पैसे का सफर

(Paise Ka Safar)

अन्तर्वासना के प्यारे पाठकों को आपकी अपनी अर्चना का प्यार। मेरे बारे में आप लोग पिछली कहानियों में पढ़ ही चुके हैं, मेरी पिछली कहानियाँ यहाँ हैं।
अब मैं अपनी जीवनगाथा आगे बढ़ाती हूँ।

अब मेरी ननदें मेरे काम से जुड़ गई थी, घर में सिगरेट और शराब का दौर तो अब आम हो गया था, आमतौर पर जब भी मैं घर पहुँचती तो उन्हें नंगी ही पाती, वो नंगी ही घर में घूमती थी।

एक दिन की बात है जब मैं शाम को घर पहुँची तो रेखा और आरती मेरे सामने गिड़गिड़ाने लगी, मुझसे बोली- भाभी हमारे लिए लंडों का इंतजाम कर दो, अब हमसे बर्दाश्त नहीं होता।

मैं समझ गई कि ये अब बिना चुदे नहीं मानेंगी। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं इन्हें किनसे चुदवाऊँ क्योंकि अनजान पर भरोसा भी नहीं कर सकती थी।

इसके लिए मैंने अपने चाचा को फोन लगाया, मेरी आवाज सुनते ही पहले तो उन्होंने फोन काट दिया जब मैंने दुबारा मिलाया तो मुझे ही झाड़ने लगे कि कुछ समय पहले कैसे मेरे सामने मेरे ससुर जी ने मेरे पापा को झाड़ा मगर मैं कुछ नहीं बोली।

इसके लिए मैंने चाचा और पापा दोनों से माफ़ी मांगी और उन्हें बताया कि कैसे मैंने अपनी ननदों को चुदवाया और अब वो लंड को तरस रही हैं।
मेरे चाचा बोले- मैं इंतजाम तो करवा दूँगा, मगर उनका रेट कितना होगा?
मैंने कहा- एक रात का दोनों को मिलाकर 1 लाख रूपया लूँगी।

तो चाचा बोले- यह तो बहुत ज्यादा है, और वो दोनों पहले से ही चुद चुकी हैं, अगर कुंवारी होती तो मैं तुम्हें इतने दिलवा देता।
आखिर में चाचा 80 हजार पर मान गए।

चाचा ने उन दोनों से मिलना चाहा इसलिए मैंने अगले दिन ही चाचा को जयपुर बुला लिया, साथ में पापा और दूसरे चाचा भी थे।
जैसे ही पापा और चाचा घर में घुसे, मैं उनको नमस्ते करके गले मिलने लगी तो पापा बोले- हमारे बीच यह रिश्ता खत्म हो चुका है, यह ड्रामा करने की कोई जरुरत नहीं है।
वैसे भी घनश्याम मेरे सौतेले पापा हैं।

मेरे चाचा जो मेरी ननदों को देखने के लिए तरस रहे थे, मुझसे उनको बुलाने को कहा।
मैंने कहा- आप बैठिये, मैं अभी उनको बुलाकर लाती हूँ।

मैंने उन दोनों को तैयार होकर आने को कहा, इतने में मैं बाहर गई और सबको सिगरेट ऑफर की और मैंने भी खुद एक सिगरेट अपने लिए जलाई और अपने पापा और चाचा के सामने कश लेने लगी।

थोड़ी ही देर में रेखा और आरती भी आ गई, दोनों ने साड़ी पहन रखी थी। क्योंकि मैंने उन्हें बताया था कि मेरे पापा और चाचा आये हुए हैं। मेरे चाचा राधेश्याम जो कि बहुत ही उतावले स्वभाव के है, उठे और आरती को कस कर पकड़ लिया, राधेश्याम के इस स्वभाव पर आरती और रेखा दोनों मेरी और देखने लगे तो मैंने उन्हें बताया- यही लोग तुम्हें आज चोदेंगे ! और आगे भी तुम्हारे लिए ग्राहकों का इंतजाम करेंगे।
तभी रेखा ने पूछा- ग्राहक?

उसके चेहरे पर प्रश्नात्मक भाव थे क्योंकि वो सोचती थी कि वो सिर्फ मजे के लिए चुद रही हैं ना कि पैसों के लिए !
मैं उठी और बोली- और क्या बहन की लौड़ियो ! तुम्हारे नखरे और साज-श्रृंगार का पैसा मैं कहाँ से लाऊँगी?

तब उन्हें समझ आ चुका था कि अब वो पक्की रण्डियाँ बनने जा रही हैं और उनकी भाभी यानि कि मैं भी एक रंडी हूँ।
इस पर मेरे चाचा मोहन बोले- लड़कियाँ तो दो हैं और आदमी तीन !

तो राधेश्याम बोला कि एक बन्दा अर्चना को चोद लेगा, मैंने जब मना किया तो तीनों वहाँ से उठ कर चल दिए और कहा- अगर तुम्हें मंजूर है तो बताओ, नहीं तो रंडियों की कमी नहीं है।
मैंने सोचा- वैसे भी साहिल मेरी प्यास नहीं बुझा पाता और चुदवाये हुए भी काफी टाइम हो गया है, इसलिए मैंने हाँ कह दी और पूछा- कौन मुझे चोदेगा?

इस पर मेरे दोनों चाचाओं ने कहा- हम तुम्हें पहले ही चोद चुके हैं, अब तुम अपने पापा को मौका क्यूँ नहीं देती।
मैंने कहा- वो मेरे पापा हैं, चाहे सौतेले ही हैं, यह पाप होगा।
तो दोनों बोले- ये कौन सा तुम्हारे सगे पापा हैं और सौतेले बाप से चुदने में क्या शर्म।

मैं काफी देर तक सोचती रही कि मेरा सगा बाप है नहीं, तभी उसने मेरे जिस्म का सौदा किया था, वर्ना अगर मेरा सगा बाप होता तो शायद ऐसा नहीं करता।

मैंने कुछ सोचा और हाँ कर दी, लेकिन मैंने कहा- मेरा रेट एक रात का 2 लाख रूपए होगा। अगर जमता है तो मुझे चोद सकते हो, वर्ना जिस खाली लंड के साथ आये थे उसके साथ ही जा सकते हो।
मैंने जो सोचा था वही हुआ, उन लोगों ने तुरंत हाँ कह दी।

शाम के करीब छः बज चुके थे, मैंने अपने दोनों चाचाओं को एक कमरे में इन्तजार करने को कहा और कहा- मैं अभी आरती और रेखा को तुम्हारे कमरे में भेजती हूँ।

मैं घनश्याम को अलग कमरे में ले गई और रुकने को बोला, फिर मैंने रेखा और आरती को अपने चाचाओं के कमरे में जाने को बोला तो मेरी दोनों ननदें पूछने लगी- हमें कितना मिलेगा?

इस पर मैंने कहा- तुम लोग धंधा करती हुई पकड़ी गई थी, तुम शायद भूल गई हो मगर मैं तुम्हें कभी भी अंदर डलवा सकती हूँ। इस पर वो दोनों डर गई और बिना कुछ बोले मेरे चाचाओं वाले कमरे में चली गई। इसके बाद मैं भी उस कमरे में चली गई जहाँ घनश्याम बैठा हुआ था। मैंने गुलाबी रंग की साड़ी पहनी हुई थी, अंदर घुसते ही मैंने अंदर से दरवाजा बंद कर दिया और एक दुल्हन की तरह अंदर घुसी।

आज की मेरी रात मेरे सौतेले बाप के नाम थी जो मुझे चोदना चाहता था। मैं अंदर घुसी और जैसे ही अपने पापा की तरफ बढ़ी तो वो उठ खड़े हुए और बोले कि ये उनसे नहीं होगा।
मैंने कहा- आप ही तो मुझे चोदना चाहते थे?
तो वो बोले- मैं बहक गया था, मैं तुम्हारा सौतेला बाप ही सही, लेकिन मैं तुम्हें नहीं चोद सकता।

मुझे बहुत खुशी हुई और मैं झुककर उनके पाँव छुए, मैंने फिर पापा से पूछा- आपको किसने बहकाया था?
तो वो बोले- मैं तुम्हारे चाचाओं की बातों में आ गया था। मैं उस वक्त कुछ नहीं बोली और पापा को बिस्तर पर लिटाकर बाहर आ गई और सिगरेट फूंकते हुए अपने चाचाओं से बदला लेने की सोचने लगी क्योंकि सबसे पहली बार उन्होंने ही मुझे चोदा था और मुझे इस काम में लाने के जिम्मेदार भी वही थे।

अगली सुबह मैं अपने चाचाओं वाले कमरे में घुसी और उनसे 4 लाख रूपए लिए तो वो बोले- और बेटी, अपने सौतेले बाप से चुद कर मजा आया?
मैंने झूठ-मूठ ही बोल दिया- हाँ बहुत मजा आया।
इसके बाद वो लोग वहां से चले गए, मैं अपनी ननदों के कमरे में घुसी तो वो दोनों रो रही थी, मैंने उनसे रोने का कारण जानना चाहा तो उन्होंने कहा कि मैं उनको ब्लैकमेल कर रही हूँ, इसलिए वो परेशान और दुखी हैं।

इसके बाद मैंने उन्हें वो सब बता दिया जो मेरे चाचाओं ने मेरे साथ किया, मेरी सच्चाई जान मेरी ननदें हैरान रह गई और पूछा तो मैंने उन दोनों को क्यूँ चुदवाया।
मैंने कहा- अब मैं कहूँगी कि तुम दोनों उनके बच्चे की माँ बनने वाली हो।

लगभग 2 महीने ऐसे ही बीत गए, मैंने वही किया जो मैंने प्लान बनाया था। मैंने उन दोनों को फोन करके जयपुर बुलवाया और उन्हें झूठी रिपोर्ट पकड़ाते हुए कहा कि आरती और रेखा तुम दोनों के बच्चे की माँ बनने वाली हैं और अगर तुम दोनों ने उनकी इच्छा पूरी नहीं की तो वो दोनों पुलिस को सब बता देंगी कि तुम दोनों ने उनका जबरन चोदन किया है।
वो दोनों घबरा गए और बोले- वो दोनों चाहती क्या हैं, उनका अबोर्शन करवा दो।
मैंने कहा- वो तो मैं करवा दूंगी लेकिन इतनी बड़ी बात तुम्हारे परिवार को भी तो पता चल सकती है।
इस पर वो बोले- रंडी, तू चाहती क्या है।

मैंने कहा- मुझे 30 करोड़ रूपए चाहिए, मेरे चाचा अमीर थे लेकिन इतने पैसों के लिए उनका सब कुछ बिक जाता।
लेकिन उन्होंने वही किया जो मैं चाहती थी। उन्होंने अपनी सारी प्रोपर्टी मेरे नाम कर दी, अब उनके पास बस एक-एक घर रह गया था और बाकी सब कुछ मेरे नाम हो गया था।
जब मैंने यह बात आरती और रेखा को बताई तो दोनों बहुत खुश हुई।

इसके बाद मैंने वाणी को फोन मिलाया और जयपुर आने को कहा, मैंने उससे सब कुछ छिपाकर आने को कहा। वाणी तो जयपुर के लिए चल दी मगर तभी मेरे ससुर का फोन आया और उन्होंने मुझसे वाणी को बुलाने का कारण पूछा।
तो मैंने कहा कि मुझे कुछ दिनों के लिए चंडीगढ़ जाने है, और आरती और रेखा यहाँ अकेली हैं।
मेरी बात से मेरे ससुर सहमत हो गए।

इसके बाद मैंने वाणी को बताया कि कैसे मैंने आरती और रेखा को चुदवाया और उसके पापा यानि कि मेरे चाचा की सारी प्रोपर्टी हड़प ली।
वाणी को बिल्कुल गुस्सा नहीं आया, शायद वो भी बदला लेना चाहती थी।

मैंने वाणी से पूछा- और सुनाओ क्या हाल हैं? तुम्हारे और गौरव और तुम्हारे सम्बन्ध कैसे हैं?
वाणी ने कहा- हम दोनों बहुत खुश हैं, और मैंने उसे अपने बीते हुए कल की सारी बात बता दी। पहले तो बहुत गुस्सा हुआ मगर बाद में मान गया।
मैंने कहा- यह सब कब हुआ?
तो उसने बताया- जब हमारे परिवार की स्थिति खराब थी।

फिर मैंने पूछा- क्या गौरव को कोई ऐतराज नहीं हुआ?
वाणी बोली- गौरव ने बिजनेस में फायदे के लिए मुझे एक आदमी से चुदवाया ताकि उसे फायदा मिल सके। तब मुझे लगा साहिल का लंड छोटा सही, मगर साहिल सच में शरीफ है और मुझसे बहुत प्यार करता है। और एक तरफ गौरव है जो एक डील के लिए अपनी पत्नी तक को चुदवा सकता है।

वाणी रोते-रोते बोलने लगी- पहले मेरे पापा ने डील के लिए मुझे चुदवाया और फिर मेरे पति ने।
मैंने कहा- तुमने मुझे क्यूँ नहीं बताया?
वाणी बोली- मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था इसलिए नहीं बताया।

मैंने वाणी से वहीं रुकने को कहा, मैंने कहा- मैं उसकी बहनों को पहले ही कई लोगो से चुदवा चुकी हूँ और दोनों पूरी रंडी बन चुकी हैं। मैंने बहुत सारे पैसे भी जमा कर लिए हैं अब हमें यह करने की कोई जरुरत नहीं।

पीछे खड़ी आरती और रेखा हमारी बातें सुन रही थी। जब उन्होंने यह सुना कि कैसे गौरव ने डील के लिए वाणी को चुदवाया तो उन्होंने कहा- भैया ने यह बहुत गलत किया, हम चाहते हैं कि हम उनके सामने चुदवायें ताकि उन्हें कुछ सबक मिले।

उन दोनों ने मेरी डील की मुराद पूरी कर दी। वाणी भी उन दोनों की बातें सुनकर खुश हो गई और मुझसे पूछा- हम इन्हें किनसे चुदवायेंगे?

मैंने कहा- ससुरजी ने मेरे पापा की बहुत बेइज्जती की थी, क्यों ना इन दोनों को मेरे पापा घनश्याम से चुदवा दिया जाए?
तो वाणी बोली- क्या वो मानेंगे?
मैंने कहा- वो जरूर मानेंगे। मुझे पता है उन्हें कैसे मानना है।

मैंने अगले ही घर पर फोन किया और पापा को बुला लिया, उधर वाणी ने भी गौरव को बुला लिया। सुबह के दस बजे पापा पहुँच गए, इसके बाद वाणी ने गौरव को फोन मिलाया तो गौरव बोला कि उसे पहुँचने में सिर्फ़ 15-20 मिनट लगेंगे।

मैंने तीनों लड़कियों आरती, रेखा और वाणी को कहा- तुम्हें ऐसी एक्टिंग करनी है कि गौरव को लगे तुम मेरे पापा से चुद चुकी हो।
तीनों ने वैसा ही किया, तीनों ने अपने कपडे उताड़े और नंगे ही मेरे पापा के सामने मॉडल की तरह चलने लगी और एक-एक करके उनके कपड़े उतार दिए। पापा को पहले से ही सब पता था।
जब गौरव आया तो मैंने कहा- तुम देखना चाहते हो तुम्हारे पीछे से तुम्हारी बहन और बीवी क्या करते हैं?
और मैंने उसे उसी कमरे में भेज दिया। हजारों कहानियाँ हैं अन्तर्वासना डॉट कॉम पर !

जब गौरव ने अंदर का नजारा देखा तो वहीं माथा पकड़ कर रोने लगा, इतने में अंदर से सब लोग कपड़े पहन कर आ गए।

मैंने गौरव से कहा- अब रोने का फायदा नहीं। वाणी पहले ही कई लोगों से चुदवा चुकी है, आरती और रेखा भी पक्की रंडी बन चुकी हैं

अगर तुम चाहो तो हमारा हिस्सा बनकर पैसे कमा सकते हो और कई और लड़कियों को चोदने को भी मिलेगा। वैसे भी वाणी तुम्हारी थी, है और रहेगी।
गौरव के पास कोई विकल्प नहीं था और वो मान गया।

कुछ महीनों तक ऐसे ही चलता रहा, वाणी, रेखा और आरती को मैंने जयपुर में ही रोक लिया और अलग-अलग लंडों से उन्हें चुदवाया। गौरव भी हमारे लिए दिल्ली के अमीर लंड का इंतजाम करता, इस तरह मैंने अपना एक नेटवर्क बना लिया।

कुछ महीनों बाद खबर आई कि मेरे ससुर की मौत हो गई इसलिए हम सब वापिस दिल्ली आ गए और मैंने भी वाणी को अपने सीनियर्स से चुदवा कर अपना ट्रान्सफर दिल्ली करवा लिया।

जब मैं दिल्ली पहुंची और साहिल से पहली बार मिली तो साहिल बोला- अब तुम मुझसे निराश नहीं होगी !
मैंने पूछा- क्यूँ क्या हुआ?

तो उसने बताया कि उसने कोई ऑपरेशन करवाया और कुछ दवाएं ली जिसके इस्तेमाल से उसके लंड का साइज अब 7 इंच हो गया है। यह खबर सुनकर मैं बहुत खुश हुई और उस रात मैंने सच में अपनी पहली सुहागरात मनाई।

अगली सुबह मैंने साहिल को अपने बीते हुए कल के बारे में सब कुछ सच बता दिया, इस पर साहिल बोला- मुझे खुशी है कि तुमने मुझे खुद सब सच बता दिया, वैसे मैं तुम्हारे बारे में पहले से ही सब सच जानता था लेकिन मैं चाहता था कि तुम खुद मुझे बताओ। मैं तुम्हें पहले भी प्यार करता था और आगे भी करता रहूँगा और उसने अपनी सारी प्रोपर्टी मेरे नाम कर दी। आज की तारीख में मेरे नाम पर 80 करोड़ से ज्यादा की प्रोपर्टी है, मगर अब जब कभी साहिल बिजनेस के लिए दिल्ली से बाहर जाता है मैं अपनी देवरानी, वाणी और ननदों को बाहर चुदवाती हूँ और पैसे कमाती हूँ।

मैंने बचपन में पढ़ा था ‘ना बीवी, ना बच्चा, ना बाप, बड़ा ना भैया, आल थिंग इस दैट- भैया सबसे बड़ा रुपैया !’ और अब मैं समझ चुकी थी कि यही सच है और पैसा सबसे बड़ा है, अगर आपके पास कोई प्यार करने वाला हो।

साहिल आज भी मुझसे प्यार करता है और मैंने भी इसलिए मैंने शादी के बाद साहिल के अलावा किसी से नहीं चुदवाया मगर अपनी देवरानी और ननदों को चुदवाती हूँ, वो भी उनके कहने पर।

आप लोगो को मेरी कहानी का आखिरी भाग कैसा लगा जरूर बताइयेगा।
मैं आगे भी कहानी लिखूँगी मगर वो सभी काल्पनिक होंगी क्योंकि मेरा जीवन अब कुछ सामान्य हो चुका है।
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