सेक्स में कोई लाज शर्म नहीं-2

Sex mein Koi Laaj Sharam Nahi-2
दो विदेशी नवयौवनाओ ने मुझे जो सेक्स का ज्ञान दिया वो बता रहा हूँ।

जैसा पहले भाग में मैंने बताया कि मेलिंडा और सिल्विया अपनी रिसर्च के लिए भारत आई थी और मुंबई की विधवा प्रोफेसर श्रुति की मेहमान थी।

श्रुति मेरे से पहले चुदवा चुकी थी इसलिए जब मेलिन और सिल्विया को एक दूसरे को स्खलित करते देखा तो भारतीय लंड से चुदने का प्रस्ताव रखा।
रिया के माध्यम से मुझे बुलाया गया।

जब श्रुति के घर पहुँचा तो वो जल्दी में थी उसे कहीं डिनर पर जाना था।
उसने मेरा परिचय मेलिन और सिल्विया से कराया तब एहसास हुआ कि यह तो थ्रीसम है और वो भी विदेशी गोरियों के साथ।

रिया ने यह बात नहीं बताई थी।

दोनों संगेमरमर की तरह गोरी थी, सिल्विया की आँखे नीली और मेलिन की हल्के भूरे रंग की थी।

दोनों सोफे पर बैठी सिगरेट पीते हुए धुएँ के छल्ले उड़ाती बला की सेक्सी लग रही थी।

इसी उन्मुक्ता ने रिया के प्रति मेरे ग़ुस्से को काफूर कर दिया।

मेलिन लूज़ टॉप में थी, हल्के झुकने से भी उसका नग्न वक्ष स्थल के मस्त नज़ारा दिखता था, बाएँ मम्मे पर दिल का टैटू था।

नीचे छोटी सी डेनिम की शॉर्ट्स पहन रखी थी।

सिल्विया ने ट्यूब टॉप पहन रखा था और नीचे मिन्नी स्कर्ट।

सिल्विया की चूत से ऊपर और चूतड़ों की दरार के ऊपर टैटू थे, जो बाद में दिखे थे।

ऐसी ऐसी जगह टैटू बनाते वक़्त बनाने वाले का खड़ा नहीं होता होगा?

सिल्विया थोड़ा सरकी ताकि मैं उन दोनों के बीच बैठ सकूँ।

मैंने अपनी सिगरेट निकाली और उन दोनों से पूछा कि मेरे पीने से उन्हें कोई ऐतराज़ तो नहीं?

हामी मिलने पर मैं भी कश भरने लगा।

मेलिन उठी और तीन के लिए शैम्पेन ले आई, ग्लास रखने झुकी तो उसके नंगे उभार देखता ही रह गया।

उसने भी मेरी निगाहों के निशाने को भांप लिया और मुस्कुराते हुए टॉप निकाल दिया।

‘मेरे यौवन का पूरा मज़ा लो।’ कहते हुए बैठ गई और मेरा सर पकड़ कर अपनी चूचियों में घुसा दिया।

मैं भी वक़्त ना गंवाते हुए उनका रस पीने लगा।

सिल्विया भी पीछे से सट कर बैठ गई और उसका बायाँ हाथ मेरी जीन्स के ऊपर मेरे लंड को मापने लगा।

सिल्विया के मस्त मम्मे मेरी पीठ में गड़ रहे थे।

मैंने पलट कर सिल्विया के गले में बाँह डाली, अपनी ओर खींच कर चूमने लगा।
मौका पाकर मेलिन उठी और पूर्ण निर्वस्त्र हो गई, वो सोफे के ऊपर चढ़ हमारे पीछे आ कर बैक रेस्ट पे पैर चौड़े कर बैठ गई।

उसकी चूत रानी की मादक महक ने आकर्षित किया और मेरी जुबान की चूत का रसपान करने लगी।

सिल्विया भी नंगी हो गई और बोली- चलो अन्दर चलते हैं।

दोनों आगे जाने लगी, मैं भी उठा और अपने कपड़े खोलने लगा।
मेरा लौड़ा एक दम तना हुआ था।

बैडरूम में दोनों बालाएँ पलंग पर घुटनो के बल थी और एक दूसरे को चूम रही थी।
मेलिन सिल्विया के चूतड़ मसल रही थी तो सिल्विया मेलिन के उरोज।
मानो उन्हें मेरी जरूरत ही नहीं थी।

मैं उन दोनों के पास गया और उनकी नंगी पीठ सहलाने लगा।
तभी झट से मेलिन ने धक्का दे मुझे पलंग पे गिरा दिया और दोनों हाथों से मेरे लंड को पकड़ कर चूसने लगी।

सिल्विया भी मेरी छाती पर चेहरे की तरफ पीठ कर बैठ गई और मेलिन के साथ लंड चूसने लगी।

मुझसे रहा नहीं गया उसकी गुलाबी चूत और गांड देख कर, मैंने चूतड़ पकड़ कर उसे अपनी ओर खींचा और चाटने लगा।

मेरा लौड़ा, टट्टे यहाँ तक कि गांड भी दोनों सेक्सी हसीनाओं के थूक से गीली थी।

सिल्विया की चूत भी स्ट्रॉबेरी की तरह लाल और चमक रही थी।

हमने पोजीशन बदली।

अब मेलिन पैर चौड़े करके लेट गई, सिल्विया घोड़ी बन उसकी चूत चाटने लगी और मैं पीछे से उसकी चूत मारने के लिए आया।

एक ही झटके में मेरा मोटा लम्बा लौड़ा सिल्विया की गुलाबी चूत को फाड़ते हुए आधा अंदर चला गया।
यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
सिल्विया की चीख निकल गई तो मेलिन ने ध्यान बंटाने के लिए मुड़ते हुए उसके मम्मे बेरहमी से मसलने शुरू किये।

मैंने चोदना जारी रखा।

मेलिन उठी और घूम कर सिल्विया की गांड के पास आ गई।

थोड़ी देर के बाद लंड चूत से निकाला और मुख में लेकर चूसने लगी।

हमने फिर पोजीशन बदली, अब मैं लेट गया और मेलिन ऊपर से मेरा लण्ड लेने लगी, सिल्विया पीछे से चिपट कर उसकी मदद करने लगी।

कमरा मेलिन की चिलकारियों से गूँज गया।

सिल्विया ने उसे चूमने लगी और मेलिन के उछालते मम्मे सँभालने की कोशिश करने लगी।

बारी बारी से दोनों की चुदाई हुई और जब वीर्य निकलने का समय आया तो मैंने अपना चिपचिपा गाढ़ा माल उन दोनों के मम्मों के ऊपर निकाला।
मलाई मिलते ही दोनों मुझे भूल गई और एक दूसरे को चाट कर साफ़ करने लगी और बीच बीच में आपस में चुम्बन भी लेती रहती।

मैं बेड पर पैर लम्बे कर दीवार का सहारा लेकर बैठ गया, सिगरेट पीते हुए दोनों की हरकत देख रहा था।

थोड़ी देर में मेलिन और सिल्विया मेरे अगल बगल चिपक के बैठ गई और सुट्टा मारने लगी।

तक़रीबन आधा घंटे हम ऐसे ही बैठे रहे। कमरा धुवे से भर गया।
मेलिन और सिल्विया मेरे लंड से खेलती या मैं उनके अंगों से।

कुछ देर में सिल्विया को जोश आया, मेरे टांगों के बीच लंड को आज़ाद किया और अपने मम्मे से मालिश करने लगी, मेरे लौड़े में कसाव आने लगा तो मुँह में लेकर गरम करने लगी।

मेलिन भी उत्तेजित हो रही थी अपनी जुबान से अपने चुचे को गीला कर मुझे चूसने के लिए परोस रही थी।

मैं उसका बोबा चूसता तो वो मेरा कान गीला कर रही थी।

सिल्विया ने मेरा लंड खड़ा कर दिया और मम्मे भींच कर उसमें चलाने को बोली।

वो घुटनों के बल बैठी, मैं पलंग पर खड़ा हुआ और मेलिन सिल्विया के पीछे चली गई।

मेलिन ने कन्धों के ऊपर से सिल्विया के मम्मों के बीच थूका ताकि चिकना हो सके और मेरा लंड आसानी से चूचे पेल सके।

दोनों फिर चुम्बनरत हो गई।

थोड़ी थोड़ी देर में मेलिन जुबान निकाल के ऊपर आते लंड को छुला देती।

तब तय हुआ पहले मेलिन की गांड मारी जाएगी।

मेलिन कुतिया बन गई और उसने अपना सर पलंग पे लगा दिया ताकि गाण्ड का मार्ग अच्छे से दिख सके।

सिल्विया ने उसकी चूतड़ पर हाथ फिराया और फिर मुँह में गीली कर एक उंगली गांड में घुसा दी, अंदर बाहर करते हुए गांड खोलने लगी फिर दो उंगलियाँ डाल दी।
गांड थोड़ी खुलने पर मैंने उसमें थूक भरा, सिल्विया उंगलियाँ अंदर बाहर कर गांड चिकनी कर रही थी।

सिल्विया ने एक बार मेरा लंड मुँह में लेकर गीला किया और मेलिन की गांड पर लगा दिया।
मेरे ज़ोर से मेलिन की चीख़ निकल गई।
ऐसा नहीं है कि मेलिन ने पहले गांड नहीं मरवाई होगी पर गांड चूत जितनी लचीली नहीं होती है

सिल्विया मेलिन के बोबे मसल रही थी और अपनी चूत भी चटवा रही थी उससे।

मैंने गांड मारना जारी रखा, सिल्विया अंदर जाते लंड के साथ थूक थूक कर चिकनाई बढ़ाती।

थोड़ी देर में मेलिन थक गई।
मैंने लंड सिल्विया की चूत में घुसाया और 7~8 स्ट्रोक ही मारे कि मेरी पिचकारी चलने वाली थी, मैंने सारा माल सिल्विया के पेट पर निकाल दिया।

हम तीनों थक चुके थे इसलिए ऐसे ही आड़े तिरछे सो गए।

रात को साढ़े तीन बजे श्रुति आई हमारी हालत देख समझ गई कि क्या मस्ती की हमने।

एकदम सलीके से चुदने वाली श्रुति भी मेलिंडा और सिल्विया की संगत में मस्त हो गई थी।
उसने मेरा लंड लिया और चूसना चालू किया।

उसकी इस हरकत से मेरी नींद खुल गई और जो नज़ारा देखा तो विश्वास ही नहीं हो रहा था खुले ब्लाउज में ब्रा ऊपर किये अपने मम्मे उचकाती श्रुति एक रांड की तरह मेरे लंड को चूस चूस कर खड़ा कर चुकी थी।

हम बाहर सोफे पर गए और वही चोदा उसे बोली- कंडोम में मत निकालना, मुझे पिला दो।

श्रुति और मैं दोनों साथ में नहाये और मैं चला आया।

मेलिन और सिल्विया से तो कभी फिर मुलाक़ात नहीं हुई लेकिन उनके उन्मुक्त कामक्रीड़ा से मैं बहुत प्रभावित हुआ और अपनी कई सम्भोग संगिनियों को यह बात बताता हूँ।

जिगोलो बनने के लिए मेल ना करें प्लीज।

अपने विचार बताएँ।

इस कहानी को पीडीएफ PDF फ़ाइल में डाउनलोड कीजिए! सेक्स में कोई लाज शर्म नहीं-2

प्रातिक्रिया दे