भाभी संग मेरी अन्तर्वासना

मेरी कहानियाँ काल्पनिक हैं.. जिनका किसी से भी कोई सम्बन्ध नहीं है। अगर होता भी है.. तो यह मात्र संयोग ही होगा।
यह कहानी मेरी और मेरी प्यारी पायल भाभी की कहानी है।

बात उस समय की है.. जब मैं बारहवीं में पढ़ता था। उस समय मैं बहुत डरपोक और शर्मीला लड़का था।

शादी में जब मैंने पहली बार भाभी को दुल्हन के रूप में देखा तो बस देखता ही रह गया था, वो स्वर्ग की किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थीं.. बिल्कुल दूध जैसा सफेद रंग, गोल चेहरा, सुर्ख गुलाबी पतले पतले होंठ, बड़ी-बड़ी काली आँखें.. पतली और लम्बी सुराहीदार गर्दन.. काले घने लम्बे बाल.. बड़े-बड़े सख्त उरोज.. पतली बलखाती कमर.. गहरी नाभि.. पुष्ट और भरे हुए बड़े-बड़े नितम्ब।

हालांकि उस समय मुझे सेक्स के बारे में कुछ नहीं पता था.. मगर भाभी मुझे बहुत अच्छी लगीं।

भाभी ने आते ही सारे घर की जिम्मेदारी सम्भाल ली, सारा दिन घर के कामों में व्यस्त रहती और जब कभी समय मिलता तो मेरी पढ़ने में भी सहायता करती।
भाभी ने बी एस सी कर रखी थी इसलिए मैं भी पढ़ाई में दिक्कत आने पर भाभी से पूछता था। मैं भाभी के घर के कामों में हाथ बंटाता था।

मैं और भाभी एक-दूसरे से बिल्कुल खुल गए, एक-दूसरे से हँसी मज़ाक कर लेते मगर अभी तक मैंने भाभी के बारे में गलत नहीं सोचा था।

लेकिन मेरे दोस्त सेक्स के बारे में बहुत कुछ जानते थे, एक बार स्कूल से आते समय हम सारे दोस्त सेक्स की बातें कर रहे थे कि मेरे एक दोस्त ने कहा- तू तो ऐसे ही घूम रहा है जबकि तेरे घर में ही जबरदस्त माल है।

उस समय तो मैंने उनकी बातों को मजाक में उड़ा दिया.. मगर एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि मेरा भाभी के प्रति नजरिया ही बदल गया।

भाभी संग मेरी अन्तर्वासना-4

भाभी और मेरे बीच दोपहर में जो हुआ था, मैं उसे ही सोच कर अपने आप उत्तेजित हो रहा था, जल्दी से रात होने का इन्तजार कर रहा था। रात हुई तो भाभी ने क्या किया?

भाभी संग मेरी अन्तर्वासना-3

दोपहर को सोते हुए मैंने देखा कि सिर्फ़ ब्लाऊज़ पेटिकोट में भाभी मेरी बगल में सो रही थी। मैं उनके बदन को छूने लगा, ब्लाउज़ खोल कर चूचियाँ चूसने लगा।

भाभी संग मेरी अन्तर्वासना-2

भाभी ने मुझे अपने बेड पर सुलाने का इन्तजाम कर लिया। दो दिन मैं उनके साथ सोया, उनके बदन को छुआ, स्खलित भी हुआ। लेकिन तीसरे दिन मु्झे भाभी की नंगी चूचियाँ मिली।

भाभी संग मेरी अन्तर्वासना-1

यह कहानी है मेरी भाभी की जब वो दुल्हन बन कर हमारे घर आई थी, मुझे बहुत अच्छी लगती थी पर मेरे मन में कोई बुरा विचार नहीं था लेकिन कैसे मेरी अन्तर्वासना उनके प्रति जागृत हुई, इस कहानी में!

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