा साथ है कितना प्यारा-3

उन्होंने मेरी केपरी के साथ ही कच्छी भी निकालकर फेंक दी। अब मैं आशीष के सामने पूर्णतया नग्न अवस्था में थी परन्तु फिर भी दिल आशीष को छोड़ने का नहीं हो रहा था।

तेरा साथ है कितना प्यारा-2

मुझे उनका चुम्बन बहुत ही अच्छा लग रहा था, बल्कि मैं तो ये चुम्बन सिर्फ माथे पर नहीं अपने पूरे बदन पर चाहती थी, उम्मीद लगने लगी थी कि शायद आज मेरी सुहागरात जरूर होगी।

तेरा साथ है कितना प्यारा-1

उन्होंने मुझे खींचकर अपनी छाती से चिपका लिया और एक मीठा सा चुम्बन दिया। मैं तो शर्म से धरती में गड़ी जा रही थी पर उनकी छाती से चिपकना बहुत अच्छा लग रहा था।