तीन पत्ती गुलाब

प्रस्तुत कहानी अन्तर्वासना के प्रख्यात लेखक प्रेम गुरु की रचना है. यह धारावाहिक कहानी एक अल्हड़ घरेलू नौकरानी के साथ प्रेम और सम्भोग की कहानी है. आनन्द लें.

तीन पत्ती गुलाब-34 HOT!

मैं सोच रही थी समाज में पुरुष और स्त्री के लिए अलग-अलग मानदंड क्यों हैं? पुरुष अपनी मर्जी से किसी से सेक्स कर सकता है पर स्त्री अगर करे तो सारा दोष स्त्री पर?

तीन पत्ती गुलाब-33

भाभी धीरे-धीरे अपने भारी और मोटे नितम्बों को नीचे करने लगी और अपनी बुर की फांकों को अँगुलियों से चौड़ा किया। अन्दर से लाल चीरा ऐसा लग रहा था जैसे किसी तरबूज की गिरी हो। फिर एक नोट को अपनी बुर की फांकों के बीच में करते हुए उठाने की कोशिश की पर नोट नीचे […]

तीन पत्ती गुलाब-32

दीदी ने भाभी को समझा दिया था कि हमारे भैया को ज्यादा तरसाना मत, जल्दी से अपना खजाना उन्हें सौम्प देना. वरना वो फिर सारी रात तुम्हारी हालत बिगाड़ देंगे।

तीन पत्ती गुलाब-31

मैं अपनी कामवाली की चूत चोद चुका था और अब उसकी गांड मारने को उतावला था. लेकिन उसे गांड के लिए मानना थोड़ा मुश्किल लग रहा था.

तीन पत्ती गुलाब-30

गौरी की कसी खूबसूरत गुलाबी गांड मारने के लिए मैं मरा जा रहा हूँ। चूत का उदघाटन तो आराम से हो गया था पर उसे गांड के लिए तैयार करना जरा मुश्किल लग रहा है।

तीन पत्ती गुलाब-29

मैं मधुर के गालों को चूमते हुए और उसके नितम्बों पर हाथ फिराते हुए यही सोच रहा था पता नहीं गौरी के नितम्बों को चूमने और मसलने का मौक़ा कब मिलेगा।

तीन पत्ती गुलाब-28

मुझे गौरी का वह पहला चुम्बन याद आ गया। अगर इस समय गौरी मेरे सामने होती तो मैं उसके होंठों को जबरदस्ती चूम लेता पर सानिया के साथ अभी यह सब कहाँ संभव था।

तीन पत्ती गुलाब-27

मैंने अपना एक हाथ नीचे करके उसकी सु-सु को टटोला। उसके चीरे पर अंगुली फिराई और फिर उसकी मदनमणि को चिमटी में पकड़ कर मसलने लगा।

तीन पत्ती गुलाब-26

मैंने अपना लंड उसकी सु-सु की फांकों के बीच लगा दिया। अब वो इस संगम के लिए तैयार थी। उसने अपनी जांघें थोड़ी सी और खोल दी और मेरे पप्पू का काम आसान कर दिया।

तीन पत्ती गुलाब-25

अपनी कामवाली लड़की के साथ सम्भोग का आनन्द लेने के अगले दिन मुझे दोबारा उसके कमसिन जिस्म का भोग लगाने की इच्छा हुई. मैं मौक़ा देख रहा था.

तीन पत्ती गुलाब-24

उसने नाइटी और हमारे प्रेमरस में भीगा तौलिया अपने हाथों में पकड़ रखा था। जिस अंदाज़ में वह टांगें चौड़ी करके चल रही थी, मुझे लगता है उसे अब भी थोड़ा दर्द महसूस हो रहा होगा।

तीन पत्ती गुलाब-23

मैंने अपनी जेब से वह सोने की अंगूठी निकाली और गौरी के दायें हाथ की अनामिका में पहना दी। मैंने गौरी के हाथ को अपने हाथ में लेकर उस पर एक चुम्बन ले लिया। गौरी लाज से सिमट गई। “गौरी मेरी प्रियतमा! आज की रात हम दोनों के लिए सुनहरे सपनों की रात है। आओ […]

तीन पत्ती गुलाब-22

गौरी इस समय रोमांच के उच्चतम स्तर पर पहुँच चुकी थी और बस मेरी एक पहल पर अपना तन, अपना कौमार्य मुझे सौम्प देने के लिए आतुर थी लेकिन तभी ...

तीन पत्ती गुलाब-21

मैंने उसकी पजामी का इलास्टिक पकड़ा और उसे धीरे धीरे नीचे करने लगा। जब पजामी थोड़ी नीचे सरकने लगी तो उसने अपने नितम्ब थोड़े से ऊपर उठा दिए ...

तीन पत्ती गुलाब-20

काश कल सुबह वो नहाते समय अपनी सु-सु दिखाने के लिए राजी हो जाए तो मज़ा आ जाए। उसके साथ नहाते समय सु-सु को चूमने का विचार मन में आते ही लंड महाराज ने तो पाजामे में कोहराम ही मचा दिया.

तीन पत्ती गुलाब-19

गुरु ... ठोक दो साली को ... क्यों बेचारी को तड़फा रहे हो ... लौंडिया तुम्हारी बांहों में लिपटी तुम्हें चु...ग्गा (चूत गांड) देने के लिए तैयार बैठी है तुम्हें प्रवचन झाड़ने की लगी है।

तीन पत्ती गुलाब-18

एक बार वो मेरा लंड चूस चुकी थी. अगले दिन मेरा दिल कर रहा था कि अपना पूरा लंड उस नवयौवना के मुख में डाल कर चुसवाऊँ. क्या मैं ऐसा कर पाया? कहानी में पढ़ें.

तीन पत्ती गुलाब-17

गौरी ने पहले तो मेरे सुपारे पर अपनी जीभ फिराई और फिर पूरे सुपारे हो मुंह में भर लिया। और फिर दोनों होंठों को बंद करते हुए उसे लॉलीपॉप की तरह बाहर निकाला।

तीन पत्ती गुलाब-16

देखो, मैं अपना निक्कर उतारता हूँ। तुम्हें मेरे लिंग को पकड़कर बस थोड़ी देर हिलाना है और उसके बाद उसमें से वीर्य निकलने लगेगा। तुम्हें थोड़ी जल्दी करनी होगी.

तीन पत्ती गुलाब-15

उसकी जांघें इतनी चिकनी और गोरी थी कि उन पर नीले से रंग की हल्की-हल्की शिरायें सी नज़र आ रही थी। और घुटनों के ऊपर का भाग तो मक्खन जैसा लग रहा था।

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