जिगोलो बनने की राह-3

(Gigolo Banne Ki Rah- Part 3)

कहानी का पिछ्ला भाग: जिगोलो बनने की राह-2

दोस्तो, भाभियो और हॉट गर्ल्स, मैं आपका राज, आपके सामने फिर से उपस्थित हूँ. मैं राजस्थान के कोटा से हूँ और आज आप लोगों को एक नई व सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ. यह अन्तर्वासना पर मेरी कहानी का तीसरा भाग है.

मैं आपको अपने बारे में एक बार फिर से बता देता हूँ. मेरी हाईट 5.5 फिट है हेल्थ भी ठीक-ठाक है. मेरे लंड की साईज 6 से 7 इंच है, जिसे मैंने कभी नापा नहीं है.

जैसा कि आपने मेरी पिछली स्टोरी में पढ़ा था कि कैसे मैं सारिका की कजन यशिमा से मिला और हम दोनों में में सेक्स शुरू हुआ.

मेरी सुबह 6 बजे आंख खुली, तो यशिमा बिस्तर पर सोई हुई थी. मैं उठा और बाथरूम की तरफ जाने लगा. मैंने देखा कि सारिका भी कमरे के सोफे पर सोई हुई थी. मैं बाथरूम से बाहर आया और मैंने सारिका को किस किया. उसको सोये हुए देख कर मेरे मन में वासना जागने लगी और मैं उसके मम्मों को दबाने लगा. इतने में सारिका की आंख खुल गई और उसने मुझे अपनी ओर खींच लिया. वो मुझे किस करने लगी. कुछ ही पलों में हम दोनों में वासना का खुमार हिलोरें मारने लगा. हम दोनों सोफे से उतर कर फर्श पर आ गए और बिछड़े प्रेमियों की तरह लिपट कर किस करने लगे.

मैं तो इस वक्त नंगा था ही, सिर्फ चड्डी में था. सारिका ने मेरी चड्डी को उतार दिया और खुद भी अपनी नाईटी निकाल कर फेंक दी. अब हम दोनों ही नंगे हो गए थे.

उसने मेरा लंड चूसा और बोली- राज अब और नहीं रहा जाता. मैंने तुम्हारी और यशिमा की चुदाई देखी, तब से तड़प रही हूँ. तुम मुझे जल्दी से चोद डालो.. फाड़ दो मेरी चुत.. आह डाल दो अपना लंड मेरी चुत में.. राज चोदो मुझे आ आहहह आहहह आ..

मैं उसकी तड़प को समझ गया और मैंने झट से उसे चुदाई की पोजीशन में लेकर अपना लंड उसकी चुत में डाल दिया. उसकी चुत गीली थी, तो लंड उसकी चुत में आसानी से चला गया. लंड चूत में घुसते ही वो मस्त होकर चुदने लगी थी और आहें भरने लगी थी.

सारिका- आह आह राज चोदो और तेज चोदो मुझे.. आह..

कुछ देर तक हमारी चुदाई चली और मैं झड़ने को हो गया. मैंने उससे पूछा- कहां निकालूं?
वो बोली- मुझे तेरा वीर्य पीना है, इसे मेरे मुँह में डालो ना जान.. आह आह..

मैंने निश्चिन्त होकर धक्के लगाने लगा. और दस धक्के के बाद जब मुझे लगा कि मेरा माल आने वाला है, तो मैंने सारिका की चुत से लंड निकाला और उसके मुँह में माल निकालने को हो गया. लंड से धार निकली, तो मैं उसके मम्मों पर झड़ गया.. कुछ रस उसके खुले मुँह में चला गया. वो मेरे वीर्य को स्वाद लेकर खाने लगी. उसने पूरे लंड को झड़ जाने तक चूसा और मुझे अलग कर दिया.

अब मैं उठ कर जैसे ही जाने लगा, तो मैंने पाया कि यशिमा मेरे पीछे खड़ी थी.

मैंने उसे देखा तो वो सारिका से बोली- चुद गई धन्नो.
सारिका बोली- हां तूने भी तो रात भर मजा लिया है.. अब जाकर मेरी तड़प राज ने खत्म की.
यशिमा ने मुझे गले लगाया और कहा- जाओ कुछ देर आराम कर लो.. बहुत मेहनत हो गई. मैं नाश्ता बना कर लाती हूँ.

मैं बिस्तर के पास गया और बिस्तर पर लेट गया. वाकयी बड़ी थकान थी. मुझे पता ही नहीं चला कि कब मेरी नींद लग गई और मैं सो गया.

मेरी आंख 4.55 पर खुली, जब मुझे मेरे शरीर पर किसी का हाथ महसूस हुआ. वो कोई और नहीं सारिका ही थी.

मेरी आंख खुली, तो सारिका ने कहा- उठ गए जनाब.. देखो घड़ी में शाम के 5 बजे हैं. आपको यहां किसी काम से बुलाया था.. और आप सो रहे हो.
मैंने सारिका से कहा- यार तुम ही उठा देती मुझे.
सारिका ने कहा- हां मैं उठाने के लिए आई थी.. लेकिन आपकी जान यशिमा ने मना कर दिया कि सोने दे यार.. थका हुआ है. फिर आज भी इसे नाईट में मेहनत करनी है.

मैं हंस दिया.

सारिका भी हंस दी और बोली- चलो फ्रेश हो जाओ, मैं तब तक कुछ खाने को लाती हूँ.
मैंने कहा- यशिमा कहां है?
सारिका ने कहा- वो अपने किसी काम से ऑफिस गई है.. आने वाली ही होगी. तुम नहा लो, फिर बाहर चलते हैं.

मैं रूम से बाहर आया, तो सारिका किचन में चाय बना रही थी. मैं भी किचन में चला गया. मैं सारिका को पीछे से पकड़ कर उसे किस करने लगा और उसके मम्मों को दबाने लगा. वो गरम होने लगी. तब तक चाय बनी, हम उधर ही अपने में ही मस्त रहे.

फिर चाय पी कर मैं नहाने जाने लगा, तो मैंने सारिका को गोद में उठा लिया और हम दोनों बाथरूम में आ गए. उसकी आंखों में भी सेक्स था. पता ही नहीं चला.. हम दोनों कब नंगे हो गए और हम साथ सेक्स करने लगे. मैंने उसको फव्वारे के नीचे लिटा कर चोदा और इस बार वीर्य उसकी चूत के बाहर ही निकाल दिया. इसके बाद हम दोनों नहाये और बाहर आ गए.

मैं तैयार होकर बैठ गया.

लगभग 7.00 बजे यशिमा ऑफिस से आई और हम तीनों बाहर गए, एक होटल में खाना खाया और आइसक्रीम लेकर हम घर आ गए.

मैं रूम में बैठा था.. थोड़ी देर में यशिमा रूम में आई और मेरे पास आकर बैठ गई. थोड़ी देर में सारिका भी रूम में आ गई और वो अपने साथ आइसक्रीम भी लाई. हम सभी ने हंसी मजाक करते हुए आइसक्रीम खाई. फिर से रूम का माहौल सेक्सी होने लगा. क्योंकि आज रात मेरे पास 2 हॉट सेक्सी चुदक्कड़ लेडी बैठी हुई थीं.

सारिका ने बोला- अबे कमीने तेरे पास 2 चुतें चुदासी बैठी हैं और तू भोलू की तरह बैठा है. तुझे यहां इसलिए नहीं बुलाया.. चल हो जा शुरू.

बस फिर क्या था, मुझे हरी झंडी मिल गई. मैं पास बैठी यशिमा के होंठों पर किस करने लगा और उसके मम्मों को दबाने लगा. हम तीनों ने ही एक दूसरे के कपड़े उतारे और हम तीनों ही नंगे हो गए.

आज का माहौल थ्री-सम का था. बस फिर क्या था.. मैं यशिमा के साथ किस कर रहा था.. सारिका नीचे बैठ कर मेरा लंड चूस रही थी.

थोड़ी देर में यशिमा भी मेरा लंड चूसने लगी. मैंने यशिमा को लंड चुसाई में लगा रहने दिया और सारिका को खींच लिया. अब मैं उसकी चुत में फिंगर कर रहा था. कुछ ही देर में हम तीनों ही गरम हो चुके थे.

सारिका ने खुद के दूध मसलते हुए कहा- राज पहले मुझे चोद दो.. तुम मेरी चूत में डाल दो.. आज मेरी चुत को इतना चोदना कि बस मजा आ जाए.. चाहे आज तुम मेरी चूत को फाड़ ही क्यों न दो.. आह जल्दी से घुसा दो राजा. अब रहा नहीं जाता.. तुम मेरी चुत को भोसड़ा बना दे यार.. तेरे लंड के लिए तो न जाने क्या क्या करना पड़ता है.. चोद कमीने चोद फाड़ दे इसे.. इस चूत का रस निकाल दे.. साली बहुत तड़पती है तेरे लंड के लिए.. चोद दे.. मसल दे.

सारिका पता नहीं इस तरह क्या क्या बोल रही थी. हम तीनों ही अलग दुनिया में थे.

मैंने सारिका की चूत को लंड के निशाने पर लिया और उसके मम्मे पकड़ कर लंड ठोक दिया. सारिका की एक तेज आह निकली और वो लंड लील गई. धकापेल चुदाई का मंजर चलने लगा. यशिमा मेरे टट्टों से खेल रही थी. उसकी इस हरकत से मेरे लंड को आग सी लगती महसूस हो रही थी.

फिर कुछ देर बाद सारिका का पानी निकल गया और वो निढाल हो गई. मेरा लंड अभी प्यासा था.

कुछ पल बाद मैंने लंड को सारिका की चुत से निकाला और यशिमा को कुतिया स्टाईल में बना कर लंड को उसकी चुत में डाल कर उसे चोदने लगा.

चुदाई के इस माहौल में यशिमा भी काफी गरम हो चुकी थी. वो भी लंड घुसवाते ही मचलने लगी.

‘आह आ आ आ आहहहह जान.. मर गई.. जान मुझे आराम से चोदो.. मुझे इस कमीनी सारिका जैसे रोज रोज लंड नहीं मिलते.. आह आह फाड़ो मत यार.. दर्द होता है जान.. धीरे करो आ आ आह आह आह..’

उसकी चुदास भरी आहें सुनकर सारिका बोली- राज तेज चोद साली कुतिया को.. निकाल दे इस रंडी की गरमी.. साली जब से तुझसे मिली है, तेरे लंड की दीवानी हो गई है.. आज छोड़ना मत इस कुतिया को.. तेज चोद तेज फाड़ दे साली की चुत को.. आज दिन में 3 बार फोन करके बोली थी कि राज को परेशान मत करना, उसे आराम करने देना.. रात को उसे मेहनत करनी है.. उसे मेरी चूत फाड़नी है. और अब कमीनी कह रही है कि धीरे धीरे चोद.. नहीं राज.. एक राजधानी एक्सप्रेस की तरह चुदाई कर.. फाड़ दे इस कुतिया की चुत.. तू छोड़ना मत इसे….

इतने में यशिमा बोली- साली रंडी मुझे लगा था कि तू इसके साथ मजे करने का सोच रही होगी.. ये भी इंसान है आराम दे इसे साली लंड की भूखी कुतिया..

इन दोनों की इस तकरार में काफी वक्त निकल गया. इस दौरान यशिमा 2 बार झड़ गई और अब मैं भी झड़ने वाला था.

तो मैंने कहा- साली रंडियों.. चुप करो.. मैं यहीं हूँ.. अभी बोलो, तुम पानी कहां लोगी?

सारिका झट से हम दोनों के पास आ गई और उसका इशारा पाते ही यशिमा भी चूत से लंड निकाल कर लंड के पास आ गई.

वे दोनों मेरे रज से सने लंड को चूसने लगीं. इतने में लंड से पानी की कुछ बूंदें सारिका के मुँह में, कुछ यशिमा के मुँह में और मम्मों पर गिर गईं. मैं वीर्य निकलने के बाद निढाल सा हो गया और लेट गया. वे दोनों मेरे लंड को चूस कर चाट कर साफ कर रही थीं.

कुछ देर आराम करने के बाद हम तीनों ने फिर से एक राउंड खेला. उसके बाद मेरी आंख लग गई.

मगर यशिमा को अभी और सेक्स चाहिए था. मैं सुबह उठ कर बाथरूम में गया, तो पीछे से यशिमा आ गई और मेरे गले लग कर रोने लगी.

मैंने पूछा, तो उसने कुछ बताया नहीं.. बस रोती रही. मैंने उसे चुप कराया और उसकी भावना को समझ गया. हमारा एक बार सेक्स बाथरूम में भी हुआ. उसको बाथरूम में चुदने में इतना अधिक मजा आ रहा था कि कुछ बताना भी हो तो पूरा किस्सा लिखना पड़ेगा. ये फिर कभी डिटेल में लिखूँगा.

फिर उसी सुबह को मुझे मेरे शहर आना था, तो मैं आने के लिए तैयार हुआ. यशिमा ने खाना बनाया, हम सभी ने खाना साथ खाया.

खाने के बाद सारिका उठ कर मेरे करीब आई और किस करते हुए बोली- जान जा रहे हो.. मत जाओ, यहीं रह लो हमारे पास…

मैंने कहा- डियर अब जाने दो, तभी तो दुबारा आ सकूँगा.

फिर मैं रेल्वे स्टेशन के लिए निकला. यशिमा मुझे अपनी कार से स्टेशन तक छोड़ने आई.

वो बोली- राज मुझे तुम्हारे साथ अच्छा लगा.. मैं उम्मीद करती हूँ कि हम दोनों बहुत जल्द मिलेंगे.

उसने मुझे मेरी फीस का एक लिफाफा दिया और मैं अपने घर आ गया.

कुछ दिन बाद उसने मुझे फिर से बुलाया. वो सब अगली सेक्स कहानी में लिखता हूँ.

आपको मेरी थ्री-सम चुदाई की कहानी कैसी लगी, मुझे मेल करके अवश्य बताएं. आपके मेल के बाद मैं इससे आगे की सेक्स स्टोरी लिखूंगा. मुझे आपके मेल का इंतजार रहेगा.

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