मैं कॉलगर्ल कैसे बन गई-10

(Main Callgirl Kaise Ban Gai- Part 10)

This story is part of a series:

अब तक आपने पढ़ा था कि मुझे एक पुलिस अधिकारी ने अपनी बहन बना कर मुझसे अपना काम करवा लिया था लेकिन उसने मुझे खुद हाथ भी नहीं लगाया था बल्कि उसने मुझसे राखी बंधवाने का इरादा भी जताया था.
अब आगे..

अगले दिन वो पुलिस अधिकारी सच में मेरे घर पर आया और मुझसे राखी बँधवा कर बोला- अपने भाई को क्या मिठाई नहीं खिलाओगी?
मैंने कहा- मुझे नहीं पता था कि आप सच में आएंगे, मैं तो इसे एक मज़ाक समझ कर भूल भी गई थी. आप दो मिनट रुकिए, मैं अभी आती हूँ.
मैं झटपट बाज़ार से मिठाई का डिब्बा लेकर आई और उसको मिठाई खिलाई.

उसने मुझे उस डिब्बे में से एक पीस मिठाई का खिलाते हुए बोला- आज से मैं तुमको अपनी बहन मानता हूँ और तुमसे यही चाहूँगा कि तुम ये सब काम छोड़ दो, अगर मेरी किसी तरह की सहयोग की ज़रूरत हो, तो बताना मैं जितना भी हो सकेगा, करूँगा.

इसके बाद वो मुझे कुछ पैसे राखी बंधवाने के देकर चला गया और जाते वक्त फिर बोला- अपने इस भाई को कभी ना भूलना, जो अब तुम्हारा कर्जदार हो चुका है. अब मेरी तरक्की हो जाएगी शायद मैं किसी दूसरे शहर में भी जा सकता हूँ. मगर तुमसे अपना सम्पर्क बना कर रखूंगा. मैं नहीं चाहता कि मेरी बहन, चाहे वो मुँह बोली ही क्यों ना हो, किसी गंदे काम में लिप्त रहे.
उसने मुझसे वादा करने को कहा.
मैंने कहा- मैं वादा तो नहीं करूँगी मगर पूरी कोशिश करूँगी.

मैंने कुछ दिनों तक यह धंधा बंद कर दिया. जो भी फोन आते थे, मैं उनका जवाब ही नहीं देती थी. आख़िर तंग आ कर मैंने फोन से सिम को ही निकाल दिया ताकि फोन ही आना बंद ही जाएं. मगर किस्मत जब साथ ना दे, तो चाहे इंसान जो भी कर ले, वो सब नहीं कर पाता है.. जो वो चाहता है.

एक दिन में किसी मॉल में थी कि पीछे से आकर किसी ने मुझे बोला- कहो मैडम, आजकल क्या कोई नया मुर्गा फंसा लिया है या किसी को चूतिया बना कर उससे शादी करने की सोच रही हो. अगर ऐसा कुछ है तो वो मैं तुम्हें करने नहीं दूँगा.

मैंने देखा वो मेरा एक दलाल था.

फिर वो बोला- एक मिनट बाहर आओ सबके सामने बात करना ठीक नहीं होगा.
मैं उसके पीछे पीछे बाहर आ गई. वो मुझे अपनी कार में बिठा कर बोला- एक बात सुन लो मेरी पाली हुई चिड़िया. तेरे पंख मेरे पास हैं, तू चाहे तो भी उड़ नहीं सकती. तू मेरा धंधा चौपट करना चाह रही है ना.. वो मैं तुझे करने नहीं दूँगा. अगर आराम से नहीं मानी तो उठवा लूँगा.. फिर मुझसे कुछ भी मत बोलना. एक बात साफ़ साफ़ सुन लो, आज तू मेरे से ही चुदेगी और टाइम पर आ जाना वरना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा. फिर जिसके पास मैं बोलूं, वहाँ जा कर चुदवा आना. मेरे साथ किसी किस्म की चालाकी नहीं चलेगी.. समझ गई ना? अब निकल कार से बाहर और शाम तो चुदने के लिए आ जाना. अपनी चुत पूरी सफाचट करके आना. बहुत दिन से लगता है तुम मुझे गोली दे रही हो. आज मैं तेरी चुत में डंडा दूँगा, ताकि उसकी खुजली फिर से शुरू हो जाए.

मैं किस्मत को कोसती हुई वापिस मॉल में आ गई.

मुझे वहाँ पर कुसुम मिल गई. मुझे देखते ही बोली- हैलो कैसी हो.. आजकल तुम्हारा बिजनेस कैसा चल रहा है?
मैंने जब कुछ जवाब नहीं दिया तो वो बोली- मुझसे क्यों नाराज़ हो.. बता ना?
मैंने उसको बताया कि आज शाम को उस दलाल ने बुलाया है मुझे चुदवाने के लिए.
कुसुम का जवाब था कि तो क्या हुआ.. यह सब तो चलता है यार अपने बिजनेस में.. अब तो हम लोगों के लिए लंड को चुत में लेना कोई खास बात नहीं है. जैसे प्यास लगते ही हम पानी पी लेते हैं, उसी तरह से चूत में लंड भी डलवा लेती हैं.

मैं उसकी तरफ हैरानी से देख रही थी.
मुझसे वो बोली- एक बात हमेशा के लिए दिमाग में रख ले. जब तक शक्ल ठीक ठाक है और मम्मे नहीं लटक जाते, तब तक चुत का धंधा चलता रहेगा और तू चलती रहेगी. उसके बाद में जैसे मैं तुमको ढूँढ कर लाई थी, उसी तरह तुम भी किसी मुसीबत की मारी को खोज कर लाओगी और उससे कमीशन लेकर ग्राहकों के आगे पेश करोगी.
मैंने कहा- ठीक है.

मैं वापिस आ गई.

मगर शाम आते आते ही मुझे समझ में आना शुरू हो गया कि अगर मैं उस दलाल के पास नहीं जाती तो वो कुछ गुंडे मेरे पीछे लगा देगा और फिर मेरा क्या हाल होगा, उसका सोचना ही मुश्किल है. इन सब बातों तो ध्यान में रख कर मैं उसके बताए हुए पते पर चल पड़ी. हां जाने से पहले मैंने अपनी चुत की झांटों को पूरी तरह से साफ़ करके चुत को पूरी मुलायम कर लिया.

जब वहाँ पहुँची तो देखते ही मेरे होश उड़ गए. क्योंकि उसने चार लड़कों को बुला रखा था और पता नहीं उन सबसे क्या बोला था कि सबके सब नंगे अपना लंड खड़ा किए हुए बैठे थे.

मुझे देखते हो वो बोला- यारो, आपका माल आ गया है, अब जाम कर इसकी चुत की सिकाई करो. साली आजकल बहुत फुदक रही है. बड़ी सती सावित्री बनने चली थी.

यह सुनते ही वो चारों लड़के मुझ पर टूट पड़े और मुझे पूरी नंगी करके मेरी चुत, मेरे मम्मों को, मेरे होंठों को चाटने में लग गए.

पता नहीं उनको कितने दिनों से चूत की तलाश थी. कभी एक मेरी चुत में अपना लंड डालता था और दूसरा उसको धक्का मार कर अपना लंड डाल देता था.

इस तरह से चारों ने मिल कर मुझे बुरी तरह से चोद कर ही दम लिया. इसके बाद वो तो वहाँ से चले गए. मगर दलाल वहीं बैठा रहा, वो बोला- बोल, अब कभी मुझे अनदेखा करेगी.

इसके बाद वो अपना लंड मेरी चुत में डाल कर धक्के मारने लगा. उन चारों से चुदने के बाद मेरे जिस्म में कोई जान बाकी नहीं बची थी. मगर वो छोड़ने को नहीं तैयार ही नहीं था. जब तक उसके लंड ने मेरी चुत में अपना रस नहीं निकाल लिया, तब तक वो धक्के पर धक्का मारता रहा.

चोदने के बाद वो मुझसे बोला- चल अब निकल यहाँ से.. आज की चुदाई का कोई पैसा नहीं मिलेगा, यह इस चुदाई की पूरी कमाई मेरी है, जो तुमने इतने दिनों तक मेरा नुकसान किया है.. और सुन जाने से पहले यह सुनती जा कि कल जैसे ही मेरा फोन आए, बिना कुछ सोचे बिना चड्डी ब्रा पहने आ जाना. तुम्हें पूरी चुदाई की फीस मिल जाएगी.

मुझे घर पर पहुँचे अभी एक घंटा भी नहीं बीता था कि उसका फोन आ गया. कल सुबह फार्म हाउस पर तुम्हें फिक्स किया है. तुम्हें कार घर के पास वाले बस स्टॉप पर मिल जाएगी.. समझ गई ना. चड्डी ब्रा नहीं डालनी है, बाकी क्या डालना है.. तुम खुद ही होशियार हो.

मुझसे बिना कुछ जवाब लिए उसने फोन काट दिया. दूसरे दिन सुबह सुबह मैं रोते हुए तैयार हो गई. एक ढीला सा टॉप, जो काफ़ी खुला हुआ था, डाला. इस टॉप में जैसे ही जरा सा भी झुकती तो मेरे मम्मे पूरे ही नंगे हो जाते थे. एक स्कर्ट डाली जो काफ़ी खुली हुई थी और घुटनों के काफी ऊपर तक की थी. अगर बैठने की कोशिश भी करूँ, तो पूरी चूत नंगी हो जाती थी.

खैर जब जाना था तो उसके कहे के मुताबिक ही जाना था. जब बस स्टॉप पर आई तो कार खड़ी हुई थी. ड्राइवर ने पिछला दरवाजा खोला और मुझे बैठने को कहा. वहाँ पर एक 45 से 47 साल का कोई आदमी पहले से ही बैठा था. मेरे बैठने की देर थी कि उसने मेरे टॉप में हाथ डाल कर मेरे मम्मों को दबाना शुरू कर दिया. कुछ देर बाद उसने अपना दूसरा हाथ मेरी चुत में डाल दिया. इस तरह से वो सारे रास्ते मेरे आमों को दबाता रहा और चूत में उंगली भी करता रहा.

इसका असर यह हुआ कि मेरे मम्मों की घुन्डियां अकड़ गईं और चूत भी पानी छोड़ने लग गई.

जब फार्म हाउस में कार पहुँची तो वो आदमी जो मेरे साथ बैठा था, निकल कर अन्दर भाग गया और फिर बाहर आकर बोला- चलो अन्दर.

जब अन्दर जा कर देखा तो कोई 70 साल का बुड्डा सोफे पर बैठा था और उसके पास एक बीस बाइस साल का लड़का खड़ा था.

मुझे आते देख कर वो उस लड़के से बोला- मुझे यहाँ पर अब अपनी जवानी का जोश इस लड़की के साथ दिखाओ.

वो तो शायद इसी आदेश का ही इंतज़ार कर रहा था. वो लड़का मुझ पर इस तरह से झपटा, जैसे चूहे पर कोई बिल्ली झपटा मारती है. उसने मेरी शर्ट और टॉप को उतारने के लिए एक पल भी नहीं लगाया.

जैसे ही उस बुड्डे ने मेरी सफाचट चुत देखी तो बोला- ज़रा इसको मेरे पास लाओ.

जैसे ही उस लड़के ने मुझे उस बुड्डे के पास धकेला तो बूढ़ा मेरी चुत पर मुँह मारने लगा. उस बुड्डे की उम्र मेरे दादा जी से भी बड़ी थी, मगर यहाँ मैं सिर्फ एक चूत की मालकिन थी, जिसको वो चूसना चाहता था. बूढ़े के मुँह में एक भी दाँत नहीं था, वो चुत के अन्दर तक अपनी ज़ुबान डाल डाल कर चूस रहा था.

कुछ देर बाद मुझे उसने लड़के की तरफ धकेला और बोला- करो जो करना है.
वो लड़का तो पहले ही अपना खड़ा लंड अपने हाथ में लिए हुए था, झट से मुझे नीचे डाल कर मेरी टांगें चौड़ी करके अपना लंड मेरी चुत में पेल दिया और फिर धक्के पर धक्का लगाने लगा.

ये सब देख कर बूढ़ा उसे उकसाए जा रहा था- हां बेटा, ज़रा जोर से चोदो, यह तुम्हारी बहन नहीं है.. इसकी चुत चोदने के पैसे दिए हैं, आज अच्छी तरह से चोदो ताकि मैं भी पूरी ब्लू फिल्म देख सकूँ.

लड़का ज़ोर ज़ोर से धक्के मारते हुए मेरे मम्मों को भी काट रहा था.
बूढ़ा बार बार बोल रहा था- साले हराम की औलाद अभी तेरा लंड बाहर क्यों है भोसड़ी के.. इसे पूरा अन्दर डाल कर चोद ना.
पूरा आधा घंटा मुझे चोदने के बाद उसका लंड बाहर निकला.

इस पर बूढ़ा बोला- इसे मेरे सामने खड़ी कर दो और इसके पैर चौड़े करके मेज से बाँध दो और हाथ पीछे की तरफ से बाँध दो. मैं इसको पूरी तरह से आज नंगी देखना चाहता हूँ.
मुझे बाँध दिया गया.
बुड्डा बहुत देर तक मेरी चुत में उंगली करता रहा. फिर उसने लड़के को बुला कर कहा- अब तू इसको कुतिया बना कर चोद. इस लड़की का सेक्स पूरा निकाल दे आज!

उसे लगा जब पूरी तरह से चुद गई तो बूढ़ा बोला- अब मैडम जी जाने से पहले मेरे लंड को भी चूस लो.. यह तो कुछ करने के काबिल रहा नहीं.

लगभग बीस मिनट तक उस बुड्डे का लंड बहुत चूसा, मगर वो तो अपना जलवा बहुत पीछे छोड़ आया था. उसमें ज़रा सी भी हरकत नहीं हुई.

इसके बाद बुड्डे ने किसी को फ़ोन किया तो पता चला कि उसने उसी दलाल से बात की थी. वहाँ से जवाब आया कि इसको 20 हजार दे दो. इससे मैं खुद ही हिसाब कर लूँगा. हाँ इसे छोड़ने का पूरा इंतजाम करवा देना, इस पर जो मेरे साथ गाड़ी में आया था. उसको बुलवाया और बोला कि इसको वहीं छोड़ कर आईयो जहाँ से लाए थे.

इससे पहले कि वो मुझे चुदाई की रकम देता, उस आदमी ने बुड्डे के कान में कुछ कहा.
बूढ़ा बोला- बहनचोद साले हरामी, पहले क्यों नहीं बताया.
फिर बोला- ठीक है पैसे मैं बाद में दूँगा, ज़रा मुझे अपनी जवानी का एक जलवा और दिखा कर जाओ.

फिर उसने उस आदमी से आँख मारी. वो भी मुझ पर टूट पड़ा और मेरी चुदाई करने लगा. जब मैंने कुछ आनाकानी की तो बुड्डा बोला- ओ रंडी साली बहनचोद चकले की औलाद, मुझसे मुँह लगाती है. चुद इससे गांड उछाल उछाल कर.. जैसे मैं बोल रहा हूँ वैसे चुद मादरचोद.

मैं बेबस थी.

फिर वो उस आदमी से बोला- तुम नीचे लेट जाओ, यह तुम्हारे ऊपर चढ़ कर तुम्हारा लंड चूत में खुद ही डालेगी, जिससे पता लगेगा कि यह तुमको चोद रही है… ना कि तुम इसको.

सिवा उसके कहना मानने के अलावा मेरे पास कुछ नहीं था. मैं उसके खड़े हुए लंड को चुत में डाल कर चुदने लगी.

इधर बूढ़ा परेशान कर रहा था- साली हरजाई जोर जोर से लगा धक्के.. उसके लंड पर..

जब मैं धक्के मार रही थी तो वो उस आदमी से बोल रहा था- बहनचोद साले हरामी की औलाद, लड़की के मम्मे क्या तेरा बाप खींचेगा. खींच साले ताकि उस पर तेरे हाथों के निशान पड़ जाएं, इसको जो पैसे देने है, वो निशान ही हमारी रसीद होगी.

जब मैं उस आदमी से भी पूरी तरह से चुद गई तो उसका लंड भी पानी छोड़ते हुए बाहर निकल गया.
तब मैं बोली- अभी भी कोई बाकी है क्या?
इस तरह से मैं चुद चुदा कर वापिस आ गई. मैं सोचती रही कि मैं क्या करूँ जिससे इन सब चीजों से छुटकारा मिल जाए.

रात को मेरी आँखों में नींद नहीं थी, बहुत सोचने के बाद मैंने उसी पुलिस अधिकारी से बात करने की सोची, जिसने मुझे अपनी बहन कहा था. जब फोन किया तो उधर से आवाज़ आई कि बहन बताओ क्या हुआ?

मैंने उससे अपने पर जो बीती थी, बताई तो उसने कहा- ठीक है, मैं तुमसे कल सुबह बात करता हूँ.

सुबह उसने मुझसे कहा- तुम अपना पासपोर्ट बनवा लो, फिर मैं तुम्हारी पूरी हेल्प करूँगा, जिससे तुम इस दलदल से पूरी तरह से निकल जाओगी.

कहानी अगले भाग में खत्म हो जायेगी.
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